कारी मा बीरबिट काली | दुकालू यादव l छत्तीसगढ़ी जसगीत लिरिक्स, अर्थ और कहानी

Cgjaslyrics✦✦ कारी मा बीरबिट काली-दुकालू यादव✦✦cgjaslyrics

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गीत-कारी मा बीरबिट काली

गायक - दुकालू यादव

गीतकार -दुकालू यादव

म्यूजिक कंपनी - kk casette 

वेबसाईट ऑनर - कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा

कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली

दुनिया भर मां हे तोर मान

आशीश देवे माता अपन भगत ल वो......

 अपनेच लईका तै हा जान

अंतरा-1

आंखी छटकारे माता चूंदी छरियाये वो.....

हाथ में खप्पर डोलाय -2

उड़ान-कान मा पहिरे बाली माता कलकत्ता वाली-2

कई से करव तोर गुणगान 

आशीश देवे माता अपन भगत ल वो......

 अपनेच लई का तै हा जान

कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली

दुनिया भर मां हे तोर मान

अंतरा-2

मुड़ी मुड़ी के माता माला ओरमाए वो.....

हाथ में खप्पर डोलाय -2

उड़ान-कान मा पहिरे बाली माता कलकत्ता वाली-2

अल करहा जीभ लमाय 

आशीश देवे माता अपन भगत ल वो......

 अपनेच लई का तै हा जान

कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली

दुनिया भर मां हे तोर मान

अंतरा-3

सुत गे शरण में माता शिव जी मनाए वो.....

तब जाके तैहा थीराय -2

उड़ान-पूजा करे नरनारी माता कलकत्ता वाली 2

रखबे तै हमरो धियान 

आशीश देवे माता अपन भगत ल वो......

 अपनेच लई का तै हा जान

कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली

दुनिया भर मां हे तोर मान

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मां शेरावाली के जस गीत के लिंक नीचे दे हावे जाके क्लीक करव 

⬩➤ कंकालिन मोरे माया

⬩➤ माटी के दाई दुर्गा

⬩➤ थैया थैया नाचे हनुमान

⬩➤ मोर दुर्गा मईया 

⬩➤ सागर के पार 

⬩➤ लहराए जवारा 

⬩➤ इतना के बेरिया 

⬩➤ दुर्गा दाई के मंदिर 

⬩➤ गंगा अस्नान्दे 



गीत के अर्थ (सरल बोलचाल म)

ये जसगीत म काली माता के भयंकर लेकिन दयालु रूप के वर्णन करे गे हे।

गीत कहिथे कि काली माता कलकत्ता वाली हवंय, दुनिया भर म उनकर मान-सम्मान हे।

माता अपन भगत मन ला आशीर्वाद देथें अउ अपन लइका जइसने सबके रक्षा करथें।

गीत म काली माता के रूप के बखान होथे —

आंखी छटकारे (गुस्सा वाला तेज रूप)

हाथ म खप्पर

लंबा जीभ

कान म बाली

गले म माला

ये सब बताथे कि माता बुराई ला खत्म करईया अउ अपन भगत मन के रखवाली करईया हवंय।

आखिरी अंतरा म बताय गे हे कि जब माता बहुत क्रोध म रहिन, तब शिव जी मनायिन, तब जाके माता शांत होइन।

🌺 गीत के विशेषता

ये गीत काली माता के उग्र रूप के सुंदर वर्णन करथे

“कलकत्ता वाली” कहिके प्रसिद्ध काली माता के महिमा गाथा गाये गे हे

गीत म भक्ति अउ डर (श्रद्धा) दुनों के मिलाप दिखथे

गायक माता ला अपन लइका जइसने मानके आशीष मांगथे

जसगीत म पारंपरिक काली पूजा के दृश्य दिखथे

मंच, जंवारा, नवरात्रि म गाये बर बढ़िया गीत

📖 कहानी छत्तीसगढ़ी बोली में 

कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली – एक भक्त के भरोसा

एक छोटे से गांव रहिस – हीरापुर। गांव के चारों कोती खेत, जंगल अउ बीच म एक पुराना काली माता के छोट मंदिर रहिस। मंदिर बहुत छोट रहिस, फेर गांव वाले मन के विश्वास बहुत बड़े रहिस।

गांव म दयालु नाम के एक गरीब किसान रहिस। वो बहुत सीधा अउ मेहनती आदमी रहिस। घर म पत्नी अउ एक छोटी बेटी रहिस – गुड़िया। दयालु के हालत ठीक नई रहिस। खेती म हर साल नुकसान हो जावत रहिस।

एक दिन गांव म नवरात्रि शुरू होइस। सब झन जंवारा बोइन, पूजा करिन, जसगीत गावत रहिन। रात म मंदिर म भजन चलत रहिस।

उही समय गांव के बुजुर्ग मन काली माता के जस गावत रहिन —

"कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली

दुनिया भर मां हे तोर मान…"

दयालु चुपचाप बैठ के सुनत रहिस। ओकर मन भारी होगे रहिस। वो धीरे से कहिस –

"मइया, मोर घर म दुख ही दुख हे, अब तोर भरोसा हे।"

रात होगे। सब घर चले गइन। दयालु मंदिर म थोड़ी देर अउ बैठिस। दीया जलत रहिस। हवा धीरे-धीरे चलत रहिस।

अचानक दयालु ला लगिस जैसे मंदिर म कोई आइस। वो डर गिस। फेर हिम्मत करके आंख खोलिस।

ओ देखिस – मंदिर के अंदर एक तेज रोशनी चमकत रहिस। रोशनी के बीच म काली माता के रूप दिखिस। काली माता लंबा जीभ, गले म माला, हाथ म खप्पर धरे खड़े रहिन।

दयालु कांप गिस। वो हाथ जोड़ के गिर गिस –

"मइया मोला माफ कर दे, मैं तो गरीब आदमी हंव।"

माता धीरे से बोलीन –

"डर मत दयालु, मैं अपन भगत ला डरावत नई, बचावत हंव।"

दयालु रो पड़िस –

"मइया मोर बेटी बीमार हे, खेती बर्बाद होगे, घर म अनाज नई हे।"

माता कहिन –

"तोर भरोसा सच्चा हे, मैं तोर घर म सुख भरहूं।"

इतना कहिके माता गायब होगइन।

दूसरे दिन दयालु उठिस, तो ओकर बेटी ठीक होगे रहिस। बुखार उतर गे रहिस। पत्नी कहिस –

"रात म गुड़िया अचानक ठीक होगे।"

दयालु मुस्कुरा दिस। वो समझ गिस – माता के कृपा होगे।

कुछ दिन बाद खेत म पानी गिरिस। फसल बहुत बढ़िया होगे। रामसाय के घर म अनाज भरगे। धीरे-धीरे वो गरीब किसान खुशहाल होगे।

गांव वाले मन पूछिन –

"दयालु, तोर किस्मत कइसे बदल गे?"

दयालु कहिस –

"ये सब काली माता के आशीष हे।"

फेर दयालु हर साल काली माता के जसगीत करवाय लगिस। गांव म रात भर भजन होवत रहिस। सब मिलके गावत रहिन —

"आशीश देवे माता अपन भगत ल वो

अपनेच लईका तै हा जान…"

धीरे-धीरे गांव के मंदिर बड़ा बनगे। दूर-दूर ले लोगन आके पूजा करे लगिन।

एक बार गांव म भयंकर बीमारी फैलगे। कई लोग बीमार होगइन। सब डर गइन। दयालु मंदिर म जाके प्रार्थना करिस –

"मइया, अपन गांव ला बचा ले।"

रात म फेर वही सपना आइस। काली माता कहिन –

"कल सब झन मिलके पूजा करिहा, मैं सबके रक्षा करहूं।"

दूसरे दिन गांव वाले मन एक साथ पूजा करिन। जसगीत गाइन। दीप जलाइन।

कुछ दिन म बीमारी खत्म होगे। गांव बच गे।

तब ले गांव म ये विश्वास होगे –

काली माता अपन भगत मन के जरूर रक्षा करथें।

आज भी हर नवरात्रि म गांव म वही गीत गूंजथे —

"कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली

दुनिया भर मां हे तोर मान…"

लोग मन कहिथें –

माता काली भले भयंकर दिखथें, फेर वो अपन लइका जइसने सबके संभालथें।

जेन सच्चे मन ले पुकारथे, माता जरूर सुनथें।

इही भरोसा, इही श्रद्धा अउ इही भक्ति के संदेश ये जसगीत देथे।

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 सुपा सूपा लाई दाई- दुकाल यादव  




गीत- सूपा सूपा लाई दाई 

गायक-दुकालू यादव

म्यूज़िक कंपनी-सुंदरानी 

वेबसाईट ऑनर-के के पंचारे 

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मुखड़ा 

 दाई ओ दाई ओ दाई ओ --तोला चघावव सूपा सूपा लाई ओ -2 

उड़ान -तोला चघावव सूपा सूपा लाई ओ -2 

 दाई ओ दाई ओ दाई ओ --तोला चघावव सूपा सूपा लाई ओ -2 

अंतरा -1 

कण्डरा के घर ले मईया सूपा बिसायेव नवा धाने के मईया लाई फोरवायेव 

कण्डरा के घर ले मईया सूपा बिसायेव नवा धाने के मईया लाई फोरवायेव 

उड़ान -पेड़ा मिठाई दाई ओ ---पेड़ा मिठाई दाई ओ --पेड़ा मिठाई दाई ओ 

दाई ओ दाई ओ दाई ओ --तोला चघावव सूपा सूपा लाई ओ -2

अंतरा -2

कोस्टा के घर ले मईया लूगरा  बिसायेव मनिहार घर ले मईया फुंदरा बनवायेव 

कोस्टा के घर ले मईया लूगरा  बिसायेव मनिहार घर ले मईया फुंदरा बनवायेव 

उड़ान -चना गुड़ खाई दाई ओ ---चना गुड़ खाई दाई ओ --चना गुड़ खाई दाई ओ

दाई ओ दाई ओ दाई ओ --तोला चघावव सूपा सूपा लाई ओ -2 

अंतरा -3

जोड़ा जोड़ा नरियर मैंहा चघावव दंड शरण गिरके माथ नवावव 

जोड़ा जोड़ा नरियर मैंहा चघावव दंड शरण गिरके माथ नवावव 

उड़ान -करबे सहाई दाई ओ ---करबे सहाई दाई ओ --करबे सहाई दाई ओ

दाई ओ दाई ओ दाई ओ --तोला चघावव सूपा सूपा लाई ओ -2 


                                     ꧁🪷🌷🌸🌺🦩꧂꧁🪷🌷🌸🌺🦩꧂

गीत के अर्थ 

ए गीत म भक्‍त अपन दाई (माता) ला बड़े प्रेम अउ श्रद्धा ले पुकारथे।

“तोला चघावव सूपा सूपा लाई” के मतलब हे –

मइया ला सूपा भर-भर के लाई (धान के फुले चावल) चढ़ाय जावत हे।

✨ अंतरा 1 के अर्थ

कण्डरा के घर ले सूपा लान के, नवा धान के लाई फोराय जावत हे।

पेड़ा मिठाई बनाके दाई ला चढ़ाय जावत हे।

👉 मतलब – नई फसल के खुशिहा म मइया ला पहिली भेंट चढ़ाय जाथे।

✨ अंतरा 2 के अर्थ

कोस्टा (बुनकर) के घर ले लूगरा (साड़ी) मंगाके,

मनिहार (चूड़ी वाला) ले फुंदरा बनवाके दाई ला सजाय जावत हे।

👉 मतलब – मइया ला नई कपड़ा अउ गहना पहिनाके पूजा करथें।

✨ अंतरा 3 के अर्थ

जोड़ा-जोड़ा नरियर चढ़ाके,

दंडवत होके माथा नवाके,

मइया ले सहारा मांगथें।

👉 मतलब – मइया हर सबके दुख दूर करथे अउ सहारा देवत हे।

🌼 गीत के महत्व

🌾 नई फसल के आभार – किसान मन अपन पहिली उपज मइया ला अर्पित करथें।

🙏 श्रद्धा अउ समर्पण – सूपा, लाई, पेड़ा, नरियर – सब म भक्ति के भाव झलकथे।

👩‍🌾 छत्तीसगढ़ी संस्कृति – गांव के परंपरा, बुनकर, मनिहार सबके जिक्र ए गीत म मिलथे।

🌺 माता के महिमा – मइया हर दुख हरइया अउ सुख दइया के रूप म वर्णित हावय।

📚 गीत के कहानी

गांव के नाम रहिस – सोनपुर। चारों कती हरियर खेत, माटी के खुशबू अउ बिहान के सुग्घर हवा। गांव म रहिस एक गरीब किसान – रामसाय। ओकर घर म बूढ़ी दाई, घरवाली सीता अउ दू झिन छोटे लइका।

बरसों ले रामसाय हर एकेच बात मानत रहिस –

“पहिली उपज दाई ला”

जइसेच धान के फसल पक जाथे, वो सबसे पहिली सूपा म धान भरके मंदिर जाथे।

🌾 नई फसल के खुशी

ए साल धान खूब लहराइस। खेत सोना जइसन चमकत रहिस।

सीता कहिस –

“ए रामसाय, ए साल त धान बढ़िया होगे, दाई ला बढ़िया चढ़ावा करबो।”

रामसाय मुस्कुराइस –

“हव, ए साल सूपा भर-भर के लाई चढ़ाबो।”

गांव के कण्डरा घर ले नया सूपा मंगाय गीस।

नवा धान फोर के लाई बनाय गीस।

मंदिर म ढोलक बाजत रहिस, जसगीत गूंजत रहिस –

“दाई ओ दाई ओ दाई ओ – तोला चघावव सूपा सूपा लाई ओ…”

गांव के महतारी मन लाई, पेड़ा, गुड़ ले भेंट चढ़ावत रहिन।

👗 सजावट के तैयारी

सीता कहिस –

“कोस्टा के घर ले लूगरा ले आवन, मइया ला नई साड़ी पहिनाबो।”

मनिहार ले सुग्घर फुंदरा बनवाय गीस।

लाल चुनरी, पीयर लूगरा अउ चमचमात फुंदरा म मइया के मूर्ति चमकत रहिस।

गांव के दाई मन कहिन –

“देखव, आज मइया कइसे सुग्घर लागत हे!”

🙏 संकट के घड़ी

खुशी के दिन जादा दिन टिके नई।

एक दिन रामसाय के छोटे बेटा बीमार पड़ गीस।

डॉक्टर दूर रहिस। दवाई के इंतजाम नई होवत रहिस।

सीता रोवत-रोवत मंदिर गीस।

दंडवत होके कहिस –

“दाई, तोला सूपा भर-भर लाई चढ़ाइन हन, अब तोर भरोसा हे… मोर लइका ला बचा ले।”

मंदिर म दिया टिमटिमा दिस।

जइसन लगिस मइया कहत होवय –

“डर मत, मं हावंव तोर संग।”

अगले दिन चमत्कार जइसन होइस।

गांव के वैद्य खुदे घर आइस अउ जड़ी-बूटी देइस।

दू दिन म लइका ठीक हो गीस।

रामसाय रोवत-रोवत मंदिर गीस –

“दाई, तोर महिमा अपरंपार हे।”

🥥 जोड़ा नरियर के चढ़ावा

रामसाय संकल्प लेइस –

“ए बार जोड़ा-जोड़ा नरियर चढ़ाहूं।”

नवरात्रि म पूरा गांव जुट गीस।

ढोल, मंजीरा, जसगीत –

माहौल भक्ति म डूब गीस।

रामसाय नरियर चढ़ाइस, माथ नवाइस अउ कहिस –

“दाई, तोर किरपा ले सब बने होवत हे।”

🌺 गांव के बदलाव

ए घटना के बाद गांव म विश्वास अउ बढ़ गीस।

सब किसान मन अपन पहिली फसल मइया ला चढ़ाय लगिन।

कोस्टा, मनिहार, कण्डरा – सबके काम बढ़ गीस।

गांव म एकता आ गीस।

हर दुख-सुख म सब संग रहिन।

🌼 कहानी के संदेश

ए गीत सिरिफ भक्ति नई,

ये जीवन के सीख देथे –

जे मिलिस, ओला भगवान के प्रसाद समझव।

संकट म भरोसा मत छोड़व।

गांव के परंपरा अउ संस्कृति ला संजो के रखव।

🌸 गीत के निष्कर्ष 

“दाई ओ दाई ओ – तोला चघावव सूपा सूपा लाई ओ”

ए गीत छत्तीसगढ़ के माटी के खुशबू आय।

एमा किसान के मेहनत, महतारी के ममता अउ मइया के महिमा झलकथे।

जेन मन सच्चे मन ले दाई ला पुकारथे,

मइया जरूर ओकर सहारा बनथे।

🙏 जय दाई। जय छत्तीसगढ़।





मोर दुर्गा दाई के गांव - दुकालू यादव /छत्तीसगढ़ी जस lyrics

 मोर दुर्गा दाई के गांव - दुकालू यादव 

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गीत -मोर दुर्गा दाई के गांव 

गायक -दुकालू यादव 

गीतकार -प्रेम उस्ताद 

म्यूजिक कंपनी -kk casets 

वेबसाइट -www.cgjaslyrics.com 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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मुखड़ा 

कउवा हा करत हे काव काव काव अउ पीपर के हे छाव 

 कउवा हा करत हे काव काव काव अउ पीपर के हे छाव 

मोर दुर्गा दाई के गांव मोर दुर्गा दाई के गांव 

अंतरा -1 

पीपर के रुखवा म बईठ के मईया के नाव रटत हे 

कोयली पड़की सुवा परेवना दुर्गा दुर्गा जपत हे 

Aww-चिरई मन करे चीव चाव ,चिरई मन करे चीव चाव 

मोर दुर्गा दाई के गांव मोर दुर्गा दाई के गांव 

अंतरा -2  

पंछी मन के पीपर बछेरा एक जगह सकलाये 

सूत उठ के बड़े फ़जर ले माता जी ला उठाये 

उड़ान -माता के परत हे पाँव ,माता के परत हे पाँव

मोर दुर्गा दाई के गांव मोर दुर्गा दाई के गांव 

अंतरा -3   

मन हर लेथे चिरई चिरगुन चीव चीव चीव जब चहके 

माता के अंगना माता के भुवना संझा बिहनिया दमके 

उड़ान -जब प्रेम के जस ल सुनाव  ,जब प्रेम के जस ल सुनाव

मोर दुर्गा दाई के गांव मोर दुर्गा दाई के गांव 

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गीत के अर्थ (Meaning in Chhattisgarhi):

गीत “मोर दुर्गा दाई के गांव” ह एक भक्ति गीत आय जेमां गायक दुकालू यादव ह अपन गांव अऊ माता दुर्गा के भक्ति के संग जुड़ाव ला गाथे।
गीत मा “कउवा”, “कोयली”, “सुवा”, “परेवना” जइसने पक्षी मन के माध्यम ले माता दुर्गा के भक्ति अऊ प्रकृति के समरसता के सुंदर चित्रन करे गे हावय ।

पीपर के रुख तले जऊन भक्ति होथे, ओमा आत्मिक शांति अऊ प्रेम बसे हे। कोयल के मीठा गाना अऊ सुवा-परेवना के नाम जप सुनके लगथे जइसे पूरा गांव भक्ति के रंग म रंग गे होवय।
गीत मा ये बताय गे हे के माता दुर्गा के गांव म सबेरे-सबेरे पूजा, आरती अऊ भक्ति के माहौल रहिथे, जिहां हर मन शांत अऊ प्रसन्न रहिथे।

गीत के महत्व (Importance):

1.      भक्ति भावना के प्रतीक:
ये गीत मा माता दुर्गा के प्रती एक अगाध श्रद्धा अऊ विश्वास के भाव प्रकट होथे।

2.      प्रकृति अऊ देवी एक संग:
गीत मा प्रकृति अऊ देवी के एक अद्भुत संगम देखाय देथे। पीपर के रुख, चिरई मन, अऊ गांव के वातावरण – सब भक्ति के रूप म दिखथें।

3.      गांव संस्कृति के चित्र:
छत्तीसगढ़ी गांव के सादगी, प्रेम अऊ देवी भक्ति के सजीव रूप ये गीत मा मिलथे।

4.      लोकगीत के आत्मा:
दुकालू यादव के मधुर आवाज अऊ प्रेम उस्ताद के शब्द मन ह छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति के आत्मा ला जगा देथें।


🎯 गीत के उद्देश्य (Udeshya):

1.      माता दुर्गा के भक्ति के संदेश ला गांव-गांव तक पहुँचाना।

2.      छत्तीसगढ़ के लोकभक्ति अऊ परंपरा के गौरव ला उजागर करना।

3.      नवपीढ़ी ला अपन संस्कृति अऊ देवी आस्था के प्रति प्रेरित करना।

 कहानी (Story in Chhattisgarhi):

“मोर दुर्गा दाई के गांव” ह सिरिफ एक गीत नई, बल्के एक भावना, एक अपनापन के कथा आय।
छत्तीसगढ़ के छोटे गांव म बसे हे दुर्गा दाई के मन्दिर, जिहां हर भोर मा घंघरू के छनछन आवाज अऊ पक्षी मन के चहचहाहट सुनाय देथे।

भोर के बेला म पीपर के रुख तले एक बूढ़ा पुजारी अऊ गायक दुकालू यादव बईठ के माता दुर्गा के नाम रटथे — “दुर्गा दुर्गा…”
ओखर चारो ओर चिरई मन उड़े-फिरे करत, कोयली सुर ल धरके गावत रहिथे।

“कउवा हा करत हे काव काव काव, अउ पीपर के हे छांव…”
ये पंक्ति सुनके लागथे जइसे पूरा प्रकृति माता दुर्गा के भक्ति म मगन होगे हे।

गांव के मनखे मन बिहान लेच उठके माता के दर्शन बर जाथें।
बच्चा, बुढ़वा, माई-भौजी — सबके चेहरा मा भक्ति के उजास झलके।
फूल, नारियल, अगरबत्ती ले माता के पूजा होथे अऊ मन्दिर के आंगन म हर कोई अपन मन के मुराद कहिथे।

कोयली के मीठा गाना अऊ सुवा के कलरव मा एक अपनापन रहिथे।
ओखर हर आवाज लगथे जइसे माता दुर्गा अपन संताने के मन म बसे हे।

“पीपर के रुखवा म बईठ के मईया के नाव रटत हे, कोयली पड़की सुवा परेवना दुर्गा दुर्गा जपत हे…”
ये पंक्तियां ह ओ सुंदर भाव ला दिखाथे जिहां हर जीव-जंतु म भक्ति के लहर रहिथे।

गांव के लोगन मन कहिथें –
“माता दुर्गा के गांव म कभू दुख नई रहय, जो आथे ओखर मन खुश हो जाथे।”

हर साल दुर्गा पूजा के दिन इहां मेला लगथे।
गांव के लइका मन झूला झूलथें, औरत मन गीत गावत हें –
“मोर दुर्गा दाई के गांव…”
ए गीत सुनके लागथे जइसे पूरा गांव स्वर्ग बन गे होवय।

संजा बेला मा जब सूरज ढलथे, तब मन्दिर के दीप जले लागथे।
ओकर उजाला पीपर के पत्ता, चिरई के डार, अऊ माता के मूर्ति ऊपर परथे।
माता के आंगन म दमक रहिथे प्रेम अऊ भक्ति के उजियारा।

“माता के परत हे पांव, माता के परत हे पांव…”
ये पंक्ति ह ओ भाव ला दर्शाथे जिहां भक्त अपन जीवन म माता के आशीर्वाद ला धरना चाहथे।

गीत के हर शब्द म अपन गांव, अपन माटी, अऊ अपन देवी के प्रेम झलकथे।
प्रेम उस्ताद के लिखे ला दुकालू यादव ह अपन आवाज ले जियावथे, अऊ KK Casets के धुन ओला अमर कर देथे।

मोर दुर्गा दाई के गांव ह एक गीत नई –
ओ ह गांव के आत्मा,
ओ ह भक्ति के धड़कन,
अऊ ओ ह छत्तीसगढ़ के मया के मिसाल आय।


🌺 निष्कर्ष (Conclusion):

“मोर दुर्गा दाई के गांव” ह हर छत्तीसगढ़िया मनखे बर एक आस्था के प्रतीक आय।
ये गीत ह बताथे के भक्ति सिरिफ मंदिर म नई, बल्के हर पेड़-पौधा, हर चिरई, हर मन म बसथे।
जेकर मन मा सच्चा प्रेम अऊ मया रहिथे, ओला माता दुर्गा जरूर सुनथें।


📌 Website Credit:
Website Owner: के के पंचारे



 टोनही झूपत हे आधा रात के - दुकालू यादव

Dukalu Yadav | Jas Geet | Tonhi Jhupathe Aadha Rat Ke | Chhattisgarhi Jas Geet | Navtari Bhajan 2025

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गीत -टोनही झूपत 

गायक -दुकालू यादव 

गीतकार -दुकालू यादव 

म्यूजिक कंपनी -के के कैसेट्स 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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मुखड़ा  

सूत गेहे गांव भर गा --टोनही झूपत हे आधा रात के 

आधा रात के गा चंदवा बईगा टोनही झूपत हे आधा रात

अंतरा -1 

सादा सादा लुगरा पहिरे चुंदी छरियाये गा चुंदी छरियाये

काला खावव काला बचावव कहिके गिगियाये गा कहिके गिगियाये

कहिके गिगियाये गा बईगा ,कहिके गिगियाये गा, कहिके गिगियाये गा

उड़ान - लागत हावय भारी डर गा -- कोन जनि हरय का जात के 

का जात के गा चंदवा बईगा टोनही झूपत हे आधा रात

आधा रात के गा चंदवा बईगा टोनही झूपत हे आधा रात

अंतरा -2  

आधा आधा रात के टोनही जुगुर जुगुर बरथे गा जुगुर जुगुर बरथे 

अंधियारी ला चुने ओहर कोन जनि का करथे गा कोन जनि का करथे

जनि का करथे गा बईगा कोन जनि का करथे गा कोन जनि का करथे

उड़ान -बईगा तै उपाये कर गा -- तोला डर हावय का बात के 

 का बात के गा चंदवा बईगा टोनही झूपत हे आधा रात के

आधा रात के गा चंदवा बईगा टोनही झूपत हे आधा रात


अंतरा -3   

जंतर मंतर मार के बईगा टोनही ला भगाये गा टोनही ला भगाये

जय होवय तोर चंदवा बईगा नाव हा जग मा छाये गा नाव हा जग मा छाये गा 

 नाव हा जग मा छाये गा बईगा नाव हा जग मा छाये 

उड़ान -सुमरे तोला कोसरिया हा  हर गा -- जस गा के अम्बे मात  के 

 अम्बे मात के चंदवा बईगा जस गा के अम्बे माँ के 

आधा रात के गा चंदवा बईगा टोनही झूपत हे आधा रात

 सूत गेहे गांव भर गा --टोनही झूपत हे आधा रात के 

आधा रात के गा चंदवा बईगा टोनही झूपत हे आधा रात




गीत के अर्थ (Meaning in Chhattisgarhi):

ए गीत मं आधा रात के वो डरावना माहौल ला बताय गे हवय, जिहां गांव मं टोनही (जादू-टोना करइया औरत) झूपत (घूमत) रहिथे। लोगन डरे रहिथें, काबर कि वो टोनही ककरो नुकसान कर सकथे।

गांव के चंदवा बईगा, जऊन समाज के जादू-टोना भगइया अउ भक्ति मं भरोसा रखइया हावय, वो अपन जंतर-मंतर ले टोनही ला भगाथे। आखिर मं सब अम्बे माता के सुमरन करथें अउ विश्वास जताथें कि भक्ति अउ माता के जस गाके, टोनही जइसने अंधविश्वास अउ डर सब मिट जाथे।


🌺 गीत के महत्व (Importance):

“टोनही झूपत” सिरिफ डर के कहानी नइ आय , ए गीत छत्तीसगढ़ी समाज के सोच, डर अउ आस्था के प्रतीक हावय। पुरखन मन के समय मं जब विज्ञान नइ रहिस, त बईगा अउ देवता मं विश्वास रहिस। ए गीत ओही समय के झलक देथे — जहां डर अउ भक्ति दुनो संग-संग चलत रहिन।

ए गीत बताथे के अंधकार (टोनही) मं भी उजियारा (भक्ति अउ माता अम्बे) के जीत होथे।

गीत के उद्देश्य (Purpose):

  1. लोकविश्वास के प्रस्तुति: टोनही अउ बईगा के पुरखौती परंपरा के दर्शन कराना।

  2. अंधविश्वास पर वार: डर के बजाय विश्वास अउ भक्ति मं भरोसा जगाना।

  3. संस्कृति के बचाव: छत्तीसगढ़ी लोककथा अउ जसगीत परंपरा ला जीवित रखना।

  4. मनोरंजन संग शिक्षा: गीत गावत समय समाजिक सन्देश देना — कि असली शक्ति भक्ति मं हे।


🌼 म्यूजिक कंपनी क्रेडिट:


 छत्तीसगढ़ी कहानी (Story Based on Song):

रात के आधा पहर बीत गे रहिस। गांव के ऊपर चांद झूलत रहिस, हवा ठंडी होगे रहिस, अउ लोगन अपन-अपन घर मं सोवत रहिन। फेर अचानक कुकुरमन भौंकना सुरु कर दिन।

गांव के बूढ़ा मन कहिन — “काबर भौंकथें? काबर हावा भारी होगे हे?”
किसे हावय नइ दिखे, फेर गली के कोने-कोने मं जइसे परछाईं हिलत रहय।

सूत गेहे गांव भर — टोनही झूपत हे आधा रात के।
कउवा पीपर के डारा मं कांव-कांव करत रहिस।

सादा लुगरा पहिरे, चुंदी छरियाय, वो औरत चुपचाप चालत रहय। कोनो ओकर चेहरा नइ देख पाइस। लोगन डरे रहिन — “का जात के गा टोनही हे?”

गांव के बीच रहिस चंदवा बईगा। ऊ बूढ़ा हावय, फेर ओकर माथा मं राख लगाय, गले मं तुलसी माला, अउ हाथ मं लोटा रहय।
लोगन कहिन —
“बईगा, टोनही झूपत हे गांव मं, कुछ उपाये कर।”

चंदवा बईगा आंख मूद लेथें, औ बोलथें —
“अंधियार मं डर नइ, विश्वास रखव।
जऊन अम्बे माता हमर रखवारी करथें, ओमन रइथें।
टोनही ला भगाय बर जंतर-मंतर नइ, सच्चा भक्ति चाही।”

बईगा अपन कोसरिया (कुशा के डंडी) ले जंतर-मंतर करे लगिस। ओकरा लगिस, हवा बदले लगिस, कुकुर शांत होगे, अउ चांद के उजियारा गांव के घर-घर मं भर गे।

लोगन सुमर लेथें —
“जय अम्बे माता!”

ओही बखत वो टोनही जइसने दिखे रहय छाया, धुंध मं गायब होगे।

दूसर दिन सवेर मं गांववाले बईगा के चरण छुइन।
कहिन —
“जय होवय तोर चंदवा बईगा, नाव तोर जग मं छाये गा।”

ए कहानी के सीख —
डर के आगे भक्ति अउ सत्य के उजियारा सबसे बड़ा हावय।
टोनही जइसने अंधविश्वास मं फसने के बजाय, अपन विश्वास अम्बे माता मं रखव।


🪔 निष्कर्ष (Conclusion):

“टोनही झूपत” दुकालू यादव के गाया गे एक सशक्त लोकगीत आय, जेमां समाज के पुरखौती डर, भक्ति अउ लोकविश्वास सब झलकथे।
ए गीत सुन के आजो गांव के बुजुर्ग कहिथें —
“जऊन टोनही ला भगाय सकथें, ओ बईगा नइ, ओ भक्ति हावय।”