तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई Lyrics | छत्तीसगढ़ी जस गीत | CG Jas Lyrics

  तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई – छत्तीसगढ़ी जस गीत 

 

          गीत - तोर डंडा शरण पखारव                  
गायक -अरुण यादव 
म्यूजिक कंपनी - के के पंचारे जस भजन
वेबसाइट -www.cgjaslyrics.com
वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे        
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गीत के बारे में

"तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई" माँ कंकालिन दाई की महिमा का वर्णन करने वाला एक लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी जस गीत है। इस गीत में माँ के उग्र और करुणामयी दोनों स्वरूपों का सुंदर वर्णन मिलता है। देवी द्वारा राक्षसों के संहार, भक्तों की रक्षा तथा छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर उनके दिव्य स्वरूप की महिमा का भावपूर्ण चित्रण किया गया है। यह गीत जस कार्यक्रमों, नवरात्रि और देवी आराधना के अवसर पर विशेष श्रद्धा के साथ गाया जाता है।

मुखड़ा 

तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई -2 

उड़ान - अऊ जय कंकालिन दाई मोर करबे माता सहाई  

तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई -2

अंतरा -1

देवलोक में मातेश्री तै पहली साज सजाये वो,पहली साज सजाये वो 

छत्तीस कोटि देवता धामी तोला माथ नवाये वो,तोला माथ नवाये वो 

रक्तबीज दानव ला मार के काली रूप चिहाये वो,काली रूप चिहाये वो 

कालरात्रि तोर रूप हर जेघरी परलय मचाये वो,जेघरी परलय मचाये वो 

उड़ान - तोर आरती मैंहा उतारव वो जय कंकालिन दाई-2

तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई -2

अंतरा -2

रिस भन्नागे मातेश्री के थर थर कापत आये वो,थर थर कापत आये वो 

अइसे अक्छीर माता होही कहिके जोखा मनाये वो,कहिके जोखा मनाये वो  

तबले दाई कंकालिन तै खाव खाव चिल्लाये वो,खाव खाव चिल्लाये वो 

पान फूल नरियर ला धरके देवी तोला मनाये वो,देवी तोला मनाये वो  

उड़ान - तोर सुरता के दियना बारव वो जय कंकालिन दाई  -2

तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई -2

अंतरा -3 

दिन बहुरागे कलजुग आगे देवी हां चरित दिखाये वो देवी हां चरित दिखाये 

छत्तीसगढ़ के डीही डोंगरी में जाके माता थिराये वो जाके माता थिराये वो

कहु बम्लाई कहु समलाई शारदा बनके छाये वो शारदा बनके छाये 

अउ समय समय में अपन भगत ल तैहा दरश दिखाए वो तैहा दरश दिखाए वो 

उड़ान - तोर प्रेम ला सुन्दर तारव वो जय कंकालिन दाई  -2

तोर डंडा शरण पखारव वो जय कंकालिन दाई -2   

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गीत का अर्थ

इस गीत में भक्त माँ कंकालिन दाई की शरण में जाकर उनका आशीर्वाद मांगता है। गीत में देवी के काली स्वरूप, रक्तबीज जैसे असुरों के वध और भक्तों की रक्षा का वर्णन किया गया है। साथ ही यह बताया गया है कि माँ समय-समय पर अपने भक्तों को दर्शन देकर उनकी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।

गीत की विशेषता

माँ कंकालिन दाई की महिमा का सुंदर वर्णन।

छत्तीसगढ़ी लोकभक्ति की मधुर प्रस्तुति।

देवी के काली और करुणामयी दोनों स्वरूपों का वर्णन।

नवरात्रि एवं जस कार्यक्रमों के लिए उपयुक्त गीत।

सरल भाषा और गहरे भक्ति भाव से भरपूर।

कथा

लोक मान्यता के अनुसार माँ कंकालिन दाई आदिशक्ति का एक तेजस्वी स्वरूप हैं। जब अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब माता अपने उग्र रूप में दुष्टों का संहार करती हैं और भक्तों की रक्षा करती हैं। छत्तीसगढ़ के अनेक क्षेत्रों में माँ कंकालिन दाई के मंदिर स्थित हैं, जहाँ श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और माता की कृपा प्राप्त करते हैं। यह गीत उसी अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है।

लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी जस गीत

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3.माता सती भवानी ओ – छत्तीसगढ़ी देवी गीत Lyrics
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 Jas Lyrics के बारे में

CG Jas Lyrics छत्तीसगढ़ी जस गीत, देवी गीत, पचरा, आरती, भजन और लोकभक्ति गीतों के सही एवं संपूर्ण बोल उपलब्ध कराने वाली एक समर्पित वेबसाइट है। यहाँ प्रत्येक गीत के साथ गीत की जानकारी, अर्थ, विशेषता, कथा और संबंधित भक्ति सामग्री भी प्रकाशित की जाती है। हमारा उद्देश्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और भक्ति परंपरा को डिजिटल माध्यम से देश-विदेश के पाठकों तक पहुँचाना है।

वेबसाइट: CG Jas Lyrics
वेबसाइट ओनर: कैलाश


बन बन गईया चराए / गायक - अरुण यादव /cgjaslyrics

🪔  बन बन गईया चराए /अरुणयादव/cgjaslyrics 🪔 

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गीत - बन बन गईया चराए

गीत लेबल-पारंपरिक 

गायक - अरुण यादव 

गीतकार - अरुण यादव

म्यूज़िक कंपनी - सुंदरानी भक्ति 

वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

बन बन गईया चराये मोर कन्हैया बन बन बसुरी बजाये हो माँ

हो बन बन बसुरी बजाये हो माँ -2 

  बन बन गईया चराये मोर कन्हैया बन बन बसुरी बजाये हो माँ

हो बन बन बसुरी बजाये हो माँ -2 

 अंतरा -1 

यहो कउन नगर के सुरहिन गईया कउन नगर चरेल जाये हो माँ

हो मईया कउन नगर चरेल जाये हो माँ

हो मईया कउन नगर चरेल जाये हो माँ 

 अंतरा -2 

यहो बृंदा बन के सुरहिन गईया बनका गली में चरेल जाये हो माँ

हो मईया नका गली में चरेल जाये हो माँ

हो मईया कउन नगर चरेल जाये हो माँ 

अंतरा -3  

यहो कउन  रंग गईया कउन रंग बछरू कउन रंग हावे चरवइहा माँ 

हो मईया कउन रंग हावे चरवइहा माँ 

हो मईया कउन रंग हावे चरवइहा माँ

 अंतरा -4  

यहो लाली रंग गईया सफ़ेद रंग बछरू श्याम रंग हावे चरवइहा माँ 

हो मईया श्याम रंग हावे चरवइहा माँ 

हो मईया श्याम रंग हावे चरवइहा माँ

 अंतरा -5  

पांच भगत मिल तोरे जस गाये जय जय बोले तुम्हारे हो माँ 

हो मईया जयजय बोले तुम्हारे हो माँ 

हो मईया जयजय बोले तुम्हारे हो माँ 

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गीत का अर्थ (भावार्थ)

"बन बन गईया चराये मोर कन्हैया" एक अत्यंत मधुर और भक्तिमय छत्तीसगढ़ी जसगीत है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप और उनकी गौचारण लीला का वर्णन किया गया है। गीत में बताया गया है कि कन्हैया जंगल-जंगल गाय चराते हैं और अपनी बांसुरी की मधुर तान से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं।

गीत के अंतरों में वृंदावन की पवित्र भूमि, गायों का महत्व और भगवान कृष्ण के श्याम स्वरूप का सुंदर चित्रण मिलता है। भक्त माता से प्रश्न करते हैं कि ये गायें कहां की हैं, इन्हें कौन चराता है और इनका रंग कैसा है। उत्तर में बताया जाता है कि ये वृंदावन की गायें हैं और इन्हें स्वयं श्यामसुंदर कृष्ण चराते हैं।

अंत में भक्तजन मिलकर माता और भगवान की महिमा का गुणगान करते हुए जय-जयकार करते हैं। यह गीत भक्ति, प्रेम, गौसेवा और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण का संदेश देता है।

गीत की विशेषता

1. श्रीकृष्ण की गौचारण लीला का वर्णन

गीत में भगवान कृष्ण के गाय चराने वाले रूप को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जो भक्तों के मन को आनंदित करता है।

2. वृंदावन की पवित्रता

गीत वृंदावन की दिव्यता और वहां की भक्ति परंपरा को दर्शाता है। इससे श्रोताओं में आध्यात्मिक भाव जागृत होते हैं।

3. सरल और मधुर शब्द

छत्तीसगढ़ी भाषा के सहज और मधुर शब्द इस गीत को गांव-गांव में लोकप्रिय बनाते हैं।

4. गौसेवा का संदेश

गीत गायों के महत्व और उनकी सेवा के प्रति श्रद्धा का भाव उत्पन्न करता है।

5. सामूहिक भक्ति का स्वरूप

अंतिम अंतरे में भक्तों द्वारा मिलकर जय-जयकार करना सामूहिक भक्ति और एकता का प्रतीक है।

कथा : बन बन गईया चराये मोर कन्हैया

बहुत समय पहले वृंदावन की धरती पर एक गरीब ग्वाला परिवार रहता था। परिवार के पास कुछ गायें थीं जिनकी सेवा करना ही उनका जीवन था। हर सुबह वे अपनी गायों को लेकर जंगल की ओर निकल जाते थे।

एक दिन गांव के लोगों ने देखा कि उनकी गायें पहले से अधिक स्वस्थ और प्रसन्न दिखाई देने लगी हैं। दूध भी पहले से ज्यादा मिलने लगा। सभी आश्चर्य में थे कि आखिर ऐसा कैसे हो रहा है।

एक बुजुर्ग साधु ने बताया कि जब गायें जंगल में जाती हैं, तब स्वयं श्यामसुंदर कन्हैया उनके साथ रहते हैं। वे बांसुरी बजाते हैं और गायों को प्रेम से चराते हैं। उनकी मधुर धुन सुनकर पशु-पक्षी भी मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

गांव वालों को विश्वास नहीं हुआ। अगले दिन वे छिपकर जंगल पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि एक श्यामवर्ण बालक पीतांबर धारण किए हुए गायों के बीच खड़ा है। उसके हाथ में बांसुरी थी और उसके चेहरे पर दिव्य मुस्कान थी।

जैसे ही बांसुरी की धुन गूंजी, पूरा वन आनंद से भर गया। पेड़ों की शाखाएं झूमने लगीं, पक्षी मधुर स्वर में गाने लगे और गायें प्रेमपूर्वक उसके पास आकर खड़ी हो गईं।

गांव वालों को समझते देर नहीं लगी कि यह कोई साधारण बालक नहीं बल्कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण हैं। सभी श्रद्धा से उनके चरणों में नतमस्तक हो गए।

कन्हैया ने कहा, "जो जीवों से प्रेम करता है, गौसेवा करता है और सच्चे मन से भगवान को याद करता है, उसके जीवन में सुख और शांति अवश्य आती है।"

उस दिन से गांव के लोगों ने आपसी भेदभाव छोड़कर प्रेम और सेवा का मार्ग अपनाया। वे प्रतिदिन भगवान का भजन करने लगे। गांव में सुख, समृद्धि और शांति का वातावरण बन गया।

आज भी जब यह गीत "बन बन गईया चराये मोर कन्हैया" गाया जाता है, तब ऐसा लगता है मानो वृंदावन की गलियों में फिर से कन्हैया अपनी बांसुरी बजाते हुए गायों को चरा रहे हों और भक्त उनके प्रेम में डूबकर जय-जयकार कर रहे हों।

जय श्रीकृष्ण। 

CG Jas Lyrics छत्तीसगढ़ी भक्ति गीत, जसगीत, लोकगीत और सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित एक मंच है। यहाँ आपको गीतों के लिरिक्स, अर्थ, कथा और कलाकारों की जानकारी सरल भाषा में प्राप्त होती है। हमारी कोशिश छत्तीसगढ़ी संस्कृति और भक्ति परंपरा को डिजिटल माध्यम से संरक्षित और प्रचारित करना है।

वेबसाइट ऑनर – कैलाश पंचारे


मोर दुर्गा मईया | अरुण यादव l छत्तीसगढ़ी देवी जस

मोर दुर्गा मईया। अरुण यादव।  छत्तीसगढ़ी जस लिरिक्स


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गीत-मोर दुर्गा मईया

गायक-अरुण यादव

म्यूजिक कंपनी-चंदन म्यूज़िक 

वेबसाइट ऑनर-कैलाश पंचारे

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मुखड़ा

घेरी बेरी मै माथ नावावव ओ--- मोर दुर्गा मईया

हे दुर्गे माँ हे दुर्गे माँ

हे दुर्गे माँ --आ हे शीतले माँ

दूध मोंगरा फूल चढ़ावव हो मोर दुर्गा मईया

घेरी बेरी मै माथ नावावव ओ--- मोर दुर्गा मईया

घेरी बेरी मै माथ नावावव ओ--- मोर दुर्गा मईया

(1)

तोर नाव ल लेके माता मैहर गोड़ उसालेव ओ

तोर नाव ल लेके माता मैहर गोड़ उसालेव ओ 

साज बाज ल बांध के फेर मै चोला ल भारेव ओ

साज बाज ल बांध के फेर मै चोला ल भारेव ओ  

      उड़ान -हो दूध मोगरा फूल चढ़ाव ओ मोर दुर्गा मईया

(2)

जगह जगह  के सुमिरत हावव सब ठाकुर देवता ल ओ

जगह जगह  के सुमिरत हावव सब ठाकुर देवता ल ओ  

आहु सहाई काम बनाहू आहु सबो नेवता म ओ

आहु सहाई काम बनाहू आहु सबो नेवता म ओ

  उड़ान -हो तोर गुण ल निसदिन गावव  ओ मोर दुर्गा मईया

हे दुर्गे माँ हे दुर्गे माँ हे दुर्गे माँ 

घेरी बेरी मै माथ नावावव ओ--- मोर दुर्गा मईया

(3)

आल्हा अम्बर हाबे माता जग म तुहर परसादे ओ

आल्हा अम्बर हाबे माता जग म तुहर परसादे ओ  

कविता ल हरे अजय के ते जग में अमर बनाबे ओ

कविता ल हरे अजय के ते जग में अमर बनाबे ओ

उड़ान -हो तोला मोगरा फूल पहिरावव ओ मोर दुर्गा मईया  

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अरुण यादव के जस गीत देखे बर नीचे क्लीक करव 

1.चंदन झूलना 

2.अजब सजे हे महामाया 

3.मईया तोर भुवना 



अजब सजे हे महामाया//ARUN YADAV//MAHAMAYA PACHRA JAS GEET

🛕👣 अजब सजे हे महामाया  /अरुण यादव 👣🛕
अजब सजे हे महामाया -arun yadav

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गीत -अजब सजे हे महामाया

गायक -अरुण यादव 

यूट्यूब  -मोर बोड़ला 

वेबसाइट -www.cgjaslyrics.com 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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अंतरा-1

अजब सजे हे महामाया रतनपुर में 

अजब सजे हे महामाया माया हो मां-2

उड़ान -अजब सजे हे महामाया माया हो माँ 

अजब सजे हे महामाया माया हो मां

रतनपुर में अजब सजे हे महामाया माया हो मां

अंतरा-1

माया जी के पावे म चुटकी बिराजे 

माया जी के गोड़ म पैजन बिराजे

उड़ान -पैजन के हावे झनकारे रतनपुर म

अजब सजे हे महामाया माया हो मां

अजब सजे हे महामाया रतनपुर में 

अजब सजे हे महामाया माया हो मां-2

अजब सजे हे महामाया रतनपुर में 

अजब सजे हे महामाया माया हो मां

अंतरा-2

माया जी के कमर म करधन बिराजे

माया जी के उंगली म मुंदरी बिराजे

उड़ान -मुंदरी के हावे झनकारे रतनपुर म

अजब सजे हे महामाया माया हो मां

अजब सजे हे महामाया रतनपुर में 

अजब सजे हे महामाया माया हो मां-2

अजब सजे हे महामाया रतनपुर में 

अजब सजे हे महामाया माया हो मां

अंतरा-3

माया जी के हाथे म चूड़ियां बिराजे

माया जी के बाहा म बहुटा बिराजे

उड़ान - बहुटा के हावे झनकारे रतनपुर म

अजब सजे हे महामाया माया हो मां

अजब सजे हे महामाया रतनपुर में 

अजब सजे हे महामाया माया हो मां-2

अजब सजे हे महामाया रतनपुर में 

अजब सजे हे महामाया माया हो मां

अंतरा-4

माया जी के गले म हरवा बिराजे

माया जी के काने म झुमका बिराजे

उड़ान -झुमका के हावे झनकारे रतनपुर म

अजब सजे हे महामाया माया हो मां

अजब सजे हे महामाया रतनपुर में 

अजब सजे हे महामाया माया हो मां-2

अजब सजे हे महामाया रतनपुर में 

अजब सजे हे महामाया माया हो मां

अंतरा-5

माया जी के नाके म नथली बिराजे

माया जी के माथे म टिकली बिराजे

उड़ान -टिकली के हावे झनकारे रतनपुर म

अजब सजे हे महामाया माया हो मां

अजब सजे हे महामाया रतनपुर में 

अजब सजे हे महामाया माया हो मां-2

अजब सजे हे महामाया रतनपुर में 

अजब सजे हे महामाया माया हो मां

अंतरा-6

माया जी के माघ म सिंदूर बिराजे

माया जी के सिर म मुकुट बिराजे

उड़ान -मुकुट के हावे झनकारे रतनपुर म

अजब सजे हे महामाया माया हो मां

अजब सजे हे महामाया रतनपुर में 

अजब सजे हे महामाया माया हो मां-2

अजब सजे हे महामाया रतनपुर में 

अजब सजे हे महामाया माया हो मां

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गीत के अर्थ

ए गीत म रतनपुर के महामाया देवी के अलौकिक रूप के गाथा गाये गे हवय।
गीत म माता के गहना-गहवर, श्रृंगार अउ झंकार के सुंदरता के बखान मिलथे।

1. माता जी के पांव म चुटकी अउ पैजन चमकत हे।

2.कमर म करधन, हाथ म चूड़ी, बाहा म बहुत, गले म हरवा, कान म झुमका।

3. माथे म टिकली, नाक म नथली, सिर म मुकुट अउ मांग म सिंदूर।

इही सब चीज मन मिलके रतनपुर के महामाया ला अद्भुत अउ दिव्य बनाथे।


 महत्व

1.ए गीत रतनपुर के महामाया मंदिर के धार्मिक महिमा बताथे।

2.माता जी के श्रृंगार अउ आभूषण के झंकार ला देवी शक्ति के प्रतीक मान गे हवय।

3.छत्तीसगढ़ के जसगीत संस्कृति म ए गीत एक बड़ महत्तम योगदान देथे।

4.माता महामाया ला रतनपुर के शक्ति पीठ म गिनती कर जाथे, जिहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन करथें।


 उद्देश्य

1.श्रद्धालु मन ला महामाया देवी के रूप अउ श्रृंगार के दर्शन कराय।

2.छत्तीसगढ़ी संस्कृति अउ जसगीत परंपरा के प्रचार-प्रसार कराय।

3. नवयुवक पीढ़ी ला अपन लोकभक्ति गीत से जोड़े रखे।

रतनपुर के महामाया – कहानी 

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला म बसे रतनपुर नगर के पहिचान आज के दिन पूरा भारत म हे। एला "छत्तीसगढ़ के काशी" कहे जाथे काबर के इहां महामाया देवी के प्रसिद्ध मंदिर हे।

पुराना कथा अनुसार राजा रत्नदेव जब रतनपुर राज करथें, तब राजा के में  देवी महामाया आके दर्शन देथें। अउ देवी कहिथें – "हे राजा! मोर मंदिर बनावव, मंय इही रतनपुर धरती म बिराजौं अउ अपन भक्त मन के रक्षा करहु ।" सपना के भोर होते ही राजा रतनदेव भारी भाव से मंदिर बनवाइन अउ ओ दिन ले महामाया देवी रतनपुर म विराजमान हे।

ए मंदिर ह शक्ति पीठ म गिनती कर जाथे। इहां हर दिन हजारन श्रद्धालु दर्शन बर आथें। नवरात्र अउ जस पर्वा म त मंदिर अउ रतनपुर नगरी झिलमिल हो जाथे। देवी जी के दर्शन करके लोगन मन अपन जीवन म शांति, सुख अउ समृद्धि पाथें।

अरुण यादव के गाये गे जसगीत “अजब सजे हे महामाया” म माता जी के श्रृंगार के अलौकिक वर्णन करे गे हवय। गीत म कहे जाथे –

1.माता जी के पांव म चुटकी अउ पैजन चमकथे।

2.कमर म करधन, हाथ म चूड़ी अउ बाहा म बहुत के झंकार सुनाई देथे।

3.गले म हरवा, कान म झुमका, माथे म टिकली अउ नाक म नथली दमकथे।

4.सिर म मुकुट अउ मांग म सिंदूर माता जी ला अद्भुत रूप देथे।

ये सब आभूषण अउ श्रृंगार के झंकार रतनपुर के वातावरण ला भक्ति अउ शक्ति के रंग म रंग देथे। श्रद्धालु मन मानथें के माता महामाया के दर्शन करे  ले दुःख-दरिद्रता दूर हो जाथे अउ घर-आंगन म सुख-शांति बने रहिथे।

रतनपुर के महामाया मंदिर के महत्व येकर से घलो जान सकथो के छत्तीसगढ़ के इतिहास अउ संस्कृति दूनों म ए मंदिर के खास जगह हे। लोकमान्यता अनुसार देवी जी अपन भक्तन के रक्षा हमेशा करथें।

आज घड़ी म इंटरनेट अउ यूट्यूब के माध्यम ले अरुण यादव के जसगीत “अजब सजे हे महामाया” मोर बोड़ला चैनल म सुनके लोगन मन भक्ति म डूब जाथें। ए गीत सिरिफ गाना नो हे, बल्कि माता महामाया के श्रृंगार अउ महिमा के अद्भुत झलक हवय।

जय माता की 🚩🚩माँ महामाया आप सब की मनोकामना पूर्ण करे 🚩🚩जय माता की