जोत जले हे नवराती/cgjaslyrics/Pachra jas lyrics

⋆˚✿˖°⋆˚✿˖°जोत जले हे नवरात्री। जस लिरिक्स छत्तीसगढ़ी ⋆˚✿˖°⋆˚✿


जोत जले हे नवराती

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गीत-जोत जले हे नवराती

गायक-

गीतकार-

म्यूज़िक लेबल-पचरा जस 

वेबसाईट ऑनर-के के पंचारे 

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मुखड़ा 

 जोत जले हे नवराति मईया के भुवन माँ जोत जले हो माँ 

(1)

काकर हावे वो मईया नव लाख गईया -2 

कौन हा हावे चरवाहा

मईया के भुवन माँ जोत जले हो माँ

 जोत जले हे नवराति मईया के भुवन माँ  जोत जले हो माँ          

(3)

बूढ़ी माई के हावे वो मईया नव लाख गईया -2 

लंगूरे हा हावे चरवाहा

मईया के भुवन माँ जोत जले हो माँ

 जोत जले हे नवराति मईया के भुवन माँ जोत जले हो माँ        

(3)

कौन रंग गईया हो मईया कौन रंग बछड़ा -2 

कौन रंग हावे चरवाहा

मईया के भुवन माँ जोत जले हो माँ

 जोत जले हे नवराति मईया के भुवन माँ जोत जले हो माँ         

(4)

सादा रंग गईया हो मईया लाल रंग बछड़ा -2 

सांवला रंग हावे चरवाहा

मईया के भुवन माँ जोत जले हो माँ

 जोत जले हे नवराति मईया के भुवन माँ  जोत जले हो माँ        

(5)

कोन बन  गईया ला चराये चरवाहा -2 

कोन बन पानी ला पियाये 

मईया के भुवन माँ जोत जले हो माँ

 जोत जले हे नवराति मईया के भुवन माँ  जोत जले हो माँ            

(6)

कदलीबन  बन  गईया ला चराये चरवाहा -2 

गंगा घाट पानी ला पियाये 

मईया के भुवन माँ जोत जले हो माँ

 जोत जले हे नवराति मईया के भुवन माँ जोत जले हो माँ        

(7)

पांच भगत मिल तोरे जस गाये  -2 

जय जय बोलथे तुम्हारे 

मईया के भुवन माँ जोत जले हो माँ 

 जोत जले हे नवराति मईया के भुवन माँ  जोत जले हो माँ

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गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी म)

(1) “काकर हावे वो मईया नव लाख गईया, कौन हा हावे चरवाहा”

एमा भक्त पूछत हे – हे मईया! ए नव लाख गाय के मालिक कोन हावे? अऊ कोन ओखर चरवाहा (रखवाला) हे?

ए प्रतीक हावे कि माता सब जीव-जंतु के मालिक हावे अऊ ओ खुदे सबके रक्षा करथे।

(2) “बूढ़ी माई के हावे वो मईया नव लाख गईया, लंगूरे हा हावे चरवाहा”

एमा बताय जात हे कि ए नव लाख गाय बूढ़ी माई (देवी रूप) के हावे अऊ लंगूर (हनुमान जी के प्रतीक) ओकर रखवाला हे।

माने – माता के सेवा म भक्त अऊ देवता घलो लगे रहिथें।

(3) “कौन रंग गईया, कौन रंग बछड़ा, कौन रंग हावे चरवाहा”

ए प्रश्न जीवन के विविधता ला बताथे – हर जीव अलग रंग, अलग रूप, फेर सब म एके शक्ति बसथे – माता के शक्ति।

(4) “सादा रंग गईया, लाल रंग बछड़ा, सांवला रंग हावे चरवाहा”

एमा सादा (शुद्धता), लाल (शक्ति), अऊ सांवला (भक्ति अऊ समर्पण) के प्रतीक बताय गे हे।

(5-6) “कदलीबन बन गईया ला चराये, गंगा घाट पानी ला पियाये”

कदलीबन मतलब पवित्र स्थान अऊ गंगा घाट पवित्रता के प्रतीक हे।

माता अपन भक्त मन ला सही मार्ग म ले जाके पवित्र जीवन जीना सिखाथे।

(7) “पांच भगत मिल तोरे जस गाये”

एमा पाँच तत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) के प्रतीक म भक्त मन माता के गुणगान करत हें।

🌺 नवरात्रि म जोत जलाने के महत्व

नवरात्रि हिन्दू धर्म के पवित्र त्योहार हे जेनला पूरा भारत म धूमधाम ले मनाय जाथे। खासकर Chhattisgarh म जसगीत अऊ माता भक्ति के अलग ही परंपरा हे।

Navratri म 9 दिन तक माता के आराधना, व्रत, अऊ जोत जलाय जाथे।

जोत के मतलब – ज्ञान, शक्ति अऊ विश्वास।

माता के रूप जइसे – दुर्गा, काली अऊ लक्ष्मी – सब रूप जीवन के अलग-अलग शक्ति के प्रतीक हें।

📖  कहानी

“नवराति के जोत”

छत्तीसगढ़ के एक छोटे गाँव म रामसाय नाम के किसान रहत रहिस। ओ हर साल नवरात्रि म माता के जोत जलावत रहिस। ओकर घर गरीब रहिस, फेर मन बहुत अमीर रहिस।

ए साल गाँव म भारी सुखा पड़ गे। फसल खराब होगे। गाँव के मनखे निराश होगे। फेर रामसाय कहिस –

“जतका अंधियार होही, उतके तेज जोत जलाही।”

नवरात्रि के पहिली रात, ओ अपन माटी के छोटकन दिया म तेल डारिस अऊ माता के भुवन म जोत जला दिस। ओ गावत रहिस –

“जोत जले हे नवराति मईया के भुवन माँ…”

गाँव के लइका मन पूछिन –

“काकर हावे वो मईया नव लाख गईया?”

रामसाय हँस के कहिस –

“ए नव लाख गईया हमन सब जीव हवन। माता हमन सबके मालिक आय।”

दूसर दिन ओ बताइस –

“लंगूरे हा हावे चरवाहा – माने भक्ति अऊ सेवा। जेन मन माता के सेवा करथे, वो खुदे रखवाला बन जाथे।”

धीरे-धीरे गाँव के अउ मनखे घलो जोत जलाय लगिन। पूरा गाँव म उजियार छा गे।

नवमी के दिन अचानक आसमान म बदरा घिर गे। पानी बरसना शुरू होगे। सुखा खत्म होगे। गाँव वाले कहिन –

“माता के जोत के चमत्कार आय।”

रामसाय कहिस –

“चमत्कार जोत म नई, हमर विश्वास म हे।”

ओ दिन ले गाँव म हर साल बड़े धूमधाम ले नवरात्रि मनाय जाथे। पाँच भगत मिलके जसगीत गाथें, अऊ पूरा गाँव एकजुट होके माता के जयकारा लगाथे।

        


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