मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में Lyrics – गुड्डा साहू | Mukund Sahu | मंडल जसगीत | CG Jas Lyrics

मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में – छत्तीसगढ़ी जस गीत Lyrics

मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में जस गीत पोस्टर | गायक गुड्डा साहू.jpg

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गीत -मोर चले माँ दुर्गा 

गायक -गुड्डा साहू 

गीतकार -मुकुंद साहू 

यूट्यूब -mandal jasgeet 

वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे 

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गीत के बारे में

"मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में" एक लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी जस गीत है जिसमें माँ दुर्गा की वीरता, शक्ति और महिषासुर सहित दैत्यों के संहार का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है। गीत में बताया गया है कि जब अधर्म बढ़ता है तब माँ दुर्गा धर्म की रक्षा के लिए सिंह पर सवार होकर युद्ध करती हैं और भक्तों के कष्टों का अंत करती हैं। यह गीत नवरात्रि, जवारा, ज्योति कलश, माता सेवा एवं देवी जागरण में विशेष रूप से गाया जाता है।

मुखड़ा  

मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में -2 

उड़ान -चण्ड मुण्ड महिसासुर मारे ---

महामाई छन छन में 

मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में -2 

अंतरा -1 

एक समय जब महिसासुर हा उधम करिस हे भारी 

देवता मन सब तेज किराके उपजाईस हे नारी 

उड़ान -सब देवता मन सोचे विचारे--

अपने वो मनमन में 

 मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में -2 

अंतरा -2 

फेर बघवा म चढ़ के माता दुर्गम ला ललकारे 

पांच बाण ला दुर्गमसुर के छाती में उतारे 

उड़ान -दुर्गमसुर मारके माता --

दुर्गा कहाये जनजन में 

 मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में -2 

अंतरा -3 

तोर महिमा के वो महामाई पार ला ना कोई पाये 

झंगु राम हां वो मोर दाई कतका महिमा बताये 

उड़ान -कतका रूप ला धर के मुकुंद के  --

बसगे मनके दर्पण में 

 मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में -2 

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गीत का अर्थ

यह जस गीत माँ दुर्गा की दिव्य शक्ति का गुणगान करता है। इसमें महिषासुर के अत्याचार, देवताओं द्वारा आदिशक्ति का आवाहन, माता के युद्ध और दैत्यों के संहार का वर्णन किया गया है। गीत भक्तों को यह संदेश देता है कि जब भी संसार में अधर्म बढ़ता है, माँ दुर्गा अपने अनेक रूपों में प्रकट होकर धर्म की रक्षा करती हैं। यह गीत श्रद्धा, शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक है।

गीत की विशेषताएँ

1.नवरात्रि में गाया जाने वाला लोकप्रिय जस गीत।

2.माँ दुर्गा की वीरता का सुंदर वर्णन।

3.सरल एवं मधुर छत्तीसगढ़ी भाषा।

4.देवी जागरण और जस प्रतियोगिता के लिए उपयुक्त।

5.भक्तों में उत्साह और भक्ति का संचार करता है।

6.पारंपरिक छत्तीसगढ़ी संगीत शैली।

7.धार्मिक एवं प्रेरणादायक संदेश।

गीतकार – मुकुंद साहू (Biography)

मुकुंद साहू छत्तीसगढ़ी भक्ति संगीत जगत के जाने-माने गीतकार हैं। उन्होंने अनेक जस गीत, देवी भजन और धार्मिक रचनाएँ लिखी हैं। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, लोकभाषा और देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था दिखाई देती है। उनके गीत सरल शब्दों में गहन धार्मिक भाव प्रस्तुत करते हैं, जिससे वे भक्तों के बीच लोकप्रिय हैं।

गायक – गुड्डा साहू (Biography)

गुड्डा साहू छत्तीसगढ़ी जस गीतों के लोकप्रिय गायक हैं। उनकी मधुर आवाज और भक्तिमय प्रस्तुति श्रोताओं को माता रानी की भक्ति में भावविभोर कर देती है। उन्होंने अनेक देवी भजन और जस गीतों को अपनी आवाज दी है, जिन्हें नवरात्रि एवं धार्मिक आयोजनों में विशेष रूप से सुना जाता है।

कथा

सनातन परंपरा के अनुसार जब पृथ्वी पर महिषासुर नामक असुर का अत्याचार अत्यधिक बढ़ गया, तब देवता भी उसके सामने असहाय हो गए। महिषासुर को ऐसा वरदान प्राप्त था कि कोई देवता उसका वध नहीं कर सकता। उसने स्वर्ग लोक पर अधिकार कर लिया और इंद्र सहित सभी देवताओं को पराजित कर दिया। चारों ओर भय और अधर्म फैल गया।

देवताओं ने भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महादेव से प्रार्थना की। तब तीनों देवों सहित सभी देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई। यही आदिशक्ति माँ दुर्गा थीं। प्रत्येक देवता ने उन्हें अपना श्रेष्ठ अस्त्र प्रदान किया। भगवान शिव ने त्रिशूल, भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र, इंद्र ने वज्र, वरुण ने शंख, अग्नि ने शक्ति और हिमालय ने सिंह वाहन प्रदान किया।

माँ दुर्गा सिंह पर सवार होकर युद्धभूमि में पहुँचीं। उनके तेज से सम्पूर्ण ब्रह्मांड प्रकाशित हो उठा। महिषासुर ने अनेक मायावी रूप धारण किए, लेकिन माँ दुर्गा ने अद्भुत पराक्रम दिखाते हुए उसके सभी प्रयासों को विफल कर दिया। अंततः त्रिशूल और दिव्य अस्त्रों से महिषासुर का वध हुआ। इस विजय के कारण उन्हें महिषासुर मर्दिनी कहा गया।

इसके बाद भी अनेक दैत्यों ने धर्म का नाश करने का प्रयास किया। चण्ड और मुण्ड जैसे असुरों का भी माता ने संहार किया। दुर्गमासुर जैसे शक्तिशाली राक्षसों का वध कर उन्होंने देवताओं और पृथ्वी की रक्षा की। इसी कारण माँ दुर्गा को शक्ति, साहस और धर्म की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।

"मोर चले माँ दुर्गा गरजत जब रण में" जस गीत इन्हीं दिव्य घटनाओं का स्मरण कराता है। गीत यह संदेश देता है कि सच्चे मन से माँ दुर्गा की आराधना करने वाले भक्तों पर उनकी विशेष कृपा बनी रहती है। वे अपने भक्तों के भय, संकट और दुखों का नाश करती हैं तथा उन्हें साहस, आत्मविश्वास और सफलता प्रदान करती हैं। नवरात्रि के अवसर पर यह गीत श्रद्धा और उत्साह के साथ गाया जाता है तथा भक्त माँ दुर्गा से सुख, समृद्धि और रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।

मातारानी के मनमोहक जस गीत 

  • दरसन बर मईया 
  • देवी के भुवन मा 
  • जुड़वास मनाबो 
  • तोर डंडा शरण 
  • बम्लाई ला सुमिरव 
  • तोर डीही के दिया 
  • लेखक: कैलाश पंचारे

    वेबसाइट: CG Jas Lyrics

    परिचय: कैलाश पंचारे छत्तीसगढ़ी जस गीत, भजन, आरती और धार्मिक सामग्री पर आधारित लेख लिखते हैं। उनका उद्देश्य छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और भक्ति संगीत को डिजिटल माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है।

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