सेवा में आये हो – ब्रम्हा सेवा मा आये हो | सूरज सुनील पचरा जस गीत

सेवा में आये हो ब्रम्हा सेवा मा आये हो छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत

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गीत -सेवा में आये हो 

गायक -सूरज सुनील 

शैली -पचरा जस 

यूट्यूब -vijaykumarjasgeet 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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गीत के बारे में

“सेवा में आये हो” एक सुंदर छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत आय। ये गीत म ब्रम्हा जी के सेवा भाव, कमंडल, झांझ-मजीरा, करताले, बांसुरी अउ जयमाला के माध्यम ले भक्ति के सुंदर चित्रण करे गे हवय।

गीत के मुखड़ा म “ब्रम्हा सेवा मा आये हो” के भाव बार-बार आवत हवय, जेन ले भक्ति अउ सेवा के भावना अउ गहिरा हो जाथे। अलग-अलग अंतरा म झांझ-मजीरा, करताले, बांसुरी अउ जयमाला के बारे म सवाल-जवाब के रूप म गीत आगे बढ़थे।

राम-लखन, कृष्ण-राधा जइसन धार्मिक पात्र मन के उल्लेख ले गीत के भक्ति भाव अउ सुंदर बन जाथे। पचरा जस के पारंपरिक गायकी म ये गीत भक्ति कार्यक्रम, जस मंडली अउ धार्मिक आयोजन म गाये बर उपयुक्त हवय।

मुखड़ा 

ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

अंतरा -1 

काहेन के तोर झांझ मजीरा ,काहेन के करताले 

काहेन के तोर झांझ मजीरा ,काहेन के करताले 

काहेन के करताले हो माता काहेन के करताले

काहेन के करताले हो माता काहेन के करताले

उड़ान - काहेन के तोर बेन बांसुरी काहेन के जयमाला

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो  

अंतरा -2  

कांच पीतल के तोर झांझ मजीरा ,कठवा के करताले 

कांच पीतल के तोर झांझ मजीरा ,कठवा के करताले 

कठवा के करताले हो माता कठवा के करताले 

कठवा के करताले हो माता कठवा के करताले 

उड़ान - हरा बांस के बेन बांसुरी तुलसी  के जयमाला

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो  

अंतरा -3   

कौन बजावे तोर झांझ मजीरा ,कौन बजावे करताले 

कौन बजावे तोर झांझ मजीरा ,कौन बजावे करताले 

कौन बजावे करताले हो माता कौन बजावे करताले 

कौन बजावे करताले हो माता कौन बजावे करताले 

उड़ान - कौन बजावे बेन बांसुरी कौन धरे यमाला

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

अंतरा -4   

राम  बजावे तोर झांझ मजीरा ,लखन बजावे करताले 

राम  बजावे तोर झांझ मजीरा ,लखन बजावे करताले 

लखन बजावे करताले  हो माता लखन बजावे करताले 

लखन बजावे करताले  हो माता लखन बजावे करताले 

उड़ान - कृष्ण बजावे तोर बेन बांसुरी राधा धरे जयमाला

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो

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गीत के अर्थ

ये गीत के मुख्य भाव सेवा, भक्ति अउ धार्मिक समर्पण आय। “ब्रम्हा सेवा मा आये हो” के माध्यम ले भगवान के सेवा म पहुंचना अउ पूजा-अर्चना के भाव ला प्रकट करे गे हवय।

गीत म झांझ-मजीरा, करताले, बांसुरी अउ जयमाला जइसन धार्मिक साधन अउ पूजा के सामग्री के उल्लेख मिलथे। ये मन भक्ति के वातावरण ला दर्शाथें।

दूसर अंतरा म कांच, पीतल, कठवा अउ हरा बांस के उल्लेख करके पारंपरिक पूजा अउ लोक संस्कृति के झलक दिखाय गे हवय।

अंतिम अंतरा म राम-लखन अउ कृष्ण-राधा के उल्लेख करके गीत म रामायण अउ कृष्ण भक्ति के भाव ला जोड़े गे हवय।

छत्तीसगढ़ी परंपरा

छत्तीसगढ़ के गांव-गंवई म जस गीत अउ पचरा के अपन अलग महत्त्व हवय। गांव के धार्मिक आयोजन, नवरात्रि, माता सेवा, जस मंडली अउ देवी-देवता के पूजा के बेरा म ये किसिम के गीत गाये जाथे।

पचरा जस म सवाल-जवाब, दोहराव, झांझ-मजीरा, करताले अउ सामूहिक गायन के परंपरा देखे बर मिलथे। ये गीत घलो ओही लोक परंपरा के सुंदर उदाहरण आय।

गीत के विशेषता अउ महत्त्व

  1. गीत म भक्ति अउ सेवा के भाव प्रमुख हवय।
  2. पचरा जस के पारंपरिक अंदाज देखे बर मिलथे।
  3. झांझ-मजीरा अउ करताले जइसन लोक वाद्य के उल्लेख हवय।
  4. बांसुरी अउ जयमाला के माध्यम ले भक्ति के चित्रण करे गे हवय।
  5. राम-लखन अउ कृष्ण-राधा के धार्मिक संदर्भ गीत ला अउ सुंदर बनाथे।
  6. गीत के दोहराव वाला मुखड़ा आसानी ले याद रहिथे।
  7. जस मंडली के सामूहिक गायन बर गीत उपयोगी हो सकथे।

गीतकार के जानकारी

ये गीत के गीतकार के नाम के पक्का जानकारी उपलब्ध नइ हे। एहू से गीतकार के नाम के जगह गलत जानकारी जोड़े के बजाय जानकारी उपलब्ध नइ हे लिखे गे हवय। अगर मूल गीत के गीतकार के सही जानकारी मिलथे, त इहाँ बाद म जोड़े जा सकथे।

गायक के जीवनी – सूरज सुनील

सूरज सुनील के स्वर म प्रस्तुत ये गीत छत्तीसगढ़ी पचरा जस के भक्ति भाव ला सामने लाथे। गीत म गायक के आवाज के माध्यम ले सेवा, भक्ति अउ धार्मिक भावना ला लोक गायकी के अंदाज म प्रस्तुत करे गे हवय।

सूरज सुनील के ये प्रस्तुति म छत्तीसगढ़ी जस गीत के पारंपरिक रंग देखे बर मिलथे। “सेवा में आये हो” जइसन गीत छत्तीसगढ़ के धार्मिक अउ सांस्कृतिक माहौल म भक्ति संगीत के महत्त्व ला दर्शाथे।

गीत के कथा

“सेवा में आये हो” गीत के कथा के केंद्र म भगवान के सेवा अउ भक्ति के भाव हवय। गीत के शुरुआत एक भक्तिमय दृश्य ले होथे, जिहां ब्रम्हा जी कमंडल धरके सेवा म आये हवय। ये दृश्य ला लोकभक्ति के सरल भाषा म प्रस्तुत करे गे हवय।

गीत म भक्त के मन म एक सवाल उठथे कि भगवान के सेवा म कऊन-कऊन चीज के उपयोग होथे। झांझ-मजीरा कऊन बजाही, करताले कऊन बजाही, बांसुरी कऊन बजाही अउ जयमाला कऊन धरी—ये सवाल गीत ला संवाद जइसन रूप देथे।

पहिली कड़ी म झांझ-मजीरा अउ करताले के बात आथे। ओकर बाद गीत के भाव अउ गहिरा होथे अउ अलग-अलग सामग्री के उल्लेख करे जाथे। कांच अउ पीतल के झांझ-मजीरा, कठवा के करताले, हरा बांस के बांसुरी अउ तुलसी के जयमाला जइसन चीज मन के माध्यम ले गांव के पारंपरिक पूजा-पाठ के चित्र उभरथे।

गीत के अगला हिस्सा म सवाल के जवाब खोजे के कोशिश करे गे हवय। कऊन वाद्य बजाही अउ कऊन जयमाला धरी—ये बात ला धार्मिक पात्र मन के संग जोड़े गे हवय। ये ढंग ले गीत म राम-लखन अउ कृष्ण-राधा के संदर्भ आथे।

राम झांझ-मजीरा बजाथें अउ लखन करताले बजाथें, अइसनेच कृष्ण बांसुरी बजाथें अउ राधा जयमाला धरथें। ये धार्मिक कल्पना गीत ला भावपूर्ण बनाथे।

पूरा गीत म “ब्रम्हा सेवा मा आये हो” के मुखड़ा बार-बार दोहराय गे हवय। ये दोहराव जस गायकी के खास अंदाज आय, जेन ले मंडली म गावत बेरा संगवारी मन घलो आसानी ले साथ दे सकथें।

ए गीत के मूल संदेश सेवा, भक्ति, समर्पण अउ धार्मिक एकता के भाव ले जुड़थे। गीत म बड़े-बड़े शब्द के बजाय गांव-गंवई के सहज बोली के उपयोग करे गे हवय। एही से ये गीत आम श्रोता मन बर आसानी ले समझ म आ जाथे।

छत्तीसगढ़ी लोक परंपरा म अइसने गीत सिरिफ मनोरंजन बर नइ, बल्कि धार्मिक भावना अउ सांस्कृतिक पहचान ला जिंदा रखे म घलो योगदान देथें। “सेवा में आये हो” गीत म पचरा जस के गायकी, धार्मिक पात्र, लोक वाद्य अउ भक्ति भाव के सुंदर मेल देखे बर मिलथे।

अक्सर पूछे जाथे – FAQ

1. “सेवा में आये हो” गीत के गायक कोन हवय?

“सेवा में आये हो” गीत ला सूरज सुनील ह गाये हवय।

2. ये गीत के शैली का हवय?

ये गीत छत्तीसगढ़ी पचरा जस शैली के हवय।

3. “सेवा में आये हो” गीत के यूट्यूब चैनल कोन हवय?

ये गीत vijaykumarjasgeet यूट्यूब चैनल म उपलब्ध हवय।

4. गीत म कऊन धार्मिक पात्र मन के नाम आथे?

गीत म ब्रम्हा, राम, लखन, कृष्ण अउ राधा के धार्मिक संदर्भ आथे।

5. गीत म कऊन-कऊन वाद्य के उल्लेख हवय?

गीत म झांझ-मजीरा, करताले अउ बेन बांसुरी के उल्लेख हवय।

6. गीत म जयमाला किसके संग जोड़े गे हवय?

गीत के अलग-अलग भाव म तुलसी के जयमाला अउ राधा के जयमाला के उल्लेख मिलथे।

7. ये गीत के गीतकार कोन हवय?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार गीतकार के नाम नइ मिल पाय हवय।

8. ये गीत कऊन कार्यक्रम म गाये जा सकथे?

ये गीत जस मंडली, धार्मिक आयोजन, माता सेवा अउ भक्ति कार्यक्रम म गाये जा सकथे।

9. “सेवा में आये हो” गीत कहां पढ़े जा सकथे?

ये गीत के बोल CG Jas Lyrics म पढ़े जा सकथे।

10. ये गीत के मुख्य भाव का आय?

गीत के मुख्य भाव सेवा, भक्ति, समर्पण अउ धार्मिक भावना आय।

अउ छत्तीसगढ़ी जस गीत पढ़व

  1. बम्लाई ला सुमिरव 
  2. डोंगरी पहाड़ म हा – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  3. देवी के सिंगारे बर – जस गीत
  4. मोर दुर्गा मईया – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  5. माई के दरस बर हां  – जस गीत
  6. मोरो मन हुलसे – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  7. झूलना मा झूला लेना -जस पचरा गीत 
  8. अब लाज रखो  – छत्तीसगढ़ी भक्ति गीत
  9. बेटी घर आये हावे  – छत्तीसगढ़ी बेटी जस गीत
  10. जगजोत जलत हे – छत्तीसगढ़ी जस गीत

CG Jas Lyrics के बारे म

CG Jas Lyrics छत्तीसगढ़ी जस गीत, पचरा जस, माता सेवा गीत अउ पारंपरिक भक्ति गीत के बोल ला एके जगह म पहुंचाय के कोसिस करे वाला वेबसाइट आय। इहाँ छत्तीसगढ़ी लोकभाषा अउ धार्मिक गीत-संगीत से जुड़े जानकारी ला सरल ढंग ले पढ़े बर मिलथे।

हमर कोसिस रहिथे कि छत्तीसगढ़ी जस गीत के बोल के संग गीत के जानकारी, अर्थ, परंपरा अउ सांस्कृतिक महत्त्व घलो पाठक मन तक पहुंचय।

YouTube चैनल के बारे म

ये गीत के जानकारी vijaykumarjasgeet यूट्यूब चैनल ले संबंधित हवय। ये चैनल म छत्तीसगढ़ी जस गीत अउ भक्ति संगीत से जुड़े वीडियो देखे बर मिल सकथे। गीत के मूल वीडियो अउ प्रस्तुति बर संबंधित यूट्यूब चैनल ला श्रेय देय जाथे।

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वेबसाइट ऑनर – के के पंचारे
CG Jas Lyrics

आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो | विजय कुमार सिंगरौल | छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत


आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत विजय कुमार सिंगरौल

आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो

गीत परिचय

“आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” एक भक्ति भाव ले भरपूर छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत आय। ए गीत म नवदुर्गा दाई के आगमन, भुवना म जोत जलाय के भक्ति, अंगना लिपाय के चौक पुराय के परंपरा अउ कलश, धान, आम के पाना ले पूजा-सजावट के सुंदर चित्रण करे गे हवय।

ए गीत ला विजय कुमार सिंगरौल गाये हवंय अउ गीत के रचना घलो विजय कुमार सिंगरौल के हवय।

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गीत -आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो 

गायक -विजय कुमार सिंगरौल 

गीतकार -विजय कुमार सिंगरौल

शैली -छत्तीसगढ़ी पचरा जस  

यूट्यूब -vijay gana channel 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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मुखड़ा 

आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो ,भुवना मा जोत जलाये हो माँ

मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

 आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो ,भुवना मा जोत जलाये हो माँ

मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

ये मोर मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

ये मोर मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

अंतरा -1 

कुटधर अंगना लिपायेव मोर माता वो ,मोतियन चौक पुराये हो माँ

मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

कुटधर अंगना लिपायेव मोर माता वो ,मोतियन चौक पुराये हो माँ 

मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

 ये मोर मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

 ये मोर मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

अंतरा -2 

सोन के कलशा अउ सूपा भर धान वो आमा के पतरी सजाये हो माँ 

मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

सोन के कलशा अउ सूपा भर धान वो आमा के पतरी सजाये हो माँ 

मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ

 ये मोर मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

 ये मोर मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

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गीत के अरथ

ए गीत के मूल भाव नवदुर्गा दाई के स्वागत अउ भक्ति ऊपर आधारित हवय।

“आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” के भाव ये आय कि नवरात्रि के पावन बेरा आ गे हवय अउ भक्त अपन घर-आंगन म दाई के पूजा बर तैयारी करत हें।

“भुवना मा जोत जलाये हो माँ” म दाई के भक्ति म पवित्र जोत जलाय के भाव हवय। जोत ला श्रद्धा, आस्था अउ उजियारा के प्रतीक मान के पूजा करे जाथे।

“कुटधर अंगना लिपायेव” म घर-आंगन ला साफ-सुथरा करके पूजा बर तैयार करे के परंपरा देखे बर मिलथे।

“मोतियन चौक पुराये” म चौक बनाय के लोक परंपरा के उल्लेख हवय।

“सोन के कलशा अउ सूपा भर धान” म छत्तीसगढ़ के खेती-किसानी अउ अन्न के महत्व झलकथे।

“आमा के पतरी सजाये” म आम के पाना ले पूजा के जगह सजाय के पारंपरिक भाव दिखाई देथे।


🌾 छत्तीसगढ़ी परंपरा

छत्तीसगढ़ के गांव-गांव म नवरात्रि के बेरा देवी-देवता के पूजा के संग घर-आंगन के साफ-सफाई, चौक सजाय, कलश स्थापना अउ जोत जलाय के परंपरा देखे बर मिलथे।

धान छत्तीसगढ़ के प्रमुख अन्न आय, एखर से पूजा के तैयारी म धान के उपयोग के अपन अलग महत्व रहिथे। सूपा, कलश, आम के पाना, जोत अउ चौक जइसन चीज मन छत्तीसगढ़ी लोकजीवन अउ धार्मिक परंपरा के हिस्सा हवंय।

ए पचरा जस गीत एही लोकभावना ला सरल छत्तीसगढ़ी बोली म गीत के रूप देथे।

गीत के विशेषता अउ महत्व

  • गीत म नवदुर्गा दाई के भक्ति के भाव हवय।
  • छत्तीसगढ़ी लोकबोली के सहज उपयोग करे गे हवय।
  • पचरा जस गायन के पारंपरिक भाव दिखाई देथे।
  • जोत जलाय अउ देवी के स्वागत के सुंदर चित्रण हवय।
  • धान, सूपा, कलश अउ आम के पाना जइसन लोक वस्तु के उल्लेख हवय।
  • नवरात्रि के पूजा माहौल बर गीत उपयुक्त हवय।
  • गीत म घर-आंगन अउ देवी पूजा के छत्तीसगढ़ी संस्कृति झलकथे।

✍️ गीतकार के जानकारी — विजय कुमार सिंगरौल

विजय कुमार सिंगरौल ए गीत के गीतकार अउ गायक हवंय। “आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” म उन्हीं के रचनात्मक भाव अउ गायकी के माध्यम ले नवदुर्गा दाई के भक्ति ला छत्तीसगढ़ी पचरा जस के रूप म प्रस्तुत करे गे हवय।

ए गीत म सरल लोकभाषा, देवी भक्ति अउ छत्तीसगढ़ी पूजा परंपरा के मेल देखे बर मिलथे।


🎤 गायक के जानकारी — विजय कुमार सिंगरौल

विजय कुमार सिंगरौल ए गीत के गायक हवंय। ए गीत म छत्तीसगढ़ी पचरा जस के भक्ति भाव ला अपन आवाज के माध्यम ले प्रस्तुत करे गे हवंय। गीत के बोल म मौजूद पूजा, जोत अउ नवदुर्गा के भाव ला गायकी के माध्यम ले श्रोता मन तक पहुंचाय के प्रयास करे गे हवय।


📖 गीत के कथा 

नवरात्रि के पावन बेरा म गांव के माहौल एकदम भक्तिमय हो जाथे। घर-घर म दाई के पूजा बर तैयारी शुरू हो जाथे। बिहान ले घर के अंगना साफ करे जाथे, आंगन ला लिप-पोत के सजाय जाथे अउ पूजा के जगह ला पवित्र बनाय जाथे। एही भक्ति के माहौल ला “आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” गीत म सुंदर ढंग ले प्रस्तुत करे गे हवय।

गीत के शुरुआत म भक्त अपन मन के भाव ले नवदुर्गा दाई ला अपन घर-भुवना म विराजे के निवता देथे। दाई के स्वागत बर भुवना म जोत जलाय जाथे। जोत के उजियारा म भक्त के मन म आस्था अउ भरोसा के भाव जागथे। दाई के पूजा म जलत जोत ला पवित्रता अउ भक्ति के चिन्ह के रूप म देखे जाथे।

दाई के आगमन बर घर के अंगना ला लिपाय-पोताय जाथे। छत्तीसगढ़ी गांव के पुरानी परंपरा म तिहार अउ पूजा के बेरा घर-दुवार के सफाई के विशेष महत्व रहिथे। साफ अंगना म चौक पुराय जाथे। चौक म रंग-बिरंगा आकृति बनाके दाई के स्वागत करे जाथे। गीत म मोतियन चौक के उल्लेख एही सुंदर परंपरा ला सामने लाथे।

आगे गीत म सोन के कलशा अउ सूपा भर धान के बात आथे। धान छत्तीसगढ़ के जीवन अउ किसानी संस्कृति ले गहराई ले जुड़ाय हवय। किसान बर धान खाली अन्न नइ, बल्कि परिवार के जीवन के आधार घलो आय। ए कारण पूजा के तैयारी म धान के उपयोग के अपन धार्मिक अउ सांस्कृतिक महत्व रहिथे।

आम के पाना ले पूजा के जगह सजाय के उल्लेख घलो गीत म मिलथे। आम के पाना, कलश अउ जोत जइसन चीज मन मिलके पूजा के पूरा वातावरण ला मंगलमय बनाथें।

ए गीत म भक्त के मन के एकेच भावना बार-बार उभर के आथे—मईया के स्वागत, पूजा अउ भक्ति। गीत के दोहरावदार पंक्ति जस गायन के विशेषता ला मजबूत करथे अउ सामूहिक रूप ले गावत बेरा श्रोता मन ला संग जोड़थे।

ए पचरा जस के माध्यम ले छत्तीसगढ़ी लोकभाषा, देवी भक्ति अउ गांव के पारंपरिक पूजा-विधि के सुंदर संगम देखे बर मिलथे। गीत सुनत बेरा श्रोता मन ला नवरात्रि के वही भक्तिमय माहौल के अनुभव होथे, जिहां घर-आंगन म जोत जलथे, चौक सजथे अउ दाई के जयकारा गूंजथे।


❓ अक्सर पूछे जाथे

1. “आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” गीत के गायक कोन हें?

ए गीत के गायक विजय कुमार सिंगरौल हवंय।

2. ए गीत के गीतकार कोन हें?

ए गीत के गीतकार घलो विजय कुमार सिंगरौल हवंय।

3. ए गीत कोन शैली के आय?

ए गीत छत्तीसगढ़ी पचरा जस शैली के आय।

4. ए गीत म काकर भक्ति करे गे हवय?

ए गीत म नवदुर्गा दाई के भक्ति अउ स्वागत के भाव हवय।

5. गीत म जोत जलाय के का भाव हवय?

जोत जलाय के भाव दाई के प्रति श्रद्धा, आस्था अउ भक्ति ले जुड़ाय हवय।

6. गीत म कऊन-कऊन पूजा सामग्री के उल्लेख हवय?

गीत म कलशा, धान, सूपा अउ आम के पतरी के उल्लेख हवय।

7. ए गीत ला कहां सुन सकथन?

ए गीत के यूट्यूब चैनल vijay gana channel म उपलब्ध हवय।

8. ए गीत म छत्तीसगढ़ी संस्कृति कइसे दिखथे?

अंगना लिपाय, चौक पुराय, धान, सूपा, कलश अउ आम के पाना जइसन परंपरागत चीज के उल्लेख ले छत्तीसगढ़ी संस्कृति झलकथे।


🔗 जस गीत 

  1. जगमग जगमग दीया बरत हे
  2. हे मैया माता सेवा मा चले आबे
  3. चंदन झूलना मां झूलना झूले मोर मईया
  4. पानी रे पानी रे पानी बरसे पानी
  5. तुम झुलव महामाई — पचरा जस गीत
  6. कंकालिन मोरे मया हो चंडालिन मोरे माया
  7. तोर आरती उतारन मोर दुर्गा मईया

जननी धीरे जननी धीरे झुलव वो/ CG Jas Lyrics/vijay kumar jas geet

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जननी धीरे जननी धीरे झुलव वो/vijay kumar jas geet.jpg

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गीत - जननी धीरे झुलव वो 

गीत लेबल - पारंपरिक जस

गायक - विजय कुमार 

म्यूज़िक कंपनी - विजयकुमार जस गीत

वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

जननी धीरे झुलव वो मईया धीरे झुलव वो

झूलना हे कमजोर महामाई धीरे झुलव वो 

अंतरा-1

मईया जी के पावे मा पैरी बिराजे -2

पैरी बिराजे हो मईया पैरी बिराजे

पैरी मा सुरुज के अंजोर ....मईया धीरे झुलव वो 

जननी धीरे झुलव वो 

झूलना हे कमजोर महामाई धीरे झुलव वो 

अंतरा-2

मईया जी के कमर मा करधन बिराजे-2

करधन बिराजे हो मईया करधन बिराजे

करधन मा सुरुज के अंजोर....मईया धीरे झुलव वो 

जननी धीरे झुलव वो 

झूलना हे कमजोर महामाई धीरे झुलव वो 

अंतरा-3

मईया जी के हाथ मा कंगन बिराजे-2

कंगन बिराजे हो मईया कंगन बिराजे

कंगन मा सुरुज के अंजोर ...मईया धीरे झुलव वो 

जननी धीरे झुलव वो 

झूलना हे कमजोर महामाई धीरे झुलव वो 

अंतरा-4

मईया जी के गले मा हरवा बिराजे-2

हरवा बिराजे हो मईया हरवा बिराजे

हरवा मा सुरुज के अंजोर ...मईया धीरे झुलव वो

 जननी धीरे झुलव वो 

झूलना हे कमजोर महामाई धीरे झुलव वो 

अंतरा-5

मईया जी के काने मा झुमका बिराजे-2

झुमका बिराजे हो मईया झुमका बिराजे

झुमका मा सुरुज के अंजोर ....मईया धीरे झुलव वो 

जननी धीरे झुलव वो 

झूलना हे कमजोर महामाई धीरे झुलव वो 

अंतरा-6

मईया जी के नाके मा नथूली बिराजे-2

नथूली बिराजे हो मईया नाथूली बिराजे

नथूली मा सुरुज के अंजोर ....मईया धीरे झुलव वो

 जननी धीरे झुलव वो 

झूलना हे कमजोर महामाई धीरे झुलव वो 

अंतरा-7

मईया जी के माथे मा टिकली बिराजे-2

टिकली बिराजे हो मईया टिकली बिराजे

टिकली मा सुरुज के अंजोर ....मईया धीरे झुलव वो

 जननी धीरे झुलव वो 

झूलना हे कमजोर महामाई धीरे झुलव वो 

अंतरा-8

मईया जी के सिर मा मुकुट बिराजे-2

मुकुट बिराजे हो मईया मुकुट बिराजे 

मुकुट मा सुरुज के अंजोर ....मईया धीरे झुलव वो 

जननी धीरे झुलव वो 

झूलना हे कमजोर महामाई धीरे झुलव वो

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छत्तीसगढ़ी जस लिरिक्स 

जननी धीरे झुलव वो मईया धीरे झुलव वो छत्तीसगढ़ी जस गीत के पूरा लिरिक्स, अर्थ, महत्व, कहानी अउ भक्ति भाव के सुंदर जानकारी पढ़व CG Jas Lyrics म।

जननी धीरे झुलव वो मईया धीरे झुलव वो | पूरा छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स 

 गीत के बारे में

"जननी धीरे झुलव वो मईया धीरे झुलव वो" एक सुंदर छत्तीसगढ़ी झूलना जस गीत आय। ए गीत म भक्त मन महामाई ल प्रेम अउ मया ले झुलना झुलावत हें। गीत के हर अंतरा म माता के श्रृंगार के अलग-अलग गहना जइसे पैरी, करधन, कंगन, हरवा, झुमका, नथूली, टिकली अउ मुकुट के महिमा गाये गे हे। ए गहना मन म सुरुज के अंजोर बताके माता के दिव्य रूप के बखान करे गे हे।

जननी धीरे झुलव वो लिरिक्स के अर्थ

ए जस गीत के मतलब ए आय कि भक्त अपन दाई ल छोटे लइका कस मया ले झुलना झुलावत हे। भक्त कहिथे कि "महामाई धीरे-धीरे झूलव, झूलना कमजोर हे।"

गीत म माता के हर अंग म पहिरे गहना ल सुरुज कस चमकत बताय गे हे। एखर मतलब माता के पूरा स्वरूप प्रकाश, शक्ति, सुख, समृद्धि अउ कृपा ले भरपूर हे।

गीत के धार्मिक महत्व

ए गीत नवरात्रि, ज्योति कलश, माता सेवा, जंवारा, जस कार्यक्रम अउ देवी जागरण म बहुत गाये जाथे।

एखर विशेष महत्व ए आय कि—

माता के श्रृंगार के महिमा बताथे।

भक्त अउ माता के मया भरे संबंध ल दिखाथे।

घर म सुख-समृद्धि अउ शांति के कामना करे जाथे।

माता के कृपा पाय बर ए गीत ल श्रद्धा ले गाये जाथे।

 जननी धीरे झुलव वो :  कहानी

एक गाँव म हर साल नवरात्रि के बड़का जस कार्यक्रम होवत रहिस। गाँव के सबो झन बिहान ले माता सेवा म जुट जावत रहिन। बूढ़ा, जवान, महतारी, लइका सब झन मिलके डोंगर, मंदिर अउ जस चौरा ल सजावत रहिन।

एक बखत गाँव के एक बुजुर्ग दाई कहिस— "माता ल सिरिफ पूजा करे ले नई, ओकर सेवा ल अपन घर के दाई कस मया ले करे बर चाही।"

ए बात सुनके गाँव के महिला मन सुंदर झूलना बनाइन। झूलना म फूल, आम के पाना अउ रंग-बिरंगी सजावट करिन। जब माता के प्रतिमा झूलना म बइठाय गीस त सबो झन गाना सुरू करिन—

"जननी धीरे झुलव वो मईया धीरे झुलव वो…"

गीत गावत-गावत सबो झन माता के श्रृंगार के बखान करिन। काबर कि भक्त मन के मानना रहिस कि माता के पैरी ले लेके मुकुट तक हर गहना संसार ल उजियार करे वाला हे।

गीत के हर अंतरा गावत समय गाँव के अलग-अलग महिला माता के चरण म फूल चढ़ावत रहिन। कऊनो पैरी के पूजा करत रहिस, कऊनो करधन, कऊनो कंगन, कऊनो मुकुट।

रात होइस त जस मंडली के भक्ति देखके गाँव के वातावरण पूरा बदल गे। ढोलक, मंजीरा अउ झांझ के आवाज ले पूरा गाँव गूंज उठिस।

एक गरीब परिवार घलो माता के दरबार म आके एही गीत गाइस। ओकर मन म धन नई रहिस, फेर भक्ति भरपूर रहिस। कुछे दिन बाद ओ परिवार के घर म खुशहाली आना सुरू होगे। खेती ल बढ़िया पानी मिलिस, परिवार के बीमारी दूर होगे अउ घर म सुख-शांति आ गे।

तब गाँव के बुजुर्ग मन कहिन कि माता धन नई, सच्चा मन देखथे।

आज घलो छत्तीसगढ़ के गाँव-गाँव म ए जस गीत बड़े श्रद्धा ले गाये जाथे। जिहां ए गीत गूंजथे, उहां माता के कृपा, प्रेम अउ आशीर्वाद के अनुभूति होथे।

 ए गीत काबर सुनना चाही?

माता के भक्ति मजबूत होथे।

मन ल शांति मिलथे।

परिवार म सुख-समृद्धि आथे।

नवरात्रि के माहौल अउ पवित्र बन जाथे।

माता के श्रृंगार के सुंदर वर्णन सुनई ला मिलथे।

ए जस गीत मन ल घलो जरूर पढ़व

बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के

तोर डीही के दीया बरइया

हो मईया चंडिका

तोर भुवन मा हरियर हरियर

झुलव भवानी झूलना मईया तोरे ललना झूलावे

 निष्कर्ष

जननी धीरे झुलव वो मईया धीरे झुलव वो सिरिफ एक जस गीत नई, बल्कि माता के प्रति असीम श्रद्धा, सेवा अउ मया के प्रतीक आय। ए गीत भक्त मन ल माता के नजदीक ले जाथे अउ भक्ति के रस म डुबो देथे। नवरात्रि, माता सेवा अउ हर देवी भक्ति कार्यक्रम म ए गीत विशेष स्थान रखथे।

 CG Jas Lyrics के बारे में 

CG Jas Lyrics छत्तीसगढ़ी जस गीत प्रेमी मन बर समर्पित एक भरोसेमंद वेबसाइट आय। इहां आप मन ल छत्तीसगढ़ी जस गीत के पूरा लिरिक्स, अर्थ, कहानी, गायक परिचय, SEO जानकारी, धार्मिक महत्व अउ दुर्लभ भक्ति गीत एके जगह म मिलही। हमर उद्देश्य छत्तीसगढ़ के लोकसंस्कृति, देवी भक्ति अउ जस परंपरा ल डिजिटल दुनिया म सुरक्षित रखे अउ नई पीढ़ी तक पहुंचाय हे।

अगर आप मन ल ए लिरिक्स पसंद आइस, त अपन परिवार अउ जस मंडली के संग जरूर साझा करव अउ CG Jas Lyrics वेबसाइट म अऊ घलोक सुंदर छत्तीसगढ़ी जस गीत पढ़व।


लगुरवा भईया सुन्दर आरती सजाये हो माँ, vijay kumar singroul, तुलसी के चौरा जस मण्डली गिरधौना

✦✦ लंगुरुवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां /विजय कुमार✦✦

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गीत - लंगुरुवा भईया 

गीत लेबल - पारंपरिक जस

गायक - विजय कुमार 

म्यूज़िक कंपनी - विजयकुमार जस गीत

वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

 लंगुरुवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

//1//

पहली आरती सजे माता जी के ब्रह्मा जी चले आए -2

उड़ान- ब्रह्मा जी चले आए भुवन मा पड़ पड़ वेद सुनाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

पहली आरती सजे माता जी के ब्रह्मा जी चले आए -2

उड़ान- ब्रह्मा जी चले आए भुवन मा पड़ पड़ वेद सुनाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

//2//

दुसर आरती सजे माता जी के विष्णु जी चले आए -2

उड़ान -विष्णु जी चले आए भुवन मा सुंदर शंख बजाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

दुसर आरती सजे माता जी के विष्णु जी चले आए -2

उड़ान -विष्णु जी चले आए भुवन मा सुंदर शंख बजाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

//3//

तीसर आरती सजे माता जी के शंकर जी चले आए -2

उड़ान - शंकर जी चले आए भुवन मा डम डम बजाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

तीसर आरती सजे माता जी के शंकर जी चले आए -2

उड़ान - शंकर जी चले आए भुवन मा डम डम बजाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

//4//

चौथे आरती सजे माता जी के नारद जी चले आए -2

 उड़ान - नारद जी चले आए भुवन मा सुंदर वीणा बजाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

चौथे आरती सजे माता जी के नारद जी चले आए -2

उड़ान - नारद जी चले आए भुवन मा सुंदर वीणा बजाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

//5//

पांचवे आरती सजे माता जी के देवता मन चले आए -2

उड़ान - देवता मन चले आए भुवन मा सुंदर जस ला गाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

पांचवे आरती सजे माता जी के देवता मन चले आए -2

उड़ान - देवता मन चले आए भुवन मा सुंदर जस ला गाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

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1. माता के भक्ति रस ले भरे गीत पढ़े बर

➡ माटी के दाई दुर्गा

2. देवी महिमा के सुंदर कथा पढ़व

➡ आमा तरी अमली

3. माता के जोत अउ भक्ति के विशेष गीत

➡ मोला देरी होंगे मईया

4. महाकाली के अद्भुत शक्ति गीत

➡ कारी मा बीरबिट काली-दुकालू

5. माता के अचरा के महिमा जानव

➡ दाई तोर अचरा मा फुले फुले गजरा मा

6. जुड़वास पर्व के विशेष जसगीत

➡ नीम डारा तोला भाए हो

7. मां के सेवा अउ समर्पण के गीत

➡ पैजनिया बाजे

8. दुर्गा माता के शक्ति स्वरूप गीत

➡ भगवती भवानी हा

9. माता के दरबार के भावपूर्ण जसगीत

➡ मलनिया गूथ देना वो

10. गांव-गांव गूंजत माता भक्ति गीत

➡ सुमरी सुमर के हां मैं तोर जस गांवव

गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)

ये जसगीत म माता के आरती के दिव्य स्वरूप ला गाये गे हवय। गीत म बताय गे हे कि माता के दरबार म एक-एक करके देवता मन पहुंचत हें अउ अपन-अपन भक्ति अउ सेवा अर्पित करत हें।

पहिली आरती म Brahma जी आथें अउ वेद के ज्ञान सुनाथें। ये ज्ञान अउ सृष्टि के प्रतीक आय।

दूसर आरती म Vishnu जी आथें अउ शंख बजाके संसार म मंगल संदेश देथें। ये पालन अउ रक्षा के प्रतीक आय।

तीसर आरती म Shiva जी आथें अउ डमरू बजाथें। ये शक्ति, तपस्या अउ परिवर्तन के संकेत देथे।

चौथी आरती म Narada जी वीणा बजाके माता के महिमा गाथें।

पांचवीं आरती म सब देवता मन मिलके माता के जस गाथें। ये बताथे कि माता के शक्ति सबसे महान हवय।

गीत के विशेषता

1. भक्ति अउ श्रद्धा ले भरपूर

ये गीत सुनते ही मन म माता के प्रति भक्ति जाग जाथे।

2. देवी दरबार के सुंदर चित्रण

गीत म देवता मन के आगमन के सुंदर वर्णन मिलथे।

3. मंच कार्यक्रम बर उपयुक्त

जगराता, जसगीत कार्यक्रम, माता सेवा अउ नवरात्रि म ये गीत बहुते लोकप्रिय हो सकथे।

4. आध्यात्मिक संदेश

गीत बताथे कि ज्ञान, शक्ति, रक्षा अउ संगीत—सब माता के चरण म समर्पित हे।

कहानी (छत्तीसगढ़ी)

बहुत साल पहिली एक छोटे गांव म नवरात्रि के समय माता सेवा के भव्य आयोजन होवत रहिस। गांव के सब लोग माता के मंदिर म जुटे रहिन। दीपक जलत रहिस, घंटी बजत रहिस अउ पूरा वातावरण भक्तिमय होगे रहिस।

गांव के एक सेवक लंगुरुवा अपन मन ले माता के आरती सजा रहिस। ओकर भक्ति देखके सब लोग भावुक होगे। जैसे-जैसे आरती सुरू होइस, लगिस जैसे देव लोक धरती म उतर आए होय।

पहिली आरती म ज्ञान के प्रकाश फैलिस। दूसर आरती म शंख के ध्वनि ले पूरा गांव गूंज उठिस। तीसर आरती म डमरू के आवाज ले नकारात्मक ऊर्जा दूर होगे। चौथी आरती म वीणा के मधुर स्वर ले सबके मन शांत होगे। आखिरी आरती म सब देवता मन माता के जयकारा लगाइन।

ओ दिन गांव के लोगन मन अनुभव करिन कि जहां सच्ची भक्ति होथे, ओतके माता अपन कृपा जरूर बरसाथे।

"छत्तीसगढ़ी माता जस गीत के अइसनेच सुंदर लिरिक्स पढ़े बर CG Jas Lyrics संग जुड़े रहव, अउ अपन भक्ति के सफर ला आगे बढ़ावव।"

मोला देरी होंगे मईया / तितरा श्रीवास / पचरा जस lyrics

✦✦ मोला देरी होंगे मईया / तितरा श्रीवास / पचरा जस lyrics✦✦

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गीत - मोला देरी होंगे मईया

गायक - तितरा श्रीवास 

गीत लेबल - पचरा जस गीत 

म्यूज़िक कंपनी - vijaykumarjasgeet 

वेबसाईट ऑनर - कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

मोला देरी होंगे मईया तोरे वो सेवा मा हां - 2

तोरे ओ सेवा मा हां....2

मोला देरी होंगे मईया तोरे वो सेवा मा हां - 2

अंतरा -1

सुरहीन गईया के गोबर मग़ाके , कूटधर अंगना लीपाये - 2

कूटधर अंगना लीपाये हो मईया कूटधर अंगना लीपाये 

सुरहीन गईया के गोबर मग़ाके , कूटधर अंगना लीपाये

कूटधर अंगना लीपाये हो मईया कूटधर अंगना लीपाये 

सुरहीन गईया के गोबर मग़ाके , कूटधर अंगना लीपाये

अहो तोरे ओ सेवा मा हां.....2

मोला देरी होंगे मईया तोरे वो सेवा मा हां - 2

अंतरा -2

गजमोतियन के चौक पुराए, सोन के कलश मढ़ाये - 2

सोन के कलश मढ़ाये मईया सोन के कलश मढ़ाये

गजमोतियन के चौक पुराए, सोन के कलश मढ़ाये 

सोन के कलश मढ़ाये मईया सोन के कलश मढ़ाये

गजमोतियन के चौक पुराए, सोन के कलश मढ़ाये 

अहो तोरे ओ सेवा मा हां.....2

मोला देरी होंगे मईया तोरे वो सेवा मा हां - 2

अंतरा -3

सोन के कलश मा दियाना मढ़ाके, सुंदर जोत जलायेव- 2

सुंदर जोत जलायेव मईया सुंदर जोत जलायेव

सोन के कलश मा दियाना मढ़ाके, सुंदर जोत जलायेव

सुंदर जोत जलायेव मईया सुंदर जोत जलायेव

सोन के कलश मा दियाना मढ़ाके, सुंदर जोत जलायेव

अहो तोरे ओ सेवा मा हां.....2

मोला देरी होंगे मईया तोरे वो सेवा मा हां - 2

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✦✦ माता रानी के मनमोहक जस गीत ✦✦

दाई तोर अचरा मा फुले फुले गजरा 

घर घर दीया माता – भक्ति अऊ ज्योति के सुंदर जसगीत ला पढ़व।

तोर बने हे मंदिरवा गीत के गहिरा अर्थ जानव।

घुंघरू में कंकड़ समाए मोरे मां

सुमरी सुमर के हां जस पचरा

लहराए जवारा हरियर हरियर हो

गरजत आए महामाया

भवानी तोरे आरती

✦✦ गीत के अर्थ✦✦

ए जसगीत मं एक भक्त अपन मईया ले कहिथे कि अगर सेवा मं देरी होवत हे, त वो देरी आलस के कारण नई, बल्कि मईया के सेवा बर पूरी श्रद्धा अऊ विधि-विधान ले तैयारी करे के कारण होवत हे।

गीत मं अंगना ला गोबर ले लीपना, चौक पुरना, कलश सजाना अऊ जोत जलाना जइसने पवित्र काम के वर्णन मिलथे। ए सब माता के स्वागत अऊ सेवा के प्रतीक आय।

भक्त अपन मईया बर पूरा मन, श्रद्धा अऊ भक्ति ले सेवा करत हे, ए बात ए गीत मं बहुत सुंदर ढंग ले बताय गे हे।

✦✦ गीत  के  महत्व ✦✦

ए जसगीत खास करके माता सेवा, नवरात्रि, जसगान अऊ देवी जागरण मं गाये जाथे। ए गीत बताथे कि माता के सेवा मं सच्चा मन, पवित्रता अऊ समर्पण होना बहुत जरूरी हे।

छत्तीसगढ़ के लोकसंस्कृति मं अंगना लीपना, चौक बनाना अऊ जोत जलाना शुभ अऊ मंगल के चिन्ह माने जाथे।

ए गीत सुनके भक्त मन के भीतर माता बर अउ घलोक श्रद्धा अऊ विश्वास जागथे।

✦✦ गीत  के कहानी✦✦

एक गांव मं एक गरीब फेर बहुत श्रद्धालु भक्त रहिस। ओकर मन मं माता बर अगाध भक्ति रहय। गांव मं जब नवरात्रि के समय आइस, तब गांव के सबो झन माता सेवा के तैयारी मं लग गिन।

ओ भक्त घलो अपन मईया के सेवा करे बर मन बनाइस। बिहान-बिहान उठके वो सुरहीन गईया के गोबर लानिस अऊ अपन अंगना ला बड़े प्रेम ले लीपिस। ओकर मानना रहय कि जिहां सफाई अऊ पवित्रता रहिथे, उहां माता के कृपा जरूर होथे।

फेर पूजा के तैयारी करत-करत समय निकलत गीस। भक्त के मन मं चिंता होइस कि कहीं मईया के सेवा मं देरी झन हो जावय। तब वो  हाथ ले हाथ जोड़ के माता ले कहिस—

"मोला देरी होंगे मईया, तोरे वो सेवा मा..."

यानि हे मईया, अगर सेवा मं देर होवत हे, त वो मोर लापरवाही नई, बल्कि तोर सेवा ला सुंदर बनाय के कोशिश आय।

ओकर बाद वो अंगना मं सुंदर चौक पुरिस, कलश सजाइस अऊ घी के दिया जलाइस। पूरा घर भक्ति अऊ सुगंध ले भर गीस।

जब रात मं जसगान सुरू होइस, त गांव वाले देखिन कि ओकर घर मं अलग किसिम के प्रकाश फैल गे हे। सब झन समझ गिन कि माता अपन भक्त के सच्ची सेवा ले प्रसन्न होगे हें।

तब ले गांव मं ए बात कहे जाथे—

जेन मन ले माता के सेवा करथे, ओकर ऊपर मईया के कृपा जरूर बरसथे।

माता सेवा मं धन-दौलत नई, बल्कि सच्चा मन, श्रद्धा अऊ समर्पण सबसे बड़े पूजा आय

“छत्तीसगढ़ी जसगीत, माता भजन अउ लोक संस्कृति ले जुड़े अउ सुंदर गीत पढ़ते रहव, त जुड़े रहू Cgjaslyrics.com संग। आप मन के प्रेम अउ सहयोग हमर प्रेरणा हे।”

✦✦ माता रानी आप सबकी मनोकामना पूर्ण करे ✦✦