डोंगरी पहाड़ी में हा | दीपक वर्मा | छत्तीसगढ़ी देवी जसगीत लिरिक्स, अर्थ और कथा
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गीत - डोंगरी पहाड़ में हा
गायक - दीपक वर्मा
गीतकार - अलख राम यादव
म्यूज़िक कंपनी - sks studio cg
वेबसाईट ऑनर - कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
डोंगरी पहाड़ी में हो तै बैठे हो माता डोंगरी पहाड़ी में हां
तै बैठे हो माता डोंगरी पहाड़ी में हां
अंतरा -1
कहा ले तै आये ओ माता काकर रूप बनाये -2
कोन हर तोर करे आरती कोन हा जस तोर गाये -2
उड़ान - कोन हा तोर करे सिंगारे ,डोंगरी पहाड़ी में हां----
तै बैठे हो माता डोंगरी पहाड़ी में हां-2
अंतरा -2
सरग लोक ले आये ओ माता काली रूप बनाये -2
नर नारी तोर करे आरती सेऊक जस तोर गाये -2
उड़ान - बईगा पंडा करे सिंगारे ,डोंगरी पहाड़ी में हां----
तै बैठे हो माता डोंगरी पहाड़ी में हां-2
अंतरा -3
जंगल झाड़ी चीर माता रस्दा तैहा बनाये -2
डोंगरी पहाड़ी म बइठे दाई आसन सुघ्घर लगाये -2
उड़ान - चिड़िया चढ़चड़ आये ओ दाई डोंगरी पहाड़ी में हां----
तै बैठे हो माता डोंगरी पहाड़ी में हां-2
अंतरा -4
नवदिन तोर मेला बराथे नरनारी सब आये -2
तोर दरस ल पाके ओ दाई जीवन सफल बनाथे-2
उड़ान - वर ईच्छा पाथे ओ दाई डोंगरी पहाड़ी में हां----
तै बैठे हो माता डोंगरी पहाड़ी में हां-2
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गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)
“डोंगरी पहाड़ी में तैं बैठे हो माता”
ए पंक्ति म गायक माता के महिमा गावत कहिथे के दाई डोंगरी पहाड़ी म विराजमान हें। भक्त मन पहाड़ म जाके माता के दर्शन करथें अउ अपन मनोकामना मांगथें।
अंतरा 1 के अर्थ
गायक माता ले पूछत हे के दाई तैं कहा ले आय हस अउ कोन रूप धरके आय हस। साथ ही पूछत हे के तोर आरती कोन करत हे अउ तोर जस कोन गावत हे।
ए म माता के पूजा-अर्चना अउ भक्त मन के सेवा के वर्णन मिलथे।
अंतरा 2 के अर्थ
माता सरग लोक ले धरती म आय हें अउ काली के रूप धरके अपन भक्त मन के रक्षा करत हें। नर-नारी सब आरती करत हें अउ सेऊक मन माता के जस गावत हें।
अंतरा 3 के अर्थ
ए भाग म माता के निवास स्थान के सुंदर वर्णन हे।
जंगल झाड़ी ला चीर के माता अपन दरबार बसाय हें। डोंगरी पहाड़ी म माता सुन्दर आसन म विराजमान हें अउ चिड़िया मन भी आके माता के आसपास चहकथें।
अंतरा 4 के अर्थ
नवरात्रि के समय माता के दरबार म बड़े मेला भरथे। दूर-दूर ले नर-नारी माता के दर्शन करे बर आथें।
दाई के दर्शन पा के भक्त मन के जीवन सफल हो जाथे अउ माता मनोकामना पूरा करथें।
🌼 गीत के धार्मिक महत्व
ए गीत माता के शक्ति अउ महिमा के वर्णन करथे।
डोंगरी पहाड़ी म बसे देवी स्थल के महत्व ला बताथे।
नवरात्रि म माता के दरबार म लगने वाले मेला के भक्ति भाव दिखाथे।
ए गीत सुनके भक्त मन के मन म श्रद्धा अउ विश्वास बढ़थे।
📖 कथा (डोंगरी पहाड़ी वाली दाई के कहानी)
बहुत साल पहिली के बात आय। एक गांव के पास घना जंगल अउ उंचा डोंगरी पहाड़ रहिस। गांव के लोगन कहिथें के ओ पहाड़ म कोई दिव्य शक्ति रहिथे। रात के समय ओ जगह म जोत जले दिखत रहिस।
एक दिन गांव के एक बुजुर्ग बईगा ला सपना म माता दर्शन देहिन। माता कहिन –
“मोर आसन डोंगरी पहाड़ी म हे, मोला उहां पूजा करव।”
सबेरे बईगा गांव वाले मन ला बताइस। सब झिन पहाड़ म जाके देखिन त ओ जगह सच म एक पवित्र स्थान दिखिस। उहां माता के मूर्ति स्थापित करे गीस।
धीरे-धीरे ओ जगह प्रसिद्ध होगे। दूर-दूर ले लोगन माता के दर्शन करे बर आवन लगिन। नवरात्रि म नौ दिन तक भव्य मेला भरथे। बईगा अउ पंडा माता के सिंगार करथें, आरती होथे अउ जसगीत गूंजथे।
कहिथें जऊन भी भक्त सच्चे मन ले डोंगरी पहाड़ी वाली दाई के दर्शन करथे, ओकर मनोकामना जरूर पूरा होथे।
तभी ले आज तक भक्त मन गावत हें —
“डोंगरी पहाड़ी में तैं बैठे हो माता…”



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