कारी मा बीरबिट काली | दुकालू यादव l छत्तीसगढ़ी जसगीत लिरिक्स, अर्थ और कहानी

Cgjaslyrics✦✦ कारी मा बीरबिट काली-दुकालू यादव✦✦cgjaslyrics

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गीत-कारी मा बीरबिट काली

गायक - दुकालू यादव

गीतकार -दुकालू यादव

म्यूजिक कंपनी - kk casette 

वेबसाईट ऑनर - कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा

कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली

दुनिया भर मां हे तोर मान

आशीश देवे माता अपन भगत ल वो......

 अपनेच लईका तै हा जान

अंतरा-1

आंखी छटकारे माता चूंदी छरियाये वो.....

हाथ में खप्पर डोलाय -2

उड़ान-कान मा पहिरे बाली माता कलकत्ता वाली-2

कई से करव तोर गुणगान 

आशीश देवे माता अपन भगत ल वो......

 अपनेच लई का तै हा जान

कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली

दुनिया भर मां हे तोर मान

अंतरा-2

मुड़ी मुड़ी के माता माला ओरमाए वो.....

हाथ में खप्पर डोलाय -2

उड़ान-कान मा पहिरे बाली माता कलकत्ता वाली-2

अल करहा जीभ लमाय 

आशीश देवे माता अपन भगत ल वो......

 अपनेच लई का तै हा जान

कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली

दुनिया भर मां हे तोर मान

अंतरा-3

सुत गे शरण में माता शिव जी मनाए वो.....

तब जाके तैहा थीराय -2

उड़ान-पूजा करे नरनारी माता कलकत्ता वाली 2

रखबे तै हमरो धियान 

आशीश देवे माता अपन भगत ल वो......

 अपनेच लई का तै हा जान

कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली

दुनिया भर मां हे तोर मान

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मां शेरावाली के जस गीत के लिंक नीचे दे हावे जाके क्लीक करव 

⬩➤ कंकालिन मोरे माया

⬩➤ माटी के दाई दुर्गा

⬩➤ थैया थैया नाचे हनुमान

⬩➤ मोर दुर्गा मईया 

⬩➤ सागर के पार 

⬩➤ लहराए जवारा 

⬩➤ इतना के बेरिया 

⬩➤ दुर्गा दाई के मंदिर 

⬩➤ गंगा अस्नान्दे 



गीत के अर्थ (सरल बोलचाल म)

ये जसगीत म काली माता के भयंकर लेकिन दयालु रूप के वर्णन करे गे हे।

गीत कहिथे कि काली माता कलकत्ता वाली हवंय, दुनिया भर म उनकर मान-सम्मान हे।

माता अपन भगत मन ला आशीर्वाद देथें अउ अपन लइका जइसने सबके रक्षा करथें।

गीत म काली माता के रूप के बखान होथे —

आंखी छटकारे (गुस्सा वाला तेज रूप)

हाथ म खप्पर

लंबा जीभ

कान म बाली

गले म माला

ये सब बताथे कि माता बुराई ला खत्म करईया अउ अपन भगत मन के रखवाली करईया हवंय।

आखिरी अंतरा म बताय गे हे कि जब माता बहुत क्रोध म रहिन, तब शिव जी मनायिन, तब जाके माता शांत होइन

🌺 गीत के विशेषता

ये गीत काली माता के उग्र रूप के सुंदर वर्णन करथे

“कलकत्ता वाली” कहिके प्रसिद्ध काली माता के महिमा गाथा गाये गे हे

गीत म भक्ति अउ डर (श्रद्धा) दुनों के मिलाप दिखथे

गायक माता ला अपन लइका जइसने मानके आशीष मांगथे

जसगीत म पारंपरिक काली पूजा के दृश्य दिखथे

मंच, जंवारा, नवरात्रि म गाये बर बढ़िया गीत

📖 कहानी छत्तीसगढ़ी बोली में 

कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली – एक भक्त के भरोसा

एक छोटे से गांव रहिस – हीरापुर। गांव के चारों कोती खेत, जंगल अउ बीच म एक पुराना काली माता के छोट मंदिर रहिस। मंदिर बहुत छोट रहिस, फेर गांव वाले मन के विश्वास बहुत बड़े रहिस।

गांव म दयालु नाम के एक गरीब किसान रहिस। वो बहुत सीधा अउ मेहनती आदमी रहिस। घर म पत्नी अउ एक छोटी बेटी रहिस – गुड़िया। दयालु के हालत ठीक नई रहिस। खेती म हर साल नुकसान हो जावत रहिस।

एक दिन गांव म नवरात्रि शुरू होइस। सब झन जंवारा बोइन, पूजा करिन, जसगीत गावत रहिन। रात म मंदिर म भजन चलत रहिस।

उही समय गांव के बुजुर्ग मन काली माता के जस गावत रहिन —

"कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली

दुनिया भर मां हे तोर मान…"

दयालु चुपचाप बैठ के सुनत रहिस। ओकर मन भारी होगे रहिस। वो धीरे से कहिस –

"मइया, मोर घर म दुख ही दुख हे, अब तोर भरोसा हे।"

रात होगे। सब घर चले गइन। दयालु मंदिर म थोड़ी देर अउ बैठिस। दीया जलत रहिस। हवा धीरे-धीरे चलत रहिस।

अचानक दयालु ला लगिस जैसे मंदिर म कोई आइस। वो डर गिस। फेर हिम्मत करके आंख खोलिस।

ओ देखिस – मंदिर के अंदर एक तेज रोशनी चमकत रहिस। रोशनी के बीच म काली माता के रूप दिखिस। काली माता लंबा जीभ, गले म माला, हाथ म खप्पर धरे खड़े रहिन।

दयालु कांप गिस। वो हाथ जोड़ के गिर गिस –

"मइया मोला माफ कर दे, मैं तो गरीब आदमी हंव।"

माता धीरे से बोलीन –

"डर मत दयालु, मैं अपन भगत ला डरावत नई, बचावत हंव।"

दयालु रो पड़िस –

"मइया मोर बेटी बीमार हे, खेती बर्बाद होगे, घर म अनाज नई हे।"

माता कहिन –

"तोर भरोसा सच्चा हे, मैं तोर घर म सुख भरहूं।"

इतना कहिके माता गायब होगइन।

दूसरे दिन दयालु उठिस, तो ओकर बेटी ठीक होगे रहिस। बुखार उतर गे रहिस। पत्नी कहिस –

"रात म गुड़िया अचानक ठीक होगे।"

दयालु मुस्कुरा दिस। वो समझ गिस – माता के कृपा होगे।

कुछ दिन बाद खेत म पानी गिरिस। फसल बहुत बढ़िया होगे। रामसाय के घर म अनाज भरगे। धीरे-धीरे वो गरीब किसान खुशहाल होगे।

गांव वाले मन पूछिन –

"दयालु, तोर किस्मत कइसे बदल गे?"

दयालु कहिस –

"ये सब काली माता के आशीष हे।"

फेर दयालु हर साल काली माता के जसगीत करवाय लगिस। गांव म रात भर भजन होवत रहिस। सब मिलके गावत रहिन —

"आशीश देवे माता अपन भगत ल वो

अपनेच लईका तै हा जान…"

धीरे-धीरे गांव के मंदिर बड़ा बनगे। दूर-दूर ले लोगन आके पूजा करे लगिन।

एक बार गांव म भयंकर बीमारी फैलगे। कई लोग बीमार होगइन। सब डर गइन। दयालु मंदिर म जाके प्रार्थना करिस –

"मइया, अपन गांव ला बचा ले।"

रात म फेर वही सपना आइस। काली माता कहिन –

"कल सब झन मिलके पूजा करिहा, मैं सबके रक्षा करहूं।"

दूसरे दिन गांव वाले मन एक साथ पूजा करिन। जसगीत गाइन। दीप जलाइन।

कुछ दिन म बीमारी खत्म होगे। गांव बच गे।

तब ले गांव म ये विश्वास होगे –

काली माता अपन भगत मन के जरूर रक्षा करथें।

आज भी हर नवरात्रि म गांव म वही गीत गूंजथे —

"कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली

दुनिया भर मां हे तोर मान…"

लोग मन कहिथें –

माता काली भले भयंकर दिखथें, फेर वो अपन लइका जइसने सबके संभालथें।

जेन सच्चे मन ले पुकारथे, माता जरूर सुनथें।

इही भरोसा, इही श्रद्धा अउ इही भक्ति के संदेश ये जसगीत देथे।

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