बेटी घर आये हावे जस गीत Lyrics | शत्रुहन पटेल | नव जागृति जस परिवार देवसर (बालोद) | CG Jas Lyrics
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गीत -बेटी घर आये हावे
गायक -शत्रुहन पटेल
जस मंडली -नव जागृति जस परिवार देवसर(बालोद )
यूट्यूब -rinku badshash
वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे
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गीत के बारे में
"बेटी घर आये हावे" एक अत्यंत भावपूर्ण छत्तीसगढ़ी जस गीत है, जिसमें बेटी के जन्म का महत्व, उसकी महानता तथा समाज में उसके योगदान का सुंदर वर्णन किया गया है। यह गीत केवल बेटी के सम्मान की बात नहीं करता बल्कि धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेटी के महत्व को उजागर करता है।
गीत में माता सीता, माता सती और माता पार्वती के जन्म प्रसंगों का उल्लेख करते हुए यह संदेश दिया गया है कि बेटियाँ स्वयं आदिशक्ति का स्वरूप होती हैं। बेटी के जन्म से परिवार में सुख, समृद्धि, अन्न, धन और खुशहाली आती है।
गीत समाज को कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराई से दूर रहने और बेटी को बेटे के समान सम्मान देने की प्रेरणा देता है। इसकी भाषा सरल, मधुर और लोक शैली में है, जिससे यह गीत श्रोताओं के मन को तुरंत छू लेता है।
मुखड़ा
बेटी घर आये हावे --- बेटी धन लाये हावे --
बेटी हां चलाये नाव तोर गा -2
बेटी हां चलाये नाव तोर
अंतरा -1
यहो बेटी जनम के हावे कहानी ,सुनेहव संत सुजानी गा
यहो बेटी जनम हे लछमी बानी ,कतरो हे परमान गा
यहो बेटी चलाथे नाव निशानी ,बेटी ले बाढ़े किसान गा
यहो बेटी ले बरसे अन धन धानी, बेटी हीरा समान गा
उड़ान -बेटी जग आये हावे ----मया बगराये हावे----
बेटी ले सुहाये गांव खोर गा
बेटी हां चलाये नाव तोर
अंतरा -2
यहो त्रेता जुग के हावे चारी ,नोहे गोठ लबारी गा
यहो जनकपुरी म पहली दारी, बिपत परिस हे भारी गा
यहो घोर अकाल पड़े बड़ भारी, भूख मरे नरनारी गा
यहो नई होवय अन्न बिना निस्तारी, सन्शो परगे अपारी गा
उड़ान -सपना हां बँधाये हावे------जुगती जमाये हावे ----
भाग ल जगाले राजा तोर गा
बेटी हां चलाये नाव तोर
अंतरा -3
यहो 12 बसढ़ ले बरसे ना पानी ,सूखे धरती सागर गा
यहो राजा जनक हां करे किसानी ,फेरे घाम म जागर गा
यहो जनम धरे तब आदि भवानी ,जोतत घानी नागर गा
यहो सच होंगे गा मया के बानी , कैना भराये सागर गा
उड़ान -देवता जय गाये हावे---- फुलवा बरसाये हावे ---
सीता नाम उड़े हावे शोर गा
बेटी हां चलाये नाव तोर
अंतरा -4
यहो जनम धरे तब आदि भवानी, रिमझिम बरसे पानी
यहो बूढ़ा किसनहा करे किसानी ,नंदी संग हे मितानी गा
यहो ठाकुर देवता धरे बीज बोनी ,सींचे हरिया धाने गा
यहो धन म तोपागे परवा छानी , हासे जम्मो परानी गा
उड़ान -दुःख हां भुलाये हावे ----सुख हां घेराये हावे----
दुनिया म होये गा अंजोर गा
बेटी हां चलाये नाव तोर
अंतरा -5
यहो धरती के बेटी धरती बरोबर ,जहुअर थर बलवाने गा
यहो हीरा असन मुहरन सुघ्घर ,नैना अगम निराली हे गा
यहो होये परसन दाई ददा हर ,जागे देदे पारी गा
यहो चमचम चमके तेज अग्नि हर, उवत सुरुज जस लाली गा
उड़ान -सुनैना हां भाये हावे---- पलना म झुलाये हावे ----
देवता हां घलो करे हावे तोर गा
बेटी हां चलाये नाव तोर
अंतरा -6
यहो बेटी हां जग में नाव चलाये, मइके अउ ससुरारे गा
यहो दुनो कुल के नाव जगाये ,सतवंतिन सत भारे गा
यहो दाई ददा के मान बढ़ाये ,सत के दियना बारे गा
यहो माता बनके मया पुराये ,बंधन ला सिरजाये गा
उड़ान -रीती ल बढाए हावे ---- धरम ल जगाये हावे ----
तीनो बहनी भाई ल अगोर गा
बेटी हां चलाये नाव तोर
अंतरा -7
यहो बेटी जनम के मान बढ़ाये ,दक्ष प्रजापति राजा गा
यहो देवी सती कहे देवता मनाये ,बाजे सरग म बाजा गा
यहो बेटी जनम धर गिरजा आये ,सुमरे संत समाजा गा
यहो हिमराजा के भाग जगाये ,काज सकल सुख साजा गा
उड़ान -शिव संग बिहाये हावे ----गौना हां कराये हावे ---
आंसू हां बोहाये झकझोर गा
बेटी हां चलाये नाव तोर
अंतरा -8
यहोबेटी जनम के जोरा करले ,मोर संग के संगवारी गा
यहो बेटी के खातिर मया धरले, बेटी हे आदि कुंवारी गा
यहो बेटी बेटा के भेद रहत ले ,करले तैहा चिन्हारी गा
यहो बेटी जनम ले कोठी भरले ,अन धन महल अटारी गा
उड़ान -बेटी गोहराये हावे -----गरभ हे जगाये हावे----
सुनले कल्पना बाबू मोर गा
बेटी हां चलाये नाव तोर
अंतरा - 9
यहो जागव जागव ये मोर भाई ,बेटी ल बेटा निहारव गा
यहो बेटी जनम ले होही भलाई, गरभ भीतर झन मारव गा
यहो बेटी के खातिर देवन दुहाई,अतकी वचन मोर हारव गा
यहो दाई दयालु करहि सहाई, गुरु के गुण ला भारव गा
उड़ान -नवजागृति जस गाये हावे------सबो ल जगाये हावे ----
बेटी के उड़ाये हावे शोर गा
बेटी हां चलाये नाव तोर
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गीत का अर्थ
इस गीत का मुख्य संदेश यह है कि बेटी किसी भी परिवार की सबसे बड़ी संपत्ति होती है। बेटी केवल माता-पिता का सम्मान नहीं बढ़ाती बल्कि दो परिवारों को जोड़ती है।
गीत में बताया गया है कि—
1.बेटी लक्ष्मी का रूप है।
2.बेटी के जन्म से घर में समृद्धि आती है।
3.माता सीता के जन्म से अकाल समाप्त हुआ।
4.माता सती और पार्वती भी बेटी के रूप में जन्मीं।
5.बेटी समाज में प्रेम, त्याग और संस्कार का संदेश देती है।
6.कन्या भ्रूण हत्या सबसे बड़ा पाप है।
7.बेटी को बेटे के समान सम्मान देना चाहिए।
गीत की विशेषताएँ
✅ बेटी सम्मान का संदेश
✅ धार्मिक एवं पौराणिक प्रसंग
✅ छत्तीसगढ़ी लोकभाषा
✅ सरल एवं मधुर शब्द
✅ सामाजिक जागरूकता
✅ परिवार और संस्कृति का महत्व
✅ मंच प्रस्तुति के लिए उपयुक्त
✅ नवरात्रि एवं जस कार्यक्रमों में लोकप्रि
गायक परिचय
शत्रुहन पटेल छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय जस गायक हैं। वे अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति और पारंपरिक छत्तीसगढ़ी शैली के लिए जाने जाते हैं। इनके द्वारा गाए गए अनेक जस गीत धार्मिक आयोजनों, नवरात्रि पर्व तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सुनने को मिलते हैं। उनकी गायकी में लोक संस्कृति, भक्ति और सामाजिक संदेश का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
कथा
"बेटी घर आये हावे" केवल एक जस गीत नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति का सार प्रस्तुत करने वाला प्रेरणादायक संदेश है। प्राचीन काल से ही बेटी को देवी का स्वरूप माना गया है। जब भी संसार में धर्म की स्थापना और मानवता के कल्याण की आवश्यकता हुई, तब देवी ने किसी न किसी रूप में अवतार लिया।
मिथिला के राजा जनक के राज्य में भयंकर अकाल पड़ा। वर्षों तक वर्षा नहीं हुई। प्रजा भूख और प्यास से व्याकुल थी। राजा जनक स्वयं हल लेकर खेत जोतने निकले। उसी समय धरती से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई, जिन्हें माता सीता के नाम से जाना गया। उनके प्रकट होते ही वर्षा हुई, खेत हरे-भरे हो गए और राज्य में खुशहाली लौट आई। इस घटना ने यह संदेश दिया कि बेटी सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है।
इसी प्रकार दक्ष प्रजापति के घर माता सती ने जन्म लिया और बाद में भगवान शिव की अर्धांगिनी बनीं। आगे चलकर हिमवान के घर माता पार्वती के रूप में आदिशक्ति ने पुनः अवतार लिया। इन सभी घटनाओं से स्पष्ट होता है कि बेटियाँ केवल परिवार की सदस्य नहीं बल्कि दिव्य शक्ति का रूप होती हैं।
गीत समाज को यह भी प्रेरित करता है कि बेटियों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव न किया जाए। आज भी कई स्थानों पर कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराइयाँ देखने को मिलती हैं। यह गीत लोगों को जागरूक करता है कि बेटी के जन्म पर गर्व करें, उसका पालन-पोषण प्रेम से करें और उसे शिक्षा व सम्मान दें।
बेटी अपने माता-पिता का मान बढ़ाती है, दो परिवारों को जोड़ती है और संस्कारों की परंपरा को आगे बढ़ाती है। वह माँ बनकर आने वाली पीढ़ियों का निर्माण करती है और समाज में प्रेम, करुणा तथा त्याग की भावना का विस्तार करती है।
इस प्रकार यह गीत धार्मिक कथा, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों का सुंदर संगम है। इसका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन समय में था।
लेखक: कैलाश पंचारे
वेबसाइट: CG Jas Lyrics
परिचय: कैलाश पंचारे छत्तीसगढ़ी जस गीत, भजन, आरती और धार्मिक सामग्री पर आधारित लेख लिखते हैं। उनका उद्देश्य छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और भक्ति संगीत को डिजिटल माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है।




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