नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी | जस गीत, अर्थ, महत्व और कहानी

✦✦ नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी✦✦

लिम डारा तोला भाये हो शीतला भवानी । स्वर -खिलेश यादव । माँ चंडीका ग्रुप नया पारा दुर्ग। Cg Jas 2024

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गीत-नीम डारा तोला भाए हो 

गायक-खिलेश यादव

म्यूज़िक कंपनी-cg मोर धरोहर

वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे

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मुखड़ा 

नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2

उड़ान- तोला बढ़ भाए... हो मां 

 नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2

अंतरा -1

बछड़ भर में तोरे परब दुएं  बेर आए हो

जम्मों नर नारी तोर देवाला सजाए हो

उड़ान - गज मोती चौक पुराए..

नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2

अंतरा -2

आदि शक्ति जगदम्बा के परब जुड़वास हे

जम्मों जीव जन के मन म एक आस हे

उड़ान - शीतला दुआरी सबों जाय 

नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2

अंतरा -3

चना दार कच्चा हरदी तोला भेंट चघाये 

जम्मों जीव जन के मन म एक आस हे

उड़ान - शीतला दुआरी सबों जाय 

नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी -2

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झूपत आबे

तोरे दरस बर 

पलना गड़े मज़ेदार 

माई के दरस बर 

तर जाहि चोला हर

देवी के सिंगारे 

डोंगरी पहाड़

देवी पार्वती हा

चले आए महामाया

हनुमान जनम ले

भोला जोतय नागर मां

गीत के अर्थ (Meaning)

🔸  नीम डारा के महत्व

गीत म गायक कहिथे कि शीतला माता ल नीम के डारा (डाली) बहुत पसंद हे। नीम ला छत्तीसगढ़ म पवित्र अउ रोग नाशक माने जाथे।

🔸 परब अउ पूजा के वर्णन

गीत म बताय गे हे कि साल म दू बेर माता के परब आवथे। ए बेरा गांव के जम्मो मनखे मिलके माता के मंदिर सजाथें अउ भक्ति भाव ले पूजा करथें।

🔸 भेंट अउ आस्था

चना, दार अउ कच्चा हल्दी जइसने प्रसाद चढ़ाके माता ल खुश करे जाथे अउ सब झन अपन सुख-शांति बर माता ले मन्नत मांगथें।

गीत के महत्व (Importance)

🔸  जुड़वास परब के खास गीत

ए गीत खास करके जुड़वास परब म गाये जाथे, जिहां माता के पूजा बड़े श्रद्धा ले होथे।

🔸  स्वास्थ्य अउ सुरक्षा के प्रतीक

शीतला माता ला बीमारी ले बचाव करे वाली देवी माने जाथे, खास करके चेचक जइसने रोग ले।

🔸  संस्कृति अउ परंपरा के पहचान

ए गीत गांव के एकता, भक्ति अउ परंपरा ल जिन्दा रखथे।

नीम डारा के मया अउ शीतला माई के किरपा

एक गांव रहिस – सोनपुर। उहां के मनखे बहुत सिधा-सादा अउ मेहनती रहिन। गांव के बीच म एक बड़े नीम के पेड़ रहिस, जिहां हर साल शीतला माता के पूजा होवत रहिस।

गांव म रामसाय नाम के एक गरीब किसान रहिस। ओकर घर म गरीबी जरूर रहिस, फेर ओकर मन म माता बर अटूट भक्ति रहिस।

एक बखत गांव म भारी बीमारी फइल गे। लइका मन बुखार ले तपे लगिन। गांव म डर के माहौल बन गे। तब बुजुर्ग मन कहिन – “शीतला माई के सच्चा पूजा करे के समय आ गे हवय।”

रामसाय अपन जिम्मेदारी समझिस। वो बिहान-सुबह उठके नीम के डारा ले आइस अउ मंदिर ल सजाय लगिस। धीरे-धीरे गांव के अउ मनखे मन घलो जुड़ गइन।

सब झन मिलके चौक पुराइन, गज-मोती ले सजाइन अउ जस गीत गाइन – “नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी…”

रामसाय अपन घर ले चना, दार अउ कच्चा हल्दी ले आइस अउ माता के चरण म चढ़ाइस। वो रो-रो के कहिस – “मइया, हमर गांव ल बचा लेवव।”

रात के बेरा ठंडी हवा चले लगिस। धीरे-धीरे बीमारी कम होइस। लइका मन ठीक होगे। गांव वाले मन समझ गइन – ये सब शीतला माता के किरपा आय।

ओ दिन ले गांव म हर साल जुड़वास परब बड़े धूमधाम ले मनाय जाथे। नीम के पूजा होथे अउ माता के जस गीत गूंजथे।

रामसाय के जीवन म घलो बदलाव आइस। ओकर घर म सुख-समृद्धि आ गे। वो हमेशा कहिथे –

“सच्चा भक्ति करहू, मइया सब दुख हर लेथे।”

 






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