नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी | जस गीत, अर्थ, महत्व और कहानी
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गीत-नीम डारा तोला भाए हो
गायक-खिलेश यादव
म्यूज़िक कंपनी-cg मोर धरोहर
वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2
उड़ान- तोला बढ़ भाए... हो मां
नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2
अंतरा -1
बछड़ भर में तोरे परब दुएं बेर आए हो
जम्मों नर नारी तोर देवाला सजाए हो
उड़ान - गज मोती चौक पुराए..
नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2
अंतरा -2
आदि शक्ति जगदम्बा के परब जुड़वास हे
जम्मों जीव जन के मन म एक आस हे
उड़ान - शीतला दुआरी सबों जाय
नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2
अंतरा -3
चना दार कच्चा हरदी तोला भेंट चघाये
जम्मों जीव जन के मन म एक आस हे
उड़ान - शीतला दुआरी सबों जाय
नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2
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गीत के अर्थ (Meaning)
🔸 नीम डारा के महत्व
ए गीत म गायक कहिथे कि शीतला माता ल नीम के डारा (डाली) बहुत पसंद हे। नीम ला छत्तीसगढ़ म पवित्र अउ रोग नाशक माने जाथे।
🔸 परब अउ पूजा के वर्णन
गीत म बताय गे हे कि साल म दू बेर माता के परब आवथे। ए बेरा गांव के जम्मो मनखे मिलके माता के मंदिर सजाथें अउ भक्ति भाव ले पूजा करथें।
🔸 भेंट अउ आस्था
चना, दार अउ कच्चा हल्दी जइसने प्रसाद चढ़ाके माता ल खुश करे जाथे अउ सब झन अपन सुख-शांति बर माता ले मन्नत मांगथें।
गीत के महत्व (Importance)
🔸 जुड़वास परब के खास गीत
ए गीत खास करके जुड़वास परब म गाये जाथे, जिहां माता के पूजा बड़े श्रद्धा ले होथे।
🔸 स्वास्थ्य अउ सुरक्षा के प्रतीक
शीतला माता ला बीमारी ले बचाव करे वाली देवी माने जाथे, खास करके चेचक जइसने रोग ले।
🔸 संस्कृति अउ परंपरा के पहचान
ए गीत गांव के एकता, भक्ति अउ परंपरा ल जिन्दा रखथे।
नीम डारा के मया अउ शीतला माई के किरपा
एक गांव रहिस – सोनपुर। उहां के मनखे बहुत सिधा-सादा अउ मेहनती रहिन। गांव के बीच म एक बड़े नीम के पेड़ रहिस, जिहां हर साल शीतला माता के पूजा होवत रहिस।
गांव म रामसाय नाम के एक गरीब किसान रहिस। ओकर घर म गरीबी जरूर रहिस, फेर ओकर मन म माता बर अटूट भक्ति रहिस।
एक बखत गांव म भारी बीमारी फइल गे। लइका मन बुखार ले तपे लगिन। गांव म डर के माहौल बन गे। तब बुजुर्ग मन कहिन – “शीतला माई के सच्चा पूजा करे के समय आ गे हवय।”
रामसाय अपन जिम्मेदारी समझिस। वो बिहान-सुबह उठके नीम के डारा ले आइस अउ मंदिर ल सजाय लगिस। धीरे-धीरे गांव के अउ मनखे मन घलो जुड़ गइन।
सब झन मिलके चौक पुराइन, गज-मोती ले सजाइन अउ जस गीत गाइन – “नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी…”
रामसाय अपन घर ले चना, दार अउ कच्चा हल्दी ले आइस अउ माता के चरण म चढ़ाइस। वो रो-रो के कहिस – “मइया, हमर गांव ल बचा लेवव।”
रात के बेरा ठंडी हवा चले लगिस। धीरे-धीरे बीमारी कम होइस। लइका मन ठीक होगे। गांव वाले मन समझ गइन – ये सब शीतला माता के किरपा आय।
ओ दिन ले गांव म हर साल जुड़वास परब बड़े धूमधाम ले मनाय जाथे। नीम के पूजा होथे अउ माता के जस गीत गूंजथे।
रामसाय के जीवन म घलो बदलाव आइस। ओकर घर म सुख-समृद्धि आ गे। वो हमेशा कहिथे –
“सच्चा भक्ति करहू, मइया सब दुख हर लेथे।”



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