"तोर दया ले माँ अम्बे" एक सुंदर छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत है, जिसमें भक्त माँ अम्बे से अपनी शरण स्वीकार करने की प्रार्थना करता है। गीत में माँ के दिव्य श्रृंगार, उनकी करुणा, ममता और भक्तों पर होने वाली कृपा का सुंदर वर्णन किया गया है। यह गीत बताता है कि सच्चे मन से माँ दुर्गा की भक्ति करने वाला कभी निराश नहीं होता।
गीत का धार्मिक महत्व
छत्तीसगढ़ में पचरा जस गीतों की परंपरा बहुत पुरानी है। नवरात्रि, जंवारा, माता सेवा और धार्मिक आयोजनों में ऐसे गीत श्रद्धा के साथ गाए जाते हैं। "तोर दया ले माँ अम्बे" भक्तों को यह संदेश देता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाई क्यों न आए, यदि माँ अम्बे की शरण सच्चे मन से ली जाए तो हर संकट दूर हो सकता है।
कथा – छत्तीसगढ़ी
गांव के किनारे एक छोटे से घर म अजय अपन परिवार संग रहत रहिस। वो गरीब जरूर रहिस, फेर ओकर मन म माता अम्बे बर अटूट भरोसा रहिस। हर साल नवरात्रि आवत रहिस त अजय अपन घर के आंगन ल गोबर ले लीपत, रंगोली बनावत अउ माता के जोत जलावत रहिस।
एक बछर गांव म भारी अकाल परगे। खेत सुखागे, काम बंद होगे अउ गांव वाले चिंता म डूब गइन। अजय के घर म खाय बर धान तक नई बचिस। फेर वो हिम्मत नई हारिस। रोज बिहान उठके माता अम्बे के जोत जलावत अउ कहत रहिस – "हे जगदम्बे माँ अंबे, शरण मा तोरे माता आये हव, अपन बनाले, हिरदे बसाले।"
गांव के कई झन मन कहिन – "सिरिफ पूजा करे ले का होही? कुछ काम-धंधा कर।"
अजय मुस्कुराके कहिस – "काम घलो करथों, फेर भरोसा त माता ऊपर हे।"
एक दिन गांव के मंदिर म पचरा जस गूंजे लागिस। गायक माता के महिमा गावत रहिन – "तोर दया ले माँ अम्बे…" पूरा गांव भक्ति म डूबगे। अजय घलो आंखी बंद करके माता के चरण म अपन दुख सुनाइस।
उही रात अजय ल सपना आइस। सपना म माता अम्बे लाल लुगरा पहिरे, सोलह श्रृंगार करे, मुस्कुरावत कहिन – "बेटा, दुख के दिन अब जादा नई रहय। मेहनत करत रहि, मोर ऊपर भरोसा बनाय रख।"
सबेरे उठके अजय के मन म नई उमंग आगे। वो गांव के बाहर खाली पड़े जमीन ल साफ करे लागिस। गांव वाले फेर हंसिन, फेर अजय हिम्मत नई हारिस।
कुछ दिन बाद जोरदार पानी गिरिस। खेत लहलहा उठिन। अजय के खेत म सबसे बढ़िया फसल होइस। जेन मन ओकर मजाक उड़ावत रहिन, ओ मन अब कहिन – "सच्ची म माता अम्बे के दया लेच ये सब होइस।"
अजय अपन पहली कमाई ले मंदिर म चुनरी, नारियल अउ दीपदान चढ़ाइस। पूरा गांव संग मिलके जस गाइस। मंदिर म गूंजे लागिस –
"अपन बनाले हे माँ अंबे, हिरदे बसाले माँ अंबे…"
ओ दिन ले गांव म हर साल ये गीत गाये जाय लागिस। लोगन मन मानय लागिन कि जेन मन सच्चे मन ले माता ल याद करथे, माता ओकर हाथ कभी खाली नई लौटावय।
ये कथा हमन ल सिखाथे कि श्रद्धा, मेहनत अउ विश्वास – ये तीनों संग रहिहीं त माता अम्बे जरूर अपन दया बरसाहीं। माता के शरण म जाके घमंड नई, बल्कि विनम्रता मिलथे। संकट चाहे कतको बड़े होवय, माता के कृपा ले ओमन छोटे पड़ जाथें।
आज घलो छत्तीसगढ़ के गांव-गांव म जब पचरा जस गूंजथे, तब भक्त मन अपन दुख-दर्द भुलाके माता के चरण म सिर नवाथें। "तोर दया ले माँ अम्बे" सिरिफ एक गीत नई, बल्कि अटूट विश्वास, भक्ति अउ माता के असीम मया के प्रतीक आय।
झुलव भवानी झूलना – मईया तोरे ललना झूलावे | छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स
झुलव भवानी झूलना एक सुग्घर छत्तीसगढ़ी देवी जस गीत हवे, जेमे माता भवानी के ममता, भक्ति अउ श्रद्धा के सुंदर वर्णन करे गे हवे। नवरात्रि, जंवारा सेवा अउ माता जागरण म ए गीत ला बड़े प्रेम अउ आस्था के संग गाये जाथे।
जस गीत के भावार्थ
ए जस गीत म चंदन काठ के झूला, चंपा चमेली के फूल अउ रेशम के डोर के माध्यम ले माता भवानी के सेवा अउ प्रेम के चित्रण करे गे हवे। भक्त मन माता के चरण म अपन श्रद्धा समर्पित करत हें।
पंडित युवराज पांडे जी के संक्षिप्त परिचय
पंडित युवराज पांडे जी छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कथा वाचक, धर्म प्रचारक अउ मधुर वाणी के धनी हवंय। अपन सरल विचार, आध्यात्मिक ज्ञान अउ भक्ति भाव ले वे हजारों भक्त मन के मन म खास जगह बनाय हवंय। माता जसगीत, सनातन धर्म के ज्ञान अउ प्रेरणादायक प्रवचन के माध्यम ले वे समाज म भक्ति अउ संस्कार के संदेश देथें। उनके स्वर म गाए गे छत्तीसगढ़ी पारंपरिक माता जसगीत मन ला भक्त मन बहुत पसंद करथें।
केशव वीडियो वर्ल्ड चैनल के बारे में
केशव वीडियो वर्ल्ड एक लोकप्रिय धार्मिक अउ सांस्कृतिक यूट्यूब चैनल आय, जिहां छत्तीसगढ़ी जसगीत, भजन, प्रवचन, धार्मिक कार्यक्रम अउ आध्यात्मिक वीडियो प्रसारित करे जाथे। ए चैनल के माध्यम ले छत्तीसगढ़ी संस्कृति, सनातन परंपरा अउ भक्ति संगीत ला देश-विदेश तक पहुंचाय जात हवय। पंडित युवराज पांडे जी के कई लोकप्रिय जसगीत अउ धार्मिक कार्यक्रम घलो एही मंच म देखे जा सकत हें।
नवरात्रि म माता भवानी के जस गीत के महत्व
छत्तीसगढ़ के संस्कृति म नवरात्रि के समय जंवारा सेवा अउ जस गायन के विशेष महत्व हवे। ए गीत मन भक्ति, प्रेम अउ माता के कृपा के संदेश देथे।
झुलव भवानी झूलना जस गीत माता भवानी के ममता अउ भक्ति के सुंदर प्रस्तुति हवे। अइसने अउ नए-पुराने छत्तीसगढ़ी जस गीत के लिरिक्स पढ़े बर हमर वेबसाइट ला जरूर देखव।
सदा भवानी ,दाहिनी रहिबे माया मोर सनमुख गौरी गणेश हो माँ
मईया सनमुख गौरी गणेश हो माँ
सदा भवानी ,दाहिनी रहिबे माया मोर सनमुख गौरी गणेश हो माँ
मईया सनमुख गौरी गणेश हो माँ
मईया सनमुख गौरी गणेश हो माँ
अंतरा -1
पांच देव मिल रक्षा करिहय ब्रम्हा विष्णु महेश हो माँ
मईया ब्रम्हा विष्णु महेश हो माँ
पांच देव मिल रक्षा करिहय ब्रम्हा विष्णु महेश हो माँ
मईया ब्रम्हा विष्णु महेश हो माँ
उड़ान -माँ मईया ब्रम्हा विष्णु महेश हो माँ
मईया ब्रम्हा विष्णु महेश हो माँ
मईया ब्रम्हा विष्णु महेश हो माँ
मईया ब्रम्हा विष्णु महेश हो माँ
अंतरा -2
सुमिरन सुमिरन मईया तोरे जस गावत हव
जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
मईया जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
सुमिरन सुमिरन मईया तोरे जस गावत हव
जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
मईया जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
उड़ान -माँ मईया जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
मईया जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
मईया जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
मईया जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
अंतरा -3
तोरे सुमिरन मईया पाप कटत हे
काया निर्मल होवत हे शरीर हो माँ
मईया काया निर्मल होवत हे शरीर हो माँ
तोरे सुमिरन मईया पाप कटत हे
काया निर्मल होवत हे शरीर हो माँ
मईया काया निर्मल होवत हे शरीर हो माँ
उड़ान - माँ मईया काया निर्मल होवत हे शरीर हो माँ
मईया काया निर्मल होवत हे शरीर हो माँ
अंतरा -4
काहन लागे आड़ी काहन लागे बाड़ी
काहन लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
मईया काहन लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
काहन लागे आड़ी काहन लागे बाड़ी
काहन लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
मईया काहन लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
उड़ान -माँ मईया काहन लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
मईया काहन लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
मईया काहन लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
अंतरा -5
फूलन लागे आड़ी फूलन लागे बाड़ी
लोहा लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
मईया लोहा लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
फूलन लागे आड़ी फूलन लागे बाड़ी
लोहा लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
मईया लोहा लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
उड़ान -माँ मईया लोहा लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
मईया लोहा लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
मईया लोहा लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
मईया लोहा लागे बजुड़ा केवाड़ी हो माँ
अंतरा -6
खोली दे केवडिया दरश देदे मोला ओ
आवत हावय सेउक तुम्हारे हो माँ
मईया आवत हावय सेउक तुम्हारे हो माँ
खोली दे केवडिया दरश देदे मोला ओ
आवत हावय सेउक तुम्हारे हो माँ
मईया आवत हावय सेउक तुम्हारे हो माँ
उड़ान -माँ मईया आवत हावय सेउक तुम्हारे हो माँ
मईया आवत हावय सेउक तुम्हारे हो माँ
मईया आवत हावय सेउक तुम्हारे हो माँ
मईया आवत हावय सेउक तुम्हारे हो माँ
अंतरा -7
सुमिरन सुमिरन मईया तोरे जस गावत हव
जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
मईया जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
सुमिरन सुमिरन मईया तोरे जस गावत हव
जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
मईया जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
उड़ान -माँ मईया जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
मईया जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
मईया जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
मईया जय जय बोलत हव तुम्हारे हो माँ
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अर्थ (Arth)
ए गीत मं गायक युवराज पाण्डेय हा मईया भवानी के दाहिनी (दक्षिण) रहय के प्रार्थना करत हे। गीत के हर अंतरा मं देवी अउ देवता मन के नाम ले सुरता करत, वो मन ला रक्षा अउ आशीर्वाद देय बर गाथा गावत गे हवय।
(1) गीत मं "गौरी गणेश" ले लेके "ब्रह्मा, विष्णु, महेश" तक सब देवता ला संगवारी बनाके मईया के आगे रक्षा बर मनौती रखे गे हवय।
(2) भक्त कहिथे के मईया के जस गावत रहिबो त पाप कट जाही, तन-मन पवित्र हो जाही।
(3) गीत के कतको अंतरा मं गाढ़ विश्वास हावे – मईया के द्वार खोली दे, दर्शन देवव, भक्त मन ले भक्ति के सुरता लगाथें।
🌹 महत्व (Mahatv)
(1) धार्मिक महत्व – देवी भवानी के भक्ति अउ आराधना के भाव ला मजबूत करथे।
(2) सामाजिक महत्व – जस गीत सामूहिक रूप मं गावल जाथे, जिहां गाम-गांव के लोगन एक संग बइठ के मईया के नाम गाथा करथें।
(3) आध्यात्मिक महत्व – गीत गावत-गावत मन मं शांति, श्रद्धा अउ विश्वास के ऊर्जा मिलथे।
🌻 उद्देश्य (Uddeshya)
(1) मईया भवानी के आशीर्वाद ले भक्त मन के रक्षा अउ मंगलकामना करवाना।
(2) हर आदमी के भीतर भक्ति, श्रद्धा अउ विश्वास के ज्योति जगाय रखना।
(3) पाप के नाश करके तन-मन ला निर्मल व स्वच्छ बनाना