हे मईया दुर्गा महरानी /लोकेश्वरी सेन /cgjaslyrics

हे मईया दुर्गा महरानी – पूरा छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स

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गीत -हे मईया दुर्गा महरानी 

गायिका - लोकेश्वरी सेन 

गीतकार - धनराज निर्मलकर 

यूट्यूब -dks studio video 

वेबसाइट- www.cgjaslyrics .com 

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मुखड़ा 

हे मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ -2 

उड़ान - तोर नाव ला सुमर सुमर के -2 

चरण ला पखारव हो मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ

 हे मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ 

अंतरा -1 

सुरहिन गईया के गोबर मा सुघ्घर अंगना लीपावन माँ 

चोवा चाउर पिसान म मईया अंगना चौक पुरावन माँ 

उड़ान - फूल काश के लोटा मा दाई -2 

निर्मल जल लावव हो मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ

 हे मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ

अंतरा -2 

अंग फूल चघाके हो मईया हुम् धुप जलायेंन माँ 

कुमकुम बंदन लगाके दाई अगर बत्ती जलायेन माँ 

उड़ान - धरम के दियना धरम के बाती  -2 

सत के दियना हो मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ

 हे मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ

अंतरा -3 

सुमर सुमर के झूमर झूमर के आरती उतारन माँ 

भूलचूक ला माफी करबे नेमधेम नई जानन माँ 

उड़ान - धनराज संग तोर वो दाई  -2 

जस महिमा ला गावव हो मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ

 हे मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ

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गीत के भावार्थ

ए गीत मं भक्त माता दुर्गा ले अपन भक्ति स्वीकार करे के अरज करत हे। भक्त माता के नाव ला सुमरत-सुमरत वोकर चरण ला पखारथे अउ बड़े श्रद्धा ले आरती उतारथे।

गीत मं छत्तीसगढ़ी घर-आंगन के पूजा परंपरा के सुंदर वर्णन करे गे हे। गोबर ले अंगना लीपना, चोवा-चाउर ले चौक पुरना, फूल चढ़ाना, धूप-अगरबत्ती जलाना, कुमकुम-बंदन लगाना अउ दिया बारना जइसन परंपरा मन ए गीत मं दिखाई देथे।

अंत मं भक्त माता ले अपन भूल-चूक बर माफी मांगथे अउ धरम अउ सत के राह मं चले के भाव रखथे। माता के जस-महिमा गाके वो अपन भक्ति ला माता के चरण मं समर्पित करथे।

गीत के खासियत

(1)ए गीत के भाषा सरल अउ मिठास भरे छत्तीसगढ़ी आय।

(2)गीत मं माता दुर्गा के प्रति गहिर भक्ति के भाव हे।

(3)छत्तीसगढ़ के गांव-गंवई के पूजा परंपरा के झलक मिलथे।

(4)गोबर ले अंगना लीपना अउ चौक पुरना जइसन लोक परंपरा के उल्लेख हे।

(5)फूल, धूप, अगरबत्ती, कुमकुम अउ दिया के माध्यम ले माता के पूजा करे के भाव हे।

(6)धरम अउ सत के राह मं चले के संदेश मिलथे।

(7)माता के जस-महिमा गाए के परंपरा ले जुड़े होय के सेती एला जस गीत के रूप मं देखे जा सकथे।

छत्तीसगढ़ी संस्कृति संग गीत के नाता

ए गीत के खास बात ये आय के एमा माता दुर्गा के भक्ति के संग-संग छत्तीसगढ़ के माटी अउ लोक परंपरा के झलक घलो मिलथे।

“गोबर मा अंगना लीपावन”, “चोवा चाउर ले चौक पुरावन”, “फूल चढ़ाना”, “धूप जलाना”, “कुमकुम-बंदन लगाना” अउ “धरम के दियना” जइसन पंक्ति मन गांव के पारंपरिक पूजा-पाठ के याद दिलाथे।

छत्तीसगढ़ मं माता के जस गाए के अपन अलग परंपरा हे। गांव के जस मंडली मन माता के महिमा गावत हें अउ भक्ति के माहौल बनाथें। ए गीत घलो ओही भक्ति अउ लोक परंपरा के भाव ला अपन मं समेटे हुए हे।

गायिका के जानकारी

ए गीत के गायिका लोकेश्वरी सेन हें। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, “हे मईया दुर्गा महरानी” गीत ला वोमन अपन आवाज मं प्रस्तुत करे हें।

गीतकार के जानकारी

ए गीत के गीतकार धनराज निर्मलकर हें। गीत के आखिरी अंतरा मं “धनराज संग तोर वो दाई” के उल्लेख घलो मिलथे।

मातारानी के सूंदर जस गीत 

  1. तोर रूप बिकट विकराला 
  2. तोर दया ले माँ अम्बे
  3. मोर चले माँ दुर्गा
  4. जब काली चरणजुग हां 
  5. माता सती भवानी ओ
  6. भगवती भवानी हां 
  7. तोर डंडा शरण पखारव 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. “हे मईया दुर्गा महरानी” कइसन गीत आय?

2. ए गीत के गायिका कोन आय?

3. ए गीत के गीतकार कोन आय?

4. ए गीत मं काकर भक्ति करे गे हे?

5. ए गीत मं छत्तीसगढ़ी संस्कृति के झलक कइसे मिलथे?

CG Jas Lyrics – के. के. पंचारे

CG Jas Lyrics मं छत्तीसगढ़ी जस गीत, माता के भक्ति गीत, आरती, पचरा अउ छत्तीसगढ़ के लोक परंपरा ले जुड़े गीत के बोल अउ जानकारी प्रस्तुत करे जाथे।

हो मईया चंडिका हो दुर्गा अंबिका आरती उतारव दाई तीनों जुवार | खुशबू साहू |

CG JAS GEET। हो मईया चंडीका। खुशबू साहू जस गीत.jpg

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गीत - हो मईया चंडिका 

स्वर - खुशबू साहू 

म्यूज़िक लेबल-आरती जस लिरिक्स 

यूट्यूब - अमरैया स्टूडियो 

वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

हो मैया चंडीका हो दुर्गा अंबिका आरती उतारव दाई तीनों जुवार।

 हो मैया चंडीका हो दुर्गा अंबिका, आरती उतारव दाई तीनों जुवार ॥

अंतरा-1

पबरित गंगा के पानी ले...... येहो मोर मैया तोरे चरण पखारव वो।

 मखमलीया वस धर ले दाई...... येहो मोर मैया पंउरी के पानी सुखावंव वो।

 चंदन लाली तिलक सार के, फूलवा के माला पहिरावंव ,

हो मैया चंडीका हो दुर्गा अंबिका, आरती उतारव दाई तीनों जुवार ॥

अंतरा-2

हूम धूप सुगंध उड़ावंव........येहो मोर मैया केसर अगर जलावंव वो।

थारी भर किसम किसम के.......येहो सोर मैया मेवा मिश्री चड़ावंत

धौरी गईया के दूध तीर ले ओकर भोग लगावव 

हो मैया चंडीका हो दुर्गा अंबिका, आरती उतारव दाई तीनों जुवार ॥

अंतरा -3

नवकल्शा नव बाती बरके ........येहो मोर मैया जोत जलावव वो

मने मन मंतर ला पढ़के..........येहो मोर मैया हिर्दे नैनन बसायेव वो

नवदीन राती सेवा करेव मां भव सागर नहकादे 

हो मैया चंडीका हो दुर्गा अंबिका, आरती उतारव दाई 

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गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी म)

"हो मईया चंडिका हो दुर्गा अंबिका" एक सुंदर भक्ति रस ले भरपूर छत्तीसगढ़ी जसगीत आय। ए गीत म भक्त अपन मन, वचन अउ कर्म ले माता चंडिका के सेवा करे के भावना व्यक्त करथे।

गीत के मुखड़ा म भक्त माता के आरती उतारत तीनों लोक के मंगल, सुख-समृद्धि अउ शांति के कामना करथे।

पहिली अंतरा म गंगा जल ले माता के चरण धोके, मखमली वस्त्र पहनाके, चंदन तिलक अउ फूल के माला चढ़ाके अपन श्रद्धा प्रकट करथे।

दूसर अंतरा म धूप, अगरबत्ती, केसर, मेवा, मिश्री अउ गाय के दूध के भोग लगाके माता के प्रसन्न करे के भावना दिखाय गे हवय।

तीसर अंतरा म नवकलश, नव बाती जलाके, मंत्र जाप करत माता ला हृदय म बसाय के बात कहे गे हवय। भक्त नौ दिन तक सेवा करके माता ले भवसागर ले पार लगाय के प्रार्थना करथे।

गीत के महत्व

ए जसगीत नवरात्रि, जंवारा, माता सेवा, जस जागरण, आरती अउ देवी भजन कार्यक्रम बर बहुत उपयुक्त आय।

ए गीत बताथे कि सच्चा भक्ति म धन-दौलत नइ, बल्कि साफ मन, श्रद्धा अउ विश्वास के सबसे जादा महत्व होथे।

कहानी (छत्तीसगढ़ी)

एक गाँव म कमला नाम के एक गरीब महिला रहय। ओकर घर म धन-दौलत नइ रहिस, फेर माता चंडिका ऊपर अटूट भरोसा रहय। हर साल नवरात्रि आवत ही वो अपन घर के कोती साफ-सफाई करके एक छोटकुन मंदिर सजाथे।

एक दिन वो सोचिस—"ए साल माता के आरती कुछ अलग ढंग ले करहूँ।"

सुबह-सुबह नदी ले पानी लानिस। वो पानी ला गंगा समान पवित्र मानके माता के चरण म अर्पित करिस। घर म रखे साफ लाल कपड़ा ला माता के ओढ़ाइस। जंगल ले लाय सुगंधित फूल ले सुंदर माला बनाइस।

आरती करत समय वो गावत रहिस—

"हो मईया चंडिका हो दुर्गा अंबिका, आरती उतारव दाई तीनों जुवार…"

गीत सुनके गाँव के अउ मनखे घलो आ गिन। सबो झिन मिलके माता के जयकारा लगाइन।

दूसर दिन कमला अपन खेत ले लाय धान बेचके थोड़ा मेवा, मिश्री अउ अगरबत्ती किनिस। गाय के दूध ले खीर बनाके माता ला भोग लगाइस।

गाँव के बुजुर्ग कहिन—"माता धन नइ, मन के भक्ति देखथे।"

तीसर दिन ले गाँव के सब महिला घलो रोज माता के सेवा करे लगिन। मंदिर म अखंड ज्योति जलाय गीस। नौ दिन तक भजन, जसगीत अउ आरती चलत रहिस।

नवमी के दिन पूरा गाँव एक संग आरती गाइस। वातावरण भक्तिमय होगे। सबके मन म शांति भरगे।

कुछ दिन बाद गाँव म अच्छी बरसात होइस। खेत लहलहा उठिस। किसान मन खुश होगिन। गाँव म बीमारी कम होगे अउ आपसी प्रेम बढ़गे।

कमला कहिस—"ए सब माता चंडिका के कृपा आय। जिहाँ सच्चा विश्वास रहिथे, उहाँ माता जरूर आशीर्वाद देथे।"

तब ले गाँव के लोग हर नवरात्रि एही जसगीत गाके माता के आरती उतारथें। आज घलो ए परंपरा चलत आवत हवय। ए गीत सिरिफ आरती नइ, बल्कि श्रद्धा, सेवा, विश्वास अउ एकता के संदेश देवइया अमूल्य भक्ति गीत आय।

ये जस गीत भी जरूर पढ़व

🙏 अगर आपको हो मईया चंडिका जस गीत पसंद आइस, त एखर संग ये प्रसिद्ध जस गीत मन ला घलो जरूर पढ़व। हर गीत म अर्थ, कहानी अऊ पूरा लिरिक्स दे गे हवय।

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CG Jas Lyrics छत्तीसगढ़ी भक्ति गीत प्रेमी मन बर समर्पित एक वेबसाइट आय, जिहां माता सेवा जसगीत, देवी गीत, पचरा, आरती, भजन अउ लोकभक्ति गीत के सही लिरिक्स प्रकाशित करे जाथे। वेबसाइट के मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ के समृद्ध लोकसंस्कृति, भक्ति परंपरा अउ जसगीत ल इंटरनेट के माध्यम ले दुनिया भर के लोगन तक पहुँचाना आय। 


लगुरवा भईया सुन्दर आरती सजाये हो माँ, vijay kumar singroul, तुलसी के चौरा जस मण्डली गिरधौना

✦✦ लंगुरुवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां /विजय कुमार✦✦

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गीत - लंगुरुवा भईया 

गीत लेबल - पारंपरिक जस

गायक - विजय कुमार 

म्यूज़िक कंपनी - विजयकुमार जस गीत

वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

 लंगुरुवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

//1//

पहली आरती सजे माता जी के ब्रह्मा जी चले आए -2

उड़ान- ब्रह्मा जी चले आए भुवन मा पड़ पड़ वेद सुनाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

पहली आरती सजे माता जी के ब्रह्मा जी चले आए -2

उड़ान- ब्रह्मा जी चले आए भुवन मा पड़ पड़ वेद सुनाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

//2//

दुसर आरती सजे माता जी के विष्णु जी चले आए -2

उड़ान -विष्णु जी चले आए भुवन मा सुंदर शंख बजाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

दुसर आरती सजे माता जी के विष्णु जी चले आए -2

उड़ान -विष्णु जी चले आए भुवन मा सुंदर शंख बजाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

//3//

तीसर आरती सजे माता जी के शंकर जी चले आए -2

उड़ान - शंकर जी चले आए भुवन मा डम डम बजाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

तीसर आरती सजे माता जी के शंकर जी चले आए -2

उड़ान - शंकर जी चले आए भुवन मा डम डम बजाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

//4//

चौथे आरती सजे माता जी के नारद जी चले आए -2

 उड़ान - नारद जी चले आए भुवन मा सुंदर वीणा बजाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

चौथे आरती सजे माता जी के नारद जी चले आए -2

उड़ान - नारद जी चले आए भुवन मा सुंदर वीणा बजाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

//5//

पांचवे आरती सजे माता जी के देवता मन चले आए -2

उड़ान - देवता मन चले आए भुवन मा सुंदर जस ला गाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

पांचवे आरती सजे माता जी के देवता मन चले आए -2

उड़ान - देवता मन चले आए भुवन मा सुंदर जस ला गाए हो

लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2

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1. माता के भक्ति रस ले भरे गीत पढ़े बर

➡ माटी के दाई दुर्गा

2. देवी महिमा के सुंदर कथा पढ़व

➡ आमा तरी अमली

3. माता के जोत अउ भक्ति के विशेष गीत

➡ मोला देरी होंगे मईया

4. महाकाली के अद्भुत शक्ति गीत

➡ कारी मा बीरबिट काली-दुकालू

5. माता के अचरा के महिमा जानव

➡ दाई तोर अचरा मा फुले फुले गजरा मा

6. जुड़वास पर्व के विशेष जसगीत

➡ नीम डारा तोला भाए हो

7. मां के सेवा अउ समर्पण के गीत

➡ पैजनिया बाजे

8. दुर्गा माता के शक्ति स्वरूप गीत

➡ भगवती भवानी हा

9. माता के दरबार के भावपूर्ण जसगीत

➡ मलनिया गूथ देना वो

10. गांव-गांव गूंजत माता भक्ति गीत

➡ सुमरी सुमर के हां मैं तोर जस गांवव

गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)

ये जसगीत म माता के आरती के दिव्य स्वरूप ला गाये गे हवय। गीत म बताय गे हे कि माता के दरबार म एक-एक करके देवता मन पहुंचत हें अउ अपन-अपन भक्ति अउ सेवा अर्पित करत हें।

पहिली आरती म Brahma जी आथें अउ वेद के ज्ञान सुनाथें। ये ज्ञान अउ सृष्टि के प्रतीक आय।

दूसर आरती म Vishnu जी आथें अउ शंख बजाके संसार म मंगल संदेश देथें। ये पालन अउ रक्षा के प्रतीक आय।

तीसर आरती म Shiva जी आथें अउ डमरू बजाथें। ये शक्ति, तपस्या अउ परिवर्तन के संकेत देथे।

चौथी आरती म Narada जी वीणा बजाके माता के महिमा गाथें।

पांचवीं आरती म सब देवता मन मिलके माता के जस गाथें। ये बताथे कि माता के शक्ति सबसे महान हवय।

गीत के विशेषता

1. भक्ति अउ श्रद्धा ले भरपूर

ये गीत सुनते ही मन म माता के प्रति भक्ति जाग जाथे।

2. देवी दरबार के सुंदर चित्रण

गीत म देवता मन के आगमन के सुंदर वर्णन मिलथे।

3. मंच कार्यक्रम बर उपयुक्त

जगराता, जसगीत कार्यक्रम, माता सेवा अउ नवरात्रि म ये गीत बहुते लोकप्रिय हो सकथे।

4. आध्यात्मिक संदेश

गीत बताथे कि ज्ञान, शक्ति, रक्षा अउ संगीत—सब माता के चरण म समर्पित हे।

कहानी (छत्तीसगढ़ी)

बहुत साल पहिली एक छोटे गांव म नवरात्रि के समय माता सेवा के भव्य आयोजन होवत रहिस। गांव के सब लोग माता के मंदिर म जुटे रहिन। दीपक जलत रहिस, घंटी बजत रहिस अउ पूरा वातावरण भक्तिमय होगे रहिस।

गांव के एक सेवक लंगुरुवा अपन मन ले माता के आरती सजा रहिस। ओकर भक्ति देखके सब लोग भावुक होगे। जैसे-जैसे आरती सुरू होइस, लगिस जैसे देव लोक धरती म उतर आए होय।

पहिली आरती म ज्ञान के प्रकाश फैलिस। दूसर आरती म शंख के ध्वनि ले पूरा गांव गूंज उठिस। तीसर आरती म डमरू के आवाज ले नकारात्मक ऊर्जा दूर होगे। चौथी आरती म वीणा के मधुर स्वर ले सबके मन शांत होगे। आखिरी आरती म सब देवता मन माता के जयकारा लगाइन।

ओ दिन गांव के लोगन मन अनुभव करिन कि जहां सच्ची भक्ति होथे, ओतके माता अपन कृपा जरूर बरसाथे।

"छत्तीसगढ़ी माता जस गीत के अइसनेच सुंदर लिरिक्स पढ़े बर CG Jas Lyrics संग जुड़े रहव, अउ अपन भक्ति के सफर ला आगे बढ़ावव।"

भवानी तोरे आरती – पंडित मदन चौहान ,देवी जसगीत आरती

✦✦ भवानी तोरे आरती -पंडित मदन चौहान  ✦✦

Bhawani Tore Aarti // माँ दुर्गा आरती // Lyrical Video Song // Devi Aarti // Sundrani Bhakti

गीत - भवानी तोरे आरती

गायक  - पंडित मदन चौहान 

गीतकार -पंडित मदन चौहान

म्यूजिक कंपनी - सुंदरानी 

वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे  

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मुखड़ा 

आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती 

भवानी तोरे आरती हो जगदंबा तोरे आरती में 

 आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती 

//1//

दया के सगरी हो,मया के जोती मईया आरती

येहो दसों दिशा उजियारी भवानी तोरे आरती

 हो जगदम्बा तोरे आरती

 आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती 

//2 //

शक्ति शिवा सरी ,जग के रचईया मईया आरती 

येहो जय हो  जगत महतारी ओ भवानी तोरे आरती 

येहो भवानी तोरे आरती हो जगदम्बा तोरे आरती

 आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती 

//3 //

तीन लोक नवखण्ड रचे हो मईया आरती 

येहो चौदा भुवन विस्तारी भवानी तोरे आरती 

येहो भवानी तोरे आरती हो जगदम्बा तोरे आरती

 आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती 

//4 //

कोन विधि तोला विनती सुनाव मईया आरती 

येहो मै तो अभूझ अनाड़ी  भवानी तोरे आरती 

येहो भवानी तोरे आरती हो जगदम्बा तोरे आरती

 आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती 

//5 //

दंड शरण परनाम करव हो मईया आरती 

येहो मदन कमल बलहारी भवानी तोरे आरती 

येहो भवानी तोरे आरती हो जगदम्बा तोरे आरती

 आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती 

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  1. ✦ बहुत ही सुन्दर जस गीत नीचे दे हावे clik करव अउ देखव ✦

  1. कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली
  2. कंकालिन मोरे माया वो चण्डालिन मोरे माया
  3. गरजत आये महामाया करताल वाले
  4. आवत हावव तोर दुवारी मोर दुर्गा मईया
  5. माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला बनाव
  6. मलनिया गूथ देना मोर दुर्गा दाई बर
  7. डग डमरू बाजे डगरे डगरे डग हा
  8. थईया थईया नाचे हनुमान

✦✦ गीत के अर्थ  ✦✦

यह जसगीत माता भवानी की आरती का गीत है। इसमें भक्त माता महामाई को जगदम्बा मानकर उनकी आरती उतारते हैं। गीत में बताया गया है कि माता दया और माया की ज्योति हैं, जिनसे दसों दिशा उजियारी हो जाती है।

भक्त माता को जगत की रचयिता बताते हुए कहते हैं कि उन्होंने तीन लोक और चौदह भुवन की रचना की है। माता को शक्ति और शिवा के समान बताया गया है जो पूरे संसार की पालनहार हैं।

भक्त अपनी अज्ञानता स्वीकार करते हुए कहते हैं कि उन्हें विनती करने की विधि नहीं आती, फिर भी वे माता के चरणों में दंडवत प्रणाम करते हैं और माता की कृपा मांगते हैं।

✦✦ गीत की विशेषता ✦✦

  • यह पूर्ण आरती शैली का जसगीत है
  • माता भवानी की महिमा का वर्णन
  • तीन लोक और चौदह भुवन का उल्लेख
  • भक्ति और समर्पण का सुंदर भाव
  • सरल छत्तीसगढ़ी भाषा
  • आरती समय गाने योग्य गीत
  • नवरात्रि और जंवारा में उपयोगी
  • समूह में गाने के लिए उपयुक्त

✦✦ गीत की कहानी ✦✦

एक छोटे से गांव मासूल  में नवरात्रि का पर्व शुरू हुआ। पूरे गांव में माता की स्थापना की गई। मंदिर में सुबह-शाम आरती होने लगी। गांव के बुजुर्ग और महिलाएं मिलकर माता की आरती गाते थे।

एक दिन गांव की एक बूढ़ी दाई ने कहा – "आज हम नई आरती गाबो, जेकर म माता के महिमा गुन गाबो।" तब सभी लोग एकत्र हुए और आरती शुरू हुई — "आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती..."

जैसे ही आरती शुरू हुई, मंदिर में दीपक की रोशनी फैल गई। ऐसा लग रहा था जैसे दसों दिशा उजियारी हो गई हो। भक्तों ने माता को दया और मया की ज्योति मानकर उनका गुणगान किया।

आरती में माता को जगत की रचयिता बताया गया। भक्त बोले कि माता ने तीन लोक और चौदह भुवन की रचना की है। यह सुनकर सभी भक्त भावविभोर हो गए।

एक छोटा बालक भी वहां खड़ा था। उसने पूछा — "माता सबके सुनथे का?"
दाई ने कहा — "हाँ बेटा, माता जगत महतारी हें, सबके सुनथे।"

फिर आरती का अगला भाग गाया गया — "कोन विधि तोला विनती सुनाव..."
भक्तों ने स्वीकार किया कि वे अज्ञानी हैं, फिर भी माता के चरणों में प्रणाम करते हैं।

आरती समाप्त होते ही मंदिर में शांति छा गई। सभी भक्तों ने माता के चरणों में फूल चढ़ाए और आशीर्वाद मांगा। गांव में खुशहाली फैल गई।

तब से हर साल नवरात्रि में यह आरती गाई जाने लगी। लोग मानते हैं कि जो भी सच्चे मन से यह आरती गाता है, माता उसकी मनोकामना पूरी करती हैं।

 

आरती मां के सजाए | नवरात्रि स्पेशल cg जस गीत

✦✦ आरती मां के सजाये / आरती छत्तीसगढ़ी जस गीत✦✦

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गीत - आरती मां के सजाए
गायक- 
म्यूज़िक कंपनी - कॉमेडी दोस्त
म्यूजिक लेबल- पारंपरिक जस
वेबसाइट ऑनर-कैलाश पंचारे 
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मुखड़ा
आरती मां के सजाए हो मोर भईया लगुरे 
आरती मां के सजाए हो मा
अंतरा -1
पहली आरती सजे मात के शंकर भोला आए
पहली आरती सजे मात के शंकर भोला आए
शंकर भोला आए हो मईया शंकर भोला आए
शंकर भोला आए हो मईया शंकर भोला आए
उड़ान -आरती में डमरू बजाये, बजाये हो मैया 
आरती मां के सजाए हो मां
अंतरा - 2
दुसर आरती सजे मात के ब्रम्हा जी चले आए
दुसर आरती सजे मात के ब्रम्हा जी चले आए
ब्रम्हा जी चले आए हो मईया ब्रम्हा जी चले
ब्रम्हा जी चले आए हो मईया विष्णु जी चले
उड़ान -आरती में फुलवा बरसाए ,बरसाए हो मैया 
आरती मां के सजाए हो मां
अंतरा - 3
तीसर आरती सजे मात के विष्णु जी चले आए
तीसर आरती सजे मात के विष्णु जी चले आए
विष्णु जी चले आए हो मईया विष्णु जी चले आए
विष्णु जी चले आए हो मईया विष्णु जी चले आए
उड़ान - ये आरती में शंख बजाए बजाए ,बजाए हो मईया 
आरती मां के सजाए हो मां
अंतरा - 4
चौथे आरती सजे मात के सेऊक मन चले आएं
चौथे आरती सजे मात के सेऊक मन चले आएं
सेऊक मन चले आएं हो मईया सेऊक मन चले आएं
सेऊक मन चले आएं हो मईया सेऊक मन चले आएं
 उड़ान -ये आरती में सेवा ला बजाए ,बजाए हो मईया
आरती मां के सजाए हो मां
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संझा के आरती /कुंजलाल साहू /सेवा जस लिरिक्स

⚡⚡⚡⚡🚩संझा के आरती। कुंजलाल साहू। जस लिरिक्स छत्तीसगढ़ी 🚩⚡⚡⚡⚡

संझा के आरती /कुंजलाल साहू /सेवा जस लिरिक्स
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गीत -संझा के आरती

गायक -कुंजलाल साहू 

यूट्यूब -कुमार जीतेन्द्र 

वेबसाइट -www.cgjaslyrics.com

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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मुखड़ा 

संझा के आरती उतारव मोर आदि भवानी 

संझा के आरती उतारव हो मां 

संझा के आरती उतारव मोर आदि भवानी 

संझा के आरती उतारव हो मां

मोर आदि भवानी संझा के आरती उतारव हो मां -2 

अंतरा -1

सुरहीन गईया के मईया गोबर मंगाइके 

आरी पारी अंगना लीपे चौक पुराके 

उड़ान- सोन के कलश माध्ययेव मोर आदि भवानी

संझा के आरती उतारव हो मां 

अंतरा -2

धरे गंगा जल मईया निर्मल पानी

पान सुपाड़ी नरियल अगर कपूर अऊ बाती

उड़ान- कंचन थारी सजायेव मोर आदि भवानी

संझा के आरती उतारव हो मां 

अंतरा -3

अगर चंदन लकड़ी के दाई आसन तोर बनायेव 

चंपा चमेली केकती केवड़ा के हारे तोर बनायेव 

उड़ान- फुल दसमत के चघायेव मोर आदि भवानी 

संझा के आरती उतारव हो मां 

अंतरा -4

नर नारी मन तोला मनाके भाग अपन सहूराये 

मन मंदिर म जोत जलाके अपनो आस पुराये 

उड़ान- श्रद्धा के जोत जलाएव मोर आदि भवानी 

संझा के आरती उतारव हो मां 

अंतरा -5

सेउक मन हा सेवा बजाके आशीष तोरे पाथे 

भार भरोसा तोला हे माता अल्हण झन कोनो आये 

उड़ान- निशदिन सेवा ला बजावव मोर आदि भवानी 

संझा के आरती उतारव हो मां 

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गीत के अर्थ 

ये गीत मा गायक अपन माता आदि भवानी ला संझा बेला मा आरती उतार के सेवा-सुमिरन करथे। आरती मतलब — माता के आगु मा दीपक, गंगाजल, फूल, धूप, अगरबत्ती अऊ कपूर जलाके पूजा करना।
हर अंतरा मा माता के पूजा के तियारी, भक्ति, अऊ श्रद्धा के भावना बर वर्णन करे गे हे।


गीत के (महत्व)

1.   ये गीत ले भक्ति अऊ श्रद्धा के भावना प्रकट होथे।

2.      समाज मा संझा के समय आरती करना—दिन भर के थकान के बाद माता के आराधना भगति  करना—एक अद्भुत परंपरा हे।

3.      ये गीत महिला मन के रोज के जीवन अऊ धर्मिक संस्कार ला जोड़े गेहे ।

4.      माता “आदि भवानी” शक्ति अऊ संरक्षण के प्रतीक हे, जेकर आराधना ले मन के शुद्धि अऊ शांति मिलथे।


गीत के विशिष्टता (खास बात)

1.      गीत पूर्ण रूप ले छत्तीसगढ़ी भाखा मा रचाय गे हे।

2.      संस्कृति, ग्रामीण परंपरा अऊ मातृ-भक्ति के सुघ्घर रूप मा बखान करथे।

3.      “सुरहीन गईया के मईया गोबर मंगाइके, अंगना लीपे चौक पुराके” जइसने पंक्ती ले गा के लोगन अपन परंपरागत पूजा के तरीका बताथे।

4.      गीत के हर अंतरा मा “उड़ान” (मुखड़ा) ये एक भावनात्मक दोहराव आय हावय ,जेकर मतलब माता के स्तुति ला गहराई ले दोहराना आय।


गीत के उद्देश्य

1.    माता आदि भवानी के आरती गा के भक्ति भावना जगाना हे ।

2.    जनता ला अपन संस्कृति अऊ देवी पूजा से जोड़ के रखना हे ।

3.   छत्तीसगढ़ के परंपरा अऊ मातृ माता -समर्पण के संस्कार ला बढ़ावा देना हे ।


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