Aama Tari Amli Bagicha Tari Jhiriya || Chanda Yadav || आमा तरी अमली /चंदा यादव/पचरा जस लिरिक्स
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गीत- आमा तरी अमली
स्वर - चंदा यादव
म्यूज़िक लेबल - पारंपरिक जस
म्यूज़िक कंपनी - sanvi sangit sargam
वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां -2
हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2
अंतरा -1
झिरिया नहावत माई के नथली गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां
हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2
आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां
हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2
अंतरा -2
झिरिया नहावत माई के खिनवा गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां
हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2
आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां
हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2
अंतरा -3
झिरिया नहावत माई के सूतिया गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां
हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2
आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां
हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2
अंतरा -4
झिरिया नहावत माई के ककनी गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां
हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2
आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां
हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2
अंतरा -5
झिरिया नहावत माई के करधन गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां
हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2
आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां
हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2
अंतरा -6
झिरिया नहावत माई के पैंजन गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां
हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2
आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां
हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2
अंतरा -7
झिरिया नहावत माई के बिछिया गंवईगे वो काला वो पहिर घर जावव हो मां
हो मईया काला वो पहिर घर जावव हो मां-2
आमा तरी अमली, बगीचा तरी झिरिया, झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां
हो मईया झिरिया नहाय के बढ़ साध हो मां-2
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CG Jas Lyrics के अउ लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी जसगीत
➤ सुमरी सुमर के हां मैं तोर जस गांवव
➤ शीतला भवानी मईया मोर जिनगी सुग्घर लागे
➤ मोला देरी होंगे मईया तोरे सेवा मा
गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी मं)
ये जसगीत मं मइया के पवित्र रूप अउ गांव के लोकजीवन के सुंदर चित्रण करे गे हे। गीत मं बताय गे हे कि बगीचा अउ झिरिया (छोटे जलस्रोत) के किनारे मइया स्नान करे बर जाथें। नहावत बखत मइया के गहना एक-एक करके गुम होवत जाथे—जइसे नथली, खिनवा, सूतिया, ककनी, पैंजन अउ बिछिया।
ये सिरिफ गहना गुम होय के बात नइये, बल्कि ये मइया के त्याग, सादगी अउ भक्त मन बर अपन ममता के प्रतीक आय। गीत सुनके लगथे कि मइया अपन श्रृंगार छोड़के अपन भक्त मन के दुख दूर करे बर निकले हवंय।
गीत के विशेषता:
1. लोक संस्कृति के झलक
ये गीत मं छत्तीसगढ़ के गांव, बगीचा, झिरिया अउ लोक जीवन के सुंदर वर्णन मिलथे।
2. माता भक्ति ले भरपूर
पूरा गीत मं मइया प्रति प्रेम, श्रद्धा अउ समर्पण झलकथे।
3. पारंपरिक धुन
ये जसगीत नवरात्रि, जस-जागर अउ माता सेवा मं गाये जाथे।
4. श्रृंगार अउ ममता के मेल
गीत मं मइया के गहना के वर्णन करके भक्त मन के भावनात्मक जुड़ाव ला मजबूत करे गे हे।
गीत के कथा Story in Chhattisgarhi
बहुत पुरखा जमाना के बात आय। एक छोटे गांव मं घलो एक सुंदर बगीचा रहिस, जिहां आम अउ इमली के पेड़ लहलहावत रहिन। ओही बगीचा के बीच मं एक निर्मल झिरिया रहिस, जिहां गांव वाले पानी भरे अउ पूजा करे जावत रहिन।
एक दिन गांव के कुछ महिला मन बिहान-बिहान पूजा बर निकरिन। ओ मन देखिन कि झिरिया के किनारे एक दिव्य प्रकाश चमकत हे। धीरे-धीरे सब्बो झन उहां पहुंचिन त देखिन कि माता शीतला स्वयं झिरिया मं स्नान करत हवंय।
माता के रूप अतका मनमोहक रहिस कि सब्बो भक्त मंत्रमुग्ध होगे। फेर स्नान करत-करत माता के नथली पानी मं गिर गे। फेर खिनवा, सूतिया, ककनी, पैंजन अउ बिछिया घलो एक-एक करके झिरिया मं समावत गे।
भक्त मन घबरा गिन, फेर माता मुस्कराके कहिन—
“गहना के मोल नइये, भक्त के प्रेम सबसे बड़े धन आय।”
ए बात सुनके गांव वाले समझ गिन कि सच्ची भक्ति बाहरी श्रृंगार मं नइ, बल्कि मन के श्रद्धा मं होथे। ओ दिन ले गांव मं हर साल ये जसगीत गाके माता के महिमा गाये जाथे।
मइया के ए पावन जसगीत अगर आप मन ला पसंद आय होही, त अपन परिवार अउ संगवारी मन संग जरूर साझा करव।
जय माता दी।



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