कंकड़ कंकड़ मा शिवशंकर | कांतिकार्तिक यादव | छत्तीसगढ़ी जस गीत

कंकड़ कंकड़ मा शिवशंकर — शिवशक्ति के हे वास

कंकड़ कंकड़ मा शिवशंकर छत्तीसगढ़ी जस गीत शिवशक्ति भक्ति गीत

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गीत -कंकड़ कंकड़ मा शिव 
गायक -कांतिकार्तिक यादव 
गीतकार -कांतिकार्तिक यादव 
संगीतकार -ओ.पी देवांगन 
यूट्यूब -ओ.पी देवांगन 
वेबसाइट ऑनर -के  के पंचारे 
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मुखड़ा 

कंकड़ कंकड़ मा शिवशंकर मन मा रख बिसवास

आवत जावत सास मा जिव शिव तोर हिरदय के पास 

शिवशक्ति के हे वास  तोर हिरदय के पास 

शिवशक्ति के हे वास

अंतरा -1 

अगम अथाह खोजे हे शिव के मनखे समझ नी पावे 

रूप स्वरुप मा खोजे शिवला माया मा बंध जावय 

माया के पिंजरा जब टूटय पंछी फुर ले उड़ावे 

बिन शक्ति के ये माटी तन सहूये शिव मा समावे 

ताल -देखले अंतर मन मा थोड़कुन -2

देखले अंतर मन मा थोड़कुन,जबतक सास हे आवास

आवत जावत सास मा जिव शिव तोर हिरदय के पास 

शिवशक्ति के हे वास  तोर हिरदय के पास 

शिवशक्ति के हे वास  

अंतरा -2 

जड़ मा शिव हे चेतन मा शिव शिव जगत मा सार 

जीव शिव हे तन गढ़ना मा शक्ति हे आधार 

बिन शक्ति के करम जगत मा तन हे शव के समान 

शक्ति शिव के मिलन ये जीव बाती अउ तेल तै जान 

ताल -कांतिकार्तिक साँझ होवत हे -2

जाग जा तैहा साँझ होवत हे छिनछिन करेव उपवास 

आवत जावत सास मा जिव शिव तोर हिरदय के पास 

शिवशक्ति के हे वास  तोर हिरदय के पास 

शिवशक्ति के हे वास  

गीत के अर्थ

ये गीत मनखे ला समझाथे कि भगवान शिव सिरिफ मंदिर के मूर्ति मं नइ, बल्कि संसार के हर कण-कण मं बिराजे हवय। मनखे अपन मन के भीतर झांक के देखही त ओकर हिरदय मं घलो शिवशक्ति के वास मिलही।

“आवत-जावत सास मा जिव शिव तोर हिरदय के पास” के मतलब आय कि मनखे के हर सांस भगवान के नजदीकी के संकेत आय। जब तक देह मं सांस चलत हे, तब तक मनखे ला अपन भीतर के शिव तत्व ला पहचानना चाही।

गीत मं माया ला पिंजरा के रूपक मं बताय गे हवय। जब मनखे माया-मोह के बंधन ले ऊपर उठथे, त ओकर आत्मा पंछी जइसने आजाद हो जाथे।

गीत  के विशेषता अउ महत्व

  1. ये गीत शिव अउ शक्ति के एकता के संदेश देथे।
  2. मनखे ला बाहरी आडंबर छोड़के अंतरमन मं भगवान ला खोजे के प्रेरणा देथे।
  3. सांस अउ शिव के संबंध ला बहुत सुंदर रूपक मं प्रस्तुत करथे।
  4. माया-मोह के बंधन ले मुक्त होय के सीख देथे।
  5. जीव, शिव अउ शक्ति के आध्यात्मिक संबंध ला सरल भाषा मं समझाथे।
  6. “कंकड़-कंकड़ मा शिवशंकर” के भाव शिव के सर्वव्यापक स्वरूप ला दर्शाथे।
  7. छत्तीसगढ़ी बोली के सहज शब्द गीत ला लोकभक्ति के रंग देथे।
  8. जस गायन, भजन अउ धार्मिक कार्यक्रम मं गाये बर उपयुक्त भाव रखथे।

गायक अउ गीतकार कांतिका‍र्तिक यादव के परिचय

कांतिका‍र्तिक यादव छत्तीसगढ़ी भक्ति संगीत के क्षेत्र मं अपन गायकी अउ गीत लेखन के माध्यम ले जुड़े कलाकार हवंय। “कंकड़ कंकड़ मा शिवशंकर” जस गीत मं वो गायक अउ गीतकार के रूप मं अपन योगदान दे हवंय। गीत मं भगवान शिव के सर्वव्यापक स्वरूप, शिव-शक्ति के महिमा अउ मनखे के अंतरमन मं बसे शिव तत्व के भाव ला छत्तीसगढ़ी बोली मं सरल अउ भक्तिमय ढंग ले प्रस्तुत करे गे हवय।

कांतिका‍र्तिक यादव के गीत लेखन मं भक्ति, आध्यात्मिक विचार अउ लोकभाषा के सुंदर मेल दिखाई देथे। “आवत-जावत सास मा जिव शिव तोर हिरदय के पास” जइसन भावपूर्ण पंक्ति मनखे ला अपन भीतर भगवान के उपस्थिति महसूस करे के संदेश देथे।

गायकी मं भक्ति भावना अउ गीत के आध्यात्मिक भाव ला प्रमुखता देय गे हवय। छत्तीसगढ़ी जस गीत के माध्यम ले शिवभक्ति के संदेश ला श्रोता मन तक पहुंचाय के प्रयास उनके रचना अउ गायन के खास विशेषता आय।

गीत के कथा — छत्तीसगढ़ी में 

बहुत पहिली के बात आय। एक गांव मं एक मनखे रहय, जेन भगवान शिव के बड़े भक्त रहय। वो रोज मंदिर जावत रहय, पूजा-पाठ करत रहय अउ घंटों भगवान के सामने बइठ के शिव के दर्शन मांगत रहय। फेर ओकर मन मं एक सवाल हमेशा उठत रहय—“भगवान शिव आखिर कहां रहिथें?”

एक दिन वो गांव के बाहर एक साधु ला देखिस। मनखे साधु ले पूछिस, “महाराज, मैं रोज शिव के पूजा करथों, फेर मोला शिव के सच्चा दर्शन नइ होवत हे। बतावव, शिव कहां मिलही?”

साधु मुस्कुराइस अउ कहिस, “तैं शिव ला बाहर खोजत हस, एक बेर अपन भीतर खोजके देख।”

मनखे ला साधु के बात समझ मं नइ आइस। साधु ओकर हाथ मं एक कंकड़ रखके कहिस, “ये कंकड़ ला देख। का तैं सोचथस कि इहां शिव नइ हो सकय?”

मनखे कहिस, “महाराज, ये तो साधारण कंकड़ आय।”

साधु कहिस, “जेन तत्व ले ये संसार बने हवय, वो तत्व शिव के बिना कइसे हो सकही? शिव ला केवल रूप मं मत खोज। शिव ला हर कण मं महसूस कर।”

ओकर बाद साधु कहिस, “अब अपन सांस ला देख। सांस भीतर जाथे अउ बाहर आथे। ये सांस चलत हे, मतलब तोर भीतर जीवन हवय। ये जीवन शक्ति बिना देह सिरिफ माटी के पुतला आय।”

मनखे धीरे-धीरे आंखी बंद करिस अउ अपन सांस ला महसूस करिस। ओकर मन शांत होय लगिस। वो पहली बार समझिस कि भगवान ला केवल मंदिर मं खोजे के जरूरत नइ हे। शिव तो ओकर अपन हिरदय के पास हवय।

साधु फेर कहिस, “माया के पिंजरा मनखे ला बाहरी दुनिया मं बांध के रखथे। धन, मान, मोह अउ अहंकार के पीछे भागत-भागत मनखे अपन भीतर के शिव ला भुला देथे। जब माया के पिंजरा टूटथे, तब आत्मा आजाद पंछी जइसने उड़थे।”

मनखे के आंखी मं आंसू आ गिस। वो समझ गिस कि शिव अउ शक्ति अलग नइ हवंय। जीवन मं चेतना शिव आय अउ ओकर चलाय वाली शक्ति शक्ति आय। जइसे बाती अउ तेल बिना दीपक नइ जल सकय, वइसने शिव अउ शक्ति के मिलन बिना जीवन के अर्थ अधूरा आय।

ओ दिन ले वो मनखे मंदिर जाना नइ छोड़िस, फेर मंदिर के संग अपन अंतरमन मं घलो शिव ला खोजे लगिस। अब वो हर कंकड़ मं शिव, हर जीव मं शिव अउ अपन हर सांस मं शिव के अनुभव करे लगिस।

यहीच गीत के संदेश आय—आवत-जावत हर सांस मं शिव तोर हिरदय के पास हवय।

YouTube चैनल — OP Dewangan के बारे मं

OP Dewangan YouTube चैनल छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत अउ भक्ति गीत मन ला दर्शक मन तक पहुंचाय के माध्यम बने हवय। “कंकड़ कंकड़ मा शिवशंकर” जइसन शिवभक्ति जस गीत के वीडियो के माध्यम ले छत्तीसगढ़ी भक्ति संगीत के भाव, भक्ति अउ लोकसंस्कृति ला बढ़ावा देय के प्रयास दिखथे।

चैनल मं प्रस्तुत गीत मन छत्तीसगढ़ी बोली, भक्ति भावना अउ धार्मिक विषय-वस्तु ले जुड़े रहिथें। ये चैनल छत्तीसगढ़ी जस गीत पसंद करे वाले श्रोता मन बर उपयोगी मंच बने सकथे।

CG Jas Lyrics के बारे मं

CG Jas Lyrics छत्तीसगढ़ी जस गीत, पचरा जस, देवी-देवता के भक्ति गीत, आरती, भजन अउ छत्तीसगढ़ के लोकभक्ति परंपरा ले जुड़े गीत के बोल ला एके जगह मं पहुंचाय के प्रयास आय। इहाँ पाठक मन ला गीत के बोल के संग गीत के जानकारी, अर्थ, महत्व अउ छत्तीसगढ़ी संस्कृति ले जुड़े जानकारी घलो मिलथे।

वेबसाइट के उद्देश्य छत्तीसगढ़ी बोली, लोकभक्ति अउ जस गीत के परंपरा ला डिजिटल माध्यम मं सुरक्षित रखे अउ नवा पीढ़ी तक पहुंचाय आय।

वेबसाइट ऑनर: के के पंचारे
वेबसाइट: CG Jas Lyrics

माँ शेरावाली के मनमोहक जस गीत 

  • गुरु बिना ये जग विरथा हे चेत लगाहु — गुरु महिमा अउ आध्यात्मिक ज्ञान बर।
  • लहराए जंवारा  — माया, देह अउ जीवन के नश्वरता के भाव बर।
  • ये हो हिंगलाज भवानी  — देवी भक्ति के गीत बर।
  • हे मईया दुर्गा महरानी — शक्ति उपासना अउ देवी भक्ति बर।
  • तोर डीही के दिया बरइया  — भवानी माता के भक्ति गीत बर।
  • घनघोर मचाये रन में कंकालिन हां  — पचरा जस गीत के परंपरा बर।
  • मोर आँखि के पुतरी दाई — माई भक्ति के भाव बर।
  • मोर चले माँ दुर्गा — माता के भक्ति अउ यात्रा भाव बर।
  • तोर दया ले माँ अम्बे — माता के कृपा अउ आशीर्वाद बर।
  • पैजनिया बाजे — छत्तीसगढ़ी जस गीत अउ लोकभक्ति के अन्य भाव बर।
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    बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां | कांतिकार्तिक यादव/छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स

    🌼 बमलाई ल सुमिरव/kantikartik yadav 🌼

    बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां | कांतिकार्तिक यादव.jpg

    गीत - बम्लाई ला सुमिरव 

    गीतकार -राजा कमल नारायण सिंह

    म्यूजिक कंपनी - ओ पी  देवांगन 

    वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे 

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    मुखड़ा 

     डोंगरगढ़ के हो बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां -2 

    बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां -2 

    अंतरा -1 

    जब केसव रहे तोर ईढ़ही अउ सीढ़ही ,केसव रहे पुजारी -2 

    केसव रहे तोर जोत जलत हे  जगमग जगमग हां-

     जगमग जगमग हां -2 

    बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां -2 

    अंतरा -2 

    जब 9  सौ 1  तोर ईढ़ही अउ सीढ़ही ,लाखो रहे पुजारी -2 

    8 सौ  60  तोर जोत जलत हे, जगमग जगमग हां

    जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां -2 

    बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां -2 

    अंतरा -3  

    जब ऋषि मुनी मन ध्यान लगाये तोर चरण में आके -2 

    लाल लागुरवा जोत जलाये जगमग जगमग हां

    जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां -2 

    बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां -2

    अंतरा -4   

    जब ब्रम्हा वेद धरे तोर द्वारे शंकर ध्यान लगावे  -2 

    कमल पति तोर आरती उतारे , जगमग जगमग हां

    जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां -2 

    बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां -2  

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    बम्लाई ला सुमिरव – गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)

    "बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां" एक सुंदर भक्ति जस गीत आय, जेमां डोंगरगढ़ वाली बम्लाई दाई के महिमा गाये गे हे। गीत म बताय गे हे कि माता के दरबार म हजारों-लाखों भक्त मन दर्शन बर आवत हें अउ माता के जोत हमेशा जगमगावत रहिथे।

    पहिली अंतरा म माता के पुराना समय के सेवा अउ पुजारी के बात कहे गे हे। दूसर अंतरा म माता के मंदिर म लगातार जलत पवित्र जोत अउ बढ़त भक्त मन के संख्या के वर्णन हे। तिसर अंतरा म ऋषि-मुनि मन घलो माता के चरण म ध्यान लगाथें, जेन ले माता के आध्यात्मिक शक्ति के महिमा पता चलथे। आखरी अंतरा म ब्रह्मा, शंकर अउ विष्णु जइसने देवता घलो माता के आरती उतारथें, जेन ले बम्लाई दाई के सर्वोच्च शक्ति के सम्मान झलकथे।

    गीत के महत्व

    डोंगरगढ़ वाली बम्लाई दाई के महिमा ला जन-जन तक पहुंचाथे।

    माता के जोत, भक्ति अउ श्रद्धा के महत्व बताथे।

    भक्त मन ला माता के सुमिरन करे बर प्रेरित करथे।

    नवरात्रि, जस गीत, माता सेवा अउ धार्मिक कार्यक्रम म गाये जाथे।

    छत्तीसगढ़ के लोकसंस्कृति अउ देवी भक्ति के सुंदर उदाहरण आय।

    बम्लाई दाई के कथा (छत्तीसगढ़ी में)

    डोंगरगढ़ के पवित्र धरती म बम्लाई दाई के असीम कृपा माने जाथे। मान्यता हे कि जऊन भक्त सच्चा मन ले माता के नाम जपथे, ओकर दुख-दरद धीरे-धीरे दूर हो जाथे। माता अपन भक्त मन ऊपर मया बरसाथे अउ संकट के बेरा रच्छा करथे।

    कहिथें कि पहिली माता के मंदिर म गिने-चुने सेवक रहिन, फेर समय के संग माता के चमत्कार दूर-दूर तक फैलिस। आज हजारों-लाखों श्रद्धालु डोंगरगढ़ पहुंचके माता के दर्शन करथें। मंदिर म जलत अखंड जोत भक्त मन बर आशा, विश्वास अउ उजाला के प्रतीक माने जाथे।

    गीत म ऋषि-मुनि, ब्रह्मा, विष्णु अउ महादेव के माता के चरण म नमन करे के वर्णन ये बात ला बताथे कि माता के शक्ति सबले महान मानी जाथे। जऊन मन श्रद्धा ले माता के आराधना करथें, ओमन ला साहस, सुख, शांति अउ नई ऊर्जा मिलथे।

    ए गीत हमन ला सिखाथे कि संकट के बेरा घबराय के बजाय माता बम्लाई के सुमिरन करना चाही। सच्ची भक्ति, सेवा अउ विश्वास ले जीवन म उजाला आथे, ठीक ओइसने जइसने माता के मंदिर के अखंड जोत हमेशा जगमगावत रहिथ

    ये घलो पढ़व 

    ➡️ तोर डीही के दिया बरइया – छत्तीसगढ़ी जस गीत

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    ➡️ हो मईया चंडिका – जस गीत लिरिक्स

    ➡️ दाई तोर अचरा मा फुले फुले गजरा मा

    🌼 माता रानी आप सब की मनोकामना पूर्ण करें 🌼

    तोर डीही के दीया बरइया | कांतिकार्तिक यादव | शीतला दाई CG Jas Geet Lyrics

    🌼 तोर डीही के दिया बरइया 🌼


    TOR DIHI KE DIYA - CG JAS Geet || Singer Kantikartik Yadav ||

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    गीत - तोर डीही के दीया बरइया

    गायक - कांतिकार्तिक यादव

    गीतकार - मौनी लाला 

    म्यूज़िक - ओपी देवांगन 

    वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे

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    मुखड़ा 

    तोर डीही के दीया बरइया मन गोहारे तोला वो -2 

    यहो हे कुलवंतिन हे सतवंतिन शीतला दाई वो

    तोर डीही के दीया बरइया मन गोहारे तोला वो -2 

    अंतरा -1 

    गांव के शक्ति चौरा ला सुमिरव ,संग मा गौरी गौरा वो 

    शिव बिन शक्ति हावे अधूरा,हूम देवव मै साहड़ा वो 

    दुर्गा महरानी वो ----------- दुर्गा महरानी वो

    तोर डीही के दीया बरइया मन गोहारे तोला वो -2 

    अंतरा -2 

    ठाकुर देव ला सुमिरव सुघ्घर ,बीजा भात के देवईया वो 

    बगरन पाठ गोहारव मन मा ,अनहोनी ले बचइया वो 

    भोला भंडारी वो ----------- भोला भंडारी वो

    तोर डीही के दीया बरइया मन गोहारे तोला वो -2 

    अंतरा -3  

    भैंसा सुर ला सुमिरव सुघ्घर ,मान पान के पवईया वो 

    दाई दाई छाहित रहिबे ,परत हावव मै पइया वो 

    येहो सुख के देवईया वो ----------- येहो सुख के देवईया वो

    तोर डीही के दीया बरइया मन गोहारे तोला वो -2 

    अंतरा -4   

    दिया बरइया सेउक मन के ,लागेव पारे भारे वो 

    कांति मौनी लाला चरण में ,करत हावय जय कारे वो 

    येहो पवरी दुवारी वो ----------- येहो पवरी दुवारी वो

    तोर डीही के दीया बरइया मन गोहारे तोला वो -2 

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    गीत परिचय

    तोर डीही के दीया बरइया एक सुंदर छत्तीसगढ़ी भक्ति जसगीत हे, जेनमा शीतला दाई, गौरा-गौरी, ठाकुर देव अऊ गांव के देवी-देवता मन के महिमा के गान करे गे हे। ए गीत ला मधुर स्वर मं कांतिकार्तिक यादव गाये हवंय, गीत के रचना मौनी लाला ह करे हवंय अऊ संगीत ओपी देवांगन के हे।

    ए जसगीत छत्तीसगढ़ के गांव-गांव मं मनाय जाथे शीतला माता पूजा अऊ जुड़वास परब के आस्था ला दर्शाथे। गीत मं दीया बरइया (दीप जलाने वाले सेवक) मन शीतला दाई के गोहार लगाथें अऊ अपन गांव, परिवार अऊ समाज के सुख-समृद्धि बर आशीर्वाद मांगथे

    मुखड़ा के अर्थ

    गीत के मुखड़ा मं भक्त मन शीतला दाई ला विनती करत हवंय। ओमन कहिथें कि तोर डीही (धाम) मं दीया जलाय वाले सेवक मन तोला पुकारत हें। दाई ह कुल के रक्षा करे वाली, सत्य अऊ धर्म के मार्ग दिखाय वाली माता आय।

    पहला अंतरा के अर्थ

    ए अंतरा मं गांव के शक्ति चौरा, गौरा-गौरी अऊ माता दुर्गा के स्मरण करे गे हे। गीत बताथे कि शिव अऊ शक्ति एक-दूसर बिना अधूरा हवंय। भक्त मन माता दुर्गा ले साहस अऊ संरक्षण के कामना करथें।

    दूसरा अंतरा के अर्थ

    एमा ठाकुर देव अऊ भोला भंडारी (भगवान शिव) के महिमा गाये गे हे। गांव के लोग मन अपन खेती-किसानी, बीजा-भात अऊ जीवन के सुख-शांति बर देवता मन ले आशीर्वाद मांगथें।

    तीसरा अंतरा के अर्थ

    ए अंतरा मं भैंसासुर देव के स्मरण करे गे हे, जेनला गांव के लोक परंपरा मं मान-सम्मान अऊ सुख-समृद्धि के प्रतीक माने जाथे। भक्त ह दाई के चरण मं बने रहिके सेवा करे के संकल्प लेथे।

    चौथा अंतरा के अर्थ

    ए अंतरा मं दीया बरइया सेवक मन के भक्ति अऊ समर्पण के वर्णन हे। गीतकार मौनी लाला अऊ गायक कांतिकार्तिक यादव माता के चरण मं जयकारा लगावत अपन श्रद्धा प्रकट करथें।

    शीतला दाई के महिमा – एक प्रेरणादायक कहानी

    बहुत साल पहिली के बात आय। छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव मं लोग मन खेती-किसानी करके अपन जीवन चलावत रहिन। गांव मं एक पुराना शीतला दाई के डीही रहिस, जिहां हर साल जुड़वास परब मं दीया जलाय जावत रहिस।

    गांव के लोग मन मानत रहिन कि शीतला दाई गांव के रक्षा करथें। जेन घलो सच्चा मन ले दाई के पूजा करथे, ओकर घर मं सुख-शांति बने रहिथे।

    ओही गांव मं एक गरीब किसान रहिस। किसान के परिवार मं बहुत तकलीफ रहिस। खेती मं फसल कम होवत रहिस अऊ घर के हालत दिन-ब-दिन खराब होवत रहिस। फेर किसान ह कभी अपन आस्था ला कमजोर नइ करे।

    जुड़वास परब के दिन किसान ह अपन परिवार संग शीतला दाई के डीही पहुंचिस। ओहा घी के एक छोटकुन दीया जलाइस अऊ दाई ले प्रार्थना करिस—

    "हे दाई, मोर घर मं धन-दौलत नइ हे, फेर मोर मन मं तोर बर सच्ची भक्ति हे। मोर परिवार के रक्षा करिहा।"

    कहिथें कि सच्चा मन के प्रार्थना भगवान जरूर सुनथें। धीरे-धीरे किसान के जीवन मं बदलाव आना शुरू होइस। अगला बरस ओकर खेत मं भरपूर फसल होइस। परिवार मं खुशहाली आइस अऊ गांव वाले मन घलो दाई के महिमा के गुणगान करे लगिन।

    एक दिन गांव मं बीमारी फैलना शुरू होइस। लोग मन घबराय लगिन। तब गांव के बुजुर्ग मन शीतला दाई के विशेष पूजा रखिन। पूरा गांव एकजुट होके माता के आराधना करिस। मान्यता हे कि दाई के कृपा ले गांव जल्दी सुरक्षित होगे अऊ बीमारी दूर होगे।

    ओ दिन ले गांव के हर परिवार जुड़वास अऊ शीतला पूजा मं दीया जरूर जलाथे। गांव के लोग मन मानथें कि दीया के प्रकाश केवल अंधियार ला दूर नइ करय, बल्कि मनखे के जीवन मं आशा, विश्वास अऊ भक्ति के उजाला घलो भर देथे।

    आज घलो जब "तोर डीही के दीया बरइया" जसगीत गूंजथे, तब गांव के लोग मन अपन पुरखा के आस्था, संस्कृति अऊ परंपरा ला याद करथें। ए गीत केवल एक भक्ति गीत नइ, बल्कि छत्तीसगढ़ के लोक संस्कृति अऊ श्रद्धा के जीवंत प्रतीक आय।

    👉 आगे पढ़ें:

    माया के दरबार सेउक 

    दुर्गा दाई के मंदिर 

    गंगा असनादे 

    डोंगरी पहाड़ मा हाँ 

    सागर के पार 

    मोर दुर्गा मईया 

    माटी के दाई दुर्गा 

    कंकालिन मोरे माया 


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    सरवर नहाएं बर- कांतिकार्तिक यादव/देवी विसर्जन जस गीत

    ✦✦ सरवर नहाएं बर- कांतिकार्तिक यादव/देवी विसर्जन जस गीत✦✦


    गीत - 
    सरवर नहाएं बर 
    गायक - कांतिकार्तिक यादव
    गीतकार -  अजय उस्ताद जी
    संगीत - ओपी देवांगन 
    म्यूज़िक कंपनी - 
    वेबसाईट ऑनर -कैलाश पंचारे 
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    मुखड़ा 

    सरवर नहाएं बर जावय यहो जावय हो मईया 

     सरवर नहाएं बर जावय हो मां 

     यहो जावय हो मईया सरवर नहाएं बर जावय हो मां

    //1//

    इक्कीस ब्रह्माण्ड म इक्कीस बहनिया -2

    नेवता मा सबो सकलाये सकलाये हो मईया 

    सरवर नहाएं बर जावय हो मां 

    झूमरथे आघू पांछु छोटे बड़े देवता-2

    हरियर निंबुआ चढ़हाये, चढ़हाये हो मईया

     सरवर नहाएं बर जावय हो मां

    //2//

    मारत हावय बईगा हा कारी पीवरी चाउर -2

    दसों अंगूरी विनती सुनाये,सुनाये हो मईया 

    सरवर नहाएं बर जावय हो मां 

    गंगा अऊ जमुना सरसती हा उमंगे -2

    लहर लहर लहराए , लहराए हो मईया

     सरवर नहाएं बर जावय हो मां

    //3//

    आगू पाछु रेगत हावे माता के गण हा -2

    फहर फहर फहराए ,फहराए हो मईया 

    सरवर नहाएं बर जावय हो मां 

    चरण पखारय अजय मुड़मा चपाए-2

    अपन करम सहराए,सहराए हो मईया 

     सरवर नहाएं बर जावय हो मां

    //4//

    पांच भगत मईया तोरे जस गाए -2

    जय जय होवय तुम्हारे, तुम्हारे हो मईया

    सरवर नहाएं बर जावय हो मां 

    बालक बरुआ हो मईया कछु नई जाने -2

    केवल शरण तुम्हारे, तुम्हारे हो मईया

     सरवर नहाएं बर जावय हो मां

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    माता रानी के मनमोहक जस गीत

    1. सुवा नाचे 

    2.पैजनिया बाजे

    3.कलशा ऊपर दियाना 

    4. झुमरी तलैया 

    5.नीम डारा 

    6.हरियर मड़वा 

    7. धरम के बात 

    8. लहराए जवारा 

    गीत के महत्व (Importance)

    ✔️ ये गीत शीतला/दुर्गा माता के स्नान परंपरा से जुड़ाय हे

    ✔️ इसमें 21 शक्ति, प्रकृति अउ भक्त के एकता दिखे

    ✔️ गांव के परंपरा म ये गीत जुड़वास, जसगीत, पूजा समय गाये जाथे

    ✔️ ये गीत सिखाथे:

    भक्ति में शुद्धता

    प्रकृति के सम्मान

    माता के प्रति पूर्ण समर्पण

    👉 ये सिर्फ गीत नई, एक पूरा आध्यात्मिक अनुष्ठान हे

    “सरवर नहाएं बर जावय हो मईया” ये लाइन सिरिफ एक घटना नई, बल्कि आत्मा के शुद्धिकरण के प्रतीक हे।

    इहाँ सरोवर (सरवर) मतलब बाहरी पानी नई, बल्कि मन के भीतर के पवित्रता घलो होथे।

    जब माता “नहाय बर जाथे”, त असल म वो: 👉 दुनिया के नकारात्मकता, दुख अउ रोग ला धो के दूर करथे

    🔹 छुपा आध्यात्मिक संदेश

    ✔️ इक्कीस बहनिया (21 शक्तियां)

    → ये मानव जीवन के 21 प्रकार के दोष/ऊर्जा के संतुलन के प्रतीक हे

    ✔️ नींबू चढ़ाना

    → नेगेटिव ऊर्जा काटे के संकेत

    ✔️ बैंगा (मेंढक) के आवाज

    → प्रकृति बता देथे कि बदलाव आने वाला हे

    ✔️ गंगा-जमुना-सरस्वती

    → शरीर, मन अउ बुद्धि के शुद्धिकरण

    ✔️ माता के गण

    → जीवन के वो अदृश्य सहायक जेन हमन देख नई पाथन

    ✔️ बालक बरुआ कुछ नई जाने

    → सच्चा भक्त वो हे, जेन अपन आप ला खाली मानथे

    👉 पूरा अर्थ एक लाइन म:

    ये गीत सिखाथे कि जब मन, प्रकृति अउ भक्ति एक साथ जुड़थे, तब जीवन के हर दुःख धो जाथे अउ माता खुद मार्ग दिखाथे।

    गीत के महत्व (Importance)

    ✔️ ये गीत शीतला/दुर्गा माता के स्नान परंपरा से जुड़ाय हे

    ✔️ इसमें 21 शक्ति, प्रकृति अउ भक्त के एकता दिखे

    ✔️ गांव के परंपरा म ये गीत जुड़वास, जसगीत, पूजा समय गाये जाथे

    ✔️ ये गीत सिखाथे:

    भक्ति में शुद्धता

    प्रकृति के सम्मान

    माता के प्रति पूर्ण समर्पण

    👉 ये सिर्फ गीत नई, एक पूरा आध्यात्मिक अनुष्ठान हे

    कथा छत्तीसगढ़ी 

    बहुत पुराना समय के बात हे। एक छोटे गांव म हर साल भयंकर बीमारी फैल जाथे। गांव वाले डरे रहंय।

    एक दिन एक बुजुर्ग महिला सपना म देखिस कि

    माता सरोवर म स्नान करे बर आही, लेकिन गांव वाले स्वागत नई कर पावत हें।

    दूसरे दिन वो गांव वाले मन ला बुलाके कहिस: 👉 “अगर तुमन माता के सरवर स्नान के तैयारी करहू, त गांव बच जाही”

    गांव वाले मिलके:

    सरोवर साफ करिन

    नींबू, फूल चढ़ाइन

    जसगीत गाइन

    जइसे ही वो गीत गूंजे: “सरवर नहाएं बर जावय हो मईया…”

    अचानक:

    हवा सुगंधित होगे

    पानी चमक उठिस

    मेंढक, पक्षी सब आवाज करे लगिन

    रात म माता प्रकट होइस अउ कहिस: 👉 “जहां भक्ति सच्चा होथे, मैं खुद आथों”

    उस दिन के बाद: ✔️ गांव म बीमारी खत्म होगे

    ✔️ हर साल ये गीत परंपरा बन गे

    👉 आज भी मान्यता हे कि ये गीत गाये जाथे,

    माता सच म सरोवर म स्नान करे आथें

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    ✦✦  माताा रानी आप सबकी मनोकामना पूर्ण करें  ✦✦

    तीन पतियां बेल के/कांतिकार्तिक यादव /रामा लहरें /जसजीत lyrics

    तीन पतियां बेल के / कांतिकार्तिक यादव / रामा लहरें जस गीत 

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    गीत-तीन पतियां बेल के

    गायक -कांतिकार्तिक यादव 

    गीतकार - रामा लहरें 

    म्यूजिक कंपनी-ओपी देवांगन 

    वेबसाईट ऑनर -कैलाश पंचारे 

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    मुखड़ा 

    तीन पतियां बेल के हरदे ला बसे मोर महादेव के -2

    उड़ान - गंगा चढ़ावव तोला, दूध चढ़ावव तोला

    फूल चढ़ावव मैं कनेर के

    तीन पतियां बेल के हरदे ला बसे मोर महादेव के -2

    अंतरा - 1

    शिव समाये अन्तस मा मोर शिव हे नीरा कारी l

    कोन रूप मा पूजा करव तोर मैहा तोर पुजारी ll

    उड़ान - सांस मा जपव मै तोला, तोर ध्यान लगावव भोला -2

    साधव मैं तन मन ला सघेर के-2

    तीन पतियां बेल के हरदे ला बसे मोर महादेव के -2

    अंतरा - 2

    सांस हा तोर नाव जपत हे शंभू शंकर भोला l

    ये जिंनगी ला करवे समर्पण पांच रतन के चोला ll

    उड़ान - मानव जनम अमोल, तर जातिश ये मोर चोला-2

    जिंनगी हो जाना हे राख ढेर के -2

    तीन पतियां बेल के हरदे ला बसे मोर महादेव के -2

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    मातारानी के जस गीत नीचे दे हावे जाके क्लिक करव
                                                                पतली कमर पचरा जसगीत 

    हे मैया माता सेवा मा चले आबे जसगीत

    झुमरी तलइया के पारे जस गीत

    बइठे हावय बमलाई डोंगरगढ़ में जसगीत

    लहराये जंवारा पंचू यादव जसगीत

    काली मारे किलकारी 

    आवो देवी दुर्गा देवेंद्र साहू जसगीत

    धरम के बात राम दयाल जायसवाल जसगीत

    कलशा ऊपर दियना मातारानी जसगीत

    सुआ नाचे सातों बहनिया 

    गीत के अर्थ 

    इस गीत में भक्त भगवान शिव को बेलपत्र की तीन पत्तियों से पूजा करने की बात कहता है। वह गंगा जल, दूध और कनेर फूल अर्पित करके भोलेनाथ को प्रसन्न करना चाहता है।

    भक्त कहता है कि शिव उसके हृदय में बसे हैं और वह हर सांस में उनका नाम जपता है। वह अपने तन-मन को साधकर पूरी श्रद्धा से महादेव की पूजा करता है।

    गीत का दूसरा भाग जीवन की सच्चाई को बताता है कि यह मानव जीवन बहुत अमूल्य है और अंत में शरीर राख बन जाना है। इसलिए इस जीवन को भगवान शिव को समर्पित करना ही सबसे बड़ा धर्म है।

    गीत की विशेषता 

    यह शिव भक्ति पर आधारित शांत भाव का जसगीत है

    बेलपत्र की तीन पत्तियों का आध्यात्मिक महत्व बताया गया है

    सांस-सांस में शिव नाम जपने का संदेश

    जीवन की नश्वरता का भाव

    पूर्ण समर्पण और भक्ति का वर्णन

    शिव पूजा की पारंपरिक विधि का उल्लेख

    गीत की कथा /कहानी

    एक छोटे से गांव में शिवभक्त निहाली नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह रोज सुबह उठकर नदी से पानी लाता और जंगल से बेलपत्र तोड़कर भगवान शिव की पूजा करता।

    निहाली का विश्वास था कि तीन पतियों वाले बेलपत्र में भगवान शिव का विशेष वास होता है। वह हमेशा तीन पत्तियों वाला बेल ढूंढकर ही लाता और बड़े प्रेम से शिवलिंग पर चढ़ाता।

    एक दिन गांव में अकाल पड़ गया। खेत सूख गए, पानी खत्म होने लगा। लोग परेशान हो गए। लेकिन निहाली ने अपनी भक्ति नहीं छोड़ी। वह रोज शिव मंदिर जाकर कहता —

    "गंगा चढ़ावव तोला, दूध चढ़ावव तोला, फूल चढ़ावव मैं कनेर के…"

    लोग उसका मजाक उड़ाते, लेकिन वह हर सांस में शिव का नाम जपता रहा।

    कुछ दिन बाद एक रात निहाली को सपना आया। भगवान शिव प्रकट हुए और बोले —

    "तोर भक्ति ले मैं प्रसन्न हवँव, कल पानी बरसही।"

    सुबह होते ही आसमान में बादल छा गए। तेज बारिश शुरू हो गई। गांव के तालाब भर गए, खेत हरे हो गए।

    तब गांव वाले समझ गए कि सच्ची भक्ति से भगवान जरूर प्रसन्न होते हैं। सभी ने मिलकर शिव मंदिर में पूजा की और निहाली को सम्मान दिया।

    उस दिन से गांव में यह गीत गाया जाने लगा —

    "तीन पतियां भेल के हरदे ला बसे मोर महादेव के…"

    यह गीत आज भी हमें सिखाता है कि जीवन नश्वर है, लेकिन भगवान शिव की भक्ति अमर है। सांस-सांस में शिव नाम जपने से मन शांत होता है और जीवन सफल बन जाता है।

    माया के दरबार / कांतिकार्तिक यादव /दुर्गा जस गीत | छत्तीसगढ़ी भक्तिगीत

    ✦✦ माया के दरबार - कांतिकार्तिक यादव जस गीत ✦✦

    माया के दरबार (पारम्परिक जस गीत मांदर धुन मे)🙏 | Kantikartik Yadav New Jas Geet 2026 | 360INDIA

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    गीत -माया के दरबार 

    गायक -कांतिकार्तिक यादव 

    गीत लेबल -पारंपरिक जस 

    म्यूजिक कंपनी -360india 

    वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे 

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    मुखड़ा 

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना 

    दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना 

    जब सेउक सेवा में आये हां  --

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना 

    //1 //

    ये काहेन के मृदंगे,मृदंगे,काहेन करताल ,काहेन बने डमरुवा

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    जब सेउक सेवा में आये हां  --

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    //2 //

    ये माटी के मृदंगे,मृदंगे ,लोहा करताल ,काठ के बने डमरुवा

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    जब सेउक सेवा में आये हां --

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    //3 //

    ये कौन बनाये मृदंगे,मृदंगे,कौने बनाये करताल ,कौन बनाये डमरुवा

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    जब सेउक सेवा में आये हां  --

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    //4 // 

    ये कुम्हार बनाये मृदंगे,मृदंगे,लोहरा करताल ,बढ़ई बनाये डमरुवा

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    जब सेउक सेवा में आये हां --

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना        

    //5 //   

    ये कोन बजाये मृदंगे,मृदंगे,कोन बजाये करताल ,कोन बजाये डमरुवा

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    जब सेउक सेवा में आये हां --

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

      दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना 

    //6 //

    ये कोन बजाये मृदंगे,मृदंगे,कोन बजाये करताल ,कोन बजाये डमरुवा

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    जब सेउक सेवा में आये हां --

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    //7 //

    ये ब्रम्हा बजाये मृदंगे,मृदंगे,नारद बजाये करताल ,भोला बजाये डमरुवा

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    जब सेउक सेवा में आये हां --

    माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

    दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना

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    गीत का अर्थ (Meaning Chhattisgarhi)

    ये जस गीत म भक्त मन माता माया (दुर्गा) के दरबार म सेवा करे बर आथें।
    गीत म ये बताय गे हे कि जब भक्त सेवा म आथें, त मृदंग, करताल अउ डमरू जइसने वाद्य बजथे।

    एमा ये घलो बताय गे हे कि ये सब वाद्य अलग-अलग कारीगर बनाथें—जइसे कुम्हार, लोहरा अउ बढ़ई।
    फेर अंत म देवता मन (ब्रम्हा, नारद अउ भोलेनाथ) खुदे ए वाद्य बजाके माता के सेवा करथें।

    👉 मतलब साफ हे—माता के भक्ति म इंसान लेके देवता तक सब झुक जाथें।


    🔷 गीत की विशेषता ( Importance)

    • ये गीत छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के सुगंध ले भरपूर हे 🌿
    • एमा पारंपरिक वाद्य यंत्र (मृदंग, करताल, डमरू) के वर्णन हे
    • अलग-अलग समाज (कुम्हार, लोहरा, बढ़ई) के योगदान दिखाय गे हे
    • भक्ति अउ एकता के संदेश देथे
    • देवी सेवा म सब बराबर हवंय—ये बात ला मजबूत बनाथे

    🔷 गीत के ऊपर कहानी 

    छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव म नवरात्रि के समय भारी उत्साह रहिस। गांव के हर कोना म माता माया के भक्ति के रंग छा गे रहिस। मंदिर ला फूल, दीया अउ रंगोली ले सजाय गे रहिस। सबो गांव वाले मन एकजुट होके माता के सेवा करे बर तैयारी करत रहिन।

    ए गांव म सुकालू नाव के एक गरीब किसान रहिस। ओकर मन म माता दुर्गा बर अगाध श्रद्धा रहिस। वो हर साल नवरात्रि म बिना नागा माता के दरबार म सेवा करे जाथे। इस साल घलो वो सोचिस—"मोर पास धन दौलत नई हे, फेर मंय अपन सेवा जरूर देहूं।"

    नवरात्रि के पहिली रात, मंदिर म जस गीत शुरू होइस—
    "माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना..."
    गीत के सुर सुनके सुकालू के मन भाव-विभोर होगे।

    गांव के लोगन म अलग-अलग जिम्मेदारी बंट गे रहिस।
    कुम्हार माटी ले मृदंग बनाइस, लोहरा करताल गढ़िस अउ बढ़ई सुंदर डमरू बनाइस।
    सबो अपन-अपन काम ला माता के सेवा समझ के करत रहिन।

    जइसे-जइसे रात गहरात गीस, जस गीत के धुन तेज होवत गीस।
    मृदंग के थाप, करताल के झंकार अउ डमरू के आवाज ले पूरा वातावरण भक्तिमय होगे।

    रामसाय चुपचाप कोना म बैठ के ये सब देखत रहिस। ओकर मन म एक ही बात घूमत रहिस—
    "का मंय घलो माता के सेवा म कुछ कर सकत हंव?"

    तभी मंदिर के पुजारी ओकर पास आइन अउ कहिन—
    सुकालू सेवा करे बर धन नई, मन चाही। तैं आके जस गीत म संग दे।"

    सुकालू हिम्मत करके गीत गाना शुरू करिस—
    "माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना..."

    जइसे ही वो गाइस, सबो लोग ओकर सुर म सुर मिलाइन।
    धीरे-धीरे पूरा मंदिर भक्ति के सागर म डूब गे।

    उसी समय एक अद्भुत घटना होइस।
    ऐसा लगिस जइसे खुद ब्रम्हा, नारद अउ भोलेनाथ आके मृदंग, करताल अउ डमरू बजावत हवंय।

    लोगन के आंख म आंसू आ गे—ये माता के कृपा रहिस।

    सुकालू ला महसूस होइस कि माता हर ओकर सच्ची भक्ति ला स्वीकार कर लीस।
    ओकर मन म अब कोई कमी के अहसास नई रहिस।

    नवरात्रि के आखिरी दिन, गांव वाले मन सुकालू के बहुत सम्मान करिन।
    सबो कहिन—"सच्ची सेवा धन ले नई, दिल ले होथे।"

    रामसाय मुस्कुराइस अउ माता के चरण म सिर झुकाइस।

    👉 ये कहानी ले हमन ला ये सीख मिलथे:

    • सच्ची भक्ति दिल ले होथे ❤️
    • हर इंसान माता के सेवा कर सकथे
    • समाज के हर वर्ग के योगदान जरूरी हे
    • माता के दरबार म सब बराबर हवंय