तोर डीही के दीया बरइया | कांतिकार्तिक यादव | शीतला दाई CG Jas Geet Lyrics

🌼 तोर डीही के दिया बरइया 🌼


TOR DIHI KE DIYA - CG JAS Geet || Singer Kantikartik Yadav ||

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गीत - तोर डीही के दीया बरइया

गायक - कांतिकार्तिक यादव

गीतकार - मौनी लाला 

म्यूज़िक - ओपी देवांगन 

वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे

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मुखड़ा 

तोर डीही के दीया बरइया मन गोहारे तोला वो -2 

यहो हे कुलवंतिन हे सतवंतिन शीतला दाई वो

तोर डीही के दीया बरइया मन गोहारे तोला वो -2 

अंतरा -1 

गांव के शक्ति चौरा ला सुमिरव ,संग मा गौरी गौरा वो 

शिव बिन शक्ति हावे अधूरा,हूम देवव मै साहड़ा वो 

दुर्गा महरानी वो ----------- दुर्गा महरानी वो

तोर डीही के दीया बरइया मन गोहारे तोला वो -2 

अंतरा -2 

ठाकुर देव ला सुमिरव सुघ्घर ,बीजा भात के देवईया वो 

बगरन पाठ गोहारव मन मा ,अनहोनी ले बचइया वो 

भोला भंडारी वो ----------- भोला भंडारी वो

तोर डीही के दीया बरइया मन गोहारे तोला वो -2 

अंतरा -3  

भैंसा सुर ला सुमिरव सुघ्घर ,मान पान के पवईया वो 

दाई दाई छाहित रहिबे ,परत हावव मै पइया वो 

येहो सुख के देवईया वो ----------- येहो सुख के देवईया वो

तोर डीही के दीया बरइया मन गोहारे तोला वो -2 

अंतरा -4   

दिया बरइया सेउक मन के ,लागेव पारे भारे वो 

कांति मौनी लाला चरण में ,करत हावय जय कारे वो 

येहो पवरी दुवारी वो ----------- येहो पवरी दुवारी वो

तोर डीही के दीया बरइया मन गोहारे तोला वो -2 

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गीत परिचय

तोर डीही के दीया बरइया एक सुंदर छत्तीसगढ़ी भक्ति जसगीत हे, जेनमा शीतला दाई, गौरा-गौरी, ठाकुर देव अऊ गांव के देवी-देवता मन के महिमा के गान करे गे हे। ए गीत ला मधुर स्वर मं कांतिकार्तिक यादव गाये हवंय, गीत के रचना मौनी लाला ह करे हवंय अऊ संगीत ओपी देवांगन के हे।

ए जसगीत छत्तीसगढ़ के गांव-गांव मं मनाय जाथे शीतला माता पूजा अऊ जुड़वास परब के आस्था ला दर्शाथे। गीत मं दीया बरइया (दीप जलाने वाले सेवक) मन शीतला दाई के गोहार लगाथें अऊ अपन गांव, परिवार अऊ समाज के सुख-समृद्धि बर आशीर्वाद मांगथे

मुखड़ा के अर्थ

गीत के मुखड़ा मं भक्त मन शीतला दाई ला विनती करत हवंय। ओमन कहिथें कि तोर डीही (धाम) मं दीया जलाय वाले सेवक मन तोला पुकारत हें। दाई ह कुल के रक्षा करे वाली, सत्य अऊ धर्म के मार्ग दिखाय वाली माता आय।

पहला अंतरा के अर्थ

ए अंतरा मं गांव के शक्ति चौरा, गौरा-गौरी अऊ माता दुर्गा के स्मरण करे गे हे। गीत बताथे कि शिव अऊ शक्ति एक-दूसर बिना अधूरा हवंय। भक्त मन माता दुर्गा ले साहस अऊ संरक्षण के कामना करथें।

दूसरा अंतरा के अर्थ

एमा ठाकुर देव अऊ भोला भंडारी (भगवान शिव) के महिमा गाये गे हे। गांव के लोग मन अपन खेती-किसानी, बीजा-भात अऊ जीवन के सुख-शांति बर देवता मन ले आशीर्वाद मांगथें।

तीसरा अंतरा के अर्थ

ए अंतरा मं भैंसासुर देव के स्मरण करे गे हे, जेनला गांव के लोक परंपरा मं मान-सम्मान अऊ सुख-समृद्धि के प्रतीक माने जाथे। भक्त ह दाई के चरण मं बने रहिके सेवा करे के संकल्प लेथे।

चौथा अंतरा के अर्थ

ए अंतरा मं दीया बरइया सेवक मन के भक्ति अऊ समर्पण के वर्णन हे। गीतकार मौनी लाला अऊ गायक कांतिकार्तिक यादव माता के चरण मं जयकारा लगावत अपन श्रद्धा प्रकट करथें।

शीतला दाई के महिमा – एक प्रेरणादायक कहानी

बहुत साल पहिली के बात आय। छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव मं लोग मन खेती-किसानी करके अपन जीवन चलावत रहिन। गांव मं एक पुराना शीतला दाई के डीही रहिस, जिहां हर साल जुड़वास परब मं दीया जलाय जावत रहिस।

गांव के लोग मन मानत रहिन कि शीतला दाई गांव के रक्षा करथें। जेन घलो सच्चा मन ले दाई के पूजा करथे, ओकर घर मं सुख-शांति बने रहिथे।

ओही गांव मं एक गरीब किसान रहिस। किसान के परिवार मं बहुत तकलीफ रहिस। खेती मं फसल कम होवत रहिस अऊ घर के हालत दिन-ब-दिन खराब होवत रहिस। फेर किसान ह कभी अपन आस्था ला कमजोर नइ करे।

जुड़वास परब के दिन किसान ह अपन परिवार संग शीतला दाई के डीही पहुंचिस। ओहा घी के एक छोटकुन दीया जलाइस अऊ दाई ले प्रार्थना करिस—

"हे दाई, मोर घर मं धन-दौलत नइ हे, फेर मोर मन मं तोर बर सच्ची भक्ति हे। मोर परिवार के रक्षा करिहा।"

कहिथें कि सच्चा मन के प्रार्थना भगवान जरूर सुनथें। धीरे-धीरे किसान के जीवन मं बदलाव आना शुरू होइस। अगला बरस ओकर खेत मं भरपूर फसल होइस। परिवार मं खुशहाली आइस अऊ गांव वाले मन घलो दाई के महिमा के गुणगान करे लगिन।

एक दिन गांव मं बीमारी फैलना शुरू होइस। लोग मन घबराय लगिन। तब गांव के बुजुर्ग मन शीतला दाई के विशेष पूजा रखिन। पूरा गांव एकजुट होके माता के आराधना करिस। मान्यता हे कि दाई के कृपा ले गांव जल्दी सुरक्षित होगे अऊ बीमारी दूर होगे।

ओ दिन ले गांव के हर परिवार जुड़वास अऊ शीतला पूजा मं दीया जरूर जलाथे। गांव के लोग मन मानथें कि दीया के प्रकाश केवल अंधियार ला दूर नइ करय, बल्कि मनखे के जीवन मं आशा, विश्वास अऊ भक्ति के उजाला घलो भर देथे।

आज घलो जब "तोर डीही के दीया बरइया" जसगीत गूंजथे, तब गांव के लोग मन अपन पुरखा के आस्था, संस्कृति अऊ परंपरा ला याद करथें। ए गीत केवल एक भक्ति गीत नइ, बल्कि छत्तीसगढ़ के लोक संस्कृति अऊ श्रद्धा के जीवंत प्रतीक आय।

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