भवानी तोरे आरती – पंडित मदन चौहान ,देवी जसगीत आरती
गीत - भवानी तोरे आरती
गायक - पंडित मदन चौहान
गीतकार -पंडित मदन चौहान
म्यूजिक कंपनी - सुंदरानी
वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती
भवानी तोरे आरती हो जगदंबा तोरे आरती में
आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती
//1//
दया के सगरी हो,मया के जोती मईया आरती
येहो दसों दिशा उजियारी भवानी तोरे आरती
हो जगदम्बा तोरे आरती
आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती
//2 //
शक्ति शिवा सरी ,जग के रचईया मईया आरती
येहो जय हो जगत महतारी ओ भवानी तोरे आरती
येहो भवानी तोरे आरती हो जगदम्बा तोरे आरती
आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती
//3 //
तीन लोक नवखण्ड रचे हो मईया आरती
येहो चौदा भुवन विस्तारी भवानी तोरे आरती
येहो भवानी तोरे आरती हो जगदम्बा तोरे आरती
आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती
//4 //
कोन विधि तोला विनती सुनाव मईया आरती
येहो मै तो अभूझ अनाड़ी भवानी तोरे आरती
येहो भवानी तोरे आरती हो जगदम्बा तोरे आरती
आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती
//5 //
दंड शरण परनाम करव हो मईया आरती
येहो मदन कमल बलहारी भवानी तोरे आरती
येहो भवानी तोरे आरती हो जगदम्बा तोरे आरती
आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती
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- ✦ बहुत ही सुन्दर जस गीत नीचे दे हावे clik करव अउ देखव ✦
- कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली
- कंकालिन मोरे माया वो चण्डालिन मोरे माया
- गरजत आये महामाया करताल वाले
- आवत हावव तोर दुवारी मोर दुर्गा मईया
- माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला बनाव
- मलनिया गूथ देना मोर दुर्गा दाई बर
- डग डमरू बाजे डगरे डगरे डग हा
- थईया थईया नाचे हनुमान
✦✦ गीत के अर्थ ✦✦
यह जसगीत माता भवानी की आरती का गीत है। इसमें भक्त माता महामाई को जगदम्बा मानकर उनकी आरती उतारते हैं। गीत में बताया गया है कि माता दया और माया की ज्योति हैं, जिनसे दसों दिशा उजियारी हो जाती है।
भक्त माता को जगत की रचयिता बताते हुए कहते हैं कि उन्होंने तीन लोक और चौदह भुवन की रचना की है। माता को शक्ति और शिवा के समान बताया गया है जो पूरे संसार की पालनहार हैं।
भक्त अपनी अज्ञानता स्वीकार करते हुए कहते हैं कि उन्हें विनती करने की विधि नहीं आती, फिर भी वे माता के चरणों में दंडवत प्रणाम करते हैं और माता की कृपा मांगते हैं।
✦✦ गीत की विशेषता ✦✦
- यह पूर्ण आरती शैली का जसगीत है
- माता भवानी की महिमा का वर्णन
- तीन लोक और चौदह भुवन का उल्लेख
- भक्ति और समर्पण का सुंदर भाव
- सरल छत्तीसगढ़ी भाषा
- आरती समय गाने योग्य गीत
- नवरात्रि और जंवारा में उपयोगी
- समूह में गाने के लिए उपयुक्त
✦✦ गीत की कहानी ✦✦
एक छोटे से गांव मासूल में नवरात्रि का पर्व शुरू हुआ। पूरे गांव में माता की स्थापना की गई। मंदिर में सुबह-शाम आरती होने लगी। गांव के बुजुर्ग और महिलाएं मिलकर माता की आरती गाते थे।
एक दिन गांव की एक बूढ़ी दाई ने कहा – "आज हम नई आरती गाबो, जेकर म माता के महिमा गुन गाबो।" तब सभी लोग एकत्र हुए और आरती शुरू हुई — "आरती उतारव महामाई ओ भवानी तोरे आरती..."
जैसे ही आरती शुरू हुई, मंदिर में दीपक की रोशनी फैल गई। ऐसा लग रहा था जैसे दसों दिशा उजियारी हो गई हो। भक्तों ने माता को दया और मया की ज्योति मानकर उनका गुणगान किया।
आरती में माता को जगत की रचयिता बताया गया। भक्त बोले कि माता ने तीन लोक और चौदह भुवन की रचना की है। यह सुनकर सभी भक्त भावविभोर हो गए।
आरती समाप्त होते ही मंदिर में शांति छा गई। सभी भक्तों ने माता के चरणों में फूल चढ़ाए और आशीर्वाद मांगा। गांव में खुशहाली फैल गई।
तब से हर साल नवरात्रि में यह आरती गाई जाने लगी। लोग मानते हैं कि जो भी सच्चे मन से यह आरती गाता है, माता उसकी मनोकामना पूरी करती हैं।


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