Aama Tari Amli Bagicha Tari Jhiriya || Chanda Yadav || आमा तरी अमली /चंदा यादव/पचरा जस लिरिक्स

✦✦ आमा तरी अमली /चंदा यादव/पचरा जस  ✦✦

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गीत- आमा तरी अमली

स्वर - चंदा यादव

म्यूज़िक लेबल - पारंपरिक जस 

म्यूज़िक कंपनी - sanvi sangit sargam

वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां -2

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

अंतरा -1

झिरिया नहावत माई के नथली गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां

हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां 

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

अंतरा -2

झिरिया नहावत माई के खिनवा गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां

हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां 

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

अंतरा -3

झिरिया नहावत माई के सूतिया गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां

हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां 

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

अंतरा -4

झिरिया नहावत माई के ककनी गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां

हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां 

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

अंतरा -5

झिरिया नहावत माई के करधन गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां

हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां 

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

अंतरा -6

झिरिया नहावत माई के पैंजन गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां

हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां 

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

अंतरा -7

झिरिया नहावत माई के बिछिया गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां

हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2

आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां 

हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2

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CG Jas Lyrics के अउ लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी जसगीत

➤ सुमरी सुमर के हां मैं तोर जस गांवव

➤ सरवर नहाए बर

➤ शीतला भवानी मईया मोर जिनगी सुग्घर लागे

➤ भवानी तोरे आरती

➤ कारी मा बीरबिट काली-दुकालू

➤ मोला देरी होंगे मईया तोरे सेवा मा

➤ मोर दुर्गा मईया

➤ माया के दरबार

➤ माटी के दाई दुर्गा 

गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी मं)

ये जसगीत मं मइया के पवित्र रूप अउ गांव के लोकजीवन के सुंदर चित्रण करे गे हे। गीत मं बताय गे हे कि बगीचा अउ झिरिया (छोटे जलस्रोत) के किनारे मइया स्नान करे बर जाथें। नहावत बखत मइया के गहना एक-एक करके गुम होवत जाथे—जइसे नथली, खिनवा, सूतिया, ककनी, पैंजन अउ बिछिया।

ये सिरिफ गहना गुम होय के बात नइये, बल्कि ये मइया के त्याग, सादगी अउ भक्त मन बर अपन ममता के प्रतीक आय। गीत सुनके लगथे कि मइया अपन श्रृंगार छोड़के अपन भक्त मन के दुख दूर करे बर निकले हवंय।

गीत के विशेषता:

1. लोक संस्कृति के झलक

ये गीत मं छत्तीसगढ़ के गांव, बगीचा, झिरिया अउ लोक जीवन के सुंदर वर्णन मिलथे।

2. माता भक्ति ले भरपूर

पूरा गीत मं मइया प्रति प्रेम, श्रद्धा अउ समर्पण झलकथे।

3. पारंपरिक धुन

ये जसगीत नवरात्रि, जस-जागर अउ माता सेवा मं गाये जाथे।

4. श्रृंगार अउ ममता के मेल

गीत मं मइया के गहना के वर्णन करके भक्त मन के भावनात्मक जुड़ाव ला मजबूत करे गे हे।

गीत के कथा Story in Chhattisgarhi

बहुत पुरखा जमाना के बात आय। एक छोटे गांव मं घलो एक सुंदर बगीचा रहिस, जिहां आम अउ इमली के पेड़ लहलहावत रहिन। ओही बगीचा के बीच मं एक निर्मल झिरिया रहिस, जिहां गांव वाले पानी भरे अउ पूजा करे जावत रहिन।

एक दिन गांव के कुछ महिला मन बिहान-बिहान पूजा बर निकरिन। ओ मन देखिन कि झिरिया के किनारे एक दिव्य प्रकाश चमकत हे। धीरे-धीरे सब्बो झन उहां पहुंचिन त देखिन कि माता शीतला स्वयं झिरिया मं स्नान करत हवंय।

माता के रूप अतका मनमोहक रहिस कि सब्बो भक्त मंत्रमुग्ध होगे। फेर स्नान करत-करत माता के नथली पानी मं गिर गे। फेर खिनवा, सूतिया, ककनी, पैंजन अउ बिछिया घलो एक-एक करके झिरिया मं समावत गे।

भक्त मन घबरा गिन, फेर माता मुस्कराके कहिन—

“गहना के मोल नइये, भक्त के प्रेम सबसे बड़े धन आय।”

ए बात सुनके गांव वाले समझ गिन कि सच्ची भक्ति बाहरी श्रृंगार मं नइ, बल्कि मन के श्रद्धा मं होथे। ओ दिन ले गांव मं हर साल ये जसगीत गाके माता के महिमा गाये जाथे।

मइया के ए पावन जसगीत अगर आप मन ला पसंद आय होही, त अपन परिवार अउ संगवारी मन संग जरूर साझा करव। 

जय माता दी।

सरवर नहाएं बर- कांतिकार्तिक यादव/देवी विसर्जन जस गीत

✦✦ सरवर नहाएं बर- कांतिकार्तिक यादव/देवी विसर्जन जस गीत✦✦


गीत - 
सरवर नहाएं बर 
गायक - कांतिकार्तिक यादव
गीतकार -  अजय उस्ताद जी
संगीत - ओपी देवांगन 
म्यूज़िक कंपनी - 
वेबसाईट ऑनर -कैलाश पंचारे 
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मुखड़ा 

सरवर नहाएं बर जावय यहो जावय हो मईया 

 सरवर नहाएं बर जावय हो मां 

 यहो जावय हो मईया सरवर नहाएं बर जावय हो मां

//1//

इक्कीस ब्रह्माण्ड म इक्कीस बहनिया -2

नेवता मा सबो सकलाये सकलाये हो मईया 

सरवर नहाएं बर जावय हो मां 

झूमरथे आघू पांछु छोटे बड़े देवता-2

हरियर निंबुआ चढ़हाये, चढ़हाये हो मईया

 सरवर नहाएं बर जावय हो मां

//2//

मारत हावय बईगा हा कारी पीवरी चाउर -2

दसों अंगूरी विनती सुनाये,सुनाये हो मईया 

सरवर नहाएं बर जावय हो मां 

गंगा अऊ जमुना सरसती हा उमंगे -2

लहर लहर लहराए , लहराए हो मईया

 सरवर नहाएं बर जावय हो मां

//3//

आगू पाछु रेगत हावे माता के गण हा -2

फहर फहर फहराए ,फहराए हो मईया 

सरवर नहाएं बर जावय हो मां 

चरण पखारय अजय मुड़मा चपाए-2

अपन करम सहराए,सहराए हो मईया 

 सरवर नहाएं बर जावय हो मां

//4//

पांच भगत मईया तोरे जस गाए -2

जय जय होवय तुम्हारे, तुम्हारे हो मईया

सरवर नहाएं बर जावय हो मां 

बालक बरुआ हो मईया कछु नई जाने -2

केवल शरण तुम्हारे, तुम्हारे हो मईया

 सरवर नहाएं बर जावय हो मां

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माता रानी के मनमोहक जस गीत

1. सुवा नाचे 

2.पैजनिया बाजे

3.कलशा ऊपर दियाना 

4. झुमरी तलैया 

5.नीम डारा 

6.हरियर मड़वा 

7. धरम के बात 

8. लहराए जवारा 

गीत के महत्व (Importance)

✔️ ये गीत शीतला/दुर्गा माता के स्नान परंपरा से जुड़ाय हे

✔️ इसमें 21 शक्ति, प्रकृति अउ भक्त के एकता दिखे

✔️ गांव के परंपरा म ये गीत जुड़वास, जसगीत, पूजा समय गाये जाथे

✔️ ये गीत सिखाथे:

भक्ति में शुद्धता

प्रकृति के सम्मान

माता के प्रति पूर्ण समर्पण

👉 ये सिर्फ गीत नई, एक पूरा आध्यात्मिक अनुष्ठान हे

“सरवर नहाएं बर जावय हो मईया” ये लाइन सिरिफ एक घटना नई, बल्कि आत्मा के शुद्धिकरण के प्रतीक हे।

इहाँ सरोवर (सरवर) मतलब बाहरी पानी नई, बल्कि मन के भीतर के पवित्रता घलो होथे।

जब माता “नहाय बर जाथे”, त असल म वो: 👉 दुनिया के नकारात्मकता, दुख अउ रोग ला धो के दूर करथे

🔹 छुपा आध्यात्मिक संदेश

✔️ इक्कीस बहनिया (21 शक्तियां)

→ ये मानव जीवन के 21 प्रकार के दोष/ऊर्जा के संतुलन के प्रतीक हे

✔️ नींबू चढ़ाना

→ नेगेटिव ऊर्जा काटे के संकेत

✔️ बैंगा (मेंढक) के आवाज

→ प्रकृति बता देथे कि बदलाव आने वाला हे

✔️ गंगा-जमुना-सरस्वती

→ शरीर, मन अउ बुद्धि के शुद्धिकरण

✔️ माता के गण

→ जीवन के वो अदृश्य सहायक जेन हमन देख नई पाथन

✔️ बालक बरुआ कुछ नई जाने

→ सच्चा भक्त वो हे, जेन अपन आप ला खाली मानथे

👉 पूरा अर्थ एक लाइन म:

ये गीत सिखाथे कि जब मन, प्रकृति अउ भक्ति एक साथ जुड़थे, तब जीवन के हर दुःख धो जाथे अउ माता खुद मार्ग दिखाथे।

गीत के महत्व (Importance)

✔️ ये गीत शीतला/दुर्गा माता के स्नान परंपरा से जुड़ाय हे

✔️ इसमें 21 शक्ति, प्रकृति अउ भक्त के एकता दिखे

✔️ गांव के परंपरा म ये गीत जुड़वास, जसगीत, पूजा समय गाये जाथे

✔️ ये गीत सिखाथे:

भक्ति में शुद्धता

प्रकृति के सम्मान

माता के प्रति पूर्ण समर्पण

👉 ये सिर्फ गीत नई, एक पूरा आध्यात्मिक अनुष्ठान हे

कथा छत्तीसगढ़ी 

बहुत पुराना समय के बात हे। एक छोटे गांव म हर साल भयंकर बीमारी फैल जाथे। गांव वाले डरे रहंय।

एक दिन एक बुजुर्ग महिला सपना म देखिस कि

माता सरोवर म स्नान करे बर आही, लेकिन गांव वाले स्वागत नई कर पावत हें।

दूसरे दिन वो गांव वाले मन ला बुलाके कहिस: 👉 “अगर तुमन माता के सरवर स्नान के तैयारी करहू, त गांव बच जाही”

गांव वाले मिलके:

सरोवर साफ करिन

नींबू, फूल चढ़ाइन

जसगीत गाइन

जइसे ही वो गीत गूंजे: “सरवर नहाएं बर जावय हो मईया…”

अचानक:

हवा सुगंधित होगे

पानी चमक उठिस

मेंढक, पक्षी सब आवाज करे लगिन

रात म माता प्रकट होइस अउ कहिस: 👉 “जहां भक्ति सच्चा होथे, मैं खुद आथों”

उस दिन के बाद: ✔️ गांव म बीमारी खत्म होगे

✔️ हर साल ये गीत परंपरा बन गे

👉 आज भी मान्यता हे कि ये गीत गाये जाथे,

माता सच म सरोवर म स्नान करे आथें

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✦✦  माताा रानी आप सबकी मनोकामना पूर्ण करें  ✦✦

देवी दुर्गा मईया /दिवेश साहू /Chhattisgarhi विसर्जन jas lyrics

✦✦ देवी दुर्गा मईया/दिवेश साहू/छत्तीसगढ़ी जस लिरिक्स /✦✦

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गीत-हे जगतारण देवी दुर्गा मईया 

गायक -दिवेश साहू

गीतकार - गौतम गुरु जी 

 म्यूजिक कंपनी -LKS  video

वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे 

मुखड़ा 

 हे जगतारण देवी दुर्गा मईया -- हे जगतारण देवी दुर्गा मईया-2 

उड़ान - कइसे करबो दाई तोर विदाई ,लागत हावे भारी करलाई-2 

जोत जंवारा हावे उसलईया---

हे जगतारण देवी दुर्गा मईया

 हे जगतारण देवी दुर्गा मईया -- हे जगतारण देवी दुर्गा मईया-2 

अंतरा -1 

जब जब तोला देखव मईया तोरे मुहरन फुले ओ माँ 

नजरे नजर मा झूले तैहर ,अंतस कईसे भूले ओ माँ 

उड़ान -जइसे बेटी तीजा पहुना आथे ,जोड़ मया ला ओहर चले जाथे 

अइसन दया मया के हस जगइया 

 हे जगतारण देवी दुर्गा मईया

 हे जगतारण देवी दुर्गा मईया -- हे जगतारण देवी दुर्गा मईया-2 

अंतरा -2  

नवदिन पूजा वरत करे हव ,दसमी के तोला पठोहू ओ माँ 

चलगे पुरखा के अजब चलागन सगरी म तोला सरोहु ओ माँ 

उड़ान -कईसन कईसन रचना ला बनाये ,नेग जोंग  गढ़के रस्दा ला बताये 

जान तिहि हर दाई जनम देवईया 

 हे जगतारण देवी दुर्गा मईया

 हे जगतारण देवी दुर्गा मईया -- हे जगतारण देवी दुर्गा मईया-2 

अंतरा -3   

माता बिदाई के आथे बेरा मन हां मोर सुरर्थे ओ माँ 

काबर आथे ये दिन बादर रहिके जिवरा जूरथे ओ माँ 

उड़ान -छाती फटे नैना आँशु ढारे ,तोर बिना अब करहि कोन दुलारे  

काहा पाबे गौतम अचरा के छईया 

 हे जगतारण देवी दुर्गा मईया

 हे जगतारण देवी दुर्गा मईया -- हे जगतारण देवी दुर्गा मईया-2 

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✦✦ शेरावाली जी के जसगीत के लिंक नीचे दे हावे जाके क्लिक करव✦✦

👉 आवो देवी दुर्गा हमरो दुवरिया जसगीत

👉 पतली कमर माता दुर्गा के 

👉 हे मैया माता सेवा मा चले आबे जसगीत

👉 देवबस्तर ला काबर छोड़े 

👉 दुर्गा दाई के अंगना मा बोयेव जंवारा जसगीत

👉 लहराये जंवारा हरियर हरियर जसगीत

👉 घर घर दिया माता 

👉 आरुग हे कलशा दाई

👉 अजब सजे हे बम्लाई 

✦✦ गीत अर्थ✦✦

ये जसगीत म भक्त मन दुर्गा मईया के विदाई बेरा के दुख ला बतावत हें।

नव दिन तक पूजा, जंवारा अउ जोत जलाके मईया ला घर म बिठाय जाथे, फेर दसमी के दिन बिदाई के बेरा आथे त भक्त मन के मन भारी हो जाथे।

गीत म मईया ला बेटी जइसने मान के बताय गे हवय — जइसे तीजा म बेटी घर आथे अउ फेर विदा हो जाथे, वइसने दुर्गा मईया घलो नव दिन रहिके अपन धाम ल चल देथे।

भक्त कहिथे कि तोर बिना कोन दुलार करही, तोर अचरा के छईया काबर छोड़ के जात हस।

इ गीत म मया, भक्ति अउ बिदाई के गहिर भाव झलकथे।

✦✦ विशेषता✦✦

ये गीत दुर्गा बिदाई के भाव म आधारित हवय

नवदुर्गा पूजा अउ जंवारा परंपरा के वर्णन हवय

बेटी के बिदाई से तुलना करके भावुक बनाय गे हवय

जसगीत गावे के बेरा माहौल भावुक हो जाथे

ग्रामीण छत्तीसगढ़ी संस्कृति के झलक मिलथे

भक्ति अउ मया के सुंदर मेल हवय

जंवारा जोत के उल्लेख खास बनाथे

दसमी विदाई के परंपरा ला दिखाथेवो

✦✦ कहानी छत्तीसगढ़ीमें✦✦

नवरात्रि के पहिली दिन गांव म बाजा गूंजिस। घर-घर म जंवारा बोये गिस, जोत जलाय गिस अउ भक्त मन दुर्गा मईया ला निमंत्रण देइन।

गांव के मंदिर म सजावट होइस, लाल चुनरी, नारियल, फूल म पूरा माहौल भक्ति म डूब गिस।

नव दिन तक गांव के महिलामन बिहान ले संझा तक पूजा करंय। जसगीत गूंजत रहिस — “हे जगतारण देवी दुर्गा मईया…”

छोटे-छोटे लइका मन घलो हाथ जोड़े मईया ला प्रणाम करंय। सबो मन के मन म एकेच भावना रहिस — मईया घर म आय हें।

दिन गुजरत गिस। नवमी बीत गिस। दसमी के बिहान जइसेच आइस, सबके मन भारी होगे।

जंवारा ऊँच होगे रहिस, जोत अब्बड़ उज्जर जलत रहिस, फेर सबो जानत रहिन — आज बिदाई के बेरा आय हवय।

महिलामन रोवत-रोवत आरती करिन। कोनो कहत रहिस – “मईया, अगला बरस जल्दी आना”

कोनो कहत रहिस – “हमर घर म सुख-शांति बनाय रखना”

जइसे बेटी तीजा म आथे अउ फेर विदा होथे, वइसने मईया घलो अपन धाम ल जावत हें।

जंवारा लेके गांव वाले नदी तीर गिन। ढोलक बजत रहिस फेर मन म उदासी रहिस।

जंवारा विसर्जन के बेरा सबो के आंखी म आंसू आ गे।

कोनो धीरे ले गुनगुनाइस — “कइसे करबो दाई तोर विदाई…”

मईया के बिदाई होइस, फेर गांव म भक्ति के रंग छोड़ गिस।

सबो मन एकेच आस धरिन — अगला नवरात्रि म मईया फिर आही।


गंगा अस्नान्दे गीत – पंचराम मिर्झा | छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स, अर्थ और कहानी

✦✦ गंगा असंस्नादे/पंच राम मिर्झा/पचरा गीत लिरिक्स✦✦

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गीत-गंगा अस्नान्दे

गायक - पंचराम मिर्झा, दिलीप मिर्झा

गीत लेबल-पारंपरिक , पचरा गीत

म्यूज़िक कंपनी - सुंदरानी 

वेबसाईट ऑनर - कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

येदे चले महामाई मार झकोरत गंगा अस्नान्दे,

 मोर चले भवानी झूमरत झूमरत गंगा अस्नान्दे।

(1)

हरियर हरियर पोलका पहिरे, हरियर पहिरे लुगरा-2

उड़ान -  येदे हरियर हरियर हाथ के चुरी खन खन खनके हो रे हो, 

येदे चले महामाई मार झकोरत गंगा अस्नान्दे,

 मोर चले भवानी झूमरत झूमरत गंगा अस्नान्दे।

(2)

कारी कारी भौह दिखे तोर, कारी काजर अंजाये -2

उड़ान - येदे कनिहा ले तोर कारी कारी चुंदी छारियाए ए हो, 

येदे चले महामाई मार झकोरत गंगा अस्नान्दे, 

मोर चले भवानी झूमरत झमरत गंगा अस्नान्दे।

(3)

लाली एड़ी के माहुर, लाली माथ के टिकली चमके -2

उड़ान - ये दे मांग में वो तोर लाली लाली सेंदुर भराए ए हो, 

ये दे चले महामाई मार झकोरत गंगा अस्नान्दे, 

मोर चले भवानी झूमरत झूमरत गंगा अस्नान्दे।

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जन्मों प्रकार के पचरा जस गीत नीचे दे हावे जाके क्लिक करव 

महराज कुमार

कलशा ऊपर दियाना

झूलना झूलन बर

तोर पांव के घुंघरू 

भोला जोते नागर मां 

गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी मा)

🔹 मुखड़ा के अर्थ:

एमा भक्त माता महामाई ला गंगा स्नान बर जात देखथे। माता झूमत-झूमत, खुश होके गंगा नहाय बर जाथे। ये दृश्य भक्ति अउ आनंद ले भरपूर हवय।

🔹 अंतरा 1 के अर्थ:

माता हरियर रंग के लुगरा अउ पोलका पहिरे हवे, हाथ म चूरी खनखनात हवय। ये सब खुशी, समृद्धि अउ सुंदरता के चिन्ह हवय।

🔹 अंतरा 2 के अर्थ:

माता के कारी भौंह अउ काजर ले सजे आंखी, बहुत सुंदर दिखत हवय। उनकर रूप देखके भक्त मन मोहित हो जाथें।

🔹 अंतरा 3 के अर्थ:

माता के एड़ी मा माहुर अउ माथा मा टिकली चमकत हवय, मांग म सिंदूर भराय हवय। ये सब सुहाग अउ शक्ति के प्रतीक हवय।

🔶 🌼 गीत के महत्व

गंगा अस्नान्दे जस गीत म माता के गंगा स्नान के महत्व ला बताय गे हवय। गंगा स्नान हिंदू धर्म म बहुत पवित्र माने जाथे। ये गीत हमन ला सिखाथे कि माता के भक्ति ले जीवन म सुख, शांति अउ समृद्धि मिलथे।

ये गीत गांव-गांव म नवरात्रि अउ जगराता म गाये जाथे, जेन ले माहौल भक्तिमय हो जाथे

🔥 गंगा अस्नान्दे – एक भक्ति भरी कहानी

एक समय के बात आय, छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव म लोगन मन बहुत श्रद्धा ले महामाई के पूजा करत रहिन। गांव म हर साल नवरात्रि के समय बड़े धूमधाम ले जस गीत गाये जाथे।

ओही गांव म रामसाय नाम के एक गरीब किसान रहिस। वो बहुत सरल अउ सच्चा मनखे रहिस। वो हर दिन महामाई के पूजा करिस अउ अपन मन के बात माता से कहिस।

एक दिन रामसाय सपना म देखिस कि महामाई खुद गंगा स्नान बर जात हवे। माता हरियर लुगरा पहिरे रहिन, हाथ म चूरी खनखनात रहिस अउ वो झूमत-झूमत गंगा तीर जावत रहिन।

सपना देखके रामसाय के मन म बहुत खुशी होइस। वो सोचिस – “अगर मैं माता के गंगा स्नान के दर्शन करहूं, त मोर जीवन धन्य हो जाही।”

दूसर दिन वो गंगा तीर जाय के ठान लेइस। वो बिना कुछ सोचे, लंबा सफर तय करत गंगा पहुंच गे।

गंगा तीर म बहुत भीड़ रहिस। सबो मनखे गंगा स्नान करत रहिन अउ माता के जयकारा लगावत रहिन।

रामसाय चुपचाप एक कोना म बैठ के माता के ध्यान करय लागिस। अचानक ओकर सामने एक अद्भुत प्रकाश दिखाई दिस।

ओ प्रकाश के बीच म महामाई प्रकट हो गइन। वो हरियर लुगरा पहिरे रहिन, माथा म टिकली चमकत रहिस अउ मांग म सिंदूर भराय रहिस।

माता झूमत-झूमत गंगा म प्रवेश करिन अउ स्नान करिन। ओ समय पूरा वातावरण दिव्य होगे।

रामसाय के आंखी ले आंसू बहाय लागिस। वो माता के चरण म गिर गे अउ कहिस – “माई, मोला अपन भक्ति म लगा लेव।”

माता मुस्कुराइन अउ कहिन – “जो सच्चा मन ले मोर भक्ति करथे, ओला मैं खुद दर्शन देथंव।”

ए कहिके माता अंतर्धान हो गइन।

रामसाय गांव लौट के सब ला ये बात बताइस। धीरे-धीरे पूरा गांव म ये कथा फैल गे।

तब ले हर साल गांव म गंगा अस्नान्दे जस गीत गाये जाय लागिस।

लोगन मन मानथें कि जेन मन सच्चा भक्ति ले ये गीत गाथें, ओखर जीवन म सुख-शांति जरूर आथे।

🔶 🎤 गायक परिचय

पंचराम मिर्झा अउ दिलीप मिर्झा छत्तीसगढ़ी जस गीत के प्रसिद्ध गायक हवंय। इनकर गाये भजन मन आज घलो गांव-गांव म बहुत लोकप्रिय हवय।

🔶 🔚 निष्कर्ष

गंगा अस्नान्दे जस गीत केवल एक भजन नई, बल्कि भक्ति अउ आस्था के प्रतीक हवय। ये गीत हमन ला सिखाथे कि सच्चा मन ले माता के भक्ति करे ले जीवन सफल हो जाथे।।


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गीत -फूल बोले मलनिया

गायक -पंचू यादव 

गीतकार -परमानंद कठोलिया 

वेबसाइट www. cgjaslyrics .com 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे  

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मुखड़ा 

फूल बोले मलनिया बगिया में सुने सुन हां

फूल बोले मलनिया बगिया में सुने सुन हां 

उड़ान- बगिया में सुने सुन हां...आ

फूल बोले मलनिया बगिया में सुने सुन हां

फूल बोले मलनिया बगिया में सुने सुन हां 

अंतरा-1

संझा डोहरू बिहने फुलथव मझनिया कुमलायेव

निशदिन जिथव निशदिन मरथव अटल कुंवार कहायेव

अटल कुंवार कहायेव मालिन अटल कुंवार कहायेव 

अटल कुंवार कहायेव मालिन अटल कुंवार कहायेव 

उड़ान - झन तोड़हू मालिन मोला...हो..ओ ओ

झन तोड़हू मालिन मोला

बगिया में चुने चुन हां....आ..आ

फूल बोले मलनिया बगिया में सुने सुन हां

अंतरा-2

मोर महक में पवन मोहागे चौदह भुवन बगराये 

देवी देवता परसन होगे काला तै चघाये 

काला तै चघाये मालिन काला तै चघाये 

काला तै चघाये मालिन काला तै चघाये 

उड़ान - जूठा करे हे भौंरा हो...हो..ओ ओ

जूठा करे हे भौंरा

बगिया में भुने भुन हां....आ..आ

फूल बोले मलनिया बगिया में सुने सुन हां

अंतरा-3

भाग माणिक गल हार बनेव मुर्दा के बनेव कफ़न 

काटा खूंटी म मैहा जड़े हव झन करहूं मोर जतन 

झन करहूं मोर जतन मालिन झन करहूं मोर जतन 

झन करहूं मोर जतन मालिन झन करहूं मोर जतन

उड़ान - परमानंद कठोलिया हो...हो..ओ ओ

परमानंद कठोलिया

लिखे हे गुणें गुण हां....आ..आ

फूल बोले मलनिया बगिया में सुने सुन

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गीत के अरथ (Arth)

ये गीत मं फूल मन मलिन (मालिन) ला कहिथें – "हमर ला झन तोड़व, काबर कि हमन अपन सुगंध अऊ सुंदरता ले जम्मो संसार ला सजावत हवन। हमर जिनगी दया, करुणा अऊ जीवन के असली मोल ला बतावत हे।"

गीत के महत्तम (Mahatw)

1.मनखे अऊ प्रकृति के अपन अपन संबंध ला देखाय हे।

2.बगिया अऊ फूल मनचो लोकजीवन के सांकेतिक चिन्ह हें।

3.जीवन के नश्वरता अऊ संयम के गहिर बात ला उजागर करे हे।

4.छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति अऊ परंपरा के अमर गीत हे।

गीत के विशेषता (Visheshta)

1.गा-गुन गुनाय जइसे छत्तीसगढ़ी बोली मं रचाय गे हे।

2.बगिया, फूल अऊ खुशबू के प्रतीक ले भाव प्रकट करे हे।

3.लोकगीत के पारंपरिक "उड़ान" (टेक) मं गेय गे हे।

गायक के परिचय (Gayak Parichay) – पंचू यादव

पंचू यादव छत्तीसगढ़ी पारम्परिक लोक जस गायन के सुर सम्राट हवंय। गांव-गांव मं जब नवरात  मा  आवाज हा हर हेर दुर्गा पंडाल में सुनाई देथे। पंचू यादव राजनाँदगाँव जिला चावेली  रहने वाला हरे। एकर  स्वर मं लोकधुन, सुगमता अऊ अपनापे के पहचान मिलथे।

गीतकार के परिचय (Gitkaar Parichay) – परमानंद कठोलिया

परमानंद कठोलिया छत्तीसगढ़  के राजनांदगांव के  रहने वाला परसिद्ध गीतकार हवंय। इनके रचना मं सरल भाषा, लोकजीवन के गहिर झलक अऊ सामाजिक संदेश मिलथे। "फूल बोले मलनिया" उनकर एक बढ़िया सृजन आय।छत्तीसगढी जस गीतकार में एकर नाम अमर हे। कठोलिया अधिकांश गायक बर गीत रचना करे। गे हावे।