येहो पहाड़ा वाली | ममता देशमुख | छत्तीसगढ़ी देवी गीत

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गीत -येहो पहाड़ा वाली 

गायिका -ममता देशमुख 

गीतकार -

म्यूजिक कंपनी -ji seris 

वेबसाइट -www.cgjaslyrics.com 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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मुखड़ा 

येहो पहाड़ा वाली कईसे के तोला मनावव हो माँ-2 

उड़ान-कतको नाव तोर अउ कतको रूप हे 

 का तोरे जस ल गावव मै गावव मईया 

कईसे के तोला मनावव हो माँ

येहो पहाड़ा वाली कईसे के तोला मनावव हो माँ-2  

अंतरा -1 

शीतला चंडी बूढ़ी माई रूप धरे बम्लाई 

अंगे अगे म तैहा बिराजे आदि शक्ति महमाई 

तै करहिन बस्तरहीन दाई सम्बलपुर समलाई 

खैरागढ़ीन दन्ते श्री रतनपुहिन दाई

उड़ान -दसमाविद्या तिहि कहाये का 

तोला भेंट चघावव चघावव मईया

कईसे के तोला मनावव हो माँ

येहो पहाड़ा वाली कईसे के तोला मनावव हो माँ-2   

अंतरा -2  

काली खप्परवाली रूप दिखे बड़ भारी 

रकत नयन चुंदी छरियाये जिभिया हाथ पसारी  

नील बरन दिखे महमाई मुर्दा के हे सवारी  

बघवा खर्री कनिहा म पहिरे विष हर गर्ब धारी 

उड़ान -सरस्वती छिन्मस्तिका कहाये 

जुगजुग जस ल बखानव बखानव मईया 

कईसे के तोला मनावव हो माँ

येहो पहाड़ा वाली कईसे के तोला मनावव हो माँ-2   

अंतरा -3   

अपन मुड़ी ल हाथ म काटे रकत के धार बोहाये 

भूख मिटाये जय बिद्या के महतारी तै कहाये 

छोडसी दाई कमल म बईठे सोला कला दिखाए 

जोगी तपसी सेवा करके भाग अपन सहूराये 

उड़ान -त्रिपुर सुंदरी मन ल मोहे 

दाई के चरण मनावव मनावव मईया 

कईसे के तोला मनावव हो माँ

येहो पहाड़ा वाली कईसे के तोला मनावव हो माँ-2  

अंतरा -4    

भुनेश्वरी सरी जग म पुजाये हर दुर्गम के परानी 

सौ बछर अंकाल म दाई तिहि हा करे कल्याने 

दुखिया के दुःख म आशु बोहाये तन म राखे जाने 

त्रिपुर भैरवी नाव जनाये भगत के पाये माने 

उड़ान -धुआँ धुआँ म सरग तोपागे 

धुआँवती गोहरावव गोहरावव मईया 

कईसे के तोला मनावव हो माँ

येहो पहाड़ा वाली कईसे के तोला मनावव हो माँ-2 

अंतरा -5    

बगुला रूप डर बगुला देवी पीवरी पियर सुहाये 

मातंगी मनमोहनी मूरत कमला लछमी कहाये 

अनधन के भंडार भरइया आशा तिसना मिटाये 

किसम किसम के नव रूप ल अड़हा समझ नी पाये 

उड़ान -प्रजा पति ममता बर तरसे 

अर्जी अरज सोरियवव सोरियवव मईया 

कईसे के तोला मनावव हो माँ

येहो पहाड़ा वाली कईसे के तोला मनावव हो माँ-2 

गायिका परिचय ( ममता देशमुख)

ममता देशमुख छत्तीसगढ़ी भक्ति संगीत की एक जानी-मानी गायिका हवंय। उंकर आवाज म अपन गांव के माटी के खुशबू अऊ श्रद्धा के भावना झलकथे। ममता देशमुख के गायन म भक्ति, समर्पण अऊ सांस्कृतिक परंपरा के अद्भुत समागम मिलथे। इहां गीत “येहो पहाड़ा वाली” म उंकर भावनात्मक आवाज भक्त मन ला माँ के विभिन्न रूप म ले जाथे।

✨ गीत के बोल के अर्थ (Chhattisgarhi में ):

मुखड़ा -
"येहो पहाड़ा वाली कईसे के तोला मनावव हो माँ"
मइया पहाड़ा म बिराजे हवय, ओकर कई-कई नाव हे, रूप हे, तेखर सेती भक्त असमंजस म हे के कइसे ओकर मन जीतै।

अंतरा 1:
मइया शीतला, चंडी, बम्लाई, बस्तरहीन, समलाई, दंतेश्वरी जइसन रूप धर के अलग-अलग जगह म बिराजे हवय। दसमहाविद्या के रूप म मइया पहिचानाय।

अंतरा 2:
मइया के खप्परवाली, काली, नील वर्ण, मुर्दा के सवारी वाले भयंकर रूप ल दर्शाय गे हे। मइया सरस्वती अउ छिन्नमस्ता के रूप म घलो बिराजे हवय।

अंतरा 3:
मइया अपन मुड़ी ल काट के रकत के धार बहाथे अऊ भूख मिटाथे। तेन विद्या के महतारी आय। मइया योगिनी, तपसी ल मोहित करे वाली त्रिपुर सुंदरी आय।

अंतरा 4:
मइया भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी के रूप म दुखियारी के पीरा हरथे, अकाल म कल्याण करथे अऊ धुआंवती रूप म गोहराथे।

अंतरा 5:
बगुला देवी, मातंगी, कमला लक्ष्मी, मइया के अनेक रूप हवय। धन, समृद्धि, ममता सब ले भरपूर हवय, फेर भक्त मन ला ओकर रूप समझ म नई आथे।

छत्तीसगढ़ी कथा

“येहो पहाड़ा वाली कईसे के तोला मनावव हो माँ” गीत म एक भक्त के मन के चिंता झलकथे, जऊन अपन जीवन म दुख-तकलीफ ले जूझत हवय अऊ मइया के अनेक रूप म ओकर सहाय खोजत हवय।

गीत म बताय गे हे के मइया के अनेक रूप हे – कभू शीतला, कभू बम्लाई, कभू खप्परवाली, तो कभू लक्ष्मी अऊ कमला। ये सब रूप म एके शक्ति के दर्शन होथे – “आदि शक्ति महमाई।” भक्त असमंजस म हे – मइया ल मनाय बर का नाम लेवव, का रूप ल भजेव, काबर के सब रूप म एके शक्ति हे।

भक्त कहिथे –

"कतको नाव तोर, अउ कतको रूप हे – का तोर जस ल गावव मईया?"

भक्त अपन भक्ति म गहराई ले जुड़ गे हवय, जिहां ओकर भावना मां के अलग-अलग रूप ल निहारे लागथे।

बम्लाई म मइया बस्तर के रक्षक बने हे। दंतेश्वरी म शक्ति के अद्भुत स्वरूप हे। समलाई म समर्पण के मूर्ति, अउ खप्परवाली म क्रोध अऊ अन्याय के संहार करे वाली रूप दिखथे।

गीत के हर अंतरा म मइया के एक नई छवि ल उकेरा गे हे –

  • कभू मइया अपन सिर काट के अपन बालक मन ल दूध पियाथे।

  • कभू दुखिया के आंसू पोछ के ओकर पीरा हरथें।

  • कभू धुआं म लिपटी त्रिपुर भैरवी बनके, अंधकार म प्रकाश बनके प्रकट होथें।

  • कभू बगुला रूप धरके भक्त मन के रक्षा करथें।

ये गीत एक रहस्य, एक भक्ति, एक आत्मा के पुकार आय – जेकर सवाल हे, कईसे के तोला मनावव हो मइया?


ये गीत काबर सुनना जरूरी हे?

✅ मइया के दसों महाविद्या के दर्शन
✅ छत्तीसगढ़ी संस्कृति अऊ गाँव के देवी मन के नाव 
✅ भक्त के मन के सच्चा सवाल अउ गोहार 
✅ आत्मा ला झकझोर देहे वाला गीत ,संगीत,अउ गायन 

नोट - एक बार मन लगा के सुनव – तोर मन मइया  के भगति म डूब जाही।

👉 ममता देशमुख के आवाज म - येहो पहाड़ा वाली गीत पढ़े सुने बर यंहा क्लिक करव

https://www.youtube.com/watch?v=ijKYF8Lhd4g

माता रानी के अउ जस गीत निचे दे हावे क्लीक करव 

  1. आ जाबे दाई 
  2. अंगार मोती के 
  3. जुड़वास परब 
  4. पहुना बनके 
  5. झन जा तै बेटा 
  6. मइके जाये बर 

आ जाबे दाई मोर अंगना | ममता देशमुख जस गीत

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आ जाबे दाई मोर अंगना

गायिका - ममता देशमुख

रचनाकार - परमानंद कठोलिया 

वेबसाईट-www.cgjaslyrics.com

वेबसाईट ऑनर - के के पंचारे 

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मुखड़ा 

आ जाबे दाई मोर अंगना सुमर सुमर करव वंदना -2 

उड़ान - दे देना दाई मया दुलार आ --आ 

पारत हावव मै गोहार हो---हो

तरसत हे नैयना तरसत हे नैयना

 आ जाबे दाई मोर अंगना सुमर सुमर करव वंदना -2 

अंतरा -1 

बंदन बन्दव मातु चंडिका --आ आ

अउ बम्लाई महतारी वो 

सम्बलपुर समलाई ला बन्दव 

रायपुर के बंजारी ओवो 

उड़ान - दे देना दाई मया दुलार आ --आ 

पारत हावव मै गोहार हो---हो

तरसत हे नैयना तरसत हे नैयना

 आ जाबे दाई मोर अंगना सुमर सुमर करव वंदना -2

अंतरा -2 

बंदन बन्दव ठाकुर देवता --आ आ

तोर लगुरवा भाई वो 

कोनो किसम अल्हण झन आये 

लागव तोर दुहाई वो 

उड़ान - दे देना दाई मया दुलार आ --आ 

पारत हावव मै गोहार हो---हो

तरसत हे नैयना तरसत हे नैयना

 आ जाबे दाई मोर अंगना सुमर सुमर करव वंदना -2

अंतरा -3 

तोर भरोसा मोला हे माता --आ आ

तोर छोड़ कहा जावव वो 

अचरी दार पुरादे प्रेम के 

महिमा जस तोर गावव 

उड़ान - दे देना दाई मया दुलार आ--आ 

पारत हावव मै गोहार हो---हो

तरसत हे नैयना तरसत हे नैयना

                आ जाबे दाई मोर अंगना सुमर सुमर करव वंदना -2


 गायिका के परिचय – ममता देशमुख 

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ममता देशमुख का जन्म स्थान तिरगा दुर्ग मे बताएं गेहे।छत्तीसगढ़ के लोक गीत जसभक्ति लोकगीत रामायण गीत के प्रसिद्ध गायिका हावय। ओमन के आवाज ममता, भक्ति अउ लोकभावना के गजब संगम दिखथे। सबले पहली एल्बम तै आशु बोहाय दाई रीहिस जेहा 2008 में रिकॉर्ड होय रीहिस आउ ओ एल्बम के दो गाना बहुत फेमस होय रीहिस तै आशु बोहाये दाई आऊ दूसरा नजरे नजर म झूल।

उंकर गाये गीत मन CG मं बहुतेच प्रसिद्ध हावय – खास करके देवी जस गीत, लोकगीत ,आउ पंथी गीत, रामायण गीत।

गांव-गांव में जब नवरात्री के समय आथे तब दुर्गा पंडाल मन म ओकर गीत हा सुनाई देथे 

यूट्यूब मं लाखों दर्शक मन के मन मा जगह बनाइस ह


आजाबे दाई मोर अंगना जइसन गीत मं ममता देशमुख जी के आवाज, भक्ति अउ पीरा ला ओत-प्रोत कर देथे, जऊन सुन के मन भावुक हो जाथे 

( गीत के मतलब अनुवाद)

ए गीत मं दाई ला बिनती करे जाथे के – "हे दाई, मोर अंगना मं आ जा, मया-दुलार दे, अपन दरसन दे।"

गांव-गांव के देवी मन के नाम लेके भक्त अपन विश्वास अउ भरोसा जतावत हे। "तरसत हे नैना" सुनके मन भर जाथे।

🪔 कब गाए जाथे ए गीत?

नवरात्रि के जस म

देवी जगराता म 

मनोकामना बर दाई ला गोहराय बर

▶️YouTube🔴यूट्यूब मं देखे बर लिंक👇

https://youtu.be/PUOdPlbUfBU?si=fh__auF2hblJBI4J

गीत म का हे तेला बताये गेहे 

ए गीत एकदम भक्ति मं भींजे रहिस हे, अउ ममता देशमुख के आवाज मा जे अपनापन हे, वो हर   मा झलकथे।

छत्तीसगढ़ के लोक संगीत ला जिन्दा रखे म अइसन कलाकार मन के बहुत बड़ योगदान हे।

छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध जस गायिका ममता देशमुख के अउ जस गीत लिरिक्स पढ़े बर निचे क्लीक करव 



बम हे बम्लाई के दुवार | ममता देशमुख | बम्लेश्वरी माता जस गीत | CG Bhakti Jas Lyrics

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गीत - बम हे बम्लाई के दुवार 

गायिका -ममता देशमुख 

लेखक -परमानंद पुरबिया 

म्यूजिक कंपनी -ji Seris 

वेबसाइट -www.cgjaslyrics.com 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे  

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मुखड़ा 

बम हे बम्लाई के दुवार वो दुवार वो दुवार वो बम्लेश्वरी दाई 

बईठे हस डोंगरी पहाड़ बम्लेश्वरी दाई बईठे हस डोंगरी पहाड़

उड़ान -वो बम्लेश्वरी दाई-2 

अंतरा -1 

पहाड़ फोड़ के उपजे मईया जंगल रद्दा बनाये 

ऊपर पहाड़ म बइठे सुघ्घर आसन तैहा लगाये 

उड़ान -लाल ध्वजा लहरे तोर दुवार वो दुवार वो दुवार वो बम्लेश्वरी दाई 

बईठे हस डोंगरी पहाड़ बम्लेश्वरी दाई बईठे हस डोंगरी पहाड़

 बम हे बम्लाई के दुवार वो दुवार वो दुवार वो बम्लेश्वरी दाई 

अंतरा -2 

मैहर गड़हीन तै महामाई शारदा नाव ले छाये 

डोंगरगढ़ के पर्वत म तै बम्लाई बन के सुहाये 

उड़ान-नर नारी आये तोर दरबार वो दरबार वो दरबार वो बम्लेश्वरी दाई 

बईठे हस डोंगरी पहाड़ बम्लेश्वरी दाई बईठे हस डोंगरी पहाड़

 बम हे बम्लाई के दुवार हो दुवार हो दुवार हो बम्लेश्वरी दाई 

अंतरा -3 

तोर बुलउवा सुन के माता दरसन बर सब आये 

जेहर हर तोर दुवारी म आये भर के झोली जाये 

उड़ान-सबके भरथस तैहा भण्डार वो भण्डार वो भण्डार बम्लेश्वरी दाई 

बईठे हस डोंगरी पहाड़ बम्लेश्वरी दाई बईठे हस डोंगरी पहाड़

 बम हे बम्लाई के दुवार हो दुवार हो दुवार हो बम्लेश्वरी दाई 

बम्लेश्वरी दाई बईठे हस डोंगरी पहाड़

बम्लेश्वरी दाई बईठे हस डोंगरी पहाड़

बम्लेश्वरी दाई बईठे हस डोंगरी पहाड़

बम हे बम्लाई के दुवार – डोंगरगढ़ वाली माई के चमत्कारी कहानी (छत्तीसगढ़ी म)

गीत - बम हे बम्लाई के दुवार
गायिका - ममता देशमुख
गीतकार - परमानंद पुरबिया
संगीत कंपनी - Ji Seris
वेबसाइट - www.cgjaslyrics.com
वेबसाइट ऑनर - के के पंचारे


🌄 डोंगरी म बसे दाई बम्लेश्वरी – एक श्रद्धा के पहाड़

डोंगरगढ़ के डोंगरी म बिराजे वाली दाई बम्लेश्वरी ह आज लाखों मनखे मन के आस के केंद्र बन गे हे। ओ दुवार म जऊन मन जाथें, ओमन अपन मन के मनौती पूरा कराके अइसन विश्वास ल लौटथें जइसे स्वर्ग ले आइस होवंय। ममता देशमुख के गाया गीत "बम हे बम्लाई के दुवार" म येही आस्था के सजीव चित्रण करे गे हे।


🔱 मुखड़ा – माई के दुवार ले गूंजथे बम-बम

"बम हे बम्लाई के दुवार, बईठे हस डोंगरी पहाड़…"
ए पंक्ति सुनतेच, एक श्रद्धा से भराय दिल म डोंगरगढ़ के मंदिर के झलक उभर जथे। माई बम्लेश्वरी डोंगरी ऊपर अपन सिंहासन म बिराजे हावे, ओकरे दुवार म हजारों झन रोज बम-बम करत दर्शन करे बर आथें। डोंगरी के हर पथ, हर सीढ़ी, हर मोड़ म भक्तिभाव के बूंद परथे।


🌿 पहाड़ फोड़ के उपजी माई – जंगल म चमत्कार

गीत के पहिला अंतरा म कहे गे हे:
"पहाड़ फोड़ के उपजे मईया, जंगल रद्दा बनाये…"

कहानी ए रहिस के पहिले डोंगरगढ़ जंगल ले घिराय रहिस। ओ डोंगर म एक समय भगवान शिव के तपोभूमि रहिस। ओ जंगल म भारी चमत्कार घलाव होवत रहिस, जिहां एक दिन भयंकर गरजाहट म माई प्रकट होइस। पहाड़ ल फोड़ के माई निकलीस अउ जंगल म रद्दा बनगे। जेखर बाद लोगन मन वो दुवार तक पहिलीच बेर दर्शन करे बर पहुँच पाइस।

ए बात म कई पौराणिक मान्यता हावय – जइसे बम्लाई मतलब बम-बम करे के देवी, जऊन शिवजी के नाम के संग जोड़ी गे हवय।


🏞 मैहर के शारदा ले डोंगरगढ़ के बम्लाई तक

गीत के दूसर अंतरा म कहे गे हे:
"मैहर गड़हीन तै महामाई, शारदा नाव ले छाये…
डोंगरगढ़ के पर्वत म तै बम्लाई बन के सुहाये…"

इहाँ एक गजब के बात सामने आथे – शारदा माई जऊन मैहर म पूजा जाथें, ओही शक्ति स्वरूप डोंगरगढ़ म बम्लाई बन के आ गे। ओह पर्वत म बइठ के अपन भव्य स्वरूप म भक्त मन ला दर्शन देवत हें।

छत्तीसगढ़ अउ मध्यप्रदेश म माई के ए स्वरूप ल लेके भारी आस्था रहिस अउ आजो रहिस। शारदा माई के स्वरूप डोंगरगढ़ म बम्लाई नाम ले विराज मान हावंय – इही बात गीत म भावपूर्ण तरीक़ा ले गाथे।


🚩 तोर बुलउवा सुन के माता – सब झन पधारे तोर दुवार

तीसरा अंतरा म भक्त के भाव ल बखान करे गे हे:
"तोर बुलउवा सुन के माता, दरसन बर सब आये…"
"जेहर हर तोर दुवारी म आये, भर के झोली जाये…"

जब माई बम्लेश्वरी बुलाथे, तब माने ओ बुलाहट म असर रहिथे। भीड़ चाहे कतको हो, पर माई के बुलाहट म चलके भक्त मन डोंगरी चढ़ जाथें। ओ मन अपन मइया ल देख के झोली पसारथें, आँखी म पानी ले भर जाथें, मनौती करथें अउ जब लहू-लहू हो जाथें, त झोली भर के लौटथें।

डोंगरगढ़ के नवरात्र म ए दृश्य देखके मन रऊँज जाथे – जिहां छोटे ले बड़, गरीब ले अमीर, नर-नारी, बूढ़ा-बच्चा – सब माई ल पूजे बर आतें।


🧡 माई बम्लेश्वरी – हर मन के संकट हरै वाली

कई भक्त मन के कहानी हे – जेन मन के जीवन म भारी संकट आय रहिस, लेकिन माई बम्लेश्वरी के दर्शन करके, मनौती धर के, अइसन चमत्कार घलाव होइस के लोगन मन फेर जिनगी म मुस्कान देख पाइस।

कोनो संतान बर आथे, कोनो बीमारी ले छुटकारा बर, कोनो रोजगार बर, तो कोनो पढ़ई बर। सब माई के चरण म विश्वास ले झुकथे अउ माई घलो अपन भण्डार खोल देवत हें।

"सबके भरथस तैहा भण्डार, बईठे हस डोंगरी पहाड़"


🛕 डोंगरगढ़ – छत्तीसगढ़ के वैष्णो देवी

डोंगरगढ़ म स्थित बम्लेश्वरी मंदिर ह 1600 सीढ़ी ऊपर स्थित हे। ओ मंदिर म रात दिन पूजा पाठ होथे। विशेष करके चैत्र अउ कुआंर नवरात्र म एहाँ लाखों श्रद्धालु आथें। बम्लेश्वरी दाई के दर्शन करके मन शांत हो जाथे।

ए मंदिर म जयकारा गूंजथे –
“जय बम्लेश्वरी माई, डोंगरगढ़ वाली माई के जयकारा होवय।”

मेला के समय सड़कों म जसगीत, भजन, डोल-बाजा अउ भक्तिरस के गंगा बहे लगथे।


🪔 गीत म समाए भक्ति रस – परमानंद के लेखनी अउ ममता के स्वर

गीत के गीतकार परमानंद पुरबिया जी के लेखनी म ओ श्रद्धा झलकथे जऊन माई बम्लेश्वरी के दरबार म देखे जाथे। अउ गायिका ममता देशमुख के आवाज म जऊन गहराई हे, ओ सीधे माई के चरण म भक्त ला ल ले जाथे।

ए गीत छत्तीसगढ़ के हरेक घर म गूंजे वाला जसगीत बन गे हे, जऊन Spotify, YouTube अउ लोकल मंच म भारी लोकप्रियता पा चुके हे।


📢 निष्कर्ष – बम हे बम्लाई के दुवार, हर छत्तीसगढ़िया के दिल म बसे माई

डोंगरगढ़ माई बम्लेश्वरी ह आज घलो भक्त मन के पीरा हरथे, संकट हरथे, अउ मनोकामना पूरा करथे। "बम हे बम्लाई के दुवार" गीत म जऊन भावना हे, ओ सीधे आस्था के मंदिर म ल जाथे। ए गीत के हर पंक्ति म, माई के महिमा, भक्त के विश्वास अउ छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक पहचान झलकथे।

     👉 आगे पढ़व – अउ देवी जस गीत के कथा 👇

    1. 1. जगमग जोत जले – दास मनोहर के लेखनी म महतारी के महिमा
    2. 2. काहे के दियना दाई – दुकालू यादव के स्वर म करुण पुकार
    3. 3. दिया बरगे हो – कांतिकार्तिक यादव के स्वर म भक्तिरस
    4. 4. तोला दुर्गा कहव की माँ काली – शर्मीला विश्वास के जसगीत
    5. 5. माई के भुवन बड़ा भीड़ – भक्ति म डुबो देहे वाला जस

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Kare seuk Man Arti//करें सेउक मन आरती



करे सेउक मन आरती  


गीत -करे सेउक मन आरती 

गायिका -ममता देशमुख 

गीतकार- परमानंद पुरबिया 

वेबसाइट -CGJASLYRICS 

वेबसाइट ऑनर -केके पंचारे 


वंदना 

अगर अतर फूल पान सुपाड़ी नारियल भेला चघावव

 

करव आरती पहाड़ा वाली के चरनन माथ नवावव 

गीत 

सरर सरर चले पुरवाही पवन हा चवर डोलय 


करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके 


उड़ान -सरर सरर चले पुरवाही 


पवन हा चवर डोलाय 


करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके 


करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके


 

अंतरा -1 


यहॉ रतन सिंहासन बईठे माई मंद मंद मुस्काये 


सोलह सिंगार करे महामाई अतर गुलाल उड़ाये 


उड़ान -करन फूल केकती केवरा के

 

करन फूल केकती केवरा के 


सखियन हार सजाये 


करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके 


करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके


उड़ान -सरर सरर चले पुरवाही


सरर सरर चले पुरवाही 


पवन हा चवर डोलय

 

करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके

 

करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके 

 

अंतरा -2  


इंद्राणी ब्रम्हाणी सवित्री लक्मी काली कहाये 


चौसट जोगनी पाठ दबाये देवता अस्तुति गाये 


उड़ान -चाँद सुरुज मईया के आहारी 


चाँद सुरुज मईया के आहारी 


जगमग जोत जलाये 


करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके 


करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके

 

उड़ान -सरर सरर चले पुरवाही


सरर सरर चले पुरवाही 


पवन हा चवर डोलय 


करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके

 

करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके 


अंतरा -3   


भैरव पिशाच नाचे भुवन में मृदंग धुन लगाये 


छुनछुन छुनछुन पैजन बाजे रुमझुम पाँव मढ़ाये 


उड़ान -तैतीस कोटि देवता मिलके

  

तैतीस कोटि देवता मिलके

  

जयजयकार मनाये 


करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके 


करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके


उड़ान -सरर सरर चले पुरवाही


सरर सरर चले पुरवाही 


पवन हा चवर डोलय 


करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके

 

करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके 


अंतरा -4    


जाटा दाह पहाड़ावाली महिमा पार तुम्हारे

 

खाली झोली भरके जाथे आथे तोर  दुवारे

 

उड़ान -ममता हा तोरे पवरी परत हे

 

ममता हा तोरे पवरी परत हे 


सरधा सुमन चढ़ाये 


करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके

 

करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके


उड़ान -सरर सरर चले पुरवाही


सरर सरर चले पुरवाही 


पवन हा चवर डोलय 


करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके

 

करे सेउक मन आरती दिया थारी ला सजाके 

TORE AARTI UTARAN//तोरे आरती उतारन

 तोरे आरती उतारन जग म हो अम्बे मईया





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गीत -तोरे आरती उतारन जग मा 

गायिका -ममता देशमुख 

म्यूजिक लेबल -केके  CASETE

वेबसाइट ओनर -केके पंचारे  

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तोरे आरती उतारन जग म हो अम्बे मईया


तोरे आरती उतारन जग म हो अम्बे मईया 

 तोरे आरती उतारन जग म हो अम्बे मईया 

उड़ान -झुमरत हावय लाल लगुरवा हो ---- 

झुमरत हावय लाल लगुरवा

नाचत हे आरती लेवईया हो 

अहो अहो नरैनी तोरे आरती उतारन जग म हो अम्बे मईया

तोरे आरती उतारन जग म हो अम्बे मईया 

अन्तरा -1   

धरम दीया धरम के बाती सत ल तेल बनाये हो मईया सत ल तेल बनाये 

पंच रतन चोला के थाली तोरेच बर सजाये हो मईया तोरेच बर सजाये

उड़ान -तोर आशीष बर जम्मो तरगे -----हो

तोर आशीष बर जम्मो तरगे

तरगे ये भारत भुईया हो  

अहो अहो नरैनी तोरे आरती उतारन जग म हो अम्बे मईया

तोरे आरती उतारन जग म हो अम्बे मईया 

अन्तरा -2    

जय जननी जगजोत जँवारा जगतारन जगदम्बा हो मईया जगतारन जगदम्बा

छाहित रहिथे लाल लगुरवा तोर किरपा ले अम्बा हो मईया तोर किरपा ले अम्बा 

उड़ान -डंडा शरण समरव जगदम्बा  -----हो

डंडा शरण समरव जगदम्बा

परव मै तोरेच पइया हो 

अहो अहो नरैनी तोरे आरती उतारन जग म हो अम्बे मईया

तोरे आरती उतारन जग म हो अम्बे मईया 

अन्तरा -3    

पूजे पुजेरी देवी देवता मै पूजा नई जानव हो माता मै पूजा नई जानव 

करम कमइया छत्तीसगढिया बासी के भोग लगाये हो मईया बासी के भोग लगाये 

उड़ान -सुमर सुमर के झुमरत हावे   -----हो

सुमर सुमर के झुमरत हावे

परमानंद कटोलिया हो 

अहो अहो नरैनी तोरे आरती उतारन जग म हो अम्बे मईया

तोरे आरती उतारन जग म हो अम्बे मईया 

Tai Aashu Bohaye


तै आशु बोहाये वो


तै आशु बोहाये वो

गीत  - तै आशु बोहाये ओ 
गायक -ममता देशमुख 
गीतकार -परमानन्द पुरबिया
म्यूजिक  लेबल- ji  series 
वेबसाइट owner -के के पंचारे 

तै आशु बोहाये वो  तै आशु बोहाये ना 

नवदिन दिन रतिहा दाई आशु बोहाये ना

तै आशु बोहाये वो  तै आशु बोहाये ना

 नवदिन दिन रतिहा दाई आशु बोहाये ना

(1) 

तहिया जुग  म दुर्गम दांनव ब्रम्हा के वरदानी गा 

चारो वेद ल बोरे बैरी गरबे गंज गुमानी गा 

धरम धरा ले बूड़गे सुखागे नदी नरवा के पानी गा 

अन पानी बिन चिहुर परगे कलपे सगरो परानी गा 

उड़ान -देवता ल सताये ओ  धर्मी ल रोवाये न 

देवता ल सताये ओ  धर्मी ल रोवाये न 

नवदिन दिन रतिहा दाई आशु बोहाये ना

तै आशु बोहाये वो  तै आशु बोहाये ना 

नवदिन दिन रतिहा दाई आशु बोहाये ना

(2 ) 

शुंभ निशुंभ महिषा सुर दानव रक्तबीज सघारे ओ 

दुर्गम दानव ले तोर बिन दाई हमला कोन उबारे ओ 

अर्जी म अइसे आदि अम्बिका परमे श्री सिधारे ओ 

दग दग ले दमके महामाया नव नव नयन उचारे ओ 

उड़ान -दाई ल गोहारे ओ माता ल मनाये ना 

दाई ल गोहारे ओ माता ल मनाये ना 

नवदिन दिन रतिहा दाई आशु बोहाये ना

तै आशु बोहाये वो  तै आशु बोहाये ना

 नवदिन दिन रतिहा दाई आशु बोहाये ना

(3) 

माता के आशु आशु म नदी नरवा भर जाये गा 

जीवन पाये सगरो परानी सुर नर नाग हिताये गा 

माथ नवाये महामाया ल विपदा ल बताये गा 

अभय पाये देवता धामी अपन अपन डीही जाये गा 

उड़ान -आशु ल बोहाये ओ जग ल हरियाये ना 

आशु ल बोहाये ओ जग ल हरियाये ना 

नवदिन दिन रतिहा दाई आशु बोहाये ना

तै आशु बोहाये वो  तै आशु बोहाये ना

नवदिन दिन रतिहा दाई आशु बोहाये ना

(4) 

देवता मन के लाज रखे बर किरपा करे किरपानी गा 

अपन तेज के नयन ले घेरे सुरपुर दिन दयाली गा 

बैरी बर उमियाये सहूये माता शेरा वाली गा 

अगम अंग ले प्रगटे तुरते दसविद्या विकराली गा 

उड़ान -बघवा में आये ओ तै लाज बचाले ना 

बघवा में आये ओ तै लाज बचाले ना

नवदिन दिन रतिहा दाई आशु बोहाये ना

तै आशु बोहाये वो  तै आशु बोहाये ना

 नवदिन दिन रतिहा दाई आशु बोहाये ना

(5 ) 

माथ म चन्दर मुकुट सोहे सिरजे शक्ति भारी गा 

भूतवा मन के भरे भस थोड़े क्षीण म उन अवतारी  गा 

तिरसुल म दुर्गम ल मारे महामाया महतारी गा 

श्री दुर्गा के नाव उचारे तभे सकल संसारी गा 

उड़ान -ममता जस गाये ओ परमा ल मनाये ना 

ममता जस गाये ओ परमा ल मनाये ना 

नवदिन दिन रतिहा दाई आशु बोहाये ना

तै आशु बोहाये वो  तै आशु बोहाये ना

 नवदिन दिन रतिहा दाई आशु बोहाये ना