घुंघरू में कंकड़ समाए- आरती सिंह/sumiran bhagti mala
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गीत - घुंघरू में कंकड़
गायिका - आरती सिंह
गीतकार - रानू निषाद
म्यूज़िक कंपनी - सुमिरन भक्ति माला
वेबसाईट ऑनर - कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
घुंघरू में कंकड़ समाए मोरे मां -2
धुररा खेलन झन जइबे भईया लंगूरे
घुंघरू में कंकड़ समाए मोरे मां -2
अंतरा-1
सबों पारा जइबे लंगूरे खेले कूदे अईबे
कुम्हार पारा हो झन, जइबे मोर मां
कुम्हारिन छोकरिन अजब एक मोहिनी
कलशा मा राखे हे लुभाये मोरे मां
अंतरा-2
सबों पारा जइबे लंगूरे खेले कूदे अईबे
लोहार पारा हो झन, जइबे मोर मां
लोहरिन छोकरिन अजब एक मोहिनी
खड्ग मा राखे हे लुभाये मोरे मां
अंतरा-3
सबों पारा जइबे लंगूरे खेले कूदे अईबे
मरार पारा हो झन,जइबे मोर मां
मरारिन छोकरिन अजब एक मोहिनी
लिबुआ मा राखे हे लुभाये मोरे मां
अंतरा-4
सबों पारा जइबे लंगूरे खेले कूदे अईबे
बनिया पारा हो झन,जइबे मोर मां
बननीन छोकरिन अजब एक मोहिनी
नारियर मा राखे हे लुभाये मोरे मां
अंतरा-5
सबों पारा जइबे लंगूरे खेले कूदे अईबे
दर्जी पारा हो झन,जइबे मोर मां
दर्जिन छोकरिन अजब एक मोहिनी
लिबुआ मा राखे हे लुभाये मोरे मां
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✓ सेवा म सेउक आये ओ शीतला शीतल करबे
“घुंघरू म कंकड़ समाय मोरे मां” ये पंक्ति सिरिफ गीत नइये, ये जिनगी के सच्चाई ला बताथे। जेन मन माता के भक्ति के रद्दा म चलथें, ओमन ला कई किसिम के बाधा अउ परीक्षा के सामना करना पड़थे। घुंघरू भक्ति के चिन्ह आय, अउ कंकड़ रद्दा म आवत दिक्कत मन के संकेत आय।
गीत म लंगूरा ला अलग-अलग पारा म जाए ले मना करे गे हे। एकर मतलब ये आय कि दुनिया म कई किसिम के मोह-माया, आकर्षण अउ भटकाव मौजूद हे, फेर सच्चा भक्त अपन मन ला स्थिर रखथे।
✓ ये जसगीत छत्तीसगढ़ के गांव-गिरांव के संस्कृति ला दिखाथे।
✓ अलग-अलग समाज अउ पारा के सुंदर वर्णन मिलथे।
✓ गीत म माता भक्ति संग जिनगी के सीख छुपे हे।
✓ नवरात्रि, जस जागरण अउ माता सेवा म ये गीत सुनके भक्तिमय माहौल बन जाथे।
चलत-चलत ओकर घुंघरू म कंकड़ फंस गिस। पांव दुखे लगिस, फेर लंगूरा हार नइ मानिस। वो माता के नाम जपत-जपत आगू बढ़त रहिस।
जब वो माता के मंदिर पहुंचिस, माता प्रसन्न होके दर्शन दिन अउ कहिन—
“जेन भक्त बाधा म घलो अपन भरोसा नइ छोड़य, वही मोर सच्चा सेवक आय।”
तभे ले ये जसगीत माता के दरबार म श्रद्धा संग गाए जाथे।



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