भईगे चण्डालिन | स्व. धर्मेन्द्र सुफल भगत | छत्तीसगढ़ी जस गीत

भईगे चण्डालिन — स्व. धर्मेन्द्र सुफल भगत के छत्तीसगढ़ी जस गीत 

भईगे चण्डालिन छत्तीसगढ़ी जस गीत — स्व. धर्मेन्द्र सुफल भगत

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गीत -भईगे चण्डालिन 

गायक - स्व.धर्मेन्द्र सुफल भगत 

गीतकार - स्व.परमानन्द पुरबिया 

यूट्यूब - new cg jas geet 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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भईगे चण्डालिन गीत के बारे मं

“भईगे चण्डालिन” एक देवी भक्ति ले भरपूर छत्तीसगढ़ी जस गीत आय। ये गीत मं दाई दुर्गा के शेर मं सवार होके दुष्ट दानव मन के संहार करे के गाथा ला बड़े भाव ले गाये गे हे। गीत के पंक्ति-पंक्ति मं माता के शक्ति, करुणा, ममता अउ भक्त मन के रक्षा करे के भाव दिखाई देथे।

गीत के शुरुआत “भईगे चण्डालिन कलर कलर किलकारे” जइसन जोशीला भाव ले होथे, जेमां दाई के विकराल शक्ति के दर्शन होथे। बघवा के गरजना अउ बघवा मं बइठे दुर्गा दुलौरिन के चित्रण गीत ला अउ प्रभावशाली बनाथे।

ये जस गीत मं दुर्गम दानव के अत्याचार, धरती मं पानी-अन्न के कमी, देवता मन के चिंता अउ माता के शरण मं जाके अपन विपदा बताये के प्रसंग ला छत्तीसगढ़ी लोकभक्ति के ढंग ले प्रस्तुत करे गे हे।

मुखड़ा 

भईगे चण्डालिन कलर कलर किलकारे-2 

उड़ान - बघवा गरजे ,बघवा गरजे बघवा गरजे ना 

बघवा मा बइठे दुर्गा दुलौरिन बैरी ला बरजे  ना 

अंतरा -1 

तहिआ जुग मा दुर्गम दानव ब्रम्हा के वरदानी गा 

चारो वेद ला बोरे बैरी गरबी गंज गुमानी गा 

धरम धरा ले बुड़के सुखागे नदी नरवा के पानी गा 

अन पानी बिन हिहुर परगे कलपे सगरो परानी गा 

उड़ान -सुमर सुमर सब देवता धामी तोला गोहारे ना -2 

 भईगे चण्डालिन कलर कलर किलकारे

अंतरा -2 

शुंभ निशुंभ महिसासुर मारे रक्तबीज संहारे वो 

दुर्गम दानव ला तोर बिन दाई हमला कोन उबारे वो 

अर्जी मा आइसे अम्बे अम्बिका परमेश्री पधारे वो 

जगजग ले दमके महमाया नाना नयन उचारे वो 

उड़ान -देख दशा दिनन के दाई आंसू ढारे ना  -2 

 भईगे चण्डालिन कलर कलर किलकारे

अंतरा -3 

माता के आंसू आंसू मा नदी नरवा भर जाये गा 

जीवन पाये सगरो परानी सुर नर नाग हिताये गा 

माथ नवा महामाया ला देवन विपदा अपन बताये गा  

अभय पाये साडी देवता धामी अपन अपन डीही जाये गा 

उड़ान -जान परिस बैरी असुरारी घेरा डारे ना   -2 

 भईगे चण्डालिन कलर कलर किलकारे

अंतरा -4 

देवता मन के लाज रखे बर किरपा करे किरपाली गा 

अपन तेज के भीतरी मा घेरे सुरहिन दयाली गा 

बैरी बर अडियाये सहुहे माता शेरावाली गा  

अगम अंग ले प्रगटे तुरते दस विद्या विकराली गा 

उड़ान -जगजननी जग जोत जवारा वेद अभारे ना -2 

 भईगे चण्डालिन कलर कलर किलकारे

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गीत के अर्थ

ये गीत के मूल भाव देवी शक्ति के महिमा ऊपर आधारित हे। गीत मं बताय गे हे कि जब दुर्गम दानव अपन शक्ति अउ वरदान के घमंड मं धरती मं अत्याचार करे लगिस, तब सगरो जगत मं संकट छा गे। नदी-नरवा सुखाये लगिन, अन्न-पानी के कमी होय लगिस अउ जीव-जंतु मन दुखी होगे।

तब देवता मन माता महामाया ला सुमरिन अउ अपन दुख-दर्द के अरजी लगाइन। माता दुर्गा अपन भक्त मन के पुकार सुनिन अउ दुष्ट शक्ति के नाश करे बर प्रगट होइन। माता के शक्ति के आगू असुर मन के घमंड टिक नइ सकिस।

गीत मं शुंभ-निशुंभ, महिषासुर, रक्तबीज अउ दुर्गम दानव जइसन दैत्य मन के संहार के माध्यम ले ये संदेश दे गे हे कि अधरम चाहे कतको ताकतवर होवय, अंत मं सत्य अउ धर्म के जीत होथे।

छत्तीसगढ़ी परंपरा मं ये गीत के महत्व

छत्तीसगढ़ मं जस गीत केवल गाना नइ, बल्कि गांव-गंवई के भक्ति अउ लोकपरंपरा के एक महत्वपूर्ण हिस्सा आय। नवरात्रि, जवारा, देवी जागरण अउ जस मंडली के आयोजन मं देवी के जस गाये के परंपरा बहुत पुराना हे।

“भईगे चण्डालिन” जइसन जस गीत मं देवी के वीर रूप, ममता रूप अउ शक्ति रूप तीनों के दर्शन होथे। गांव के जस मंडली मन मं ऐसे गीत मन ला ढोलक, झांझ, मंजीरा अउ सामूहिक स्वर के संग गाये जाथे। उड़ान के दोहराव गीत मं जोश अउ भक्ति के माहौल ला अउ गाढ़ा कर देथे।

गीत के विशेषता अउ महत्व

1.गीत मं देवी दुर्गा के शक्ति के सुंदर बखान हे।
2.दुर्गम दानव के अत्याचार अउ माता के संहार के प्रसंग हे।
3.शुंभ-निशुंभ, महिषासुर अउ रक्तबीज जइसन दानव मन के उल्लेख मिलथे।
4.छत्तीसगढ़ी लोकभाखा के सहज शब्द मन के उपयोग करे गे हे।
5.“बघवा गरजे” जइसन उड़ान गीत मं जोश भर देथे।
6.गीत मं भक्त अउ देवी के बीच के भावनात्मक संबंध देखे ला मिलथे।
7.धर्म, सत्य अउ शक्ति के जीत के संदेश मिलथे।
8.जस मंडली मं सामूहिक रूप ले गाये बर ये गीत उपयुक्त हे।
9.नवरात्रि अउ देवी आराधना के बखत गीत के महत्व अउ बढ़ जाथे।
10.ये गीत छत्तीसगढ़ी देवी-भक्ति के लोकधुन अउ परंपरा ला जीवित रखे मं योगदान देथे।

गीतकार स्व. परमानन्द पुरबिया के बारे मं

“भईगे चण्डालिन” के गीतकार स्व. परमानन्द पुरबिया बताये गे हें। उपलब्ध गीत जानकारी के आधार मं उनकर रचना मं देवी भक्ति, लोकभाषा अउ धार्मिक कथा के सुंदर मेल दिखाई देथे।

उनकर व्यक्तिगत जीवन, जन्मस्थान, शिक्षा, जस मंडली या अन्य रचनात्मक जानकारी के प्रमाणित विवरण उपलब्ध नइ होय के सेती इहाँ मनगढ़ंत जीवनी नइ लिखे गे हे। गीत के शब्द मन ले ये जरूर पता चलथे कि रचना मं देवी शक्ति अउ लोकभक्ति के गहिर भाव ला महत्व दे गे हे।

गायक स्व. धर्मेन्द्र सुफल भगत के बारे मं

“भईगे चण्डालिन” गीत ला स्व. धर्मेन्द्र सुफल भगत के स्वर मं प्रस्तुत करे गे हे। उनकर आवाज मं गाये देवी भक्ति के गीत मन छत्तीसगढ़ी जस परंपरा के हिस्सा हें।

उपलब्ध जानकारी मं उनकर जन्मतिथि, जन्मस्थान, संगीत शिक्षा अउ व्यक्तिगत जीवन संबंधी पर्याप्त प्रमाणित जानकारी नइ हे। ए कारण ले गलत जानकारी जोड़े के बजाय इहाँ केवल उपलब्ध गीत संबंधी जानकारी ला महत्व दे गे हे।

स्व. धर्मेन्द्र सुफल भगत के नाम ले जुड़े गीत मन छत्तीसगढ़ी भक्ति संगीत के श्रोता मन बर सांस्कृतिक महत्व रखथे।

भईगे चण्डालिन के कथा

बहुत पहिली के बात आय। धरती मं धर्म-कर्म के पालन होवत रहिस अउ मनखे, देवता अउ प्रकृति अपन-अपन नियम मं चलत रहिन। फेर एक समय दुर्गम नाम के एक शक्तिशाली दानव घोर तपस्या करके ब्रम्हा ले वरदान हासिल करिस। वरदान पाय के बाद ओकर भीतर घमंड भर गे।

दुर्गम अपन शक्ति के गलत उपयोग करके देवता मन ला परेशान करे लगिस। धीरे-धीरे ओकर अत्याचार बढ़त गिस। चारो वेद तक ला अपन कब्जा मं ले ले के धर्म के मार्ग ला कमजोर करे लगिस। धरती मं अनाज-पानी के संकट पैदा होय लगिस। नदी, नरवा अउ तालाब सुखाये लगिन। जीव-जंतु अउ मनखे पानी-अन्न के अभाव मं दुखी होगे।

धरती के ये हालत देखके देवता मन घबरा गइन। सगरो देवता धामी मन एक ठन जगह मं इकट्ठा होके जगदंबा ला सुमरिन। देवता मन माता के आगू अपन दुख के अरजी लगाइन। माता के शरण मं जाके सबो झन अपन रक्षा बर विनती करिन।

भक्त मन के पुकार सुनके महामाया के हृदय मं करुणा जागिस। माता के आंखी ले निकले आंसू धरती मं पानी के रूप मं बहत गिन। नदी-नरवा फेर भराय लगिन अउ धरती मं जीवन के आस जागिस।

माता अपन विकराल शक्ति के रूप धारण करिन। दुष्ट दानव अउ ओकर अत्याचार के सामना करे बर देवी रणभूमि मं उतरिन। माता के शेर गरजत रहिस अउ देवी के तेज ले सगरो दिशा प्रकाशित होवत रहिस।

देवी शक्ति के आगू दुर्गम दानव के घमंड चूर होगे। माता दुष्ट शक्ति के संहार करके धरती मं फेर धर्म अउ शांति के स्थापना करिन। देवता मन माता के जय-जयकार करिन अउ अपन-अपन धाम ला लौट गइन।

ये कथा के मूल संदेश ये आय कि जब संसार मं अधरम बढ़थे, तब शक्ति के जागरण जरूरी होथे। सच्चे मन ले देवी ला सुमरे वाला भक्त कभू अकेला नइ रहय। माता शक्ति अपन भक्त मन के रक्षा करथे अउ अन्याय के अंत करके सत्य के स्थापना करथे।

“भईगे चण्डालिन” गीत ये पूरा देवी महिमा ला छत्तीसगढ़ी लोकभाखा मं गाथा के रूप मं प्रस्तुत करथे।

अक्सर पूछे जाथे वाले सवाल 

1. “भईगे चण्डालिन” गीत के गायक कोन हें?

“भईगे चण्डालिन” गीत के गायक स्व. धर्मेन्द्र सुफल भगत हें।

2. “भईगे चण्डालिन” के गीतकार कोन हें?

ये गीत के गीतकार स्व. परमानन्द पुरबिया हें।

3. ये गीत कोन किसम के गीत आय?

ये एक छत्तीसगढ़ी जस गीत अउ देवी भक्ति गीत आय।

4. “भईगे चण्डालिन” गीत मं काकर महिमा गाये गे हे?

गीत मं माता दुर्गा, महामाया अउ देवी शक्ति के महिमा गाये गे हे।

5. गीत मं कोन-कोन दानव के उल्लेख हे?

गीत मं शुंभ, निशुंभ, महिषासुर, रक्तबीज अउ दुर्गम दानव के उल्लेख मिलथे।

6. ये गीत मं बघवा के उल्लेख काबर करे गे हे?

बघवा माता दुर्गा के वाहन आय अउ देवी के वीर अउ शक्ति रूप के प्रतीक आय।

7. ये गीत काकर बखत गाये जा सकथे?

ये गीत नवरात्रि, जस जागरण, जवारा, देवी पूजा अउ भक्ति कार्यक्रम मं गाये जा सकथे।

8. “भईगे चण्डालिन” के मतलब का आय?

ये गीत के संदर्भ मं “चण्डालिन” शब्द देवी के विकराल, शक्तिशाली अउ दुष्ट शक्ति के संहार करे वाला रूप ला दर्शाथे।

9. ये गीत के यूट्यूब चैनल के नाम का आय?

गीत संबंधी जानकारी मं यूट्यूब चैनल New CG Jas Geet बताये गे हे।

10. ये गीत के बोल कहां मिलही?

“भईगे चण्डालिन” के छत्तीसगढ़ी गीत के बोल CG Jas Lyrics मं पढ़े जा सकथे।

CG Jas Lyrics के बारे मं

CG Jas Lyrics छत्तीसगढ़ी जस गीत, देवी भक्ति गीत, पचरा, आरती अउ लोकभक्ति गीत के बोल ला एके जगह मं पहुंचाय के कोसिस करथे। हमर उदिम ये हे कि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक भक्ति गीत मन के शब्द, गायक, गीतकार अउ गीत संबंधी जानकारी आने वाला पीढ़ी तक पहुंचत रहय।

CG Jas Lyrics मं छत्तीसगढ़ी बोली-भाखा के जस गीत मन ला डिजिटल रूप मं सहेजे के काम करे जाथे, ताकि गांव-गंवई के पुराना भक्ति गीत मन इंटरनेट मं घलो जिंदा रहंय।

वेबसाइट ऑनर: के. के. पंचारे

माता मयारू के जस गीत निचे दे हावे 

👉🏿गुरु बिना ये जग विरथा हे — गुरु महिमा वाला छत्तीसगढ़ी जस गीत

👉🏿ज्ञान के देवईया मईया शारदा — मां शारदा के भक्ति गीत

👉🏿ये पिंजरा के पोश सुवना — जीवन दर्शन वाला छत्तीसगढ़ी जस गीत

👉🏿तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी — शीतला भवानी जस गीत

👉🏿ये हो हिंगलाज भवानी — हिंगलाज भवानी के भक्ति गीत

👉🏿कंकड़ कंकड़ मा शिवशंकर — भगवान शिव के भक्ति गीत

👉🏿तोर दया ले मां अम्बे — मां अम्बे के जस गीत

👉🏿मोर चले मां दुर्गा — दुर्गा माता के भक्ति गीत



ज्ञान के देवईया मईया शारदा | छत्तीसगढ़ी जस गीत | स्व. धर्मेंद्र सुफल भगत

ज्ञान के देवईया मईया शारदा 

ज्ञान के देवईया मईया शारदा छत्तीसगढ़ी जस गीत — स्व. धर्मेंद्र सुफल भगत

गीत के जानकारी

गीत - ज्ञान के देवईया मईया शारदा 
स्वर-स्व.धर्मेन्द्र सुफल भगत 
गीतकार -स्व-परमानन्द पुरबिया 
यूट्यूब -के के पंचारे जस भजन 
 भाषा -छत्तीसगढ़ी 
वेबसाइट -www .cgjaslyrics .com 

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मुखड़ा 

 हे मईया ज्ञान के देवईया मईया शारदा -2 

उड़ान - ज्ञान के ज्ञान के -----ज्ञान के देवईया

ज्ञान के देवईया मईया शारदा 

 हे मईया ज्ञान के देवईया मईया शारदा 

अंतरा -1 

राधा के जिभिया ले ,सिरजे हे भवानी 

लछमी पति नारायण के ,बने महरानी 

उड़ान - हो सरसती सुर के सधईया,हे मईया

 ज्ञान के देवईया मईया शारदा

 हे मईया ज्ञान के देवईया मईया शारदा  

अंतरा -2 

कोनो कथे ब्रम्हा के बेटी ,कोनो ओकर रानी 

ये कइसे लीला देश के,होही ओही कारी 

उड़ान - हो वीणा के ताल सधईया,हे मईया

 ज्ञान के देवईया मईया शारदा

 हे मईया ज्ञान के देवईया मईया शारदा  

अंतरा -3  

अर्जी म अइसे अम्बा ,देवी महामाया 

अहिरा घर अवतारे ,कलजुगहि काया 

उड़ान - हो पुरबिया ला पार लगइया ,हे मईया

 ज्ञान के देवईया मईया शारदा

 हे मईया ज्ञान के देवईया मईया शारदा 

उड़ान - ज्ञान के ज्ञान के -----ज्ञान के देवईया

ज्ञान के देवईया मईया शारदा 

 हे मईया ज्ञान के देवईया मईया शारदा -2

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गीत के अर्थ

ये गीत मं मईया शारदा ला ज्ञान अउ विद्या के देवी मान के उनकर महिमा गाए गेहे। गायक मईया ले अपन ऊपर ज्ञान के कृपा बनाय रखे के अरदास करथे।

गीत मं माता के अलग-अलग रूप अउ लोकमान्यता के उल्लेख मिलथे। कहीं मईया ला ब्रह्मा के बेटी कहे जाथे, त कहीं देवी के अलग रूप माने जाथे। वीणा के ताल अउ सुर के साधना के माध्यम ले माता सरस्वती के संगीत अउ कला संग जुड़ाव ला बताय गेहे।

अंतरा मं गीतकार अपन भक्ति भावना ले मईया ला पुकारत हे अउ अपन जीवन ला भवसागर ले पार लगाय के विनती करथे। पूरा गीत के मूल भाव ज्ञान, भक्ति, सुर, साधना अउ माता के कृपा आय।

गीत के विशेषता अउ महत्व

1.ये गीत छत्तीसगढ़ी लोकभाषा के सरल रूप मं रचे गेहे।

2.गीत मं मईया शारदा के ज्ञान स्वरूप के बखान करे गेहे।

3.वीणा, सुर अउ साधना के सुंदर उल्लेख मिलथे।

4.गीत के बोल मं भक्ति अउ लोकपरंपरा दुनों के मेल हे।

5.स्व. धर्मेंद्र सुफल भगत के गायकी गीत ला भावपूर्ण बनाथे।

6.स्व. परमानन्द पुरबिया के रचना मं देवी भक्ति के लोकभाव दिखाई देथे।

7.जस गीत के रूप मं ये रचना छत्तीसगढ़ी धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा संग जुड़थे।

8.विद्यार्थी, कलाकार अउ संगीत साधक मन बर ज्ञान के महत्व के संदेश देथे।

गायक स्व. धर्मेंद्र सुफल भगत के परिचय

स्व. धर्मेंद्र सुफल भगत ये गीत के गायक हवंय। “ज्ञान के देवईया मईया शारदा” मं उनकर नाम आदर के संग स्मरण करे गेहे। गीत मं माता शारदा के भक्ति, ज्ञान अउ सुर के भाव ला गायकी के माध्यम ले प्रस्तुत करे गेहे।

गायक के जनम स्थान, संगीत शिक्षा, परिवार अउ गायकी जीवन के विस्तृत प्रमाणित जानकारी उपलब्ध नई होय के कारण इहाँ अनुमानित जानकारी नइ लिखे गेहे। ये गीत उनकर भक्ति-संगीत यात्रा के एक महत्वपूर्ण रचना के रूप मं प्रस्तुत करे जा सकथे।

गीतकार स्व. परमानन्द पुरबिया के परिचय

स्व. परमानन्द पुरबिया के नाम ये भक्ति रचना के गीतकार के रूप मं जुड़े हवय। “ज्ञान के देवईया मईया शारदा” गीत मं उनकर रचना के माध्यम ले माता शारदा के महिमा, ज्ञान अउ संगीत के भाव ला छत्तीसगढ़ी लोकबोली मं प्रस्तुत करे गेहे।

उपलब्ध जानकारी मं स्व. परमानन्द पुरबिया के जनम स्थान, शिक्षा, संगीत यात्रा अउ जीवन के विस्तृत व्यक्तिगत जानकारी उपलब्ध नई हे। ए कारण ले बिना प्रमाण के कोनो जानकारी जोड़ना उचित नई होही। उनकर रचना के ये गीत लोकभक्ति के भाव ला सामने लाथे।

CG Jas Lyrics के बारे मं

CG Jas Lyrics छत्तीसगढ़ी जस गीत, देवी भक्ति गीत, पचरा, आरती अउ छत्तीसगढ़ी लोकभक्ति के गीत मन ला एक जगह मं पहुंचाय के प्रयास करइया वेबसाइट आय। इहाँ गीत के बोल के संग-संग गीत के जानकारी, अर्थ, गायक अउ गीतकार संबंधी जानकारी ला सरल भाषा मं प्रस्तुत करे जाथे।

वेबसाइट के उद्देश्य छत्तीसगढ़ी लोकभाषा, लोकगीत अउ भक्ति परंपरा ला डिजिटल माध्यम ले सहेजना अउ नवा पीढ़ी तक पहुंचाना आय।

वेबसाइट ऑनर: के. के. पंचारे

CG Jas Lyrics मं अउ पढ़व

  1. गुरु बिना ये जग विरथा हे चेत लगाहु — गुरु महिमा जस गीत
  2. कंकड़ कंकड़ मा शिव  — देवी भक्ति गीत
  3. ये हो हिंगलाज भवानी — हिंगलाज भवानी जस गीत
  4. हे मईया दुर्गा महरानी — दुर्गा मईया जस गीत
  5. ये पिंजरा के पोश सुवना — जीवन अउ भक्ति संदेश वाला जस गीत
  6. तरी हरी ना मोर नाना भवानी मोर — पचरा जस गीत
  7. शीतला भवानी — शीतला मईया जस गीत
  8. मोर चले माँ दुर्गा — दुर्गा भक्ति गीत
  9. तोर दया ले माँ अम्बे — माता अम्बे के भक्ति गीत

मोर आँखि के पुतरी/धर्मेंद्र सुफल भगत

 

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गीत -मोर आँखि के पुतरी दाई 

गायक -स्व-धर्मेंद्र सुफल भगत 

गीतकार -परमानन्द पुरबिया 

म्यूजिक कंपनी-SG Music 

वेबसाइट -WWW.CGJASLYRICS.COM 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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मुखड़ा 

मोर आँखि के पुतरी दाई पुतरी ओ 

देखे बर तरसत हे तोला 

 मोर आँखि के पुतरी दाई पुतरी ओ 

देखे बर तरसत हे तोला 

उड़ान -बिहनिया मझनिया संझा ---आ आ

बिहनिया मझनिया संझा ये आदी हे मोला 

देखे बर तरसत हे तोला 

 मोर आँखि के पुतरी दाई पुतरी ओ 

देखे बर तरसत हे तोला 

अंतरा -1 

यहो चतुर चार लख चारा कोरी चारा चरवाये 

पखरा म पखरा ले दाई पानी ओगराये 

यहो चतुर चार लख चारा कोरी चारा चरवाये 

पखरा म पखरा ले दाई पानी ओगराये 

उड़ान -सात सखी सात बहनिया----हो ओ हो 

सात सखी सात बहनिया भाई लगुरे भोला 

देखे बर तरसत हे तोला

मोर आँखि के पुतरी दाई पुतरी ओ 

देखे बर तरसत हे तोला  

अंतरा -2  

यहो कनका कनका तोर बसेरा जावव कते मोहाटी 

ये काया के काये भरोसा बिन धारण के पाटी 

यहो कनका कनका तोर बसेरा जावव कते मोहाटी 

ये काया के काये भरोसा बिन धारण के पाटी 

उड़ान -यहो डीही के बाजे डमरू डोली --ई ई 

डीही के बाजे डमरू डोली झन बने भोला 

देखे बर तरसत हे तोला 

मोर आँखि के पुतरी दाई पुतरी ओ 

देखे बर तरसत हे तोला 

अंतरा -3 

यहो तीन लोक दस चार भुवन मा जब जब आँखि मुदव 

झूलत रहिथे तोरे चेहरा छतरंग छईया खुदव 

यहो तीन लोक दस चार भुवन मा जब जब आँखि मुदव 

झूलत रहिथे तोरे चेहरा छतरंग छईया खुदव 

उड़ान -यहो पर बिन बरतिया घरतीया--आ आ  

पर बिन बरतिया घरतीया पाये लागे मोला  

देखे बर तरसत हे तोला

मोर आँखि के पुतरी दाई पुतरी ओ 

देखे बर तरसत हे तोला  

अंतरा -4  

यहो पांच तत्व के कुरिया कईचा पाचे हावे गवाही 

पाचे हितवा मितवा बैरी पाचे येला पाचाही 

यहो पांच तत्व के कुरिया कईचा पाचे हावे गवाही 

पाचे हितवा मितवा बैरी पाचे येला पाचाही 

उड़ान -यहो मरगे कतरगे तइहा --आ आ  

मरगे कतरगे तइहा मारु अउ ढोला 

देखे बर तरसत हे तोला 

मोर आँखि के पुतरी दाई पुतरी ओ 

देखे बर तरसत हे तोला 

अंतरा -5  

यहो भाग भाग म पाग हे कहिथे पचहर पाया पागी 

जोरव जोरा तोर अगोरा फुटइया के फूटे आँखि  

यहो भाग भाग म पाग हे कहिथे पचहर पाया पागी 

जोरव जोरा तोर अगोरा फुटइया के फूटे आँखि  

उड़ान -यहो परमानन्द पुरबिया पियासा  --आ आ  

परमानन्द पुरबिया पियासा चूरत रहिथे चोला 

देखे बर तरसत हे तोला 

मोर आँखि के पुतरी दाई पुतरी ओ 

देखे बर तरसत हे तोला 

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विशेष धन्यवाद: इस गीत के सभी मूल रचनाकारों और म्यूजिक कंपनी SG Music  को, जिन्होंने यह सुंदर भजन प्रस्तुत किया।


नोट: यह लिरिक्स केवल शैक्षिक और मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। सभी अधिकार संबंधित कलाकार और म्यूजिक कंपनी के पास सुरक्षित हैं।


गायक परिचय – स्व. धर्मेंद्र सुफल भगत

स्व. धर्मेंद्र सुफल भगत छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध जस गायक रहे, जिनके गीतों में भक्ति, भाव और लोक संस्कृति की गहरी छाप दिखाई देती है। उनकी आवाज में अपनापन और मधुरता थी, जो हर श्रोता के मन को छू जाती थी। उन्होंने अपने जीवन में अनेक जस गीत गाकर माता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और छत्तीसगढ़ की भक्ति संस्कृति को नई ऊंचाई दी।


✍ गीतकार परिचय – परमानन्द पुरबिया

परमानन्द पुरबिया छत्तीसगढ़ी भक्ति गीतों के लोकप्रिय रचनाकार हैं। उनकी रचनाएँ गहरे अर्थ और भाव से भरी होती हैं, जो सीधे भक्त के हृदय को छू लेती हैं। "मोर आँखि के पुतरी दाई" जैसे गीत उनकी रचनात्मक प्रतिभा का सुंदर उदाहरण हे


🌸 भावार्थ (छत्तीसगढ़ी में)

इस गीत में गायक अपन दाई ला अपनी आँखि के पुतरी कहिके संबोधित करत हे। वो दिन-रात दाई के दर्शन बर तरसत हे। गीत मं दाई के महिमा, माता-पिता के सेवा, भाई-बहिनी के अपनापन अउ धरती-आकाश के गवाही के संग श्रद्धा व्यक्त करे गे हे।

"मोर आँखि के पुतरी" ये सिरिफ एक उपनाम नई, ये ममता, प्रेम अउ भक्ति के गहिर भाव के प्रतीक हे। गायक अपन जीवन के हर पल, हर सांस मं माता के स्मरण करथे अउ येही अपन सबसे बड़े सुख मानथे।



सगा अनगहिया आगे/Dharmendra Sufal Bhagat

<img src="jas-geet-kar-permanand.jpg" alt="परमानंद पुरबिया - छत्तीसगढ़ी जस गीत लेखक, देवी भक्ति गीत सगा अंगहिया आगे के गीतकार" />
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गीत - सगा अनगहिया आगे

गायक - धर्मेंद्र सुफल भगत 

गीतकार - परमांनद पुरबिया 

कैटेगरी - जस गीत ,भग्ति गीत

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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मुखड़ा  

सगा अनगहिया आगे का या गोई बईला म चढ़के तोर बईहा आगे -2 

उड़ान -गौरी बिहावन बुढ़वा देवा -2 

ओहा तहिआ आगे का या गोई बईला म चढ़के तोर बईहा आगे

अंतरा -1 

यहो जुरयाये सरी देवता धामी पाये शिव के पतिया 

चाँद सुरुज दोनों संग मा रेंगय दिन कहव की रतिहा

यहो लोखन के सब पाछू रहिगे बाजा अउ बरतिया 

भूत्वा ले धरिया सब ले आये सगा हरे की घरतिया

उड़ान - ले जाही का तोला उढ़ररिया -2 

तोर लेवहिया आगे का या गोई बईला म चढ़के तोर बईहा आगे

 सगा अनगहिया आगे का या गोई बईला म चढ़के तोर बईहा आगे -2 

अंतरा -2  

यहो जोहर जोहर इस्सर राजा गटगट मचे समाये हे 

काल बरन कंकालिन के थन के तनौटी पाये हे 

यहो ढेरहीन बने सदा सुहागी चंडी नेंग निभाये हे 

मटर मटर मटकावत दारी भौजी लेगे बर आये हे 

उड़ान - सास ससुर के नी पता ठिकाना  -2 

येदे अहिआ आगे का या गोई बईला म चढ़के तोर बईहा आगे

 सगा अनगहिया आगे का या गोई बईला म चढ़के तोर बईहा आगे -2 

अंतरा -3  

यहो गौरी गौरा मड़वा कीजरे दाई के डोर टिकागे 

जनम जनम के जोड़ी जावर पिरित के बंधना बाधागे 

यहो माई भरोसा तीन परोसा मांदी चंडी खागे 

नोहर सोहर भौजी पाये ननद हां हरसागे 

उड़ान - परमानन्द पुरबिया परके  -2 

मनमोहइया आगे का या गोई बईला म चढ़के तोर बईहा आगे

 सगा अनगहिया आगे का या गोई बईला म चढ़के तोर बईहा आगे -2 

गीत के अर्थ छत्तीसगढ़ी भोली भाखा मा 

ए गीत म  पार्वती ल ओकर सखी मन पार्वती ल  कथे की आन गांव ले तोर दूल्हा भुतहा अउ बईहा दूल्हा आहे कहिके पार्वती ल शेड़थे 

अंतरा 1 म ये बताय हावे 

शिव के  बरतिया जाए  के खत पाके जम्मो देव धामी मन एक जगह सकलाय हाबे ,चंदा अउ सुरुज हा दिन में अउ रात में  बरतिया जाय बे तैयार हो जाथे ,ओकर बाजा बजैया मन हां बरतिया मन ले पछवा जाते वह  के लोगन मन नई चीन सके की घरतीय हरे की बरतिया। 

अंतरा 2 म ये बताय हावे 

एमा चंडी माई, कंकालिन देवी, अउ इस्सर राजा (शिव जी) के विशेष बखान करे गे हे।
भौजी (दुल्हन) के सौंदर्य ला मटकावत आये हवय।
सास-ससुर के जानकारी नई, फेर बरात ह धूमधाम से आइस।

अंतरा 3 म ये बताय हावे 

ए भाग म माई के डोर टिकाके गउरी-गौरा के मड़वा के पूजा करे गे हे।
जनम जनम के जोड़ी बनाय के बात करे गे हे।
नोहर-सोहर अउ ननद-भौजी के हंसी-खुशी म माहौल ला बताइस हे।

गायक के परिचय: धर्मेंद्र सुफल भगत

धर्मेंद्र सुफल भगत छत्तीसगढ़ी जस गीत गायक के रूप म प्रसिद्ध हें। येहर खैरागढ़ जिला के रहियाईया आय एकर  आवाज म मिठास हवय अउ एकर गीत मन म धार्मिक, सामाजिक अउ लोक भावना के संगम देखे ला मिलथे।

गीतकार के परिचय: परमांनद पुरबिया

परमांनद पुरबिया छत्तीसगढ़ी गीत लेखन के क्षेत्र म एक जाना-माना नाम हें। एकर लिखे गीत म गहराई, परंपरा अउ भक्तिभाव झलकथे। छत्तीसगढ़ी में जस गीत अतीक सारा लिखे हे जेकर गिनती नई कर सकथ। 


धर्मेंद्र सुफल भगत के अउ जस गीत पढ़े बर www.cgjaslyrics.com ल visit करव 

👇धर्मेंद्र सुफल भगत के अउ जस गीत निचे दे हावे 👇

  1. मोर आँखि के पुतरी दाई 
  2. मुड़ी के माला 
  3. ज्ञान के देवईया 
  4. बता देना रस्दा मईया 
  5. ये जारे जिवरा 
  6. जिपरहीन होंगे दाई 

ये गीत ल यूट्यूब म सुने बर नीचे  यूट्ब के लिंक दे हावव 👇

     https://youtu.be/gMQK7W_TsQs?si=DFduANQnLTm1dKhC


 
  

MUDI KE MALA//मुड़ी के माला पहिरे


_________मुड़ी के माला पहिरे _________


गीत-मुड़ी के माला पहिरे

गायक- धर्मेंद्र सुफल भगत 

गीतकार -परमानंद पुरबिया

वेबसाईट -www.cgjaslyrics.com

Website owner केके पंचारे 

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मुड़ी के माला पहिरे 


मुड़ी के माला पहिरे अवघड़हीन के आले हे


मुड़ी के माला पहिरे अवघड़हीन के आले हे 


उड़ान- कोलकाता वाली ओ दाई कोलकाता वाली ओ 


नई होवय जग मा अइसन कहूं के ऊफेर


मुड़ी के माला पहिरे अवघड़हीन के आले हे


मुड़ी के माला पहिरे अवघड़हीन के आले हे 


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अंतरा -1 

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अरन बरन के बरन में दाई कारी बरन बरत हे


खड़ा खप्पर धरे चंडिका बैरी ला जेहा झरत हे


लक लक लहू के उखड़ मात गै तीसर नयन जरत हे


सिर सिंदूर कर नखी कटारी भुतवा ला हाक परत हे


उड़ान - अंटागढ़ वाली ओ दाई अंटागढ़ वाली ओ


भुलागे भाग लिखईया कोन जनि लिखे बर ले 


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अंतरा -2  

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 विरन बिकट बर नाय नरैनी बरन बिसा ला काबर ओ

 

दुहरी मा दुहरी तिहरी त्रिलोकीन मुड़ी के माला काबर ओ

 

लक लक लहू के उखड़ मात गै तीसर नयन जरत हे


सिर सिंदूर कर नखी कटारी भुतवा ला हाक परत हे


उड़ान - अंटागढ़ वाली ओ दाई अंटागढ़ वाली ओ


भुलागे भाग लिखईया कोन जनि लिखे बर ले 


मुड़ी के माला पहिरे अवघड़हीन के आले हे


मुड़ी के माला पहिरे अवघड़हीन के आले हे

 

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अंतरा -3 

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गिरी पर्वत जल अगिन अगाशा सरबस तोरे दासी ओ 


लरही कस लहू रकत  के दाई काबर अतीक पियाशी ओ 


रकतबीज रक्षा बर अम्बा जुगजुग के तै फांसी ओ 


पिले पिले रकत चामुण्डा होबे कभू हितासी ओ 


उड़ान -नैनागढ़ वाली ओ दाई नैनागढ़ वाली ओ


जग म जेकर जहुहर कत अतके लहसी फिरे


मुड़ी के माला पहिरे अवघड़हीन के आले हे


मुड़ी के माला पहिरे अवघड़हीन के आले हे 


कोन जनि तै करम  करे बैरी भूत्वा फ़ुले ओ


मॉस मोहर के अनवत हरवा  गर म गजब के  खुले ओ


ओरमा झोरमा गल करधनिया कनिहा म तोर झूले ओ 


सुन लेबे कभु सुफल भगत के हमरो डेरौथी छूले ओ

 

उड़ान-मोहबा गढ़ वाली ओ दाई मोहबा गढ़ वाली ओ


पुरबिया के पहुना बनते अवगढ़ींन शीतला सरे 


मुड़ी के माला पहिरे अवघड़हीन के आले हे


मुड़ी के माला पहिरे अवघड़हीन के आले हे