अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी/गायक: जीतू साहू /जस मंडली -श्री दाई के दुलरवा नवरत्न जस जस झांकी मंडली
अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी – पूरा छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स
छोटा परिचय
“अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी” एक भावपूर्ण छत्तीसगढ़ी जस गीत आय, जेमां महाभारत के द्रौपदी चीरहरण के प्रसंग ला बहुत मार्मिक ढंग ले गाये गे हवय। गीत म द्रौपदी अपन मान-सम्मान बचाय बर भगवान श्रीकृष्ण ला गोहार लगाथे। भगवान कृष्ण अपन भक्त के पुकार सुनके ओकर लाज बचाथें। ये गीत भक्ति, विश्वास अउ भगवान के शरण म जाए के संदेश देथे।
गीत की जानकारी
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मुखड़ा
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
उड़ान - बैरी खीचत तन के लुगरा ,होवत हावे तन भर उघरा -2
दुहासासन दुराचारी --
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
//1//
महाभारत के किस्सा हरे ,सुनहु चेत लगाये गा !
माया पति हे ,माया करे, मोहनी महल बनाये गा !!
पंडवा मन के बाटा मा परे ,सुघ्घर यज्ञ रचाये गा !
आये दुर्योधन यज्ञ के झरे ,देखे बर हे सधाये गा !!
उड़ान -महल देखे गा दुर्योधन ,महल हावे सुघ्घर अकन -2
देख मोहाये भारी
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
//2//
दुर्योधन आये महल भीतर ,माया ला नई जाने गा !
पानी जनाये भुईया बरोबर ,रेगे सीना ताने गा !!
भोरहा होंगे गिरगे जहुअर ,दुर्योधन बुध माने गा !
लकर लउहा उठे उहि कर ,झपागे अलहन आने गा !!
उड़ान -देख परिस हे दुरपति महरानी ,ठठा करे हासे उहि खानी -2
दुरपति उहि पारी --
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
//3//
भीम दुरपति उहि बेरा ,हासी उड़ाये भारी गा !
अंधरा के बेटा हावस अंधरा ,कहे दुरपति नारी गा !!
हिरदे होंगे कतरा कतरा ,सहे अपमाने सारी गा !
दुर्योधन आगी कस अंगरा ,ललियाये अये दुवारी गा !!
उड़ान -दुर्योधन बदला बर ठाने ,हासे हावे मोला मनमाने -2
पांच पति के नारी --
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
//4//
पासा खेले बर जोखा जमाथे ,सकुनी ममा हर भारी गा !
पांडवमन बर न्योता पाठाथे ,आये पांडव उहि पारी गा !!
धर्मराज बइठे अगुवाथे ,पासा खेले उहि दारी गा !
पासा कपट के सकुनी ढुलाते ,जाहुअर करे होशियारी गा !!
उड़ान -दाव लगाए धर्मराजे ,फसगे जाल म पांडव आजे -2
होंगे करम कारी --
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
//5//
दुरपति ला घिरलाये ,सभा बीच दुशासन गा !
भारी हसी मोर उड़त हे ,बदला लेबो गनगन गा !!
दुशासन लाये चूंदियाए हासे बैरी दुर्योधन गा !
भारी दुरपति रोये गाये ,चीख चीख कल्पन गा !!
उड़ान -दास बनगे पांडव हमर ,अब का करहि पांडव हर -2
गरजे अहंकारी --
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
करनी मा हावे लजाके दपके वीर के पासा गा
//6//
पांडव मन मुड़ी गाड़ियाके ,बइठे देख तमासा गा !
करनी मा हावे लजाके दपके वीर के पासा गा !!
दुरपति रोये गोहराके ,टूटे ओकर आशा गा
रूठे हावे किरिया खाके ,धरती का आकाशा गा
उड़ान -दुर्योधन कहे खींचो लुगरा ,करो निवस्तर निच्चट उघरा -2
हासे हावे भारी --
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
//7//
दुसासन अचरा धर झपते ,खींचे लुगरा सरसर गा !
दुरपति रोये कहा सपटे ,बैरी हासे सभा भर गा !!
लाज बचा अब लुगरा लपटे ,मुरलीधर मनोहर गा !
सभा भीतर सब हावे कपटे ,हितवा नई हे मोर बर गा !!
उड़ान -सुने गोहार तुरते आये ,छुपके हावे लुगरा हावे पुराये -2
गोवर्धन गिरधारी --
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
//8//
दुसासन गिरे थर खाथे ,बांचे दुरपति लाजे गा !
वस्तारा अवतार मा आये ,साजे भगत के काजे गा !!
दुराचार ला बंद कराये ,धृतराज हरआजे गा !
हरे राज ला पांडव पाये ,सतके झंडा साजे गा !!
उड़ान -नवरत्न मंडली जस गाये ,भुनेश्वर घलो माथ नवाये -2
शरणन हावे तुम्हारी --
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी
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गीत के अर्थ
ये गीत के मूल भाव भगवान श्रीकृष्ण ऊपर पूरा भरोसा रखे के हवय। द्रौपदी जब अपन जीवन के सबसे कठिन घड़ी म पहुंचथे, तब सभा म ओकर मदद करे वाला कोनो नई रहिथे। पांडव मन घलो जुआ के बंधन म बंधाय रहिथें। तब द्रौपदी भगवान कृष्ण ला गोहार लगाथे।
“अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी” के मतलब आय कि हे भगवान कृष्ण, अब मोर मान-सम्मान के रक्षा करव। भक्त के विश्वास ये रहिथे कि भगवान अपन सच्चा भक्त के पुकार ला जरूर सुनथें।
गीत म अहंकार, कपट, अन्याय अउ अधर्म के परिणाम घलो देखाय गे हवय। अंत म सत्य अउ धर्म के विजय होथे।
छत्तीसगढ़ी परंपरा
छत्तीसगढ़ म जस गीत मन भक्ति अउ लोक संस्कृति के महत्वपूर्ण हिस्सा आय। गांव-गांव म जस मंडली मन देवी-देवता, रामायण, महाभारत अउ धार्मिक प्रसंग ऊपर आधारित गीत गाथें।
जस गीत के खास बात ये आय कि कठिन धार्मिक कथा ला सरल छत्तीसगढ़ी बोली म गाके आम मनखे तक पहुंचाय जाथे। रात के जस, नवरात्रि, धार्मिक आयोजन, मंडली कार्यक्रम अउ गांव के भक्ति माहौल म अइसने गीत मन सुनाय बर मिलथे।
“अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी” घलो महाभारत के कथा ला छत्तीसगढ़ी लोकभाषा के भाव म प्रस्तुत करे वाला भक्ति गीत आय।
गीत की विशेषता और महत्व
- गीत महाभारत के प्रसिद्ध प्रसंग ऊपर आधारित हवय।
- छत्तीसगढ़ी लोकभाषा म धार्मिक कथा ला सरल ढंग ले बताथे।
- भगवान कृष्ण के प्रति भक्त के विश्वास दिखाथे।
- गीत म अधर्म अउ अहंकार के विरोध के संदेश मिलथे।
- द्रौपदी के पीड़ा ला भावपूर्ण ढंग ले प्रस्तुत करे गे हवय।
- जस मंडली म सामूहिक रूप ले गाये बर उपयुक्त हवय।
- गीत छत्तीसगढ़ी जस परंपरा ला मजबूत बनाय म मददगार हवय।
- गीत के मुखड़ा जल्दी याद हो जाथे।
- महाभारत के कथा ला लोकगीत के माध्यम ले नई पीढ़ी तक पहुंचाय म मदद करथे।
- गीत के मूल संदेश सत्य, धर्म अउ भगवान के शरण ऊपर आधारित हवय।
कथा – द्रौपदी के लाज अउ भगवान कृष्ण
महाभारत के कथा म पांडव मन इंद्रप्रस्थ म अपन भव्य महल बनवाथें। माया के अद्भुत कला ले बने ये महल ला देखके बहुत झन अचंभित हो जाथें। एक बेरा दुर्योधन घलो इंद्रप्रस्थ पहुंचथे। महल के बनावट अइसन रहिथे कि जिहां पानी दिखथे उहाँ जमीन रहिथे अउ जिहां जमीन दिखथे उहाँ पानी रहिथे। माया के खेल ला नई समझ पाय के दुर्योधन कई बेर भ्रमित हो जाथे।दुर्योधन के मन म पांडव मन बर पहिली ले ईर्ष्या रहिथे। महल के घटना ओकर मन के जलन ला अउ बढ़ा देथे। द्रौपदी के हंसी के प्रसंग घलो ओकर मन म बदला के भावना पैदा करथे। बाद म दुर्योधन अपन मामा शकुनि के मदद ले पांडव मन ला जुआ खेले बर बुलवाथे।शकुनि पासा खेले म माहिर रहिथे अउ कपट के सहारा ले पासा खेलथे। धर्मराज युधिष्ठिर एक-एक करके अपन धन-दौलत, राज्य अउ आखिर म अपन भाई मन तक ला हार जाथे। स्थिति अइसन बनथे कि द्रौपदी ला घलो दांव म लगाय देथे।दुर्योधन के आदेश म दुशासन द्रौपदी ला सभा म घसीट के लाथे। सभा म द्रौपदी अपन मान-सम्मान के रक्षा बर बड़े-बड़े वीर मन ला सवाल करथे, फेर कोनो ओकर सहायता बर आगे नई आथे।जब दुशासन द्रौपदी के वस्त्र खींचे लगथे, तब द्रौपदी अपन सब सहारा छोड़के भगवान श्रीकृष्ण ला पुकारथे। ओकर मन म पूरा विश्वास रहिथे कि भगवान अपन भक्त के लाज जरूर रखहीं।द्रौपदी के पुकार सुनके भगवान श्रीकृष्ण ओकर लाज बचाथें। दुशासन वस्त्र खींचत रहिथे, फेर वस्त्र खत्म नई होय। अंत म दुशासन थक जाथे। द्रौपदी के मान-सम्मान बच जाथे।
ये कथा हमन ला सिखाथे कि अहंकार, अन्याय अउ अधर्म चाहे कुछ समय बर शक्तिशाली दिखय, फेर आखिर म सत्य अउ धर्म के विजय होथे। भगवान ऊपर सच्चा भरोसा रखे वाला भक्त कठिन समय म घलो अकेला नइ होय।
इही भाव ला छत्तीसगढ़ी जस गीत “अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी” म बहुत मार्मिक ढंग ले प्रस्तुत करे गे हवय।



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