तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी | हरीश साहू /शीतला माता के छत्तीसगढ़ी जस गीत

तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी – छत्तीसगढ़ी जस

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गीत -तरिया पार के नीम छाव मा

गायक -हरीश साहू

जस मंडली-जय अम्बिका मानस एवं जस जगराता परिवार कारा (उरला) 

गीतकार -धनराज निर्मलकर 

गीत लेबल -शीतला जुड़वास 

यूट्यूब - सुमित फोटो स्टूडियो 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

वेबसाइट -cgjaslyrics 

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मुखड़ा 

तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी -2 

उड़ान - डीहिडोंगर के देवी कहाये -हो वो हो 

डीहिडोंगर के देवी कहाये

गांव देवी महरानी 

तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी

अंतरा -1 

हो जगजननी जगतरण के ,महिमा हावे नियारी गा  

दाई दयाली जगहितकारी ,शक्ति के अवतारी गा 

चण्डमुण्ड ला मारके देवी,चामुंडा नाव धारी गा 

दुर्गम मारे दुर्गा कहाये ,हे भगवती महतारी गा 

उड़ान - ये जग ला शीतला करईया हो वो हो

ये जग ला शीतला करईया

शीतला माता रानी 

रिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी

अंतरा -2 

शीतल शीतला मोर दाई ,ग्राम देवी कहाये गा 

गांव के डीहीवारिन देवी ,गांव गांव पुजाये गा 

शीतला दाई के मंदिर हां ,माता देवाला कहाये गा 

शीतला के इक्कीस रूप ,इक्कीस रूप धराये गा 

उड़ान - हावे इक्कीस बहिनी के हो वो हो 

हावे इक्कीस बहिनी 

अइसे नाव निसानी 

तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी

अंतरा -3 

बड़े दाई बूढ़ी माता  ,बाटय दाना चिहारी गा 

झलझला अगिया अउ ,मोती अंगार धारी गा  

बेमची लाइयाँ खुरा चपका ,उपके  अपारी गा 

जुड़ीताप सेंदरी माता ,काल स्वरूप धारी गा 

उड़ान - गला मा होथे गलवा माता हो--वो --हो  

गला मा होथे गलवा माता

शीतला के परमाने 

तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी

अंतरा -4 

इक्कीस बहिनी मान पावे ,शीतला के रूप कहाये गा  

सादा पीताम्बरी हां ,ये जग ला बचाये गा  

नाव अनेक शीतला के ,आषाढ़ मा परब आये गा  

माता पहुचनी जुड़वास मा ,गांव बस्ती सकलाये गा 

उड़ान - माता देवाला मेला भराये  हो--वो --हो  -2

माता देवाला मेला भराये

लागे दिन सुहानी 

तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी

अंतरा -5 

जेकर जइसे पूर्ति हे ,वइसे वोहा मनाथे गा  

कांचा पक्का जेवन अउ ,मेवा मिठाई चघाये गा  

अपन भगत के सेवा मा, शीतला दाई ज़ुराथे गा 

शीतल होंगे शीतला दाई ,मया दया बरसाथे गा 

उड़ान - धनराज लिखे जुडवासा हो--वो --हो  

धनराज लिखे जुडवासा

गुना गुण के कहानी 

तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी

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गीत के अर्थ

ये गीत के मूल भाव शीतला माता के भक्ति अउ गांव के लोक आस्था ऊपर आधारित हे। गीत मं माता ला जगजननी, जगत के पालनहारिन, शक्ति के अवतार अउ गांव के रखवारिन कहे गे हे।

“तरिया पार के नीम छांव” माता के शांत अउ शीतल रूप के प्रतीक आय। नीम ला गांव-गंवई मं पवित्र अउ उपयोगी पेड़ माने जाथे, एखर से शीतला माता के शीतलता अउ लोकविश्वास के संबंध अउ गहिरा हो जाथे।

गीत मं माता के अलग-अलग रूप जइसे शीतला, चामुंडा, दुर्गा, बूढ़ी माता, गलवा माता अउ इक्कीस बहिनी के उल्लेख मिलथे। ये सब रूप माता के अलग-अलग शक्ति अउ लोकपरंपरा के प्रतीक मानें जाथें।

गीत के आखिरी हिस्सा मं भक्त मन के श्रद्धा के वर्णन हे। मनखे अपन सामर्थ्य अउ मनोकामना के अनुसार माता ला भोजन, मेवा-मिठाई अउ प्रसाद चढ़ाथे। बदला मं माता अपन भक्त ऊपर मया, दया अउ आशीर्वाद बरसाथें—यही ये गीत के मुख्य संदेश आय।

गीत के विशेषता अउ महत्व

  1. ये गीत मं शीतला माता के लोक रूप के सुंदर वर्णन मिलथे।
  2. गीत मं डीही-डोंगर, गांव देवी अउ ग्राम-देवाला के लोकविश्वास झलकथे।
  3. इक्कीस बहिनी के मान्यता ला गीत के माध्यम ले सामने लाय गे हे।
  4. नीम के छांव अउ शीतलता के माध्यम ले माता के शांत स्वरूप ला बताय गे हे।
  5. गीत मं छत्तीसगढ़ के गांव-गंवई के धार्मिक परंपरा के झलक मिलथे।
  6. जुड़वासा अउ माता देवाला के मेला जइसन लोक आयोजन के उल्लेख हे।
  7. सरल छत्तीसगढ़ी बोली के कारण गीत ला गांव के आम मनखे आसानी ले समझ सकथे।
  8. ये गीत मं भक्ति के संग लोकसंस्कृति अउ परंपरा दुनों के समावेश हे।
  9. माता के अनेक रूप के वर्णन गीत ला धार्मिक रूप ले महत्वपूर्ण बनाथे।
  10. जस गीत के माध्यम ले आने वाली पीढ़ी तक लोक आस्था अउ परंपरा पहुंचाय जा सकथे।

गीतकार धनराज के जानकारी

“तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी” के गीतकार के रूप मं गीत के अंतिम उड़ान मं धनराज के नाम उल्लेखित हे। धनराज के रचना मं गांव-गंवई के बोली, देवी-देवता के लोकमान्यता अउ छत्तीसगढ़ी धार्मिक परंपरा के प्रभाव देखे बर मिलथे। ये गीत मं शीतला माता के अलग-अलग रूप अउ इक्कीस बहिनी के उल्लेख करके स्थानीय धार्मिक विश्वास ला जस गीत के रूप मं प्रस्तुत करे गे हे।

गायक हरीश साहू के बारे मं

हरीश साहू छत्तीसगढ़ी भक्ति गीत अउ जस गीत के गायकी ले जुड़े कलाकार आय। “तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी” जस गीत मं उनके आवाज के माध्यम ले शीतला भवानी के महिमा अउ भक्ति के भाव ला प्रस्तुत करे गे हे।

उनके गायकी मं छत्तीसगढ़ी बोली के मिठास, देवी भक्ति अउ लोकपरंपरा के भाव ला महत्व मिले हे। शीतला माता के महिमा गावत ये गीत गांव-गंवई के धार्मिक आस्था अउ लोकसंस्कृति संग जुड़त दिखाई देथे।

शीतला भवानी अउ जुड़वासा के कथा

छत्तीसगढ़ के गांव-गंवई मं शीतला दाई ला बहुत मान-सम्मान के साथ पूजा जाथे। लोकमान्यता मं शीतला माता ला गांव के रखवारिन देवी के रूप मं देखे जाथे। गांव के सुख-शांति, परिवार के मंगल अउ संकट ले बचाव बर मनखे माता के पूजा-पाठ करथें। एखर से शीतला दाई के पूजा केवल मंदिर तक सीमित नइ रहिस, बल्कि गांव के लोकजीवन अउ परंपरा के एक हिस्सा बन गे हे।

पुराना समय मं गांव के आसपास नीम के पेड़ के विशेष महत्व रहिस। नीम के छांव, ओकर पवित्रता अउ शीतलता ला माता के स्वरूप संग जोड़े गे। एही लोकभावना ले गीत मं “तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी” जइसन सुंदर पंक्ति बने हे। इहां तरिया गांव के प्राकृतिक जीवन के प्रतीक आय अउ नीम के छांव माता के शीतल मया के प्रतीक बन जाथे।

शीतला माता के लोकपरंपरा मं गांव के अलग-अलग देवी रूप के मान्यता घलो मिलथे। कोनो गांव मं दाई ला डीहीवारिन कहे जाथे, कोनो जगह बूढ़ी माता के रूप मं पूजा जाथे, त कोनो जगह शीतला दाई के संग अलग-अलग बहिनी देवी मन के मान्यता रहिथे। ये गीत मं इक्कीस बहिनी के उल्लेख एही लोकपरंपरा ला दर्शाथे।

जुड़वासा के समय गांव-गांव मं माता के पूजा, प्रसाद अउ सामूहिक आयोजन के माहौल बनथे। भक्त मन अपन श्रद्धा के अनुसार कांचा-पक्का भोजन, मेवा-मिठाई अउ प्रसाद चढ़ाथें। माता देवाला मं मेला भरथे, दूर-दूर ले मनखे पहुंचथें अउ दाई के दरबार मं अपन मनोकामना रखथें।

गीत के भाव ये बताथे कि भक्ति मं दिखावा जरूरी नइ हे। जेकर जइसन सामर्थ्य हे, वो अपन श्रद्धा के अनुसार माता ला मनाथे। माता अपन भक्त मन ऊपर मया अउ दया बरसाथें—यही लोकविश्वास शीतला जस गीत के केंद्र मं हे।

ए गीत मं देवी के शक्ति के संग छत्तीसगढ़ के मिट्टी, गांव, तरिया, नीम, मेला अउ लोकपरंपरा के सुंदर चित्र दिखाई देथे। एखर से ये केवल एक जस गीत नइ, बल्कि छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति अउ शीतला माता के प्रति जनआस्था के भावपूर्ण अभिव्यक्ति घलो आय।

माता भवानी के अउ जस गीत लिंक 

  1. ये पिंजरा के पोश सुवना – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  2. तरी हरी ना मोर नाना भवानी – पचरा जस
  3. जनम देवईया – जस गीत
  4. तोर रूप बिकट बिकराला वो – मरघट के काली जस
  5. बम्लाई ला सुमिरव  – देवी जस गीत
  6. मोर चले माँ दुर्गा – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  7. तोर दया ले माँ अम्बे – माता जस गीत
  8. तोर भुवन माँ – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  9. जुड़वास मनाये – देवी जस गीत
  10. हो मईया चंडिका  – काली जस गीत

जुड़वास मनाबो आषाढ़ महीना में | शीतला माता जस गीत Lyrics | छत्तीसगढ़ी जस गीत

जुड़वास मनाबो आषाढ़ महीना में – शीतला माता छत्तीसगढ़ी जस गीत Lyrics

जुडवास मनाबो आषाढ़ महीना म 🚩 यूकेश देवांगन 🚩मां शीतला जुडवास महोत्सव 2026.jpg

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गीत -जुड़वास मनाबो ना 

गायक -युकेश देवांगन 

गीत लेबल -पारंपरिक जस 

जस मंडली -माँ हिंगलाज जस सेवा भजन मंडली पवनतरा (जालबंधा)

यूट्यूब -cg dog eshwar sahu

वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे  

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गीत के बारे में 

"जुड़वास मनाबो आषाढ़ महीना में" शीतला माता के महिमा ला बखान करे वाला एक सुंदर छत्तीसगढ़ी जस गीत आय। ए गीत मं आषाढ़ महीना के रिमझिम बरसात, धरती के तृप्ति, नीम के छांव मं विराजे शीतला माता अऊ जुड़वास पर्व के महत्व के सुंदर वर्णन करे गे हे। गीत मं दूध-भात, दही, फूल अर्पित करके माता ले सुख, शांति अऊ रोगमुक्त जीवन के कामना करे जाथे। ए जस गीत भक्ति, लोकसंस्कृति अऊ छत्तीसगढ़ के पारंपरिक आस्था के जीवंत उदाहरण आय।

मुखड़ा  

जुड़वास मनाबो आषाढ़ महीना में हां -2 

आषाढ़ महीना में हां -2 

जुड़वास मनाबो आषाढ़ महीना में हां -2 

अंतरा -1  

आषाढ़ महीना रिमझिम वर्षा भुईया के तिस्ना मिटाये -2 

जब भुईया के तिस्ना मिटाये हो मईया भुईया के तिस्ना मिटाये

आषाढ़ महीना रिमझिम वर्षा भुईया के तिस्ना मिटाये

जब नीम के छईया म बईठे मईया शीतला माता कहाये -2 

जब शीतला माता कहाये मईया शीतला माता कहाये

नीम के छईया म बईठे मईया शीतला माता कहाये

जब रोग प्रपस ल दूर भगाये 

आषाढ़ महीना में हां -2 

जुड़वास मनाबो आषाढ़ महीना में हां -2 

अंतरा -2  

दूध भात अउ दही चढ़ाये फूल के माला चढ़ाये -2 

जब फूल के माला चढ़ाये हो मईया फूल के माला चढ़ाये 

दूध भात अउ दही चढ़ाये फूल के माला चढ़ाये

जब नरनारी सब आशीष पाये जयजय कार बुलाये 

जब जयजय कार बुलाये हो मईया जयजय कार बुलाये 

नरनारी सब आशीष पाये जयजय कार बुलाये 

जब सरग सब देव फूल बरसाये आषाढ़ महीना में हां

जुड़वास मनाबो आषाढ़ महीना में हां -2

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गीत के अर्थ 

ए जस गीत मं शीतला माता के पूजा के महत्व ला बताय गे हे। आषाढ़ महीना मं जुड़वास पर्व मनाके माता ला दूध-भात, दही अऊ फूल चढ़ाय जाथे। मान्यता हे कि शीतला माता अपन भक्त मन ला रोग-व्याधि ले बचाथे अऊ परिवार मं सुख-समृद्धि प्रदान करथे। गीत मं बरसात के आगमन, धरती के हरियाली अऊ माता के कृपा के सुंदर चित्रण मिलथे।

गीत के विशेषता

  • शीतला माता के महिमा के सुंदर वर्णन।
  • जुड़वास पर्व के धार्मिक महत्व।
  • छत्तीसगढ़ी लोकभाषा मं सरल अऊ मधुर शब्द।
  • बरसात अऊ प्रकृति के सुंदर चित्रण।
  • भक्ति रस ले भरपूर पारंपरिक जस गीत।
  • धार्मिक कार्यक्रम अऊ माता सेवा मं गाये जाथे।

जुड़वास पर्व के कथा 

जुड़वास छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख लोकपर्व आय, जेनला आषाढ़ महीना मं बड़े श्रद्धा अऊ भक्ति भाव ले मनाय जाथे। ए पर्व के संबंध शीतला माता ले माने जाथे। गांव-गांव मं ए दिन माता के पूजा-अर्चना करे जाथे अऊ परिवार के सुख, शांति, निरोग जीवन अऊ खुशहाली बर आशीर्वाद मांगे जाथे। जुड़वास के दिन घर-आंगन के साफ-सफाई करके पूजा के तैयारी करे जाथे। लोगन मन बिहान ले नहाधो के नीम के डारा, फूल, दूध, दही, भात अऊ दूसर पूजा सामग्री के व्यवस्था करथें।

पुरखा मन के मान्यता हवय कि जब धरती मं भीषण गर्मी परथे अऊ चारों कोती सूखा के हालत बन जाथे, तब जीव-जंतु, पेड़-पौधा अऊ मनखे सब झिन गर्मी ले परेशान हो जाथें। अइसने समय मं आषाढ़ महीना के रिमझिम बरसात धरती ला ठंडक देथे। एही समय शीतला माता के पूजा करके प्रकृति अऊ माता के प्रति आभार व्यक्त करे जाथे। "जुड़वास" शब्द के अर्थ घलो ठंडक, शांति अऊ राहत ले जोड़के देखे जाथे। ए पर्व मनखे के मन, तन अऊ प्रकृति तीनों ला जुड़ाव अऊ शीतलता देय के संदेश देथे।

शीतला माता ला रोगन के नाश करे वाली देवी माने जाथे। गांव के बुजुर्ग मन कहिथें कि माता के कृपा ले चेचक, बुखार, महामारी अऊ अनेक प्रकार के रोग ले रक्षा मिलथे। एखर सेती माता के पूजा मं विशेष रूप ले ठंडा भोग चढ़ाय जाथे। दूध-भात, दही, चना, गुड़, नारियल अऊ फूल माता ला अर्पित करे जाथे। कई जगह मं एक दिन पहिली बने भात ला दूसरे दिन ठंडा करके माता ला भोग लगाय जाथे। ए परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चलत आवत हे।

जुड़वास के दिन गांव के महिला, पुरुष, बुजुर्ग अऊ छोटे-छोटे लइका मन साफ कपड़ा पहनके माता के मंदिर या नीम के पेड़ के नीचे एकत्र होथें। माता के जयकारा लगाय जाथे, जस गीत गाये जाथें अऊ पूजा-पाठ करे जाथे। ढोलक, मंजीरा अऊ झांझ के संग भक्ति गीत गूंजथे, जेन ले पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाथे। गांव के लोग एक-दूसर ला जुड़वास के बधाई देवतें अऊ सुख-समृद्धि के कामना करथें।

नीम के पेड़ के जुड़वास मं बहुत विशेष महत्व माने जाथे। लोकमान्यता अनुसार शीतला माता नीम के छांव मं विराजमान रहिथें। नीम मं प्राकृतिक औषधीय गुण होथे, एखर पाना अऊ डारा वातावरण ला शुद्ध रखे मं मदद करथे। एही कारण ले माता के पूजा अधिकतर नीम के नीचे करे जाथे। पूजा के बाद नीम के पाना घर ले जाके सुरक्षित रखे जाथे, जेनला शुभ अऊ मंगलकारी माने जाथे।

जुड़वास खाली एक धार्मिक पर्व नइये, बल्कि ए प्रकृति संरक्षण अऊ सामाजिक एकता के संदेश घलो देथे। ए दिन गांव के लोग मिलजुल के पूजा करथें, एक-दूसर के घर जाथें, प्रसाद बांटथें अऊ भाईचारा बढ़ाथें। ए परंपरा समाज मं प्रेम, सहयोग अऊ अपनापन ला मजबूत करथे। लइका मन घलो अपन ददा-दाई अऊ ददा-दाई (बुजुर्ग) ले ए पर्व के महत्व सीखथें, जेन ले संस्कृति अगली पीढ़ी तक पहुंचथे।

छत्तीसगढ़ मं आज घलो अनेक गांव मं जुड़वास बड़े धूमधाम ले मनाय जाथे। कई जगह माता के झांकी निकाले जाथे, भजन-कीर्तन होथे अऊ जस गायन के आयोजन घलो रखे जाथे। श्रद्धालु मन माता ले परिवार के सुख, खेती-किसानी के उन्नति, अच्छा बरसात अऊ निरोग जीवन के वरदान मांगथें। किसान मन विश्वास करथें कि माता के कृपा ले खेत मं हरियाली आही अऊ फसल बढ़िया होही।

जुड़वास हमन ला ए सीख देथे कि प्रकृति, पानी, पेड़-पौधा अऊ स्वास्थ्य के सम्मान करना बहुत जरूरी हवय। धरती ला ठंडक देय वाला पानी अऊ जीवन बचाय वाला प्रकृति के संरक्षण करना हर मनखे के जिम्मेदारी आय। माता शीतला के पूजा के माध्यम ले हमन अपन संस्कृति, परंपरा अऊ लोकआस्था ला जीवित रखथन।

आज के आधुनिक समय मं घलो जुड़वास पर्व के महत्व कम नई होय हवय। गांव होवय या शहर, श्रद्धालु मन पूरे विश्वास अऊ भक्ति ले माता के पूजा करथें। ए पर्व छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक पहचान के एक अमूल्य हिस्सा आय। जुड़वास मनाके हमन अपन पुरखा मन के परंपरा, प्रकृति के सम्मान अऊ माता शीतला के असीम कृपा के प्रति अपन श्रद्धा व्यक्त करथन।

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    ये जुड़वास आगे ना | मोर शीतला दाई के जुड़वास आगे ना | नया छत्तीसगढ़ी शीतला माता जस गीत Lyrics

    ✦✦ जुड़वास आगे ना ✦✦


    JUDWAS AAGE NA | जुड़वास आगे ना | Master  Sunil Sihore.jpg
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    गीत - जुड़वास आगे ना 

    गीत लेबल - जुड़वास 

     गायक -सुनील सिहोरे 

    गीतकार -मंगल वर्मा 

    यूट्यूब - मास्टर सुनील सिहोरे  

    वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे

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    गीत के बारे में 

    "ये जुड़वास आगे ना" छत्तीसगढ़ी संस्कृति और शीतला माता की अटूट भक्ति से जुड़ा अत्यंत सुंदर जस गीत है। इस गीत में आषाढ़ मास में मनाए जाने वाले जुड़वास पर्व की महिमा का वर्णन किया गया है। गीत बताता है कि जब जुड़वास आता है तब पूरी प्रकृति हरियाली से भर जाती है और देवी-देवता भी माता शीतला की आराधना करते हैं। भक्त माता के दरबार में चना, दार, कच्ची हल्दी और श्रृंगार अर्पित कर सुख-समृद्धि तथा रोगमुक्त जीवन की कामना करते हैं। यह गीत श्रद्धा, आस्था और छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा का सुंदर परिचय देता है।

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    मुखड़ा 

     ये जुड़वास आगे ना , ये

    जुड़वास मनाये वो | रामकुमार यादव | आषाढ़ महीना शीतला माता जुड़वास जस गीत | CG Jas Lyrics

    ✦✦ जुड़वास मनाये वो  ✦✦

    ashad mahina judwas manaye vo-singer ramkumar yadav.jpg

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    गीत -जुड़वास मनाये वो 

    गायक -रामकुमार यादव 

    म्यूजिक लेबल -जुड़वास जस गीत

    यूट्यूब - सुमिरन भक्ति माला 

    वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे  

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    मुखड़ा 

    जुड़वास मनाए ओ जुड़वास मनाए ना

     आषाढ़ महीन मईया तोर जुड़वास मनाए ओ

      उड़ान - गांव बस्ती के सबझन मिलके 

    माथ नवाये वो 

     आषाढ़ महीन मईया तोर जुड़वास मनाए ओ

    अंतरा -1 

    दाई तोर मंदिर ल लिपाये पोतायेव 

    जगमग दियना जलायेव 

    उड़ान - गजमोतियन ले अंगना म दाई 

    चौक पुरायेव वो

    आषाढ़ महीन मईया तोर जुड़वास मनाए ओ 

    अंतरा -2  

    आवव आके बैठो दाई आसन बिसायेव हव 

    चरण पखारे बर गंगा जल लाये हव 

    उड़ान - चंदन बंदन फूल दसमत के 

    तोला चघाये वो

    आषाढ़ महीन मईया तोर जुड़वास मनाए ओ 

    अंतरा -3 

    पाठ पूजा करत हावव बईगा अउ गुनिया मन

     लइका पिचका नर नारी बइठे हे सिंहासन   

    उड़ान - सुनले अउ अर्जी विनती ल 

    तोला गोहराये वो

    आषाढ़ महीन मईया तोर जुड़वास मनाए ओ

    अंतरा -4 

    हरदी के पानी अउ निमुआ के डारा 

    बईगा हा सिचय पानी सबला डारा डारा 

    उड़ान - मन ला शांत करव माँ शीतला 

    तन ला जुड़ाये वो

    आषाढ़ महीन मईया तोर जुड़वास मनाए ओ 

    अंतरा -5  

    मै तो नई जानव दाई तोर सेवा के मरम ला 

    गावत हावव जस हिन्दू के धरम ला 

    उड़ान - पड़े शरण में राम कोसरिया 

    आशीष बरसाये वो

    आषाढ़ महीन मईया तोर जुड़वास मनाए ओ   

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    गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी म)

    "जुड़वास मनाये वो" सिरिफ एक जस गीत नई हे, ए हमर छत्तीसगढ़ के लोक आस्था, संस्कृति अउ शीतला दाई के भक्ति के जीयत-जागत चिन्हा आय। गीत म गायक बताथे कि आषाढ़ महीना लगतेच गांव के सबो झन एक संग जुटके शीतला दाई के जुड़वास मनाथें। मंदिर ल लीप-पोत के, चौक पुरके, दीप जलाके, गंगा जल, चंदन, फूल अउ नीम-हरदी ले दाई के पूजा करे जाथे।

    ए गीत के असली संदेश ये आय कि सच्चा मन, सेवा, एकता अउ श्रद्धा ले करे गे पूजा सबसे बड़े चढ़ावा होथे। शीतला दाई ले गांव के सुख, शांति, रोग-दुख ले रक्षा अउ परिवार के मंगल के कामना करे जाथे। जुड़वास सिरिफ एक पर्व नई, बल्कि गांव-समाज ल एक डोरी म बांधे वाला लोक संस्कार आय।


    गीत के विशेषता (छत्तीसगढ़ी म)

    • ए गीत म शीतला दाई के जुड़वास पर्व के परंपरा के सुंदर चित्रण मिलथे।

    • गांव के एकता, भाईचारा अउ सामूहिक पूजा के भाव ल उभारथे।

    • हरदी, नीम, गंगा जल, चंदन अउ दीपक जइसन लोक परंपरा के महत्व बताथे।

    • छत्तीसगढ़ के संस्कृति, लोक विश्वास अउ देवी भक्ति के जीवंत रूप ल दिखाथे।

    • गीत के शब्द सरल, मधुर अउ भक्तिमय हवंय, जेन ला हर उमर के मनखे गा सकथे।

    • जुड़वास पर्व म गाये जाय वाला ए गीत श्रद्धा, शांति अउ सेवा के संदेश देथे।


    कथा – जुड़वास मनाये वो (छत्तीसगढ़ी लोककथा)

    आषाढ़ महीना के पहिली बरखा धरती ऊपर गिरिस। खेत-खार हर हरियर होवत रहिस। गांव के गली, चौरा अउ मंदिर म एक अलगच रौनक दिखत रहिस। हर घर के माई-बहिनी कहत रहिन – "ए साल जुड़वास धूमधाम ले मनाबो, शीतला दाई ल मनाबो।"

    गांव के बीचो-बीच एक पुराना मंदिर रहिस। कहे जाथे कि बरसों पहिली गांव म चेचक अउ कई किसिम के बीमारी फैल गे रहिस। तब गांव के बुजुर्ग मन शीतला दाई के अराधना करिन। दाई के कृपा ले गांव धीरे-धीरे बीमारी ले मुक्त होगे। ओही दिन ले गांव म जुड़वास मनाय के परंपरा सुरू होइस।

    जुड़वास के बिहान सबो झन सूरज उगे के पहिली उठ गिन। घर-दुआर ल साफ करे गीस। मंदिर ल गोबर अउ माटी ले लीपे गीस। आंगन म चावल के आटा ले सुंदर चौक पुरे गीस। छोटे-छोटे लइका मन फूल बटोरे बर निकर गिन।

    गांव के दाई-बहिनी मन मिलके जस गीत गावत मंदिर पहुंचिन। कऊनो आरती के थारी लाने रहिस, कऊनो दीपक, कऊनो नारियल अउ कऊनो गंगा जल। मंदिर के वातावरण भक्ति ले भर गे।

    बईगा पूजा सुरू करिस। शीतला दाई के चरण म गंगा जल चढ़ाइस। चंदन, फूल, अगरबत्ती अउ दीप अर्पित करे गीस। गांव के बूढ़ा-बुजुर्ग हाथ जोड़के कहिन – "दाई, हमर गांव ल रोग-दुख ले बचाय रखिहा।"

    पूजा के बाद हरदी के पानी अउ नीम के डारा ले गांव भर म छिड़काव करे गीस। छोटे लइका मन हांसत-खेलत एक-दूसर ऊपर पानी के बूंद गिरावत रहिन। बुजुर्ग मन समझाइन – "ए सिरिफ परंपरा नई, ए स्वास्थ्य अउ स्वच्छता के चिन्हा आय।"

    ओही गांव म कोसराम नाव के एक गरीब किसान रहिस। फसल खराब होय के सेती घर के हालत कमजोर रहिस। फेर ओ कभू दाई ऊपर भरोसा नई छोड़े। जुड़वास के दिन ओ अपन घर के आखिरी तेल ले एक दीया जलाइस अउ कहिस – "दाई, धन-दौलत नई चाही, बस हमर परिवार ल सुखी रखिहा।"

    बरखा बढ़िया होइस। खेत लहराय लागिन। फसल एतीक बढ़िया होइस कि कोसराम के घर म खुशहाली लौट आइस। गांव वाले मन कहिन – "दाई के कृपा तभे मिलथे, जब मन साफ होथे।"

    धीरे-धीरे जुड़वास गांव के सबसे बड़े पर्व बनगे। दूर-दूर ले मनखे दर्शन बर आवन लागिन। जस गीत के स्वर गूंजे लागिस। छोटे लइका मन अपन ददा-दाई ले ए परंपरा सीखिन। माई-बहिनी मन नई पीढ़ी ल बताइन कि संस्कृति ल जिंदा रखे बर पर्व मनाना जरूरी होथे।

    आज घलो जब आषाढ़ महीना आवथे, गांव के मंदिर म दीप जलथे, चौक पुरथे, नीम के डारा लहराथे अउ जस गीत गूंजथे—

    "जुड़वास मनाये वो... आषाढ़ महीना मईया तोर जुड़वास मनाये ओ..."

    ए गीत सिरिफ गाना नई, बल्कि छत्तीसगढ़ के माटी, आस्था, संस्कृति अउ लोकविश्वास के अमर पहचान आय। जेन समाज अपन परंपरा ल जिंदा रखथे, ओ समाज के पहचान पीढ़ी दर पीढ़ी बने रहिथे। शीतला दाई के जुड़वास आज घलो गांव-गांव म मनखे मन ल एक सूत्र म बांधके प्रेम, सेवा, शांति अउ सद्भाव के संदेश देत हे।

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    सेवा म सेउक आये ओ – शीतला शीतल करबे सब के दुःख हरबे

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    हो मईया चंडिका

    झूला झुलव भवानी

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    शीतला भवानी मईया मोर- गोविंद साह/cgjaslyrics

    ✦✦ शीतला भवानी मईया मोर-गोविंद साहू/छत्तीसगढ़ी जस लिरिक्स✦✦

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    गीत - शीतला भवानी मईया मोर 

    गायक - गोविंद साहू 

    गीतकार - दास मनोहर घृतलहरे 

    म्यूज़िक कंपनी - T C Music 

    वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 

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    मुखड़ा 

     शीतला भवानी मईया मोर-2

     जिनगी सुग्घर लागे कोरा मा तोर -2

    उड़ान - पलपल हावे तोर सहारा -------2

    बांधे मया के हावे डोर के----

    जिनगी सुग्घर लागे कोरा मा तोर -2

    अंतरा -1

    आठों पहर समाए दाई, तै तो मोर मन मा 

    दुःख पीड़ा विश्रायेव मईया आके तोर शरण मा 

    उड़ान-अगर धूप नारियर फूल माला-2

    चढ़ाए हाथ करे जोड़...

    जिनगी सुग्घर लागे कोरा मा तोर -2

    अंतरा -2

    छत्तीसगढ़ के गांव गांव मां बैठें तरियां पारे 

    आरंग तीर के भोथली गांव म बीच बस्ती म डारे 

    उड़ान-रोज आथन मां तोर देवाला -2

    उवत सुरुज भोर.....

    जिनगी सुग्घर लागे कोरा मा तोर -2

    अंतरा -3

    आदि शक्ति माता मोर शीतला,शीतल हे तोर रूप ओ 

    दास मनोहर गोविंदा ला, देथे भारी सुख ओ 

    उड़ान-महिमा हावय तोर नियारा-2

    शीतल करे अंजोर...

    जिनगी सुग्घर लागे कोरा मा तोर -2

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    माता रानी के अऊ जस गीत के लिंक

    हे मैया माता सेवा मा चले आबे – दुकालू यादव जसगीत

    शीतल शीतला शीतल शीतला हो – अमन बघेल शीतला भक्ति गीत

    झुमरी तलइया के पारे – पंचराम मिर्झा जसगीत लिरिक्स

    तोर आरती उतारन मोर दुर्गा मईया – पूरन साहू जस

    मरघहीन काली ओ – तांत्रिक काली माता जसगीत

    लहराये जंवारा – पंचू यादव देवी जसगीत

    पैजनिया बाजे मईया के – सुखऊ राम केंवट जसगीत

    गीत का अर्थ (भावार्थ)

    यह जसगीत माता शीतला की महिमा का वर्णन करता है। भक्त कहता है कि माता के आंचल में जीवन बहुत सुंदर लगता है। हर पल माता का सहारा मिलता है और उनकी ममता की डोर से भक्त बंधा रहता है।

    गीत में बताया गया है कि भक्त दिन-रात माता को अपने मन में बसाए रहता है और दुख-पीड़ा से छुटकारा पाने के लिए उनकी शरण में जाता है। नारियल, फूल और माला चढ़ाकर भक्त माता की पूजा करता है।

    दूसरे अंतरे में छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में माता शीतला के मंदिर होने का वर्णन है। लोग सुबह-सुबह माता के देवालय में जाकर पूजा करते हैं और उनके आशीर्वाद से दिन की शुरुआत करते हैं।

    तीसरे अंतरे में माता को आदि शक्ति बताया गया है। उनकी महिमा निराली है और वे संसार को शीतलता प्रदान करती हैं। भक्त दास मनोहर कहता है कि माता शीतला की कृपा से जीवन सुखमय हो जाता है।

    🔷 गीत की विशेषता

    • शीतला माता की ममता का सुंदर वर्णन

    • छत्तीसगढ़ के गांवों की भक्ति परंपरा दिखाई गई

    • सरल और भावुक शब्दों में लिखा गया जसगीत

    • भक्त और माता के रिश्ते को दर्शाता गीत

    • सुबह की पूजा और शरणागति का वर्णन

    • आदि शक्ति माता की महिमा का गान

    🔷 कहानी ,Chhattisgarhi Story)

    छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव में दास मनोहर नाम के एक गरीब किसान रहत रहिस। ओकर जिनगी मा बहुत दुख तकलीफ रहिस। खेत मा फसल ठीक नई होवय, घर मा बीमारी रहय, मन हमेशा परेशान रहय।

    गांव के बुजुर्ग मन कहिन — "शीतला भवानी मईया के शरण मा जा, सब दुख दूर हो जाही।"

    दूसर दिन भोर मा दास मनोहर नारियल, फूल आऊ माला लेके गांव के तरिया पारे बने छोटे मंदिर मा पहुंचिस। उहां शीतला मईया के मूर्ति रहिस। ओ हाथ जोड़ के कहिस —

    "मोर मईया, अब तोर शरण मा आएंव, मोर जिनगी ला सुधर दे।"

    धीरे-धीरे ओकर मन शांत होगे। ओ रोज सुबह मंदिर जाय लगिस। पूजा करे लगिस। कुछ दिन बाद ओकर खेत मा हरियाली आ गे। घर मा सुख आ गे। बीमारी दूर होगे।

    दास मनोहर समझ गे — ये सब मईया के कृपा हवय।

    अब ओ हर दिन गावत रहिस —

    "शीतला भवानी मईया मोर

    जिनगी सुग्घर लागे कोरा मा तोर"

    गांव के दूसर लोग मन घलो ओला देखके माता के पूजा करे लगिन। धीरे-धीरे पूरा गांव मा भक्ति के माहौल बन गे।

    माता शीतला के मंदिर मा रोज दिया जलय, भजन गूंजय, आऊ सबके जीवन मा सुख शांति आ गे।

    तब ले आज तक गांव के लोग मन कहिथें —

    माता शीतला के कोरा मा जाके जिनगी सचमुच सुग्घर हो जाथे।

    ✦✦  शीतला भवानी आप सब की मनोकामना पूर्ण करे ✦✦

    नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी | जस गीत, अर्थ, महत्व और कहानी

    ✦✦ नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी✦✦

    लिम डारा तोला भाये हो शीतला भवानी । स्वर -खिलेश यादव । माँ चंडीका ग्रुप नया पारा दुर्ग। Cg Jas 2024

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    गीत-नीम डारा तोला भाए हो 

    गायक-खिलेश यादव

    म्यूज़िक कंपनी-cg मोर धरोहर

    वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे

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    मुखड़ा 

    नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2

    उड़ान- तोला बढ़ भाए... हो मां 

     नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2

    अंतरा -1

    बछड़ भर में तोरे परब दुएं  बेर आए हो

    जम्मों नर नारी तोर देवाला सजाए हो

    उड़ान - गज मोती चौक पुराए..

    नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2

    अंतरा -2

    आदि शक्ति जगदम्बा के परब जुड़वास हे

    जम्मों जीव जन के मन म एक आस हे

    उड़ान - शीतला दुआरी सबों जाय 

    नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2

    अंतरा -3

    चना दार कच्चा हरदी तोला भेंट चघाये  ओ 

    अपन मनौती के भेंट चढ़ाके तोला मनाए ओ 

    उड़ान - तोला जस पचरा सुनाए 

    नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2

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    झूपत आबे

    तोरे दरस बर 

    पलना गड़े मज़ेदार 

    माई के दरस बर 

    तर जाहि चोला हर

    देवी के सिंगारे 

    डोंगरी पहाड़

    देवी पार्वती हा

    चले आए महामाया

    हनुमान जनम ले

    भोला जोतय नागर मां

    गीत के अर्थ (Meaning)

    🔸  नीम डारा के महत्व

    ए गीत म गायक कहिथे कि शीतला माता ल नीम के डारा (डाली) बहुत पसंद हे। नीम ला छत्तीसगढ़ म पवित्र अउ रोग नाशक माने जाथे।

    🔸 परब अउ पूजा के वर्णन

    गीत म बताय गे हे कि साल म दू बेर माता के परब आवथे। ए बेरा गांव के जम्मो मनखे मिलके माता के मंदिर सजाथें अउ भक्ति भाव ले पूजा करथें।

    🔸 भेंट अउ आस्था

    चना, दार अउ कच्चा हल्दी जइसने प्रसाद चढ़ाके माता ल खुश करे जाथे अउ सब झन अपन सुख-शांति बर माता ले मन्नत मांगथें।

    गीत के महत्व (Importance)

    🔸  जुड़वास परब के खास गीत

    ए गीत खास करके जुड़वास परब म गाये जाथे, जिहां माता के पूजा बड़े श्रद्धा ले होथे।

    🔸  स्वास्थ्य अउ सुरक्षा के प्रतीक

    शीतला माता ला बीमारी ले बचाव करे वाली देवी माने जाथे, खास करके चेचक जइसने रोग ले।

    🔸  संस्कृति अउ परंपरा के पहचान

    ए गीत गांव के एकता, भक्ति अउ परंपरा ल जिन्दा रखथे।

    नीम डारा के मया अउ शीतला माई के किरपा

    एक गांव रहिस – सोनपुर। उहां के मनखे बहुत सिधा-सादा अउ मेहनती रहिन। गांव के बीच म एक बड़े नीम के पेड़ रहिस, जिहां हर साल शीतला माता के पूजा होवत रहिस।

    गांव म रामसाय नाम के एक गरीब किसान रहिस। ओकर घर म गरीबी जरूर रहिस, फेर ओकर मन म माता बर अटूट भक्ति रहिस।

    एक बखत गांव म भारी बीमारी फइल गे। लइका मन बुखार ले तपे लगिन। गांव म डर के माहौल बन गे। तब बुजुर्ग मन कहिन – “शीतला माई के सच्चा पूजा करे के समय आ गे हवय।”

    रामसाय अपन जिम्मेदारी समझिस। वो बिहान-सुबह उठके नीम के डारा ले आइस अउ मंदिर ल सजाय लगिस। धीरे-धीरे गांव के अउ मनखे मन घलो जुड़ गइन।

    सब झन मिलके चौक पुराइन, गज-मोती ले सजाइन अउ जस गीत गाइन – “नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी…”

    रामसाय अपन घर ले चना, दार अउ कच्चा हल्दी ले आइस अउ माता के चरण म चढ़ाइस। वो रो-रो के कहिस – “मइया, हमर गांव ल बचा लेवव।”

    रात के बेरा ठंडी हवा चले लगिस। धीरे-धीरे बीमारी कम होइस। लइका मन ठीक होगे। गांव वाले मन समझ गइन – ये सब शीतला माता के किरपा आय।

    ओ दिन ले गांव म हर साल जुड़वास परब बड़े धूमधाम ले मनाय जाथे। नीम के पूजा होथे अउ माता के जस गीत गूंजथे।

    रामसाय के जीवन म घलो बदलाव आइस। ओकर घर म सुख-समृद्धि आ गे। वो हमेशा कहिथे –

    “सच्चा भक्ति करहू, मइया सब दुख हर लेथे।”

     






    सेवा म सेउक आये ओ/दुकालू यादव /छत्तीसगढ़ी जुड़वास जस लिरिक्स

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    गीत-सेवा म सेउक आये ओ

    गायक -दुकालू यादव 

    गीतकार -दुकालू यादव 

    म्यूजिक -दुकालू यादव

    म्यूजिक कंपनी -DRY  MUSIC  

    वेबसाइट -www . cgjaslyrics.com

    वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे   

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    मुखड़ा 

    सेवा म सेउक आये ओ शीतला शीतल करबे सब के दुःख हरबे 

    माता तोर होवत हे जुड़वास शीतला तोर होवत हे जुड़वास 

    अंतरा -1 

    नीम डारा तोला भाथे ओ हरदी पानी म जुराथे ना 

    चना दार के भोग म दाई पेट हा तोर 

    रोग राई ल भगाये बर दया के बूटी पीया देबे 

    रोवत ल हसाये बर ममता अपन छलका देबे 

    उड़ान - सतवंतीन शीतला कहाये ओ --ओ 

    पाये पोटारे रहिबे अचरा म बांधे रखबे -2 

    माता बस अतरी हावे आस -2 

    सेवा म सेउक आये ओ शीतला शीतल करबे सब के दुःख हरबे 

    माता तोर होवत हे जुड़वास शीतला तोर होवत हे जुड़वास 

    अंतरा -2 

    नीम डारा तोला भाथे ओ हरदी पानी म जुराथे ना 

    चना दार भोग म दाई पेट हा तोर भर जाथे ओ 

    गुगुर धूप हा सुहाथे ओ पूजा पाठ हा जगाथे ना 

    भगत के भगति भाव म मनहा तोर कुमलाथे ओ 

    उड़ान - आषाढ़ म तोला जुड़ाये ओ --ओ 

    सुख शांति ल बरसाबे कोनो ल झन तरसाबे-2  

    दाई तोर ऊपर हे विश्वास---आ -2  

    सेवा म सेउक आये ओ शीतला शीतल करबे सब के दुःख हरबे 

    माता तोर होवत हे जुड़वास शीतला तोर होवत हे जुड़वास   

      अंतरा -3  

    गदहा  के तोर सवारी ओ हाथ म सूपा बाहरी ना 

    तरिया पार म बइठे तै सबके करे रखवारी ओ 

    स्वेत बरन के सिंगारी ओ तोर संवागा भारी ना 

    शक्ति स्वरूपा शाखंभरि सबके तै महतारी ओ 

    उड़ान - गांव शहर तैहा पुजाये ओ --ओ 

    जुगजुग म तै अवतरके देवी रूप ल तै धरके -2 

    कोसरिया सुमरे बारो मॉस -2 

    सेवा म सेउक आये ओ शीतला शीतल करबे सब के दुःख हरबे 

    माता तोर होवत हे जुड़वास शीतला तोर होवत हे जुड़वास   

    तोर जुड़वास परब हे पावन | शीतला मइया जस गीत

     



    गीत -  तोर जुड़वास परब हे पावन 
    गायक -भरत जाटव 
    गीतकार - स्व.चंद्रकांत बघ्धर्रा
    म्यूजिक -सेवक राम यादव 
    म्यूजिक कंपनी -चंदन म्यूजिक 
    वेबसाइट -www . cgjaslyrics.com 
    वेबसाइट ऑनर - के के पंचारे
    ═══════ 
     मुखड़ा 

    तोर जुड़वास परब हे पावन तोर जुड़वास परब  हे पावन

    तोर जुड़वास परब हे पावन तोर जुड़वास परब हे पावन

    उड़ान -हे शीतला मईया ----आ आ आ, 

    हे लिमहीन  दाई 

    जीव जन जेमा जुड़ावन 

    तोर जुड़वास परब हे पावन तोर जुड़वास परब हे पावन


    अंतरा-1 

    बादर के थाप म ---आ आ आ बिजली नैन चमकाये 

    कोरस -बिजली नैना चमकाये हो माया मोर बिजली

     नैना चमकाये 

    नाचे नचकारिन छम छम -----पानी पियासे मिटाये 

    कोरस -पानी पियासे मिटाये  हो माया मोर पानी

     पियासे मिटाये 

    उड़ान - सासे मा सास लाये महीना आषाढ़ ताये 

    मासे माँ माँ  सुहावन 

    तोर जुड़वास परब हे पावन तोर जुड़वास परब हे पावन


    अंतरा-2 

    हरियागे हरियर फरियर -------र र र र अंतस बाहिर

     जरे चेतन 

    कोरस -अंतस बाहिर जरे चेतन 

    घोरे शीतल रूप शीतला ---आ आ आ किरपानी 

     किरपा केसन 

    उड़ान -अंचरा के छईया ---आ तरी घोंडईया 

    मारत दुःख ल बुरावन 

    तोर जुड़वास परब हे पावन तोर जुड़वास परब हे पावन

    अंतरा-3  

    हासत हासावत जुड़ मिल --इ इ लईका सियान सकलाथे 

    कोरस  -लईका सियान सकलाथे हो माया

     मोर लईका सियान सकलाथे

    धरके चढ़ावा पुरत भर ---र र र तोर मंदिरवा म आथे 

    कोरस -तोर मंदिरवा म आथे हो माया मोर तोर

     मंदिरवा म  आथे 

    उड़ान - चना दार हरदी कईचा पान फूल दूबी नाईका 

    डारा पाना लिम के चघावन 

    तोर जुड़वास परब हे पावन तोर जुड़वास परब हे पावन

    अंतरा-4 
     
    दयावंतीन तोरे ..... फूले फरे जग वासी 

    कोरस -फूले फरे जग वासी हो माया मोर फूले फरे जग वासी 

    मानुष योनि जस गाथे...भोग के लख चौरासी 

    कोरस -भोग के लख चौरासी हो माया मोरभोग के लख चौरासी 

    उड़ान -  जय हनुमान के संग मा भरत बाघधर्रा रंग मा

    भगति भगत रगावन 

    तोर जुड़वास परब हे पावन तोर जुड़वास परब हे पावन


    तोर जुड़वास परब हे पावन तोर जुड़वास परब हे पावन

    गायक परिचय – भारत जाटव जस सेवा गीत गायक 

    भारत जाटव छत्तीसगढ़ के दुर्ग के रहइया आय।  एक सुरीला अउ भावुक भक्ति गायक घलो हावय। ओमन  मन

     विशेष करके शीतला दाई, दुर्गा माता, अउ देवी देवता मन ऊपर आधारित जस गीत ला अपन मधुर आवाज म

     गाके लोकमन म बसा डारे हावय।

    भारत जाटव के आवाज म गजब के मिठास हावयजऊन मनखे मन ला भक्ति म रंग देथे। उहाँ के गाना मन म गांव-

    गंवई के सोंधापन साफ झलकथे। जब नवरात्रि के समय आथे तब एकर गीत दुर्गा पंडाल म सुनाई देथे। 


    गीतकार परिचय – चंदू बघधर्रा (स्व. चंद्रकांत बघधर्रा)

    स्वर्गीय चंदू बघधर्रा छत्तीसगढ़ के नामी जसगीतकार रहिन। एकर रचना मन म गांव के आस्था, देवी भक्ति, अउ

     संस्कृति के गजब के झलक रहिथे।

    शीतला दाई ऊपर लिखे गीत "तोर जुड़वास परब हे पावन" मा उहाँ के भक्ति अउ भावना साफ झलकथे।


    चंदू बघधर्रा अपन लेखनी ले छत्तीसगढ़ के लोक साहित्य ला समृद्ध करे हवंय।

    गीत के अर्थ  (छत्तीसगढ़ी भाषा  में)

    ए गीत छत्तीसगढ़ के पारंपरिक जुड़वास परब ला समर्पित आय, जऊन शीतला मइया के उपवास, पूजा-पाठ अउ लोक आस्था ले जुड़े हवय। ए परब म गांव के मनखे मन मइया ला बड़ भक्ति भाव ले पूजथें।

    गीत म बारीस के सुरुआत, बिजुरी के चमक, नचइया मन के छम-छम नाच, हरियर हरियाली अउ मंदिर म चढ़ावा चढ़ाय के संस्कृति ला बड़े सुंदर ढंग ले देखाय गे हवय।

    • बिजली नैन चमकाना – शीतला मइया के तेज अउ शक्ति के चीन्हा आय।

    • नचकारिन छम-छम नाचना – गांव के महतारी-बहिनी मन के भक्ति अउ श्रद्धा के भाव ला दर्शाथे।

    • अंचरा के छईया – मइया के शीतल छांव, जिहां दुख-तकलीफ मिटथे।

    • लईका-सियान सकलाना – परब म घर-परिवार के संग एकठा होके भक्ति करना।

    • चना दार, हरदी, कईचा पान – चढ़ावा म अर्पित होवत मइया के परती श्रद्धा के प्रतीक आय।

    • दयावंतीन तोरे फूले फरे जग वासी – मइया के किरपा ले संसार के सब जीव-जन के भला होथे।

    ए गीत मा शीतला मइया के करुणा, लोक संस्कृति अउ आस्था के भाव बड़े गजब ले समाय गे हवय।

    📖 गीत पर आधारित कहानी (छत्तीसगढ़ी में) 

    छत्तीसगढ़ के अंचल म एक सुघ्घर गांव रहिस – लिमहिनपारा। ए गांव के मनखे हर साल आषाढ़ मास के जुड़वास परब म मां शीतला ला मनाथें। गांव के मंदिर म नीम के झाड़ के छइंहा म मइया के सुंदर मूर्ति रहिस।

    जुड़वास के दिन गांव म खूब चहल-पहल रहिस। मेहरारू मन बिहान बिहनिया उठके शीतला दाई के पूजा बर चना दार, हरदी, कईचा पान, फूल, दूबी, नाइका अउ लिम के डारा पाना ल चढ़ाथें।

    बच्चा मन ठउर-ठउर नाचत, गावत, गीत गावत – "तोर जुड़वास परब हे पावन" के सुर म मगन रहिथें।

    बूढ़ा-बुजुर्ग कहिथें के जे दिन आषाढ़ मास के जुड़वास के पूजा म मइया ला सच्चा मन ले बिसाथे, ओकर दुख-दर्

    , रोग-बीमारी मइया हर हर लेथें।

    गांव म एगो नंदू कका रहिस, ओकर घर म बरसों से संतान नइ रहिस। हर साल जुड़वास म उंकर घर म गीत गाथे

     गाथे आशीर्वाद म पूछे जाथे – "हे शीतला मइया, लईका देबे तोर किरपा ले।"

    ए साल म नंदू कका अउ ओकर घरवाली सुघ्घर ले पूजा करे। गीत म गहिर भाव रहिस –


    "धरके चढ़ावा पुरत भर तोर मंदिरवा म आथे, चना दार हरदी कईचा पान फूल दूबी नाईका"

    बिच्छू ले पीड़ित बिहरू बाई, जेकर गा म परत घाव बन गे रहिस, मइया के छांव म बइठ के बरस ले नइ होवत पीड़ा

     ले मुक्त होईस। उ कहिथे –


    "अंचरा के छईया आ तरी घोंडईया मारत दुःख ल बुरावन"``

    गीत म हर भाव म श्रद्धा, प्रकृति के संग समरसता, अउ मइया शीतला के किरपा के भाव झलकथे।

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    भरत जाटव के जम्मो जस गीत के लिंक नीचे 👇दे हावय  

    1. राम राम के बेरा मा 
    2. दाई दयाली ओ 
    3. नजरे नजर म झूल 
    4. कब तै अवतरबे दाई 
    5. बघवा बघवा 
    6. गरजे अउ गुमरे 
    7. नव दुर्गा नव रूप 
    8. दाई के दरश 
    9. डंका तोर