✦ सुमरी सुमर के हां | सुमित्रा ध्रुव | छत्तीसगढ़ी पचरा जसगीत लिरिक्स ✦

✦ सुमरी सुमर के हां | सुमित्रा ध्रुव | छत्तीसगढ़ी पचरा जसगीत लिरिक्स ✦

मैं तोर जस गांवव सुमिरी सुमर के | सुमित्रा ध्रुव dhruw.shalini netaam | Chhattisgarhi jas get| TKN STUDIO

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गीत-सुमरी सुमर के हां

⁴गीत लेबल - पचरा जस 

स्वर-सुमित्रा ध्रुव 

म्यूज़िक कंपनी - T.K.N Studio 

वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

सुमरी सुमर के हां मैं तोर जस गांवव सुमरी सुमर के हां -2

मैं तोर जस गांवव सुमरी सुमर के हां -2

अंतरा -1

गांव के ठाकुर देव ला सुमिरव, सुमिरव शीतला मईया ला -2

सुमिरव शीतला मईया हो माता सुमिरव शीतला मईया ला

गांव के ठाकुर देव ला सुमिरव, सुमिरव शीतला मईया ला -2

गांव के महामाई ला सुमिरव सुमरी सुमर के हां 

 मैं तोर जस गांवव सुमरी सुमर के हां-2

अंतरा -2

राम ला सुमिरव, लक्ष्मण सुमिरव सुमिरव चारों भईया ला -2

सुमिरव चारों भईया हो माता सुमिरव चारों भईया ला

राम ला सुमिरव, लक्ष्मण सुमिरव सुमिरव चारों भईया ला 

अंजनी के हनुमान ला सुमिरव सुमरी सुमर के हां 

 मैं तोर जस गांवव सुमरी सुमर के हां-2

अंतरा -3

ब्रह्मा ला सुमिरव, विष्णु ला सुमिरव सुमिरव श्री कैलाशे ला -2

सुमिरव श्री कैलाशे ला हो माता सुमिरव सुमिरव श्री कैलाशे ला

ब्रह्मा ला सुमिरव, विष्णु ला सुमिरव सुमिरव श्री कैलाशे ला 

गौरी के गणेश ला सुमिरव सुमरी सुमर के हां 

 मैं तोर जस गांवव सुमरी सुमर के हां-2

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✦ मनभावन जस गीत लिरिक्स✦

                                        👉 तीन पतियां बेल के महादेव | सावन भक्ति जसगीत लिरिक्स

👉 डग डमरू बाजे डगरे-डगरे डग हा | शिव भक्ति जसगीत

👉 गरजत आये महामाया करताल वाले | शक्तिमय जसगीत

👉 हे जगतारण देवी दुर्गा मईया | विदाई जसगीत लिरिक्स

👉 दाई तोर अचरा मा फुले गजरा | भाव भक्ति जसगीत

✦✦ अर्थ ✦✦

ये जसगीत म गायक कहत हे कि वो हर देवी-देवता ला सुमर-सुमर के माता के जस गावय। वो सबसे पहले गांव के ठाकुर देव, शीतला मईया अउ महामाई ला याद करथे।

फिर राम-लक्ष्मण अउ चारों भइया के नाम लेथे, हनुमान जी के स्मरण करथे।

आखिर म ब्रह्मा-विष्णु अउ कैलाशपति शिव जी के नाम लेके गौरी पुत्र गणेश ला सुमरथे।

मतलब ये गीत म पूरा देवी-देवता के आह्वान करके माता के जस गाये जाथे, ताकि पूजा सफल होय अउ गांव म सुख-शांति बने रहय।

विशेषता 

ये पारंपरिक छत्तीसगढ़ी जसगीत हे

हर अंतरा म अलग-अलग देवी देवता के स्मरण

गांव के लोकदेवता ठाकुर देव अउ महामाई के उल्लेख

राम-हनुमान अउ शिव परिवार सबके एक साथ पुकार

पूजा, जगराता अउ जस कार्यक्रम म गाये जाथे

कहानी

एक गांव म हर साल माता के जस गाये जाथे। गांव के लोगन सब झन संझा होतेच चौरा म जुट जाथें। ढोलक, मंजीरा अउ झांझ के आवाज गूंज उठथे।

गांव के बुजुर्ग गायक गाना सुरू करथे –

"सुमरी सुमर के हां मैं तोर जस गांवव..."

सबसे पहले वो गांव के ठाकुर देव ला सुमरथे। काबर कि गांव के रखवारी ठाकुर देव करे हे। फेर शीतला मईया ला याद करे जाथे ताकि गांव म बीमारी नई आवय।

फेर गायक कहिथे – राम ला सुमिरव, लक्ष्मण सुमिरव।

गांव के लोगन हाथ जोड़ के राम दरबार ला याद करथें। हनुमान जी के नाम लेताच माहौल म भक्ति अउ बढ़ जाथे।

थोड़ी देर बाद गायक ब्रह्मा, विष्णु अउ कैलाशपति शिव के नाम लेथे।

सब लोग "जय हो" बोलथें।

फेर गणेश जी ला सुमर के गाना पूरा करथे।

गांव के बूढ़ा कहिथे –

"जब तक सब देवता ला याद नई करबो, तब तक पूजा पूरा नई होवय"

ये सुनके सब मन झूम उठथें अउ माता के जस गूंज उठथे।

रात भर भक्ति के माहौल बने रहिथे अउ गांव म सुख-शांति के कामना करे जाथे।


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