गरबा रास लीला माचे /पुनीत साहू/परमानंद कठोलिया/cgjaslyrics

✦✦ गरबा रास लीला माचे/पुनीत साहू/परमानंद कठोलिया✦✦
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गीत - गरबा रास लीला माचे 
गायक - पुनीत साहू
गीतकार - परमानंद कठोलिया
वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 
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मुखड़ा 

 गरबा रास लीला माचे, गरबा रास लीला माचे

झूमर झूमर डंडा नाचे, झूमर झूमर डंडा नाचे 

उड़ान - हो अम्बे माता दरबार हो

आगे आगे आगे नवरात्रि तिहार हो

झूला में अंबे सुहावे, भैरव लगुरवा झुलावे -2

हो झलके 16 सिंगार हो

आगे आगे आगे नवरात्रि तिहार हो

//1//

नव झन कुंवार कैना सजे समरे आनी बानी

डांडिया नाचा नाच के ठुमके झूमर झूमर के सुहानी 

उड़ान - परसन हो माता रानी , आदि शक्ति हे महारानी -2

हो बाजे डंडा ठहकार हो

आगे आगे आगे नवरात्रि तिहार हो

//2//

डांडिया ताल ताल में खनके खुनूर  खुनूर पैरी 

छुनुर छुनुर पैरी बाजे रंग के मताये गैरी 

उड़ान - बछर भर मे आथे अबीर गुलाल उड़ाथे -2

हो अंबे माता के दुवार हो

आगे आगे आगे नवरात्रि तिहार हो

//3//

गद गद हो नव दुर्गा दाई नव कैना के रूप धरे 

नाचे गाए नव कैना संग सुर में दाई सुर भरे 

उड़ान - तकधिन ता ताता थैया झूमरत हेअंबा मईया-2

हो पूरा करत हे दुलार हो 

आगे आगे आगे नवरात्रि तिहार हो

//4//

नव कन्या संग नव दुर्गा कुंवारी भोजन करें 

मन वांछित भर देखे दाई भगत के दुःख हरे

उड़ान - नांदगांव नंदई होलिया रहीथे परमानंद कठोलिया-2

हो देवे अल्हण ला टार हो 

आगे आगे आगे नवरात्रि तिहार हो

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🌼 भक्त मन के पसंदीदा जसगीत संग्रह

पैजनिया बाजे– जस गीत अउ अर्थ

शीतला दाई जसगीत – सेवा म सेउक आये

धरम केबात– शक्ति स्वरूपा दाई

दाई तोर अचरा मा – भक्ति कथा

घुंघरू में कंकड़

जगमग जोत जले– नवरात्रि विशेष गीत

मोला देरी होंगे मईया

लगुरवा भईया

गीत के अर्थ

ये जसगीत म माता Ambe Mata के नवरात्रि दरबार के सुंदर चित्रण करे गे हे।

गीत म गरबा, डांडिया, नव कन्या पूजा, माता के सिंगार अउ भक्त मन के भक्ति भाव ला बहुत सुंदर ढंग ले बताय गे हे। ये गीत मंच कार्यक्रम, माता सेवा, जगराता अउ नवरात्रि उत्सव बर बहुत लोकप्रिय हो सकथे।

गीत के “गरबा रास लीला माचे, झूमर झूमर डंडा नाचे” लाइन बताथे कि माता के दरबार म खुशी, उत्साह अउ भक्ति के माहौल बने रहिथे। सब झन संगीत के ताल म नाचत-गावत माता के आराधना करथें।

गीत म “झूला में अंबे सुहावे” कहिके माता के सुंदर रूप अउ सोलह श्रृंगार के वर्णन करे गे हे। माता अपन भक्त मन ला प्रेम, दया अउ आशीर्वाद देवत हवंय।

गीत के आगे के अंतरा म नव कन्या पूजा के महत्व बताय गे हे। कन्या मन ला माता के रूप मानके भोजन कराय जाथे, सेवा करे जाथे अउ आशीर्वाद लेय जाथे।

पूरा गीत के संदेश ये आय कि माता के सच्चा भक्ति ले जीवन के दुख, परेशानी अउ बाधा दूर हो सकथे, अउ घर-परिवार म सुख, शांति अउ समृद्धि आ सकथे।

गीत के विशेषता

ये जसगीत म माता Ambe Mata के नवरात्रि दरबार के सुंदर चित्रण करे गे हे।

गीत म गरबा, डांडिया, नव कन्या पूजा, माता के सिंगार अउ भक्त मन के भक्ति भाव ला बहुत सुंदर ढंग ले बताय गे हे। ये गीत मंच कार्यक्रम, माता सेवा, जगराता अउ नवरात्रि उत्सव बर बहुत लोकप्रिय हो सकथे।

कथा – गरबा रास लीला माचे

एक समय के बात आय, एक छोटे गांव म हर साल Navratri के भव्य आयोजन होवत रहिस। गांव के सब झन मिलके माता के दरबार सजावत रहिन। फूल, दीपक अउ रंगोली ले पूरा मंदिर चमकत रहिस।

रात होतही ढोलक के आवाज गूंजे लगिस। गांव के बहिनी-बेटी मन रंग-बिरंगा कपड़ा पहनके गरबा नाचे लगिन। हर हाथ म डांडिया, हर चेहरा म खुशी।

अचानक एक बुजुर्ग भक्त कहिस— “जिहां सच्चा भक्ति होथे, उहां माता खुद आशीर्वाद देथे।”

उही रात एक छोटी कन्या मंदिर आइस। ओकर चेहरा म अलग चमक रहिस। जेन-जेन ओकर दर्शन करिस, ओकर मन के दुख दूर होगे। सब समझ गइन— आज माता खुद नव कन्या के रूप म आइन हवंय।

तब ले गांव म ये गीत गाए जाथे—

गरबा रास लीला माचे…

"माता रानी के भक्ति ले भरपूर नवा-नवा जस गीत लिरिक्स पढ़े बर CG Jas Lyrics मं फेर जरूर आवव।"

✦✦ मातारानी आप सब की मनोकामना पूर्ण करे✦✦

माटी के दाई दुर्गा -मनहरण साहू / छत्तीसगढ़ी जस लिरिक्स

✦✦ माटी के दाई दुर्गा -मनहरण साहू / छत्तीसगढ़ी जस लिरिक्स  ✦✦

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गीत-माटी के दाई दुर्गा 

गायक-मनहरण साहू 

गीतकार -परमानन्द कठोलिया

म्यूजिक कंपनी -ji  series

वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

 माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला  बनाव 
 माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला  बनाव 
उड़ान -कुँवार महीना अजोरी पाखीर 
कुँवार महीना अजोरी पाखीर 
दिन एकम के मडाव 
 माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला  बनाव 
 माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला  बनाव 
(1)
नवदुर्गा महित मर्दानी दया मया के सागर हे 
अस्टभुजी मोरती के रूप म चरनन महिसा सुर हे 
उड़ान -जगदम्बा के माने करे बर
 जगदम्बा के माने करे बर 
माटी के दुर्गा मढ़ाव 
(2 )
नवदुर्गा महेश मर्दानी दया मया के सागर हे 
अस्टभुजी मोर तीके रूप म चरनन महिसा सुर हे 
उड़ान -जगदम्बा के माने करे बर 
जगदम्बा के माने करे बर 
माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला  बनाव 
 माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला  बनाव 
(3 )
लाल बरन लाली रंग चोलना लाली सिंगार पहिरायेव
पुत्री अस समराके दाई अखंड जोत जलायेव 
उड़ान _लहर लहर लहराये जवारा _लहर लहर लहराये जवारा
नेवता नेवतैया ला बलाव 
माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला  बनाव 
 माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला  बनाव 
(4 )
चलत चलागन पुरखा पुरातन इसने तोला मनावव
नेम धेम जप पूजा पाठ कर नवररतीह गोहरावव
उड़ान ~ध्वजा तोरण तोर अंगना में छायेव
 ध्वजा तोरण तोर अंगना में छायेव 
मड़ई बैरग समराव
माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला  बनाव 
 माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला  बनाव 
(5 )
तीनो तिलिक तोर सेवा करके चरणन मात नवायेव
आशा तिसना पूरा करके तोर सरन में आयेव 
उड़ान ~छत्तीसगढ़ परमानंद कठोलिया
छत्तीसगढ़ परमानंद कठोलिया 
 जपत हावय तोर नाम
माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला  बनाव 
 माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला  बनाव
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माँ भवानी के जस गीत पढ़े बर निचे क्लीक करव
 
 अर्थ (सरल छत्तीसगढ़ी म)

ये जसगीत म गांव के लोगन माटी ले दाई दुर्गा के मूर्ति बनाय के बात करत हें। कुंवार महीना (नवरात्रि) म गांव वाले मिलजुल के माटी के दाई बनाथें, जंवारा बोथें अउ पूजा करथें।
गीत बताथे के दाई दुर्गा दया मया के सागर हें, महिषासुर मर्दिनी हें अउ सबके दुख हरथें। गांव म ध्वजा, तोरण, जंवारा, अखंड जोत सब सजाके दाई के सेवा करे जाथे।
आखिर म भक्त मन अपन मनोकामना पूरा करे बर दाई के चरण म सिर नवाथें अउ दाई के नाम जपथें।

⭐ गीत के विशेषता
नवरात्रि म माटी के दुर्गा बनाय के परंपरा के सुंदर वर्णन
गांव के जंवारा, मड़ई, ध्वजा, तोरण के झलक
दाई दुर्गा के महिषासुर मर्दिनी रूप के उल्लेख
सरल छत्तीसगढ़ी भक्ति भाव से भरपूर जसगीत
जगराता अउ जवारा कार्यक्रम म गाये जाथे
📖 कहानी छत्तीसगढ़ी
कुंवार महीना सुरु होवत रहिस। गांव के चारों कोती हलचल बढ़गे रहिस। खेत खार म काम कम होगे रहिस अउ सबके मन म नवरात्रि के उत्साह दिखत रहिस। गांव के बड़े बुजुर्ग मन चौपाल म बइठ के तय करिन के ए साल घलो दाई दुर्गा के माटी के मूर्ति बनाही।
गांव के रामसाय काका कहिन –
"देखव भइया, परंपरा पुरखा ले चलत आवत हे, माटी के दाई बनाके सेवा करबो, तभे गांव म सुख शांति रहिही।"
दूसर दिन बिहान सबो झन नदी किनारा गेन। उहां ले साफ माटी लानिन। लइका मन खुशी म उछलत रहिन। माटी ल गीला करके मूर्ति बनाय के काम सुरु होइस। धीरे-धीरे दाई के आकार दिखे लगिस। आठ भुजा, सिंह के ऊपर बिराजे दाई के रूप बनत रहिस।
गांव के महिलामन गावत रहिन –
"माटी के दाई दुर्गा गढ़-गढ़ तोला बनाव…"
गीत के संग काम म भक्ति के रंग चढ़ गे रहिस। कऊनो हाथ माटी देत रहिस, कऊनो आकार बनावत रहिस, कऊनो पानी छिड़कत रहिस।
तीसर दिन मूर्ति पूरा बन गे। अब सिंगार के बारी रहिस। लाल रंग के चोलना, चुनरी, मुकुट अउ गहना सजाय गिस। दाई के आंख बनावत बखत सब चुप होगिन। मानो सच म दाई गांव म आ गे हें।
उही बखत पुजारी जी कहिन –
"अब जंवारा बोय के तैयारी करव।"
मड़ई बनाय गिस। साफ जगह म माटी बिछाय गिस। जौ बोय गिस। पानी डार के पूजा करे गिस। अखंड जोत जलाय गिस। धूप अगरबत्ती के सुगंध चारों कोती फैल गे।
रात होइस त गांव म जसगीत गूंजे लगिस। ढोलक, मंजीरा अउ झांझ के आवाज म पूरा गांव झूम उठिस। महिलामन थारी बजावत गावत रहिन –
"लहर लहर लहराये जवारा…"
लइका मन घुमत रहिन, बुजुर्ग मन भक्ति म डूबे रहिन। हर घर ले नेवता भेजाय गिस। सबो झन दाई के दर्शन करे आवत रहिन।
नवरात्रि के चौथा दिन गांव म झंडा तोरण लगाय गिस। हर घर म दीप जले लगिस। संझा बखत आरती होवत रहिस। लोगन अपन मनोकामना मांगत रहिन। कऊनो नौकरी बर, कऊनो संतान बर, कऊनो सुख शांति बर।
एक दिन गांव के गरीब परिवार के गोमती बाई दाई के आगू रोवत रहिस। ओकर बेटा बीमार रहिस। वो हाथ जोड़ के कहिस –
"दाई, मोर लइका ल बचा ले, मैं तोर सेवा करहूं।"
गांव वाले सब ओकर संग प्रार्थना करिन। कुछ दिन म लइका ठीक होगे। गोमती बाई खुशी म नारियल चढ़ाइस अउ दाई के जस गाइस।
दिन बीतत गिस। जंवारा हरियर होगे। पूरा मड़ई हरियाली ले भर गे। दाई के रूप अउ सुहावन दिखे लगिस। सबो झन कहत रहिन –
"दाई हमर गांव म खुश हें।"
अष्टमी के दिन कन्या पूजन होइस। लइकी मन के पैर धोय गिस। भोजन कराय गिस। सबो झन दाई के रूप मान के सेवा करिन।
नवमी के दिन बड़ा भंडारा रखाय गिस। खीर, पूरी, सब्जी, प्रसाद बांटे गिस। दूर-दूर ले लोगन आयिन। जसगीत अउ भक्ति म पूरा गांव डूब गे।
आखिर म दशमी के दिन विदाई के बारी आइस। सबो झन के आंख म आंसू रहिस। मूर्ति विसर्जन बर ले जावत बखत महिलामन गावत रहिन –
"माटी के दाई दुर्गा गढ़-गढ़ तोला बनाव…"
नदी किनारा पहुंचके पूजा करे गिस। नारियल फोड़े गिस। दाई ल विदा करे गिस। सबो झन मन म एके बात रहिस –
"अगले साल फिर आवव दाई।"
गांव लौटत बखत सबके मन हल्का रहिस। सबो झन मानत रहिन के दाई दुर्गा अपन आशीर्वाद देके गइन। खेत म फसल बढ़िया होही, घर म सुख शांति रहिही।
एही परंपरा आज घलो गांव म चलत हवय। हर कुंवार महीना म माटी के दाई बनाय जाथे, जंवारा बोय जाथे अउ जसगीत गूंजत हवय। भक्ति, परंपरा अउ एकता के ए सुंदर उदाहरण आज घलो गांव के संस्कृति ल जिंदा रखे हवय।


सजे आनी बानी /पुनीत साहू/परमानंद कठोलिया

🚩🚩🚩 सजे आनी बानी / पुनीत साहू  / जस lyrics 🚩🚩🚩

सजे आनी बानी दाई के दुवरिया ।पुनीत साहू

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गीत - सजे आनी बानी 

गायक - पुनीत साहू

गीतकार - परमानंद कठोलिया

वेबसाईट - www.cgjaslyrics.com

वेबसाईट ऑनर - के के पंचारे

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मुखड़ा 

सजे आनी बानी दाई के दुवरिया 

 सजे आनी बानी दाई के दुवरिया 

उड़ान -जारे जारे सुवा लेजा लिख लिख  तैहा पतिया 

अंतरा -1  

ब्रम्ह लोक जा ब्रम्ह कहिबे विष्णु लोक जा बैकुण्ड

शिव लोक जा शिव ला कहिबे अउ जाबे सातो कुण्ड 

उड़ान - जगमग जगमग जोत जलत हे नव दिन अउ नवरतिहा

 सजे आनी बानी दाई के दुवरिया 

 सजे आनी बानी दाई के दुवरिया

अंतरा -2 

कृष्ण लोक जा कृष्ण कहिबे अउ कहिबे गणेश ला 

पाताल पूरी जा वाशु नाग अउ कहिदेबे तै शेष ला 

उड़ान - तोरण पताखा सजे हे सुघ्घर रददा मा हावे तरिया 

 सजे आनी बानी दाई के दुवरिया

  सजे आनी बानी दाई के दुवरिया 

 अंतरा -3  

भूले बिसरे ला हाथ जोड़ के कहिदेबे संदेश ला 

यज्ञ रचे हव डीही डोंगर में हरही मोर कलेश ला 

उड़ान - देवी देवता के चरण परत जा फूल जाही तोर छतिया 

 सजे आनी बानी दाई के दुवरिया

  सजे आनी बानी दाई के दुवरिया

 अंतरा -4   

धरम दुवारी लीम के छईया शीतला माता के डेरा 

परमानंद कठोलिया कहिथे होंगे विसर्जन बेरा 

उड़ान - नम्मी के दिन बरत बरत निकलही सब झन बनहुँ बरतिया 

 सजे आनी बानी दाई के दुवरिया

  सजे आनी बानी दाई के दुवरिया  

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गीत के अर्थ 

ये गीत देवी माई के भक्ति अउ नवरात्र तिहार के गीत आय। गीत मं बताइस गे हे कि नवरात्र के दिन माता  के दुआर, आंगन अउ मंदिर मन बड़े सुंदर संगे सजत हे। तोता (सुवा) ला दूत बनाके संदेश भेजे जावत हे कि माई तक भक्तमन के प्रार्थना पहुंचा दे।

गीत मं देवी के महिमा ला गायक हा बताये गेहे कि ब्रह्मा, विष्णु, शिव, कृष्ण, गणेश, शेषनाग जइसने सबो देवता मन घलो माई के स्तुति करथें। माई के महिमा सिरिफ धरती मं नोहय, स्वर्ग, पाताल अउ सबो लोक मं गूंजथे।

ए गीत भक्ति अउ श्रद्धा के महत्व बताथे। जे मन देवी ला भूले-बिसरे हवंय, ओमन घलो माई के संदेश सुने के बाद वापस भक्ति मं जुड़ जाथें। पूजा-पाठ, हवन अउ यज्ञ डोंगर-डीही जइसने गाम-गांव मं आयोजित करके संगी-साथी मिलके दुख-दर्द, क्लेश दूर करथें।

अंत मं गीत मं धर्म-दुआर, शीतला माता के आंगन अउ विसर्जन के रस्म के बखान करे गे हवय। नवरात्र मं व्रत-उपवास रखे लोगन के जीवन मं शांति, सुख अउ समृद्धि आ जाथे।