मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में Lyrics – गुड्डा साहू | Mukund Sahu | मंडल जसगीत | CG Jas Lyrics

मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में – छत्तीसगढ़ी जस गीत Lyrics

मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में जस गीत पोस्टर | गायक गुड्डा साहू.jpg

════════✺════════

गीत -मोर चले माँ दुर्गा 

गायक -गुड्डा साहू 

गीतकार -मुकुंद साहू 

यूट्यूब -mandal jasgeet 

वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे 

════════✺════════

गीत के बारे में

"मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में" एक लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी जस गीत है जिसमें माँ दुर्गा की वीरता, शक्ति और महिषासुर सहित दैत्यों के संहार का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है। गीत में बताया गया है कि जब अधर्म बढ़ता है तब माँ दुर्गा धर्म की रक्षा के लिए सिंह पर सवार होकर युद्ध करती हैं और भक्तों के कष्टों का अंत करती हैं। यह गीत नवरात्रि, जवारा, ज्योति कलश, माता सेवा एवं देवी जागरण में विशेष रूप से गाया जाता है।

मुखड़ा  

मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में -2 

उड़ान -चण्ड मुण्ड महिसासुर मारे ---

महामाई छन छन में 

मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में -2 

अंतरा -1 

एक समय जब महिसासुर हा उधम करिस हे भारी 

देवता मन सब तेज किराके उपजाईस हे नारी 

उड़ान -सब देवता मन सोचे विचारे--

अपने वो मनमन में 

 मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में -2 

अंतरा -2 

फेर बघवा म चढ़ के माता दुर्गम ला ललकारे 

पांच बाण ला दुर्गमसुर के छाती में उतारे 

उड़ान -दुर्गमसुर मारके माता --

दुर्गा कहाये जनजन में 

 मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में -2 

अंतरा -3 

तोर महिमा के वो महामाई पार ला ना कोई पाये 

झंगु राम हां वो मोर दाई कतका महिमा बताये 

उड़ान -कतका रूप ला धर के मुकुंद के  --

बसगे मनके दर्पण में 

 मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में -2 

════════✺════════

गीत का अर्थ

यह जस गीत माँ दुर्गा की दिव्य शक्ति का गुणगान करता है। इसमें महिषासुर के अत्याचार, देवताओं द्वारा आदिशक्ति का आवाहन, माता के युद्ध और दैत्यों के संहार का वर्णन किया गया है। गीत भक्तों को यह संदेश देता है कि जब भी संसार में अधर्म बढ़ता है, माँ दुर्गा अपने अनेक रूपों में प्रकट होकर धर्म की रक्षा करती हैं। यह गीत श्रद्धा, शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक है।

गीत की विशेषताएँ

1.नवरात्रि में गाया जाने वाला लोकप्रिय जस गीत।

2.माँ दुर्गा की वीरता का सुंदर वर्णन।

3.सरल एवं मधुर छत्तीसगढ़ी भाषा।

4.देवी जागरण और जस प्रतियोगिता के लिए उपयुक्त।

5.भक्तों में उत्साह और भक्ति का संचार करता है।

6.पारंपरिक छत्तीसगढ़ी संगीत शैली।

7.धार्मिक एवं प्रेरणादायक संदेश।

गीतकार – मुकुंद साहू (Biography)

मुकुंद साहू छत्तीसगढ़ी भक्ति संगीत जगत के जाने-माने गीतकार हैं। उन्होंने अनेक जस गीत, देवी भजन और धार्मिक रचनाएँ लिखी हैं। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, लोकभाषा और देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था दिखाई देती है। उनके गीत सरल शब्दों में गहन धार्मिक भाव प्रस्तुत करते हैं, जिससे वे भक्तों के बीच लोकप्रिय हैं।

गायक – गुड्डा साहू (Biography)

गुड्डा साहू छत्तीसगढ़ी जस गीतों के लोकप्रिय गायक हैं। उनकी मधुर आवाज और भक्तिमय प्रस्तुति श्रोताओं को माता रानी की भक्ति में भावविभोर कर देती है। उन्होंने अनेक देवी भजन और जस गीतों को अपनी आवाज दी है, जिन्हें नवरात्रि एवं धार्मिक आयोजनों में विशेष रूप से सुना जाता है।

कथा

सनातन परंपरा के अनुसार जब पृथ्वी पर महिषासुर नामक असुर का अत्याचार अत्यधिक बढ़ गया, तब देवता भी उसके सामने असहाय हो गए। महिषासुर को ऐसा वरदान प्राप्त था कि कोई देवता उसका वध नहीं कर सकता। उसने स्वर्ग लोक पर अधिकार कर लिया और इंद्र सहित सभी देवताओं को पराजित कर दिया। चारों ओर भय और अधर्म फैल गया।

देवताओं ने भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महादेव से प्रार्थना की। तब तीनों देवों सहित सभी देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई। यही आदिशक्ति माँ दुर्गा थीं। प्रत्येक देवता ने उन्हें अपना श्रेष्ठ अस्त्र प्रदान किया। भगवान शिव ने त्रिशूल, भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र, इंद्र ने वज्र, वरुण ने शंख, अग्नि ने शक्ति और हिमालय ने सिंह वाहन प्रदान किया।

माँ दुर्गा सिंह पर सवार होकर युद्धभूमि में पहुँचीं। उनके तेज से सम्पूर्ण ब्रह्मांड प्रकाशित हो उठा। महिषासुर ने अनेक मायावी रूप धारण किए, लेकिन माँ दुर्गा ने अद्भुत पराक्रम दिखाते हुए उसके सभी प्रयासों को विफल कर दिया। अंततः त्रिशूल और दिव्य अस्त्रों से महिषासुर का वध हुआ। इस विजय के कारण उन्हें महिषासुर मर्दिनी कहा गया।

इसके बाद भी अनेक दैत्यों ने धर्म का नाश करने का प्रयास किया। चण्ड और मुण्ड जैसे असुरों का भी माता ने संहार किया। दुर्गमासुर जैसे शक्तिशाली राक्षसों का वध कर उन्होंने देवताओं और पृथ्वी की रक्षा की। इसी कारण माँ दुर्गा को शक्ति, साहस और धर्म की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।

"मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में" जस गीत इन्हीं दिव्य घटनाओं का स्मरण कराता है। गीत यह संदेश देता है कि सच्चे मन से माँ दुर्गा की आराधना करने वाले भक्तों पर उनकी विशेष कृपा बनी रहती है। वे अपने भक्तों के भय, संकट और दुखों का नाश करती हैं तथा उन्हें साहस, आत्मविश्वास और सफलता प्रदान करती हैं। नवरात्रि के अवसर पर यह गीत श्रद्धा और उत्साह के साथ गाया जाता है तथा भक्त माँ दुर्गा से सुख, समृद्धि और रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।

मातारानी के मनमोहक जस गीत 

  • दरसन बर मईया 
  • देवी के भुवन मा 
  • जुड़वास मनाबो 
  • तोर डंडा शरण 
  • बम्लाई ला सुमिरव 
  • तोर डीही के दिया 
  • लेखक: कैलाश पंचारे

    वेबसाइट: CG Jas Lyrics

    परिचय: कैलाश पंचारे छत्तीसगढ़ी जस गीत, भजन, आरती और धार्मिक सामग्री पर आधारित लेख लिखते हैं। उनका उद्देश्य छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और भक्ति संगीत को डिजिटल माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है।

    Copyright Notice

    © Copyright 2026 CG Jas Lyrics | Website Owner: कैलाश पंचारे

    इस वेबसाइट पर प्रकाशित गीत केवल शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं जानकारी के उद्देश्य से साझा किए जाते हैं। गीतों के मूल अधिकार संबंधित गीतकार, गायक, संगीत कंपनी एवं कॉपीराइट धारकों के पास सुरक्षित हैं।


  • वाह वाह रे पंछी दानव ला मार गिराय Lyrics | गुड्डा साहू जसगीत | कंक पंछी की वीर गाथा

        

                 ══════❀══════                 

                                   गीत - वाह वाह रे पंछी                                  

    गायक -गुड्डा साहू 

    गीतकार -गुड्डा साहू 

    यूट्यूब - बबला साहू 

    वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे    

                                      ══════❀══════                                          

    मुखड़ा 

      वाह वाह रे पंछी दानव ला मार गिराय -2

    उड़ान - चिथ चिथ लहू बोहाय

                    भाई के बदला चुकाय -------भाई के बदला चुका              

     वाह वाह रे पंछी दानव ला मार गिराय -2  

    अंतरा -1 

    कनउ कंक भर नाव के पंछी ,वेद पुराण बताये 

    एक समय मा कंक हा उड़त, जब कैलाश मा जाये 

    वो कैलाश मा विदु दुरूप के ,दानव एक रहाये

    विदु दुरूप तब कंक पंछ ला ,देख के घुच्छा आये 

    उड़ान - कंक पंछी के मुड़ ला वो दाई -2 

    दानव हां काट गिराय -------दानव हां काट गिराय

     वाह  वाह  रे पंछी दानव ला मार गिराय -2

    अंतरा -2  

     कंक भाई मोर मरगे कहिके ,कंधर खबर हे पाये 

    आंसू बोहावत वो कंधर हर , फेर कैलाश मा जाये 

    सोन के आस म बैठके दानव,दारू पियत जाये 

    मतनी कपत्नी संग दानव हा ,उही तीर म रहाये 

    उड़ान - उही समय  कंधर चिल्लाके -2 

    रण म हे ओला बुलाय  -------रण म हे ओला बुलाय 

     वाह  वाह  रे पंछी दानव ला मार गिराय -2

    अंतरा -3  

    विधु दुरूप हर तब महामाई ,हे किरपाल उठाये 

     कंक संग म युद्ध चले ,दानव तलवार चलाये 

     कंक पंछी अपन चोंच म हे तलवार दबाये 

    गोड़ म वो तलवार ल रमजय टुकड़ा टुकड़ा हो जाय  

    उड़ान - तब दानव ल  कंक पंछी  -2 

    मार के रण म गिराय ----- -------लक्षमण सिंह जस गाय 

     वाह वाह रे पंछी दानव ला मार गिराय -2    

    ══════❀══════

        गीत के बारे म

    गीत – वाह वाह रे पंछी दानव ला मार गिराय

    ए गीत छत्तीसगढ़ के पारंपरिक जसगीत मन म एक अनोखा गाथा गीत आय। एमा एक बहादुर कंक पंछी के कहानी बताय गे हे, जऊन अपन भाई के हत्या के बदला ले बर दानव संग युद्ध करथे। गीत म वीरता, भाईचारा, न्याय अउ माता के कृपा के सुंदर वर्णन मिलथे।

    गीत के सरल अर्थ

    गीत के मुखड़ा म गायक कंक पंछी के बहादुरी के बड़ाई करत कहिथे कि वो दानव ला मार गिराइस अउ अपन भाई के बदला पूरा करिस। दानव के लहू रणभूमि म बहिस अउ अन्याय के अंत होगे।

    पहिली अंतरा म बताय गे हे कि वेद-पुराण म कंक नाम के एक पवित्र पंछी के उल्लेख मिलथे। एक दिन वो कैलाश पर्वत जावत रहिस। उहां विधुदुरूप नाम के दानव रहय। दानव कंक पंछी ला देखके क्रोधित होगे अउ ओकर सिर काट डारिस।

    दूसर अंतरा म कंधर नाम के ओकर भाई ला ए दुखद समाचार मिलथे। भाई के मृत्यु के समाचार सुनके वो रोथे, फेर हिम्मत नइ हारय। वो कैलाश जाके दानव ला युद्ध बर ललकारथे।

    तीसर अंतरा म दानव अउ कंधर के बीच घमासान युद्ध होथे। माता महामाई के कृपा कंधर ऊपर रहिथे। अंत म कंधर अपन शक्ति, साहस अउ माता के आशीर्वाद ले दानव ला परास्त करके रणभूमि म गिरा देथे।

    गीत के विशेषता

    1. वीर रस के अद्भुत उदाहरण

    ए गीत म वीरता अउ साहस के भाव भरपूर दिखथे। सुनइया मन म जोश भर देथे।

    2. भाईचारा के संदेश

    गीत सिखाथे कि सच्चा भाई अपन भाई बर हर परिस्थिति म खड़े रहिथे।

    3. अन्याय के विरोध

    दानव अत्याचार के प्रतीक आय जबकि कंक पंछी न्याय अउ धर्म के प्रतीक आय।

    4. माता महामाई के महिमा

    युद्ध म विजय माता के कृपा ले मिलथे, ए संदेश गीत म स्पष्ट दिखथे।

    5. लोकपौराणिक धरोहर

    ए गीत छत्तीसगढ़ के समृद्ध लोकसंस्कृति अउ लोककथाओं के सुंदर उदाहरण आय।

    गीत के कथा (विस्तृत कहानी)

    बहुत पुराना समय के बात आय। कैलाश पर्वत के आसपास एक भयंकर दानव विधुदुरूप के आतंक रहिस। वो संत, साधु अउ निर्दोष जीव मन ला परेशान करत रहिस।

    उही समय कंक नाम के एक पवित्र पंछी कैलाश दर्शन बर निकलिस। वो धर्म, भक्ति अउ सत्य के प्रतीक मानाय जाथे। जब वो कैलाश पहुंचिस त दानव ओकर उपस्थिति ला सहन नइ कर सकिस। क्रोध म आके दानव ह कंक पंछी के हत्या कर दिस।

    ए घटना के समाचार जब ओकर भाई कंधर तक पहुंचिस त वो दुख ले भर गीस। फेर वो केवल रोय नइ, बल्कि अन्याय के खिलाफ लड़ई करे के संकल्प ले लिस।

    कंधर कैलाश पहुंचिस। उहां दानव अपन घमंड म डूबे रहिस। कंधर ह खुलेआम ओला युद्ध बर ललकारिस। दानव ह तलवार निकालिस अउ भयंकर युद्ध सुरू होगे।

    युद्ध के दौरान माता महामाई के कृपा कंधर ऊपर बरसत रहिस। कंधर के साहस बढ़त गीस। आखिरकार वो दानव के घमंड ला चूर-चूर कर दिस अउ ओकर अंत कर दिस।

    दानव के मृत्यु संग न्याय के जीत होइस अउ भाई के बदला पूरा होगे। ए कारण गीत म "भाई के बदला चुकाय" के पंक्ति बार-बार गाये जाथे।

    CG Jas Lyrics

    CG Jas Lyrics छत्तीसगढ़ी जसगीत, भजन, देवी गीत, लोकगीत अउ धार्मिक गीत मन के सबसे भरोसेमंद संग्रह आय। ए वेबसाइट म आप मन ला छत्तीसगढ़ी गीत के शुद्ध लिरिक्स, सरल अर्थ, गीत के कथा अउ सांस्कृतिक जानकारी एके जगह म मिलथे। अगर आप छत्तीसगढ़ी संस्कृति अउ जसगीत के प्रेमी हव, त CG Jas Lyrics आप मन बर एक सुंदर मंच आय, जिहां रोज नए-नए गीत जोड़े जाथें।

    ठलहा तै होबे मयारू दाई /गायक - गुड्डा साहू /जस सेवा गीत

    🌼 ठलहा तै होबे मयारू दाई / गुड्डा साहू / जस सेवा गीत 🌼

    Thalha tai hobe मयारु दाई

    ════════❀════════

    गीत - ठलहा तै होबे मयारू दाई 

    गायक - गुड्डा साहू 

    गीतकार - गुड्डा साहू 

    यूट्यूब - बबला साहू 

    वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे 

    ════════❀════════

    मुखड़ा 

     ठलहा तै होबे मयारू दाई वो 

    चले आबे ऐती ,ठलहा तै होबे मयारू दाई-2 

    अंतरा -1 

    नई हे मोर घर मा दाई ,कही आनी बानी 

    नीचट गरीब हव दाई ,करथव किसानी 

    जाता में दर के राखेव ,हवव मैं पिसानी 

    बंगला चटनी संग मा चीख लेबे दाई 

    उड़ान - पुराये हव मैंहा अंगाकर रोटी वो ,चले आबे ऐती--- 

     ठलहा तै होबे मयारू दाई 

     ठलहा तै होबे मयारू दाई वो 

    चले आबे ऐती ,ठलहा तै होबे मयारू दाई-2 

    अंतरा -2 

    गंजी ला मांग के दाई लाने हव मै उधारी 

    कहां के पाहू दाई बड़ा अउ सुहारी 

    कइसे मोर जिनगी पहाथे देख महतारी 

    लुगरा पोलखा देहु कहा ले तोला मै निसानी 

    उड़ान - कुरता पहिरे हावव चिरहा धोती वो ,चले आबे ऐती--- 

     ठलहा तै होबे मयारू दाई--- 

     ठलहा तै होबे मयारू दाई वो 

    चले आबे ऐती ,ठलहा तै होबे मयारू दाई-2 

    अंतरा -3  

    कइसे दरस ला दाई मैंहा तोर पाहू 

    धोके तोर गोड़ ला दाई मैंहा तर जाहु 

    जिनगी के काहे भरोसा कब मर जाहु 

    आबे मोर घर मा दाई भेंट का चघाहू 

    उड़ान - झुंगू मा नई हे हीरा मोती वो ,चले आबे ऐती--- 

     ठलहा तै होबे मयारू दाई--- 

     ठलहा तै होबे मयारू दाई वो 

    चले आबे ऐती ,ठलहा तै होबे मयारू दाई-2

    ════════❀════════

     

    गीत के भावार्थ

    “ठलहा तै होबे मयारू दाई” एक अइसन भक्ति गीत आय जेमां एक गरीब किसान अपन दाई (माता रानी) ल अपन घर आके आशीर्वाद देय बर बिनती करत हे। गीत के हर पंक्ति मं सच्चा प्रेम, श्रद्धा अउ समर्पण के भावना झलकथे।

    भक्त कहिथे कि ओकर घर धन-दौलत ले भरपूर नइये। न महल हवय, न बड़े-बड़े पकवान हवय। वो त एक साधारण किसान आय, जऊन दिन-रात मेहनत करके अपन परिवार चलाथे। फेर वोला भरोसा हवय कि दाई अपन भक्त के प्रेम ल देखथे, धन-संपत्ति ल नइ।

    गीत मं किसान माता ल कहिथे कि मोर घर मं अंगाकर रोटी, बंगला चटनी अउ साधारण भोजन हवय। जऊन कुछ हवय, वोला प्रेम ले परोसहूं। मोर घर छोटे हो सकथे, फेर मोर मन मं तोर बर अथाह श्रद्धा हवय।

    दूसर अंतरा मं किसान अपन गरीबी के हालत बताथे। वो कहिथे कि उधार ले कुछ व्यवस्था करे हवंव, फेर मोर बस मं बड़े-बड़े पकवान बनाना नइये। मोर कपड़ा घलो फटे-पुराने हवंय, फेर मोर मन साफ हवय।

    तीसर अंतरा मं जीवन के अस्थिरता के बात आय। किसान सोचथे कि जिनगी के कोनो भरोसा नइये। एही से वो माता ल कहिथे कि मोर जीते जी एक बेर मोर घर जरूर आ जा। मोर कोठी मं हीरा-मोती नइये, फेर मोर हृदय भक्ति अउ प्रेम ले भरपूर हवय।

    ए गीत हमन ला सिखाथे कि माता रानी बर सबसे बड़ा भोग सोना-चांदी नइ, बल्कि निष्कपट प्रेम, श्रद्धा अउ विश्वास आय।


    गीत के विशेषता 

    1. ग्रामीण जीवन के सजीव चित्रण

    ए गीत मं छत्तीसगढ़ के किसान जीवन के सुंदर झांकी देखे ला मिलथे। खेती-किसानी, सादा भोजन अउ संघर्षपूर्ण जीवन के सच्चा चित्रण करे गे हवय।

    2. सच्ची भक्ति के संदेश

    गीत बताथे कि माता रानी धनवान अउ गरीब मं भेदभाव नइ करय। जेकर मन मं सच्ची श्रद्धा रहिथे, माता ओखर ऊपर कृपा करथे।

    3. सरल अउ मधुर भाषा

    गीत के शब्द सरल छत्तीसगढ़ी मं लिखे गे हवंय। एखर भाषा सीधे श्रोता के हृदय ल छू लेथे।

    4. विनम्रता के उत्कृष्ट उदाहरण

    भक्त अपन गरीबी छुपाथे नइ, बल्कि माता के आगू सच्चाई रखथे। ए विनम्रता गीत ल अउ अधिक प्रभावशाली बनाथे।

    5. लोक संस्कृति के परिचय

    अंगाकर रोटी, बंगला चटनी, लुगरा-पोलखा जइसन शब्द छत्तीसगढ़ी संस्कृति अउ परंपरा के सुंदर परिचय देवत हवंय।

    6. भावनात्मक गहराई

    गीत सुनके अइसन लगथे जइसे एक भक्त अपन मां संग सीधे बात करत होय। ए आत्मीयता गीत के सबसे बड़ी ताकत आय।

    मयारू दाई के आगमन

    बहुत पुराना बात आय। छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव मं राम नाम के किसान रहत रहिस। ओखर परिवार बहुत गरीब रहिस। माटी के घर, खपरैल के छानी अउ दू एकड़ खेत लेच ओखर पूरा संसार चलत रहिस।

    राम  रोज बिहान ले खेत जाथे, कड़ी मेहनत करथे, फेर मौसम के मार अउ गरीबी के कारण घर के हालत सुधर नइ पावत रहिस। गांव के कुछ लोग धनवान रहिन। नवरात्रि मं बड़े-बड़े पंडाल सजावत रहिन, महंगा भोग चढ़ावत रहिन। फेरराम  के घर मं अइसन कोनो साधन नइ रहिस।

    फेरराम के मन मं माता रानी बर अगाध श्रद्धा रहिस। वो कहत रहिस—

    "दाई धन-दौलत नइ देखय, दाई त अपन भक्त के मन देखथे।"

    एक दिन नवरात्रि शुरू होइस। गांव भर मं माता के जस गूंजे लगिस। राम  घलो अपन घर के कोठा मं एक छोटकुन दिया बारिस अउ माता ल प्रणाम करके कहिस—

    "दाई, मोर घर गरीब हो सकथे, फेर मोर मन गरीब नइये। एक बेर मोर घर घलो आ जा।"

    ओ दिन ले राम रोज माता के जस गावत रहिस—

    "ठलहा तै होबे मयारू दाई वो, चले आबे ऐती..."

    गांव वाले के हंसी

    जब गांव वाले राम के जसगीत सुनिन त कुछ लोग हंस पड़े।

    एक आदमी कहिस—

    "अरे राम तोर घर मं न मिठाई हवय, न फल-फूल। माता तो बड़े-बड़े मंदिर मं जाही।"

    राम मुस्कुराके कहिस—

    "माता बर प्रेम चाही, पकवान नइ।"

    गांव वाले फेर हंसिन, फेर राम अपन भक्ति मं डटे रहिस।

    एक रहस्यमयी बुजुर्ग महिला

    नवरात्रि के सातवां दिन सांझ के बेरा जोरदार पानी गिरना शुरू होगे। बिजली चमकय लागिस। राम अपन घर के आंगन मं दिया बचावत रहिस।

    तभी ओखर घर के दुआरी मं एक बुजुर्ग महिला आके खड़े होगे।

    महिला कहिस—

    "बेटा, बहुत भूख लागे हवय। कुछ खाय बर मिल जाही का?"

    राम बिना देर करे कहिस—

    "दाई, मोर घर मं कुछ खास नइये, फेर जऊन हवय वो तोर आय।"

    ओ घर के भीतर ले अंगाकर रोटी, बंगला चटनी अउ गंजी ले आइस। बड़े आदर ले महिला के आगू रख दिस।

    महिला मुस्कुराइस अउ कहिस—

    "बेटा, तैं खुद खाबे का?"

    राम कहिस—

    "पहिली मेहमान खाही, फेर हमन खाबो।"

    महिला के आंखी मं खुशी झलक उठिस।

    अनोखा आशीर्वाद

    महिला भोजन खाके कहिस—

    राम, तैं मोला पहचानस?"

    राम  कहिस—

    "नइ दाई, फेर मोर बर तैं माता समान हवस।"

    महिला मुस्कुराइस।

    अचानक घर मं एक अद्भुत प्रकाश फैल गे। पूरा कमरा उज्ज्वल होगे।

    राम  देखिस कि बुजुर्ग महिला के स्थान मं माता रानी के दिव्य स्वरूप विराजमान हवंय।

    राम  के आंखी ले आंसू बहना शुरू होगे।

    वो माता के चरण मं गिर पड़िस।

    माता कहिन—

    राम  तैं मोला महल के भोग नइ, प्रेम के भोग चढ़ाय हस। मोर बर एही सबसे बड़ा प्रसाद आय।"

    माता के वरदान

    माता कहिन—

    "मांग बेटा, का मांगथस?"

    राम हाथ जोड़के कहिस—

    "दाई, मोला धन नइ चाही। बस मोर गांव के सब झन सुखी रहंय।"

    माता मुस्कुराइन।

    "जेकर मन मं दूसर बर भलाई होथे, ओला मैं खाली हाथ नइ छोड़ंव।"

    माता आशीर्वाद देके अंतर्ध्यान होगिन।

    चमत्कार

    दूसर दिन बिहान जब राम  खेत गीस त देखिस कि सूखे पड़े फसल मं नई हरियाली आ गे हवय।

    कुछ महीना बाद भरपूर उपज होइस।

    राम  के घर के गरीबी धीरे-धीरे दूर होगे।

    फेर सबसे बड़ी बात ए रहिस कि राम  के मन मं घमंड कभू नइ आइस।

    वो हर साल नवरात्रि मं अंगाकर रोटी अउ बंगला चटनी के भोग लगावत रहिस।

    गांव के बदलाव

    जब गांव वाले ए घटना सुनिन त सबके सोच बदल गे।

    जऊन लोग धन के घमंड करत रहिन, ओमन समझ गइन कि माता रानी सच्चा प्रेम ल स्वीकार करथे।

    गांव के हर घर मं भक्ति अउ सेवा के भावना बढ़ गे।

    अब गांव के लोग गरीब-अमीर के भेदभाव कम कर दिन।

    कथा के संदेश

    ए कथा हमन ला सिखाथे कि—

    • माता रानी धन-दौलत नइ, मन के सच्चाई देखथे।
    • प्रेम ले चढ़ाय गे छोट से छोट भोग घलो माता ल प्रिय लागथे।
    • भक्ति मं दिखावा के कोनो जगह नइये।
    • गरीब मनखे के सच्चा श्रद्धा भगवान तक जरूर पहुंचथे।
    • जे दूसर के भलाई चाहथे, भगवान ओखर ऊपर विशेष कृपा करथे।

    "ठलहा तै होबे मयारू दाई" 

    गीत के असली संदेश एही आय कि माता रानी बर हीरा-मोती ले बढ़कर भक्त के निष्कपट प्रेम अउ विश्वास होथे। जय माता दी। 🙏🌺

    🌼 माता रानी आप सब की मनोकामना पूर्ण करें 🌼

    दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो | छत्तीसगढ़ी जस गीत अर्थ, महत्व अउ कहानी

    दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो

    दुर्गा दाई के मंदिर   गायक -गुड्डा साहू

     ════════✿════════

    गीत -दुर्गा दाई के मंदिर 

    गायक -गुड्डा साहू 

    गीतकार -गुड्डा साहू 

    म्यूजिक कंपनी - sg  music

    वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे  

     ════════✿════════

    मुखड़ा 

    दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो 

    उड़ान -झूमे गाये नर अउ नारी झूमे गाये वो -2 

    दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो 

    //1 //

    चैत के महीना दाई बोये हव जंवारा वो 

    ढोल नगाड़ा अउ तबला बाजे बाजत हे नगाड़ा वो 

    कोनो बजावे तासा मांदर कोनो हा खधेरी वो

    उड़ान -मन के मनौती सबझन पाये मन झूमे गाये वो-2

    दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो

    //2  //

    कोनो चघाये हीरा मोती कोनो चघाये नरियर वो

    ढोल नगाड़ा अउ तबला बाजे बाजत हे नगाड़ा वो 

    तोर दरश बर ब्रम्हा विष्णु आये हे सरग ले वो 

    उड़ान -भोले बाबा डमरू हे बजाये मन झूमे गाये वो-2

    दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो

    //3 //

    रुचमुच ले मोर माता रानी करे हे सिंगारी वो 

    नवराति के पावन बेला मेला भरे हे भारी वो 

    दाई के दुवारी झंगु माथ ल नवाये वो

    उड़ान -भोले बाबा डमरू हे बजाये मन झूमे गाये वो-2

    दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो

     ════════✿═══════ 

    गीत के अर्थ (Meaning in Chhattisgarhi)

    ये जस गीत म दुर्गा दाई के महिमा गाये गे हे। जब नवरात्रि के पावन समय आथे, तब गांव-गांव अउ मंदिर म भक्ति के माहौल बन जाथे। नर अउ नारी सब मिलके दाई के मंदिर म झूम-झूम के भजन गाथें।

    चैत महीना म जंवारा बोये जाथे, जऊन माता के शक्ति के प्रतीक होथे। ढोल, नगाड़ा, तबला अउ मांदर के आवाज ले पूरा वातावरण गूंज उठथे। हर कोनो अपन-अपन मनौती लेके दाई के चरण म आथे अउ दाई सबके इच्छा पूरा करथें।

    गीत म ये घलो बताय गे हे कि ब्रह्मा, विष्णु अउ भोले बाबा घलो दाई के दरबार म आथें, जऊन दाई के महानता ला दर्शाथे।


    🟣 गीत के महत्व (Importance)

    👉 ये जस गीत नवरात्रि म गाये जाथे
    👉 दाई के भक्ति अउ श्रद्धा ला बढ़ाथे
    👉 समाज म एकता अउ खुशी के माहौल बनाथे
    👉 जंवारा, मेला अउ पूजा के परंपरा ला जिंदा रखथे
    👉 मनोकामना पूरा करे के विश्वास ला मजबूत करथे

    👉 नवरात्रि स्पेशल गीतों का पूरा कलेक्शन देखने के लिए नीचे दिए गानो पर क्लीक करे 


    🟠  छत्तीसगढ़ी कहानी

    शीर्षक: दाई के मंदिर म जागे भक्ति के ज्योत

    चैत के महीना सुरु होत ही गांव म अलगच रौनक दिखे लगिस। चारो ओर भक्ति के माहौल बन गे रहिस। गांव के बीचों-बीच स्थित दुर्गा दाई के मंदिर म रोज भीड़ बढ़त जावत रहिस।

    गांव के रामू, जऊन एक गरीब किसान रहिस, वो हर साल नवरात्रि म जंवारा बोवत रहिस। ओकर मन म अटूट विश्वास रहिस कि दाई जरूर ओकर दुख दूर करही।

    एक दिन रामू अपन घरवाली सीता ले कहिस –
    "ए सीता, ये साल दाई के दरबार म जाके मनौती मांगहूं, मोर फसल हर साल खराब हो जाथे, दाई जरूर कुछ करही।"

    सीता मुस्कुराके कहिस –
    "दाई म सबके दुख हर लेथें, तोर घलो जरूर सुनही।"

    नवरात्रि सुरु होइस। गांव म ढोल, नगाड़ा, तबला अउ मांदर के आवाज गूंज उठिस। हर कोई रंग-बिरंगा कपड़ा पहिन के मंदिर जावत रहिस। रामू घलो अपन जंवारा बोके दाई के मंदिर पहुंचिस।

    मंदिर म भारी भीड़ रहिस। नर अउ नारी सब झूम-झूम के जस गीत गावत रहिन –
    "दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो…"

    रामू के आंखी म आंसू आ गे। वो हाथ जोड़ के कहिस –
    "हे दाई, मोर दुख ला दूर कर दे, मोर घर म खुशहाली ले आ।"

    दिन बीतत गिस। नवरात्रि के आखरी दिन मेला लगिस। दूर-दूर ले लोगन आइन। दुकान, झूला अउ भक्ति गीत ले पूरा वातावरण गूंजत रहिस।

    उही रात रामू ला सपना आइस। सपना म दाई प्रकट होइस अउ कहिस –
    "बेटा, चिंता झन कर, तोर मेहनत अब रंग लाही।"

    सपना ले जाग के रामू बहुत खुश होइस।

    कुछ दिन बाद, रामू के खेत म फसल लहलहा उठिस। ए साल ओकर जीवन बदल गे। वो खुशी-खुशी मंदिर जाके दाई के धन्यवाद करिस।

    गांव वाले सब कहिन –
    "देखव, दाई के महिमा अपार हे, जऊन सच्चा मन ले मांगथे, ओकर जरूर पूरा होथे।"

    तब ले हर साल रामू अउ पूरा गांव दाई के मंदिर म झूम-झूम के जस गीत गाथें।

    नवरात्रि स्पेशल गीतों का पूरा कलेक्शन देखने के लिए नीचे दिए गानो पर क्लीक करे
    नवरात्रि स्पेशल गीतों का पूरा कलेक्शन देखने के लिए नीचे दिए गानों पर क्लिक करें
     

    देवी पार्वती हा /गुड्डा साहू /cgjaslyrics 

    देवी पारवती हाँ cgjaslyrics

    ═══════

    गीत -देवी पारवती हाँ

    गायक - गुड्डा साहू

    गीतकार - गुड्डा साहू 

    वेबसाईट - www.cgjaslyrics.com

    वेबसाईट ऑनर - के के पंचारे 

    ═══════

    मुखड़ा 

    देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ  

    देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ  

    उड़ान -बनगे जोगनिया हो माँ -2 

    देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ  

    अंतरा -1 

    जब बनके दूल्हा बनके भोले नाथ हा बइला म चढ़के आये

     भूतवा परेतवा कइसे बराती अपन संग म लाये

    उड़ान - राजा हिमांचल सुघ्घर दाई 

    करथे बरात परघनिया

    देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ

    अंतरा -2 

    जब बनके जोगनिया पारवती हां जोगी संग म जाये 

     बइठे हवय सुघ्घर डोली म मंदमंद मुस्काये 

    उड़ान - पारवती हां चलय वो दाई 

    बनके भोला के दुल्हनिया 

    देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ 

    अंतरा -3 

    शीतला मंडल ताल मिलाके आनंद मंगल गाये 

    लशमन झंगु अउ गिरधारी शहनाई ल बजाये 

    उड़ान - मम अपराध शमा कर दाई 

    सेऊक बने हे बजनिया 

            देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ           

    ═══✴═══



    गीत के अर्थ (Chhattisgarhi Arth)

    “देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया” एक पवित्र छत्तीसगढ़ी जसगीत आय जेन म माता पारवती के त्याग, भक्ति अउ भगवान भोलेनाथ संग विवाह के कथा ल सुंदर तरीका ले गाया गे हे।

    ए गीत म बताय गे हे कि जब भगवान शिव दूल्हा बनके बैल (नंदी) म चढ़के आथें, त ओमन संग भूत-परेत घलो बराती बनके आथें। ए दृश्य ल देखके राजा हिमांचल अउ माता मैना घबराथें फेर आखिरकार पारवती जी अपन सच्चा प्रेम अउ भक्ति ले शिव जी के संग विवाह करथें।

    पारवती जी जोगनिया रूप धारण करके अपन तपस्या अउ समर्पण के प्रतीक बन जाथें। ए गीत म शीतला मंडल, शहनाई अउ आनंद मंगल के गूंज ले विवाह के माहौल ल घलो सुंदर ढंग ले दिखाय गे हे।

    🔷 गीत के धार्मिक महत्त्व (महत्व)

    भक्ति अउ तपस्या के प्रतीक – माता पारवती के जोगनिया रूप त्याग अउ समर्पण के चिन्ह आय।

    शिव-शक्ति मिलन – ए गीत शिव अउ शक्ति के पवित्र संगम ल दर्शाथे।

    विवाह संस्कार के झलक – छत्तीसगढ़ी परंपरा अनुसार बरात, शहनाई अउ मंगल गीत के वर्णन मिलथे।

    आध्यात्मिक संदेश – सच्चा प्रेम, विश्वास अउ श्रद्धा ले भगवान के प्राप्ति हो सकथे।

     – छत्तीसगढ़ी भक्तिमय कहानी 🌺

    छत्तीसगढ़ के धरती म जसगीत के परंपरा बहुते पवित्र माने जाथे। एही पवित्र जसगीत म एक प्रसिद्ध गीत आय – “देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ”। ए गीत ल गायक अउ गीतकार गुड्डा साहू जी गाए हें, जेन म माता पारवती अउ भगवान शिव के पवित्र विवाह के कथा ल बहुत सुंदर ढंग ले प्रस्तुत करे गे हे।

    🔶 हिमांचल के महल म जन्मे पारवती

    बहुत बछर पहिली, हिमालय पर्वत के राजा हिमांचल अउ माता मैना के घर एक सुंदर कन्या के जनम होइस – माता पारवती। बचपन लेच पारवती जी के मन भगवान शिव म लगे रहिस। ओमन जानत रहिन कि ओमन के जीवन के लक्ष्य शिव जी के प्राप्ति आय।

    🔶 तपस्या अउ जोगनिया रूप

    जब पारवती जी बड़ी होइस, त ओमन कठोर तपस्या करे लगिन। जंगल म रहिके, भूखे-पियासे रहिके, भगवान शिव के ध्यान लगाइन। ए तपस्या देखके देवता घलो चकित हो गइन।

    आखिरकार, पारवती जी अपन राजसी रूप त्याग के “जोगनिया” रूप धारण करिन। ए जोगनिया रूप त्याग, समर्पण अउ सच्चा प्रेम के प्रतीक आय। एही बात ल गीत म गाया गे हे –

    “देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ…”

    🔶 भोलेनाथ के अनोखा बरात

    जब भगवान शिव दूल्हा बनके निकरिन, त ओमन नंदी बैल म सवार रहिन। बराती मन म भूत, प्रेत, गण अउ योगी रहिन। ए बरात ल देखके राजा हिमांचल घबरा गइन, फेर पारवती जी के अटूट विश्वास सबके शंका दूर कर दिस।

    गीत के पंक्ति म सुंदर वर्णन आय –

    “भूतवा परेतवा कइसे बराती अपन संग म लाये…”

    ए दृश्य बताथे कि भगवान शिव साधारण दूल्हा नई, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के स्वामी हें।

    🔶 विवाह के मंगल ध्वनि

    जब पारवती जी डोली म बइठिन, त ओमन मंद-मंद मुस्काइन। चारों ओर शहनाई बजे लगिस। शीतला मंडल ताल मिलाके आनंद मंगल गावत रहिन। पूरा वातावरण भक्तिमय होगे।

    ए विवाह सिरिफ दू आत्मा के मिलन नई रहिस, बल्कि शिव अउ शक्ति के संगम रहिस। ए संगम ले सृष्टि के संतुलन बनिस।

    🔶 गीत के आध्यात्मिक संदेश

    ए कहानी हमन ला सिखाथे कि –

    सच्चा प्रेम म त्याग जरूरी हे

    भगवान के प्राप्ति खातिर धैर्य अउ तपस्या चाही

    बाहरी रूप नई, भीतर के भक्ति महत्वपूर्ण हे

    माता पारवती के जोगनिया रूप हमन ला सिखाथे कि अगर मन सच्चा होही, त भगवान जरूर मिलहीं।

    🔶 छत्तीसगढ़ी संस्कृति म महत्व

    छत्तीसगढ़ म नवरात्रि, जसगीत, जंवारा अउ देवी भजन के समय ए गीत गाए जाथे। गांव-गांव म माता पारवती के विवाह कथा गूंजत रहिथे। ए गीत भक्ति, संस्कृति अउ परंपरा के प्रतीक आय।



    अंगार मोती के अंगना म जागे जोति

      ═══════

      गीत -अंगार मोती के ओ 

    गायक -गुड्डा साहू 

    www.cgjaslyrics.com 

    वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे

       ═══════ 

    ﮩـﮩﮩ٨ـ🫀ﮩ٨ـﮩﮩ٨ـ

    मुखड़ा 

    अंगार मोती के वो--वो अंगना म जागे जोति वो--2 

    अंतरा -1 

    गंगरेल बांध म दाई चलय पुरवईया

    नदिया के तीर म हावय शीतल छईया 

    उही मेर हावे देवी अंगार मईया 

    सगरे जगत के डोंगा पार करईया 

    उड़ान - चमकत हे अंग वो --ओ -ओ 

    पहिरे हे माला मोती वो

    अंगार मोती के वो--वो अंगना म जागे जोति वो--  

    अंतरा -2 

    पाछू डहर ले दाई गंगा बोहाथे 

    नव लाख के गहना म देवी हा सुहाथे 

    आँखी म काजर कारी टिकली लगाये 

    पइरी के घुँघरू बाजे मन ल मोहाये  

    उड़ान -महकत हे गजरा वो --ओ -ओ 

    मुड़ म गाथे हे चोटी वो 

    अंगार मोती के वो--वो अंगना म जागे जोति वो--

    अंतरा -3 

    देह म हे बंदन लाली तोर महतारी 

    लाल चुनरिया ओढ़े महिमा हे भारी 

    नर नारी तोर दुआरी मारे किलकारी 

    लईका पिचका तै हस देथस दाई चिन्हारी 

    उड़ान -तै विनती ल सुनके वो --ओ -ओ 

    हरही के भरथस गोदी वो 

    अंगार मोती के वो--वो अंगना म जागे जोति वो--

    अंतरा -4 

    जग के परानी मन हां घर तोर हां बरथे 

    चूड़ी पाठ भेंट चघाके तोला सुमरथे 

    लक्मन झंगु दाई जस म झुमरथे 

    चरण पखारे ब्रम्हा खड़े पानी धरके 

    उड़ान -तोर रद्दा निहारे वो --ओ -ओ 

    खलिहा म आबे येती वो

    अंगार मोती के वो--वो अंगना म जागे जोति वो--   

     

    अंगार मोती दाई के चमत्कारी कथा – छत्तीसगढ़ी म

    छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल म एक गाोंव रहिस – मोटियारी। ए गाोंव के किनारा म बहत रहिस गंगरेल नदिया, अउ ओही तीर म एक पुराना मंझा मंदिर रहिस – अंगार मोती दाई के।

    🌺 गीत ले जुड़ी भावना

    "अंगार मोती के वो अंगना म जागे जोति वो" ए गीत म अंगार माई के अलौकिक रूप के बखान करे गे हे। देवी माई के अंग म मोती कस चमक, गजरा के महक, अउ सुहावना छईंया ह लोकमन ल मोह लेथे।


    🌼 कथा के आरंभ – अंगना म जोति जागे

    एक बेर के बात आय, गाँव म लछमन झंगु नाव के एक गरीब चरवाहा रहिस। ओकर लइका मन रोज रात म डहर बटकत रहिन, घर के भीतर दुख-दरिद्र के बादर छा गे रहिस। झंगु रोज अंगार मोती दाई के मंदिर जाय अउ चुपचाप दाई के चरण म बैठके गोहार लगाय:

    “दाई, अंगना म जोति ला जगा दे, मोर घर म अंधियार बड़ घलो हे।”

    एक रात जब झंगु दाई के दरबार म पूजा करथे, तब मंदिर म अचानक तेज जोति फूटथे। झंगु के आँख चकाचौंध हो जाथे, अउ ओ देखथे – देवी अंगार मोती ह खुद मूर्ति म ले निकर के ओकर कोरा म बइठ गे हे।


    🔥 चमत्कार के सुरुआत

    झंगु के घर जब वो जोति ल लयाके दीप म बराथे, तब ले ओकर घर म सुख के वर्षा होथे। लइका ह हांसथे, गाय-गोरू ह दूध देथे, अउ अंगना म फूल खिलथे। ओ ह रोज दाई ल भोग लगाथे – लड्डू, नारियल, अउ गेंदा फूल।


    🌊 गंगरेल नदिया अउ दाई के परचा

    गीत म कहे गे –
    "गंगरेल बांध म दाई चलय पुरवईया, नदिया के तीर म हावय शीतल छईया"

    गंगरेल नदिया के पानी म दाई ह अक्सर भटकथें। एक दिन गाँव के मनखे मन देखे – दाई के मूर्ति ह पानी म तैरत हे, अउ जिहां-जिहां पानी चलथे, ओतकी हरियर क्यार म फुलवा फूट जाथे। एला ले गाँव म परचा फइलथे के दाई आज घलो जिन्दा हे।


    👑 नव लाख के गहना अउ गजरा

    दाई ला सिंगार करे जाय – नव लाख के गहना, पैरी के घुँघरू, आँख म काजर, अउ मुड़ म गजरा। जेवन दाई के दर्शन करथे, ओला मानो मोती के किरण म लिपट गे रहाय।


    🧒 बच्चा मन के दुलारी – चिन्हारी दाई

    गीत म कहे गे –
    "लईका पिचका तै हस देथस दाई चिन्हारी"
    दाई ह बच्चा मन के रक्षक हे। जऊन लइका ह बीमार हो जाथे, ओकर गोदी म अंगार माई के चिटकाही म भस्म लगा दे जाथे, अउ बच्चा ह गेंदी कस खिल जाथे।


    🙏 झुमरत श्रद्धा अउ भक्ति

    "नर नारी तोर दुआरी मारे किलकारी"
    लोकमन झुमरत रहिथे, झंगु हा झुमर गीत गाथे, अउ दाई के आंगन म भजन मंडली बन जाथे।


    🌸 ब्रहम देव के दर्शन

    "चरण पखारे ब्रम्हा खड़े पानी धरके"
    ए कहिनी म बताय गे – एक दिन ब्रह्मा देव खुद अंगार माई के दर्शन करे बर आय रहिन। वो ह दाई के पांव धोके जल म अपन अक्स देखे रहिन। ये संकेत देथे के देवी खुद सृष्टिकर्ता मन ल आशीर्वाद देथें।


    🌟 निष्कर्ष – अंगार मोती दाई के आस्था

    अंगार मोती दाई के आस्था ह सिरिफ परंपरा नइ हे, वो एक जीवंत शक्ति के रूप आय। झंगु झइसे हर गरीब, हर भक्ति मन के अंगना म दाई के जोति जरथे। गीत म गाये गे हर शब्द, गाँव के लोक परंपरा ल जिन्दा करथे।


    ✅ "आगे पढ़े" गुड्डा साहू  स्वर में सबो जस लिरिक्स 

    •  महाकाली नाचे ओ 
    • पहुना बनके ना 
    • देवी पार्वती हां 
    • दुर्गा दाई के मंदिर में 
    • रोवत हे लागुरवा दाई 
    • माता सेवा म चले आय 
    • मोर चले माँ दुर्गा 
    • मैया के चुनरी 
    • तोर अतका सूंदर रूप हे