Aama Tari Amli Bagicha Tari Jhiriya || Chanda Yadav || आमा तरी अमली /चंदा यादव/पचरा जस लिरिक्स

✦✦ आमा तरी अमली /चंदा यादव/पचरा जस  ✦✦

════════ᛝ════════

गीत- आमा तरी अमली

स्वर - चंदा यादव

म्यूज़िक लेबल - पारंपरिक जस 

म्यूज़िक कंपनी - sanvi sangit sargam

वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 

════════ᛝ════════

मुखड़ा 

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां -2

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

अंतरा -1

झिरिया नहावत माई के नथली गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां

हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां 

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

अंतरा -2

झिरिया नहावत माई के खिनवा गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां

हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां 

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

अंतरा -3

झिरिया नहावत माई के सूतिया गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां

हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां 

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

अंतरा -4

झिरिया नहावत माई के ककनी गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां

हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां 

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

अंतरा -5

झिरिया नहावत माई के करधन गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां

हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां 

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

अंतरा -6

झिरिया नहावत माई के पैंजन गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां

हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां 

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

अंतरा -7

झिरिया नहावत माई के बिछिया गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां

हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां 

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

════════ᛝ════════

CG Jas Lyrics के अउ लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी जसगीत

➤ सुमरी सुमर के हां मैं तोर जस गांवव

➤ सरवर नहाए बर

➤ शीतला भवानी मईया मोर जिनगी सुग्घर लागे

➤ भवानी तोरे आरती

➤ कारी मा बीरबिट काली-दुकालू

➤ मोला देरी होंगे मईया तोरे सेवा मा

➤ मोर दुर्गा मईया

➤ माया के दरबार

➤ माटी के दाई दुर्गा 

गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी मं)

ये जसगीत मं मइया के पवित्र रूप अउ गांव के लोकजीवन के सुंदर चित्रण करे गे हे। गीत मं बताय गे हे कि बगीचा अउ झिरिया (छोटे जलस्रोत) के किनारे मइया स्नान करे बर जाथें। नहावत बखत मइया के गहना एक-एक करके गुम होवत जाथे—जइसे नथली, खिनवा, सूतिया, ककनी, पैंजन अउ बिछिया।

ये सिरिफ गहना गुम होय के बात नइये, बल्कि ये मइया के त्याग, सादगी अउ भक्त मन बर अपन ममता के प्रतीक आय। गीत सुनके लगथे कि मइया अपन श्रृंगार छोड़के अपन भक्त मन के दुख दूर करे बर निकले हवंय।

गीत के विशेषता:

1. लोक संस्कृति के झलक

ये गीत मं छत्तीसगढ़ के गांव, बगीचा, झिरिया अउ लोक जीवन के सुंदर वर्णन मिलथे।

2. माता भक्ति ले भरपूर

पूरा गीत मं मइया प्रति प्रेम, श्रद्धा अउ समर्पण झलकथे।

3. पारंपरिक धुन

ये जसगीत नवरात्रि, जस-जागर अउ माता सेवा मं गाये जाथे।

4. श्रृंगार अउ ममता के मेल

गीत मं मइया के गहना के वर्णन करके भक्त मन के भावनात्मक जुड़ाव ला मजबूत करे गे हे।

गीत के कथा Story in Chhattisgarhi

बहुत पुरखा जमाना के बात आय। एक छोटे गांव मं घलो एक सुंदर बगीचा रहिस, जिहां आम अउ इमली के पेड़ लहलहावत रहिन। ओही बगीचा के बीच मं एक निर्मल झिरिया रहिस, जिहां गांव वाले पानी भरे अउ पूजा करे जावत रहिन।

एक दिन गांव के कुछ महिला मन बिहान-बिहान पूजा बर निकरिन। ओ मन देखिन कि झिरिया के किनारे एक दिव्य प्रकाश चमकत हे। धीरे-धीरे सब्बो झन उहां पहुंचिन त देखिन कि माता शीतला स्वयं झिरिया मं स्नान करत हवंय।

माता के रूप अतका मनमोहक रहिस कि सब्बो भक्त मंत्रमुग्ध होगे। फेर स्नान करत-करत माता के नथली पानी मं गिर गे। फेर खिनवा, सूतिया, ककनी, पैंजन अउ बिछिया घलो एक-एक करके झिरिया मं समावत गे।

भक्त मन घबरा गिन, फेर माता मुस्कराके कहिन—

“गहना के मोल नइये, भक्त के प्रेम सबसे बड़े धन आय।”

ए बात सुनके गांव वाले समझ गिन कि सच्ची भक्ति बाहरी श्रृंगार मं नइ, बल्कि मन के श्रद्धा मं होथे। ओ दिन ले गांव मं हर साल ये जसगीत गाके माता के महिमा गाये जाथे।

मइया के ए पावन जसगीत अगर आप मन ला पसंद आय होही, त अपन परिवार अउ संगवारी मन संग जरूर साझा करव। 

जय माता दी।

आगे आगे आषाढ़ के मास – परब जुड़वास गीत |चंदा यादव | छत्तीसगढ़ी जस गीत |

🎶 आगे आगे आषाढ़ के मास – परब जुड़वास गीत |चंदा यादव 🎶


_____๑♡⁠๑______

गीत -परब जुड़वास के लागे 

गायिका -चंदा यादव 

जय माँ लक्ष्मी बालिका जस सेवा मंडली जोरातराई (राजनाँदगाँव )

यूट्यूब -मास्टर के वी 

वेबसाइट -www . cgjaslyrics .com 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

 _____๑♡⁠๑______

मुखड़ा 

आगे आगे आषाढ़ के मास परब जुड़वास के लागे 

उड़ान - परब जुड़वास के लागे हो -2 

आगे आगे,आगे आगे ,आगे आगे 

आषाढ़ के मास 

परब जुड़वास के लागे 

परब जुड़वास के लागे 

आगे आगे आषाढ़ के मास परब जुड़वास के लागे 

अंतरा -1 

महीना आषाढ़ हे पबरित पावन रितवा लगे बरसात गा 

भय परब जुड़वास सुहावन मंदिर सेवा गाथे गा 

माता देवाला बड़े मनभावन सोलह बहनिया साथ गा 

शीतला दाई के चरण मनावत लगुरे खड़े दिनरात गा

उड़ान - परब जुड़वास के लागे हो -2 

राखे भगति में ,राखे भगति में ,राखे भगति में

कतरो उपवास 

परब जुड़वास के लागे 

आगे आगे आषाढ़ के मास परब जुड़वास के लागे 

अंतरा -2 

बछर भर दिन ऋतु गनाये चर चर मास बटाये गा  

बर्षा सिराये शरद ऋतु आये गर्मी तन ला तपाये गा  

चेत जरत धरती अगियाये टिपत भोभरा जनाये गा 

तेज सुरुज के सहे नई जाये जीव जन सब अकुलाये गा 

उड़ान - परब जुड़वास के लागे हो -2 

भागे कइसे ,भागे कइसे ,भागे कइसे

तन के पियास 

परब जुड़वास के लागे 

आगे आगे आषाढ़ के मास परब जुड़वास के लागे 

अंतरा -3 

मासो आषाढ़ म घर घर बादर गरजे जहुअर 

बिजली चमके चरचर चरचर उमरखुमड़ के बज्जर गा 

बरसे बदरा झरझर झरझर अमृत वर्षा बरोबर गा  

शीतलंग पाये धरती कोरा हर लागे तनमन हरियर गा 

उड़ान - परब जुड़वास के लागे हो -2 

उड़े चिरगुन,उड़े चिरगुन,उड़े चिरगुन 

चहके आगास

परब जुड़वास के लागे 

आगे आगे आषाढ़ के मास परब जुड़वास के लागे 

अंतरा -4 

बनके सताक्षी शीतला भवानी पानी ल बरसाये गा  

छाहित होये बरखा रानी सब के जिव जुड़ाये गा 

करे किसनहा खेती किसानी नागर हरिया रेगाये गा 

छोटे बड़े का सगरो परानी जागर तोर कमाये गा 

उड़ान - परब जुड़वास के लागे हो -2 

दाई रचना ,दाई रचना ,दाई रचना 

रचे हे चउमास 

परब जुड़वास के लागे 

आगे आगे आषाढ़ के मास परब जुड़वास के लागे 

अंतरा -5 

बरूहा भगत हर गुण ल गाये माता के माता के सेवा गात गा  

अगर कपूर हुम् धुप गुगवाये देहरी म दीया जलाये गा 

सुमर सुमर के मुड़ी नवाये नरियर भेंट चघाये गा 

 मन के मनौती सबे मनाये दरस करे सुख पाये गा 

उड़ान - परब जुड़वास के लागे हो -2 

भागे सुमिरत,भागे सुमिरत ,भागे सुमिरत

सबके पियास 

परब जुड़वास के लागे 

आगे आगे आषाढ़ के मास परब जुड़वास के लागे 

अंतरा -6 

शीतला सबला शीतल करईया दया मया बरसाये गा  

अपन भगत के पीड़ा हरइया माया के अचरा लामाये गा 

बाधा विधन दुःख टरबे तरइया सबला सुख देवाय गा  

रुखराई के नाश करईया बरवा गोहार लगाये गा    

उड़ान - परब जुड़वास के लागे हो -2 

करे कतरो ,करे कतरो ,करे कतरो 

बिरहा के नाश 

परब जुड़वास के लागे 

आगे आगे आषाढ़ के मास परब जुड़वास के लागे 

अंतरा -7 

सबला शीतलंग माता देवईया का जुड़वास मानवव गा 

श्रद्वा भाग्य के टिल के मईया हरदी तेल चघावव गा 

बाधा विधन दुःख टरबे तरइया सबला सुख देवाय गा  

जय ठकुराईन बूढ़ी माई जयजय जय गोहरावव गा 

उड़ान - परब जुड़वास के लागे हो -2 

तनमन म तनमन म तनमन म 

भरे विश्वाश 

परब जुड़वास के लागे 

आगे आगे आषाढ़ के मास परब जुड़वास के लागे 

अंतरा -8 

नीम डारे ले चवर डोलाये लगुरे अलख जगाये गा 

जुरमिल सेउक सेवा गाये मृंदग ढोल बजाये गा 

सब माता रहिबे सहाये नर नारी गोहराये गा 

दाई दयाली फुलवा चघाये गुरु चरण शीतलाये गा 

उड़ान - परब जुड़वास के लागे हो -2 

जय लष्मी जय लष्मी जय लष्मी 

करे हव उपास

परब जुड़वास के लागे 

आगे आगे आषाढ़ के मास परब जुड़वास के लागे 

 ═══════🔱 ═══════



 अर्थ (Arth)

ए गीत मा जुड़वास पर्व के महत्व के बखान करे गे हे हावे।  आषाढ़ मास बरसात के सुरुआत के समय आय, जेमा धरती हर हरियर हो जाथे, किसान मनखे ला खेती बर नवा उमंग मिलथे। शीतला माता के आराधना करके गा गे गीत मा भक्त मन अपन श्रद्धा, विश्वास अऊ उपवास ला समर्पित करथें।


 महत्व (Mahatva)

1.      जुड़वास पर्व छत्तीसगढ़ मा खास महत्व रखथे।

2.      ए दिन मनखे उपवास रहिके माता शीतला ला मनाथे।

3.      आषाढ़ मास के बरसात हर धरती ला शीतलता देथे।

4.      गीत मा भगवान अऊ देवी शीतला के किरपा के आह्वान करे गे हे।

5.      जस मण्डली मन समाज मा भक्ति, सेवा अऊ एकता के संदेश देथें।


 उद्देश्य (Udeshya)

1.      शीतला माता के भक्ति गीत ला गाके जनमानस के मन मा श्रद्धा जगाना।

2.      जुड़वास पर्व के सांस्कृतिक अऊ धार्मिक महत्व ला बताना।

3.      आषाढ़ मास मा देवी के पूजा-पाठ के परंपरा ला आगे बढ़ाना।


गायक परिचय (Gayak Parichay)

ये गीत ल चंदा यादव हा  गाय हावे चंदा यादव जस मंडली के गायिका हावे। येकर मंडली के नाम जय माँ लक्ष्मी बालिका जस सेवा मंडली जोरातराई (राजनाँदगाँव ) हावे। चंदा यादव हा जोरातराई राजनांदगाव के रहईया आय। येकर मधुर आवाज में जस श्रोता मन झूम नाचथे। चांण्डा यादव ह बहुत ही प्रतिभा साली  गायिका हावे 

जस मंडली परिचय 

 जय माँ लक्ष्मी बालिका जस सेवा मंडली जोरातराई (राजनाँदगाँव )

जस मंडली छत्तीसगढ़ के भक्ति संस्कृति के आधार स्तंभ हवंय। ए मंडली मन गाँव-गाँव, शहर-शहर मा जा के माता जस गाइन करके लोगन ला भक्ति रस मा जोड़थें। जस मंडली के गायन शैली मा ढोलक, मृदंग, झांझ अऊ घुंघरू के संगत रहिथे।

! शीतला जुड़वास से सम्बंधित गीत !

  1. शीतला शीतला कहिके 
  2. तोर जुड़वास परब हे पावन 
  3. शीतलंग शीतला 
  4. अजब सजे हे तोर देवाला 
  5. मोर गांव के शीतला दाई
  6.  कनकन माँ बस ो दाई शीतला 
  7. शीतल शीतला