थईया नाचे हनुमान / दीपक वर्मा / पचरा जस लिरिक्स छत्तीसगढ़ी

── ⋆⋅𖤓⋅⋆ ──  थईया  नाचे हनुमान / दीपक वर्मा  / पचरा छत्तीसगढ़ी गीत  ── ⋆⋅𖤓⋅⋆ ──


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गीत-थईया थईया नाचे हनुमान 
गायक-दीपक वर्मा
संकलन - अजय 
म्यूजिक कंपनी-sks studio cg 
वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 
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 थईया थईया नाचे हनुमान 

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

थईया थईया नाचे हनुमान 

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

अंतरा-1

राम जनम सुने देवता सब आए

कीसम किसाम के हे भेस बनाए

राम जनम सुने देवता सब आए

किसम किसम के हे भेस बनाए

उड़ान  -जुरे हावय लइका अऊ सियान 

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

थईया थईया नाचे हनुमान 

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

अंतरा -2

अंजनी दुलरवा हे बदले हे चोला

संग में मदारी बनके चले बंभोला

अंजनी दुलरवा हे बदले हे चोला

संग में मदारी बनके चले बंभोला

उड़ान - करा थे तमासा दिनमान

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

थईया थईया नाचे हनुमान 

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

अंतरा-3

ऐती ओती भागे कभु रुख चढ़ जाथे

मारथे उलानबाटी चोन्हा देवावे 

ऐती ओती भागे कभु रुख चढ़ जाथे

मारथे उलानबाटी चोन्हा देवावे 

उड़ान - कभू परे भुईयां में उठान

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

थईया थईया नाचे हनुमान 

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

अंतरा -4

राम दरस करके गदगद हे

सात परिक्रमा करके खुशी होगे मन में

राम दरस करके गदगद हे

सात परिक्रमा करके खुशी होगे मन में

उड़ान- करत हे अजय गुणगान

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

थईया थईया नाचे हनुमान 

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

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जन्मों प्रकार के पचरा जस गीत के लिंक नीचे दे हावे 

मोर दुर्गा मईया,

सागर के पार 

इतना के बेरिया 

लहराए जवारा 

गंगा अस्नान्दे 

देवी के सिंगारे 

तर जाहि चोला

डोंगरी पहाड़ मा 

पलना गड़े मजेदार 

गीत का अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)

ये जसगीत म हनुमान जी के आनंद अउ भक्ति के वर्णन करे गे हवय। जब भगवान राम के जनम होइस, त सब देवता खुश होगे। हनुमान जी अपन खुशी ला नाचा के जाहिर करत हवंय, अउ शंकर भगवान डमरू बजावत हवंय।

पहिली अंतरा म बताय गे हवय कि राम जन्म के खबर सुनके देवता मन अलग-अलग भेस बना के आइन। लइका ले लेके सियान तक सब झूम उठिन।

दूसर अंतरा म हनुमान जी के बाल रूप के वर्णन हवय, जिहां वो अपन रूप बदल के मस्ती करत हवंय अउ भगवान शिव मदारी बनके संग म चलत हवंय।

तीसर अंतरा म हनुमान जी के चंचलता दिखाय गे हवय — कभू इहाँ दौड़त, कभू रूख म चढ़त, कभू कूदत-फांदत। ये सब उनकर बाल लीला के चिन्ह हवय।

चौथा अंतरा म जब हनुमान जी राम जी के दरस करथें, त वो गदगद हो जाथें अउ सात परिक्रमा करके खुशी म डूब जाथें। आखिर म वो भगवान के गुणगान करथें।

👉 कुल मिलाके, ये गीत भक्ति, खुशी अउ उत्सव के प्रतीक आय।

🔷 विशेषताएं (Features / Importance)

🌼 भक्ति से भरपूर – हनुमान जी के राम प्रति प्रेम के सुंदर चित्रण

🌼 उत्सव का माहौल – राम जन्म के खुशी म देवता मन के आगमन

🌼 बाल लीला वर्णन – हनुमान जी के चंचल रूप के सुंदर झलक

🌼 शिव-हनुमान संबंध – शंकर भगवान के डमरू बजाना एक विशेष आकर्षण

🌼 लोक संस्कृति से जुड़ा – छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुसार गाया जाने वाला जसगीत

🔷 कथा (छत्तीसगढ़ी में)

बहुत दिन पहिली के बात आय। अयोध्या नगरी म जब भगवान राम के जनम होइस, त पूरा धरती म खुशी के लहर दौड़ गे। हर कोती बधाई के आवाज गूंजे लागिस। देवता मन घलो ये पवित्र घड़ी के इंतजार करत रहिन, त सबो देवता अपन-अपन रूप बदल के अयोध्या पहुंच गइन।

कोई साधु के भेस म आय, कोई गवइया बनके, त कोई नट-नटनी बनके। सबके मन म एकेच बात रहिस – राम जी के दरस पाना।

एही बखत, एक नन्हा बालक घलो हावय, जऊन दिखत साधारण रहिस, फेर ओकर आंखी म अलग चमक रहिस। ये बालक अउ कोनो नई, खुद हनुमान जी रहिन, जऊन अपन बाल रूप म आय रहिन।

हनुमान जी राम जनम के खबर सुनके इतका खुश होगे रहिन कि वो खुद ला रोक नई पाइन। वो थईया-थईया करके नाचना सुरू कर दिन। ओखर हर कदम म भक्ति झलकत रहिस।

उधर भगवान शिव घलो ये आनंद के घड़ी म चुप कइसे रहितें? वो घलो अयोध्या पहुंच गइन। फेर वो अपन असली रूप म नई, बल्की एक मदारी के रूप धारण करिन। हाथ म डमरू धरके वो बजाना सुरू कर दिन।

डमरू के धुन अउ हनुमान जी के नाच – ये दृश्य इतका अद्भुत रहिस कि जऊन देखत रहिस, वो मंत्रमुग्ध हो जाथे।

हनुमान जी कभू इहाँ दौड़त, कभू उहां कूदत, कभू रूख म चढ़ जाथें। छोटे-छोटे करतब दिखाके सबके मन ला खुश कर देथें। लइका मन त ताली बजा-बजा के हंसे लगिन, अउ सियान मन घलो मुस्कान रोक नई पाइन।

एक बखत हनुमान जी इतका उछलिन कि सीधे जमीन म गिर गइन, फेर तुरंत उठके फेर नाचना सुरू कर दिन। ये सब देखके देवता मन घलो हंस पड़िन।

जब राम जी के दरबार म पहुंचिन, त हनुमान जी के आंखी म आंसू आ गइन। वो अपन प्रभु के दरस करके भावुक हो गइन। तुरंत वो सात परिक्रमा करिन अउ हाथ जोड़के प्रणाम करिन।

ओकर मन म एकेच भावना रहिस – सेवा अउ भक्ति।

भगवान शिव घलो डमरू बजावत-बजावत मुस्कुरा रहिन। वो जानत रहिन कि ये बालक कोई साधारण नई, बल्कि खुद भक्ति के सागर हनुमान आय।

पूरा अयोध्या म वो दिन खुशी, भक्ति अउ प्रेम के संगम बन गे। हर कोती “जय श्री राम” के जयकारा गूंजत रहिस।

हनुमान जी अपन नाच अउ भक्ति ले सबके मन जीत लिन। वो दिखा दिन कि सच्चा भक्त कइसन होथे – जऊन अपन प्रभु के खुशी म खुद ला भुला देथे।

आज घलो जब ये जसगीत गाए जाथे, त मन म वही खुशी अउ भक्ति जाग उठथे। ये गीत हमन ला सिखाथे कि भगवान के प्रति सच्चा प्रेम अउ समर्पण कइसन होना चाही।

तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ – नोहर वर्मा | नवरात्रि देवी जस गीत अर्थ (Chhattisgarhi Jas Geet Lyrics)

तर जाही ओ चोला हा । नोहर वर्मा l जस लिरिक्स छत्तीसगढ़ी
Tar Jahi o Chola Ha Tore Darash Le Ha | CG...

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गीत-तारजाही हो चोला हा

गायक -नोहर वर्मा 

म्यूज़िक लेबल-पचरा जस गीत

म्यूज़िक कंपनी -sks studio cg 

वेबसाईट ऑनर - कैलाश पंचारे

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मुखड़ा 

        तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ,

        तर जाही वो चोला हा तोरे दया ले हाँ।

     येहो तोरे दरस ले हाँ...

अंतरा -1 

जब पहली रूप तोर दर्शन पायेव, शैलपुत्री वो भवानी

जब दूसर रूप ब्रह्मचारिणी वो माता

तोरे दरस ले हाँ----

  तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ

अंतरा -2 

जब तीसर रूप तोर दर्शन पायेव, चंद्रघंटा जगरानी

   चौथे रूप कुष्मांडा वो माता

तोरे दरस ले हाँ---- 

  तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ

अंतरा -3 

जब पाँचवा रूप तोर दर्शन पायेव, स्कंदमाता भवानी 

जब छटवाँ रूप कात्यायनी वो माता

तोरे दरस ले हाँ----

  तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ

अंतरा -4

जब सांतवा रूप तोर दर्शन पायेव, कालरात्रि कल्याणी 

जब आठवाँ रूप महागौरी वो माता

तोरे दरस ले हाँ----

  तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ

अंतरा -5

जब नोवों रूप तार दर्शन पायेव, सिद्धिदात्री महामाई

जब नव दिन नवरात में माता

तोरे दरस ले हाँ----

  तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ

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गीत का अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)

“तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ” एक भक्ति से भरपूर छत्तीसगढ़ी देवी जस गीत हे। ए गीत म भक्त माता दुर्गा के चरण म अपन श्रद्धा अऊ विश्वास ला व्यक्त करत हे।

गीत म गायक कहिथे कि मोर ये मनखे के चोला (जीवन) माता के दर्शन अऊ दया ले पवित्र हो जाही। माता के कृपा मिलते ही जीवन के दुख-तकलीफ दूर हो जाथे।

ए गीत के हर अंतरा म माता दुर्गा के नौ रूप के महिमा बताय गे हे, जेन ला नवरात्रि म पूजा जाथे।

1️⃣ पहला रूप – शैलपुत्री

जब भक्त माता शैलपुत्री के दर्शन पाथे, तब ओकर जीवन म नई शक्ति अऊ भक्ति के शुरुआत होथे।

2️⃣ दूसर रूप – ब्रह्मचारिणी

ब्रह्मचारिणी माता तपस्या अऊ संयम के प्रतीक हें। ओखर दर्शन ले मन म धीरज अऊ भक्ति बढ़थे।

3️⃣ तीसरा रूप – चंद्रघंटा

चंद्रघंटा माता संकट दूर करे वाली देवी हें। ओखर कृपा ले डर अऊ बिपत्ति दूर हो जाथे।

4️⃣ चौथा रूप – कुष्मांडा

कुष्मांडा माता सृष्टि के रचना करे वाली देवी माने जाथे। ओखर दर्शन ले जीवन म सुख-समृद्धि आथे।

5️⃣ पाँचवाँ रूप – स्कंदमाता

स्कंदमाता ममता अऊ करुणा के रूप हें। ओ भक्त मन ला संतान सुख अऊ खुशहाली देथें।

6️⃣ छठवाँ रूप – कात्यायनी

कात्यायनी माता शक्ति अऊ साहस के प्रतीक हें। ओ दुष्ट शक्तियों के नाश करथें।

7️⃣ सातवाँ रूप – कालरात्रि

कालरात्रि माता अंधकार अऊ भय के नाश करे वाली हें। ओ भक्त मन के रक्षा करथें।

8️⃣ आठवाँ रूप – महागौरी

महागौरी माता शांति, पवित्रता अऊ कृपा के रूप हें। ओ जीवन म सुख अऊ उजाला भर देथें।

9️⃣ नौवाँ रूप – सिद्धिदात्री

सिद्धिदात्री माता भक्त मन ला सिद्धि अऊ वरदान देथें। नवरात्रि के आखरी दिन ओखर पूजा करे जाथे।

👉 ए गीत के संदेश ये हे कि जेन भक्त सच्चे मन ले माता के पूजा करथे, ओकर जीवन माता के दर्शन अऊ दया ले सफल हो जाथे।और पचरा जस गीत पढ़ें :

और पचरा जस गीत पढ़ें :

डोंगरी पहाड़ म हा

देवी के सिंगारे बर

मोर दुर्गा मईया

ये हो माई के दरश बर हां

जगमग जोत जले दाई

दाई तोर अचरा मा फुले फुले गजरा

दाई दयाली वो





डोंगरी पहाड़ी में हा | दीपक वर्मा | छत्तीसगढ़ी देवी जसगीत लिरिक्स, अर्थ और कथा


डोंगरी पहाड़ में हा

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गीत - डोंगरी पहाड़ में हा 

गायक - दीपक वर्मा

गीतकार - अलख राम यादव 

म्यूज़िक कंपनी - sks studio cg

वेबसाईट ऑनर - कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

 डोंगरी पहाड़ी में हो तै बैठे हो माता डोंगरी पहाड़ी में हां 

तै बैठे हो माता डोंगरी पहाड़ी में हां

अंतरा -1

कहा ले तै आये ओ माता काकर रूप बनाये -2

कोन हर तोर करे आरती कोन हा जस तोर गाये -2 

उड़ान - कोन हा तोर करे सिंगारे ,डोंगरी पहाड़ी में हां---- 

तै बैठे हो माता डोंगरी पहाड़ी में हां-2 

अंतरा -2

सरग लोक ले आये ओ माता काली रूप बनाये -2

नर नारी तोर करे आरती सेऊक जस तोर गाये -2 

उड़ान - बईगा पंडा करे सिंगारे ,डोंगरी पहाड़ी में हां---- 

तै बैठे हो माता डोंगरी पहाड़ी में हां-2 

अंतरा -3

जंगल झाड़ी चीर माता रस्दा तैहा बनाये  -2

डोंगरी पहाड़ी म बइठे दाई आसन सुघ्घर लगाये  -2 

उड़ान - चिड़िया चढ़चड़ आये ओ दाई डोंगरी पहाड़ी में हां---- 

तै बैठे हो माता डोंगरी पहाड़ी में हां-2 

अंतरा -4

नवदिन तोर मेला बराथे नरनारी सब आये  -2

तोर दरस ल पाके ओ दाई जीवन सफल बनाथे-2 

उड़ान - वर ईच्छा पाथे ओ दाई डोंगरी पहाड़ी में हां---- 

तै बैठे हो माता डोंगरी पहाड़ी में हां-2 

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अगर आप और भी छत्तीसगढ़ी देवी जसगीत पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए पोस्ट जरूर पढ़ें।

👉 जोत जले हे नवराति मईया के भुवन माँ जसगीत

👉 दाई तोर अचरा मा फुले फुले गजरा मा जसगीत

👉 सेवा म सेउक आये ओ शीतला

गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)

“डोंगरी पहाड़ी में तैं बैठे हो माता”

ए पंक्ति म गायक माता के महिमा गावत कहिथे के दाई डोंगरी पहाड़ी म विराजमान हें। भक्त मन पहाड़ म जाके माता के दर्शन करथें अउ अपन मनोकामना मांगथें।

अंतरा 1 के अर्थ

गायक माता ले पूछत हे के दाई तैं कहा ले आय हस अउ कोन रूप धरके आय हस। साथ ही पूछत हे के तोर आरती कोन करत हे अउ तोर जस कोन गावत हे।

ए म माता के पूजा-अर्चना अउ भक्त मन के सेवा के वर्णन मिलथे।

अंतरा 2 के अर्थ

माता सरग लोक ले धरती म आय हें अउ काली के रूप धरके अपन भक्त मन के रक्षा करत हें। नर-नारी सब आरती करत हें अउ सेऊक मन माता के जस गावत हें।

अंतरा 3 के अर्थ

ए भाग म माता के निवास स्थान के सुंदर वर्णन हे।

जंगल झाड़ी ला चीर के माता अपन दरबार बसाय हें। डोंगरी पहाड़ी म माता सुन्दर आसन म विराजमान हें अउ चिड़िया मन भी आके माता के आसपास चहकथें।

अंतरा 4 के अर्थ

नवरात्रि के समय माता के दरबार म बड़े मेला भरथे। दूर-दूर ले नर-नारी माता के दर्शन करे बर आथें।

दाई के दर्शन पा के भक्त मन के जीवन सफल हो जाथे अउ माता मनोकामना पूरा करथें।

🌼 गीत के धार्मिक महत्व

ए गीत माता के शक्ति अउ महिमा के वर्णन करथे।

डोंगरी पहाड़ी म बसे देवी स्थल के महत्व ला बताथे।

नवरात्रि म माता के दरबार म लगने वाले मेला के भक्ति भाव दिखाथे।

ए गीत सुनके भक्त मन के मन म श्रद्धा अउ विश्वास बढ़थे।

📖 कथा (डोंगरी पहाड़ी वाली दाई के कहानी)

बहुत साल पहिली के बात आय। एक गांव के पास घना जंगल अउ उंचा डोंगरी पहाड़ रहिस। गांव के लोगन कहिथें के ओ पहाड़ म कोई दिव्य शक्ति रहिथे। रात के समय ओ जगह म जोत जले दिखत रहिस।

एक दिन गांव के एक बुजुर्ग बईगा ला सपना म माता दर्शन देहिन। माता कहिन –

“मोर आसन डोंगरी पहाड़ी म हे, मोला उहां पूजा करव।”

सबेरे बईगा गांव वाले मन ला बताइस। सब झिन पहाड़ म जाके देखिन त ओ जगह सच म एक पवित्र स्थान दिखिस। उहां माता के मूर्ति स्थापित करे गीस।

धीरे-धीरे ओ जगह प्रसिद्ध होगे। दूर-दूर ले लोगन माता के दर्शन करे बर आवन लगिन। नवरात्रि म नौ दिन तक भव्य मेला भरथे। बईगा अउ पंडा माता के सिंगार करथें, आरती होथे अउ जसगीत गूंजथे।

कहिथें जऊन भी भक्त सच्चे मन ले डोंगरी पहाड़ी वाली दाई के दर्शन करथे, ओकर मनोकामना जरूर पूरा होथे।

तभी ले आज तक भक्त मन गावत हें —

“डोंगरी पहाड़ी में तैं बैठे हो माता…”



हनुमान जनम ले/दिनेश जागड़े /पचरा जस गीत लिरिक्स

🚩🚩🚩हनुमान जनम- दिनेश जागड़े /पचरा जस गीत 🚩🚩🚩
हनुमान जनम ले कौने कारण बर हा | छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत |

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गीत - हनुमान जनम ले

गायक -दिनेश जागड़े 

म्यूजिक कंपनी-sks स्टूडियो cg 

गीतशैली-पचरा

वेबसाइट -www.cgjaslyrics.com 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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मुखड़ा 

हनुमान जनम ले कउने कारण बर हां -2 

उड़ान -कउने कारण बर हां -2 

 हनुमान जनम ले कउने कारण बर हां -2

अंतरा -1 

जब कउने नगर में राम जनम ले कउने में भारत भाई -2 

कउने में भारत भाई हो मईया कउने में भारत भाई 

कउने नगर में राम जनम ले कउने में भारत भाई

उड़ान -जब कउने नगर ले सिया जनम ले -----2 

कउने नगर में हां ---

हनुमान जनम ले कउने नगर में हां --2

अंतरा -2  

जब अवध पूरी में राम जनम ले वाहवा भारत भाई -2 

वाहवा भारत भाई हो मईया वाहवा भारत भाई

अवध पूरी में राम जनम ले वाहवा भारत भाई

उड़ान -जब जनकपुरी में  सिया जनम ले -----2 

बम्पा पूरी में हां ---

हनुमान जनम ले बम्पा पूरी में हां --2

अंतरा -3   

कौन  लगिन  में राम जनम ले कौन में भारत भाई -2 

कौन में भारत भाई हो मईया कौन में भारत भाई

कौन लगिन में राम जनम ले कौन में भारत भाई

उड़ान -जब  कौन लगिन में  सिया जनम ले -----2 

कौन लगिन में हां ---

हनुमान जनम ले लगिन में  हां --2

अंतरा -4    

नम्मी के दिन राम जनम ले दशमी भारत भाई -2 

दशमी भारत भाई हो मईया दशमी भारत भाई

नम्मी के दिन राम जनम ले दशमी भारत भाई

उड़ान -जब एकादशी को सिया जनम ले -----2 

दुवादशी में हां ---

हनुमान जनम ले दुवादशी में  हां --2

अंतरा -5     

कउन कारण बर राम जनम ले काबर भारत भाई -2 

काबर भारत भाई हो मईया काबर भारत भाई

कउन कारण बर  राम जनम ले काबर भारत भाई

उड़ान -जब कउन कारण बर सिया जनम ले ----2 

कउन कारण बर हां ---

हनुमान जनम ले कउन कारण बर  हां --2

अंतरा -6      

जगतारन बर राम जनम ले जस बर भारत भाई -2 

जस बर भारत भाई हो मईया जस बर भारत भाई

कउन कारण बर  राम जनम ले काबर भारत भाई

उड़ान -जब वन जाये बर सिया जनम ले ----2 

लंका दहन बर हां ---

            हनुमान जनम ले कउन कारण बर  हां --2                   

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       गीत के अर्थ (अर्थ - Meaning in Chhattisgarhi)

ये गीत मा हनुमान जी के जनम के कारण ला बताय गे हे। गीत मं बार-बार पूछे जाथे — “हनुमान जनम ले कउने कारण बर हां?”
इसका मतलब हे — हनुमान जी काबर जनम लेन? कउन बखत मं, कउन कारण ले जगत मं आये रहिन?

गीत के अलग-अलग अंतरा मं बताय गे हे —

1.      जब राम जी अवधी मा जनम लीन 

2.      सिया जी जनकपुरी मं जनम लीन 

3.      त ओही बखत हनुमान जी के अवतार घलो होइस।

4.      भगवान राम अऊ माता सीता के सेवा बर, लंका दहन बर, अऊ जग तरन बर हनुमान जनम लेन।


🔱 गीत के महत्व (Mahatv - Importance)

  1. आध्यात्मिक महत्व:
    हनुमान जी के जन्म के कारण ला समझावत हे – ओ मनुष्य अऊ देवता दुनो के रक्षक हें।
  2. भक्ति भावना जगाथे:
    गीत सुनके मन भक्ति अऊ श्रद्धा ले भर जाथे।
  3. पचरा परंपरा के हिस्सा:
    ये गीत छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पचरा गायन शैली मं गाए जाथे, जऊन मं देवी-देवता के गुणगान होथे।
  4. संस्कृति के पहचान:
    छत्तीसगढ़ी संस्कृति मं जसगीत अऊ पचरा गीत के बड़ महत्व हे, अऊ ये गीत ओही धरोहर के हिस्सा हे।

✨ गीत के विशेषता (Visheshta - Highlights)

1.      गीतशैली: पचरा (लोक भक्ति शैली)

2.      भावार्थ: भगवान हनुमान के जनम के रहस्य अऊ कारण के गाथा

3.      भाषा: शुद्ध छत्तीसगढ़ी लोकभाषा

4.      भक्ति भाव: राम-सिया-हनुमान के पावन कथा पर आधारित

5.      संगीत: पारंपरिक ढोलक, झांझ, मंजीरा अऊ छत्तीसगढ़ी तान मं तैयार


गीत के उद्देश्य (Udeshy - Purpose)

1.      हनुमान जी के अवतार के रहस्य ला लोकगीत के रूप मं बताय जावय।

2.      राम-सिया-हनुमान के संबंध अऊ जन्म कथा ला भावात्मक रूप मं प्रस्तुत करय।

3.      नवा पीढ़ी ला छत्तीसगढ़ी पचरा शैली अऊ लोक भक्ति के महत्ता समझाय।

4.      समाज मं भक्ति, श्रद्धा अऊ नैतिकता के संदेश फैलाय।

     

हनुमान जनम ले — छत्तीसगढ़ी भक्ति कथा

छत्तीसगढ़ के भक्ति गीतन मा  “हनुमान जनम ले कउने कारण बर हां” एक बहुत गजब के गीत आय।
ये गीत ह सिरिफ गाना नई, बल्कि भगवान हनुमान के अवतार के कथा ला जन-जन तक पहुंचाय के एक भक्ति यात्रा हे।
दिनेश जागड़े के मधुर आवाज मा गाए गे ये पचरा गीत मा, हर पंक्ति मा प्रश्न उठाय जाथे – “हनुमान जनम ले कउने कारण बर हां?”
अऊ ओही प्रश्न के जवाब मं ये कथा बने हे — भक्ति, सेवा अऊ त्याग के सजीव चित्र।


🌺 कथा के आरंभ

एक बखत के बात आय।
धरती पाप अऊ अन्याय ले भारी हो गे रहिस।
असुर मन बिन रोक-टोक के अत्याचार करत रहिन।
देवता मन, ऋषि-मुनि सब घबराय गे रहिन।
तब देवता मन ब्रह्मा जी, विष्णु जी अऊ महादेव जी के दरबार मा पहुंचिन अऊ कहिन —
“हे देव, अब धरती ला बचाय के उपाय करव। असुर मन ह अधर्मी होगे हें।”

तब भगवान विष्णु ह कहिन —
“अब मैं स्वयं राम रूप मा अवतार लेहूँ।”
ए बात सुनके देवता मन खुश होगे।
राम जनम लेन अवधपुरी (अयोध्या) मा ।
ओखर संग सिया जनम लेन जनकपुरी मा।
जइसे ये गीत कहिथे —

“जब अवध पूरी में राम जनम ले वाहवा भारत भाई,
जब जनकपुरी में सिया जनम ले, हनुमान जनम ले बम्पा पूरी में हां।”


🕊️ हनुमान जनम के कारण

देवता मन जानत रहिन —
राम जी के जीवन मा एक एसे भक्त के जरूरत हे जे मन अपन जीवन राम के सेवा मा समर्पित कर दे।
जे मन शक्ति, बुद्धि, अऊ भक्ति तीनों मा अनोखा होय।

एला देखके महादेव जी खुद विचार करिन —
“राम के सेवा बर तो खुद मा जाबे के चाही।”
अऊ ओमन अपन अंश ला अंजनी माता के गर्भ मा दे देथें।

अंजनी माता ह वायुवेग ले गर्भ धारण करथें —
अऊ ओखर पेट ले जन्म होथे हनुमान जी।


🌞 हनुमान जी के बाल रूप के कथा

जब हनुमान जी छोटे रहिन, तब ओमन आकाश मा चमकत सूरज ला देखिन।
ओमन सोचिन — “ये तो पका फल जइसने दिखथे।”
अऊ उड़े बर लगिन सूरज ला पकड़ ले।

सूर्य देव डर गइन।
संपूर्ण ब्रह्मांड अंधकार मं डूब गे।
तब इंद्र देव ह वज्र से वार करिन अऊ हनुमान जी बेहोश होगे।
वायु देव ह अपन पुत्र ला घायल देखके बहुत दुखी होगे अऊ ओमन पूरी धरती ले हवा हटा लेथें।

सब देवता मन डर गइन।
तब ब्रह्मा जी अऊ विष्णु जी मिलके हनुमान जी ला वरदान देथें —
“हे वायुपुत्र, तैं अमर होबे। तेंकर नाम अऊ कीर्ति सदा जगत मं गूंजत रहिहे।”


🕉️ राम जन्म के संग हनुमान के उद्देश्य

ए गीत मं बताय गे हे कि —
राम जनम होथे एक जगह, सिया जनम होथे दूसर जगह, अऊ ओही बखत हनुमान जनम लेथें।

“जब कउने नगर में राम जनम ले,
जब कउने नगर में सिया जनम ले,
हनुमान जनम ले कउने नगर में हां।”

ए बात ला सुनके समझ मं आथे कि तीनों के जनम के समय एक गुप्त दिव्य संबंध रहिस।
राम बिना हनुमान अधूरे, अऊ हनुमान बिना राम के नाम अधूरा।
भगवान हनुमान ह राम अऊ सिया के सेवा बर जनम लेथें, जस गीत मं कहे गे —

“जगतारन बर राम जनम ले जस बर भारत भाई,
लंका दहन बर हनुमान जनम ले हां।”


🔥 भक्ति अऊ सेवा के प्रतीक

हनुमान जी के जीवन मा भक्ति अऊ सेवा के मिसाल मिलथे।
राम वनवास मा गइन, तब हनुमान ह ओमन के दूत बनके पहिली बखत मिलिन।
सिया के खोज मं ओमन समुंदर पार करिन अऊ लंका मं रावण के दरबार तक पहुंचिन।

जेन बखत ह सिया माता ला लंका मं कैद रखे गे रहिस, हनुमान जी ह ओखर लंका जलाके राम के शक्ति अऊ भक्ति के परिचय दीन।

ओमन कहिन —
“जय श्रीराम” कहिते लंका जल गीस, रावण के सेनामं डर समा गीस।
ए गीत के अंतरा ह ओही भाव ला बताथे —

“वन जाये बर सिया जनम ले, लंका दहन बर हां —
हनुमान जनम ले कउन कारण बर हां।”


🌸 हनुमान के चरित्र – निःस्वार्थ सेवा के प्रतीक

हनुमान जी ह कभू अपन शक्ति के घमंड नई करिन।
ओमन कहिन —
“राम के बिना मोर अस्तित्व नई। मोर जीवन तो ओखर नाम मं बसथे।”
एहा सच्ची भक्ति के मिसाल आय।

हनुमान जी ह अपन जीवन मं तीन वचन रखिन —

  1. ब्रह्मचर्य पालन,

  2. राम नाम के जाप,

  3. लोक कल्याण के सेवा।

ओमन ह हर युग मं जीवित रहिन अऊ भक्त मन के दुख दूर करथें।


🌿 छत्तीसगढ़ी परंपरा मा हनुमान भक्ति

छत्तीसगढ़ के गांव-गांव मा हनुमान जी के मंदिर ह मिलथे।
मंगलवार अऊ शनिवार के दिन गांववाले मन ह तेल के दिया बालथें, झांझ-ढोलक के संग पचरा गावत हें।
दिनेश जागड़े जइसने गायक मन ह ये पारंपरिक भक्ति गीत ला अपन सुर मं गावत हें, ताकि नवा पीढ़ी ओला सुने अऊ अपन संस्कृति ला जिए।

“हनुमान जनम ले” गीत ओही परंपरा के बखान आय।
एमा बताय गे हे कि हनुमान जी के जनम सिरिफ एक दैवी घटना नई, बल्कि मानवता के रक्षा बर होइस।


🔱 कथानक के संदेश

ये कथा अऊ गीत दुनो एके बात सिखावथे —
जे मन अपन कर्म, निष्ठा अऊ भक्ति ला सच्चे मन ले निभाथे, ओ मन देवत्व पा जाथे।

हनुमान जी के जनम, ओमन के कार्य अऊ ओमन के भक्ति – ये सब मन ला सिखाथे कि –
भक्ति मं शक्ति हे, अऊ सेवा मं भगवान हे।


🌻 निष्कर्ष

“हनुमान जनम ले” गीत ह एक भक्ति गाथा आय जऊन मा  राम, सिया अऊ हनुमान के जनम के रहस्य ला छत्तीसगढ़ी पचरा गायन शैली मं गाए गे हे।
दिनेश जागड़े के आवाज मा गाए गे ये गीत ह मन मा श्रद्धा अऊ शांति के लहर फैला देथे।

हनुमान जी ह अपन भक्ति, विनम्रता अऊ सेवा भाव ले हमन ला सिखाथें कि –
भगवान तक पहुंचइया रास्ता सिरिफ भक्ति अऊ निष्ठा हे।

जे मन अपन मन के भीतर हनुमान के नाम ले प्रेम रखही, ओमन के जीवन मा कभू अंधकार नई रहय।
ए गीत ह ओही प्रकाश हे –
जे मन के भीतर भक्ति के दिया जलाथे।


🚩 जय श्रीराम 🚩
🚩 जय बजरंगबली 🚩