घुंघरू में कंकड़ समाए- आरती सिंह/sumiran bhagti mala

✦✦ घुंघरू में कंकड़ समाए- आरती सिंह/sumiran bhagti mala ✦✦

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गीत - घुंघरू में कंकड़ 

गायिका - आरती सिंह 

गीतकार - रानू निषाद 

म्यूज़िक कंपनी - सुमिरन भक्ति माला

वेबसाईट ऑनर - कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

घुंघरू में कंकड़ समाए मोरे मां -2

धुररा खेलन झन जइबे भईया लंगूरे 

घुंघरू में कंकड़ समाए मोरे मां -2

अंतरा-1

सबों पारा जइबे लंगूरे खेले कूदे अईबे 

कुम्हार पारा हो झन, जइबे मोर मां 

कुम्हारिन छोकरिन अजब एक मोहिनी 

कलशा मा राखे हे लुभाये मोरे मां

अंतरा-2

सबों पारा जइबे लंगूरे खेले कूदे अईबे 

लोहार पारा हो झन, जइबे मोर मां 

लोहरिन छोकरिन अजब एक मोहिनी 

खड्ग मा राखे हे लुभाये मोरे मां

अंतरा-3

सबों पारा जइबे लंगूरे खेले कूदे अईबे 

मरार पारा हो झन,जइबे मोर मां 

मरारिन छोकरिन अजब एक मोहिनी 

लिबुआ मा राखे हे लुभाये मोरे मां

अंतरा-4

सबों पारा जइबे लंगूरे खेले कूदे अईबे 

बनिया पारा हो झन,जइबे मोर मां 

बननीन छोकरिन अजब एक मोहिनी 

नारियर मा राखे हे लुभाये मोरे मां

अंतरा-5

सबों पारा जइबे लंगूरे खेले कूदे अईबे 

दर्जी पारा हो झन,जइबे मोर मां 

दर्जिन छोकरिन अजब एक मोहिनी 

लिबुआ मा राखे हे लुभाये मोरे मां

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✦✦ माता रानी के अऊ जस गीत✦✦

देवी के सिंगारे बर 

दाई तोर अचरा मा

कंकालीन मोरे माया 

सरवर नहाए बर 

देवी दुर्गा मैया 

सेवा म सेउक आये ओ शीतला शीतल करबे

गीत के अर्थ 

“घुंघरू म कंकड़ समाय मोरे मां” ये पंक्ति सिरिफ गीत नइये, ये जिनगी के सच्चाई ला बताथे। जेन मन माता के भक्ति के रद्दा म चलथें, ओमन ला कई किसिम के बाधा अउ परीक्षा के सामना करना पड़थे। घुंघरू भक्ति के चिन्ह आय, अउ कंकड़ रद्दा म आवत दिक्कत मन के संकेत आय।

गीत म लंगूरा ला अलग-अलग पारा म जाए ले मना करे गे हे। एकर मतलब ये आय कि दुनिया म कई किसिम के मोह-माया, आकर्षण अउ भटकाव मौजूद हे, फेर सच्चा भक्त अपन मन ला स्थिर रखथे।

✦✦ विशेषता ✦✦

✓ ये जसगीत छत्तीसगढ़ के गांव-गिरांव के संस्कृति ला दिखाथे।

✓ अलग-अलग समाज अउ पारा के सुंदर वर्णन मिलथे।

✓ गीत म माता भक्ति संग जिनगी के सीख छुपे हे।

✓ नवरात्रि, जस जागरण अउ माता सेवा म ये गीत सुनके भक्तिमय माहौल बन जाथे।

✦✦ छत्तीसगढ़ी कथा✦✦
बहुत बछर पहिली के बात आय। एक छोटे गांव म माता के एक सेवक रहिस, जेला गांव वाले “लंगूरा” कहिके बुलावत रहिन। जब घलो गांव म माता के जस गूंजत रहिस, लंगूरा अपन पांव म घुंघरू बांधके माता के दरबार पहुंचत रहिस।एक दिन माता अपन सेवक के भक्ति के परीक्षा लेबर सोचिन। लंगूरा जइसे-जइसे गांव के पारा-पारा ले गुजरिस, तइसे-तइसे ओकर सामने अलग-अलग मोह रखे गे। कुम्हार पारा म कलश, लोहार पारा म चमकदार खड्ग, बनिया पारा म नारियर, अउ मरार पारा म फल-फूल।

चलत-चलत ओकर घुंघरू म कंकड़ फंस गिस। पांव दुखे लगिस, फेर लंगूरा हार नइ मानिस। वो माता के नाम जपत-जपत आगू बढ़त रहिस।

जब वो माता के मंदिर पहुंचिस, माता प्रसन्न होके दर्शन दिन अउ कहिन—

“जेन भक्त बाधा म घलो अपन भरोसा नइ छोड़य, वही मोर सच्चा सेवक आय।”

तभे ले ये जसगीत माता के दरबार म श्रद्धा संग गाए जाथे।


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