तोला गुड़ गुड़ के | छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स | राज मानिकपुरी | CGJasLyrics

तोला गुड़ गुड़ के – छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स

छत्तीसगढ़ के माटी म माता रानी के भक्ति अउ जस गायन के परंपरा बहुते पुराना अउ अनमोल हे। एही भक्ति परंपरा ला आगे बढ़ावत गायक राज मानिकपुरी के आवाज म प्रस्तुत जस गीत “तोला गुड़ गुड़ के” माता जगदम्बा के महिमा अउ माटी ले माता के सुंदर प्रतिमा बनाय के भाव ला प्रकट करथे।
ए गीत म माटी, नदिया, पानी अउ श्रृंगार के माध्यम ले माता रानी के स्वरूप के मनमोहक वर्णन करे गे हे। जय माँ महामाया महिमा अपार जस झांकी परिवार बेन्द्रिकाला के भक्ति भाव ए गीत ला अउ खास बनाथे।

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गीत -तोला गुड़ गुड़ के
गायक -राज मानिकपुरी 
जय माँ महामाया महिमा अपार जस झांकी परिवार बेन्द्रिकाला
यूट्यूब -एनटीआर साहू 
वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे  

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“तोला गुड़ गुड़ के” एक सुंदर छत्तीसगढ़ी भक्ति जस गीत आय। ए गीत म माता रानी ला माटी के बेटी के रूप म बनाय के कल्पना करे गे हे।
गीत के मुखड़ा म नदिया तीर के पिवरा माटी ले माता के स्वरूप बनाय के बात कहे गे हे। अऊ अंतरा म माता जगजननी के महिमा, लाली लुगरा, हरियर पोलखा, माटी के बिंदी, कजरा, गजरा अउ बाली के सुंदर श्रृंगार के वर्णन मिलथे।
ए गीत छत्तीसगढ़ के गांव-गांव म माता रानी के भक्ति अउ जस गायन के सांस्कृतिक भावना ला दर्शाथे।

तोला गुड़ गुड़ के – छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स

मुखड़ा 
तोला गुड़ गुड़ के तोला जुड़ जुड़ के माटी के बेटी बनाव वो-2 
उड़ान -नदिया तीर के पिवरा माटी -2 
सुघ्घर मैंहा --------लाव 
 तोला गुड़ गुड़ के तोला जुड़ जुड़ के माटी के बेटी बनाव वो-2 
अंतरा -1 
यहो जगजननी माँ जगदम्बा वो ,महिमा तोर महान माँ 
 सगरो जिनिस चरा चर बगरे,अटल अजनम कुंवार माँ 
उड़ान -करसी मा सुघ्घर पानी लाके -2 
माटी ला मैंहा-------- मताव
 तोला गुड़ गुड़ के तोला जुड़ जुड़ के माटी के बेटी बनाव वो-2 
अंतरा -2 
यहो लाली लुगरा हरियर पोलखा,माटी के बिंदी सुहाय माँ 
आँखी के कजरा खोपा के गजरा,कान में बाली झुलाय माँ 
उड़ान -राज हां तोरे जस ला गाये  -2 
बेन्द्री मोर गांव -------- माँ 
 तोला गुड़ गुड़ के तोला जुड़ जुड़ के माटी के बेटी बनाव वो -2 

गीत के परिचय

ए गीत के भावार्थ म माता रानी के प्रति भक्त के अगाध प्रेम अउ समर्पण झलकथे।
गीत म भक्त कहिथे कि नदिया तीर के पिवरा माटी लाके, ओला गूंद-गूंद के माता रानी के सुंदर स्वरूप बनाहूं। माटी के माध्यम ले जगदम्बा के प्रतिमा बनाय के कल्पना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन अउ माता सेवा के परंपरा ले जुड़े हे।
पहिली अंतरा म माता जगजननी के अपार महिमा के बखान करे गे हे। माता के शक्ति अउ संसार म व्याप्त स्वरूप ला नमन करे गे हे।
दूसरी अंतरा म माता के श्रृंगार के वर्णन हे। लाली लुगरा, हरियर पोलखा, माटी के बिंदी, आंखी म कजरा, खोपा म गजरा अउ कान म बाली पहिरे माता के सुंदर रूप के कल्पना करे गे हे।
गीत के माध्यम ले भक्त अपन गांव बेन्द्री म माता के जस गाके अपन श्रद्धा प्रकट करथे।
छत्तीसगढ़ म जस गीत माता रानी के भक्ति के एक महत्वपूर्ण लोक परंपरा आय। गांव-गांव म जस मंडली मन ढोलक, झांझ, मंजीरा अउ अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्र के संग माता के जस गाथें।
नवरात्रि, जंवारा, माता सेवा अउ धार्मिक आयोजन म जस गायन के विशेष महत्व रहिथे।
“तोला गुड़ गुड़ के” गीत म माटी ले माता के स्वरूप बनाय के भाव छत्तीसगढ़ के ग्रामीण संस्कृति के सुंदर झलक दिखाथे।
माटी हमर जीवन के आधार आय। एही माटी ले माता के प्रतिमा बनाय के कल्पना भक्ति, प्रकृति अउ लोकसंस्कृति के आपसी संबंध ला बताथे।

 गीत के विशेषता अउ महत्व

ए छत्तीसगढ़ी जस गीत के कुछ खास विशेषता ये हवंय:

  1. माता जगदम्बा के महिमा के सुंदर वर्णन।

  2. नदिया तीर के पिवरा माटी के सांस्कृतिक महत्व।

  3. माटी ले माता के प्रतिमा बनाय के भक्तिमय कल्पना।

  4. छत्तीसगढ़ी बोली के सरल अउ मधुर प्रयोग।

  5. माता रानी के पारंपरिक श्रृंगार के वर्णन।

  6. गांव बेन्द्री के धार्मिक पहचान।

  7. जस गायन के लोक परंपरा के संरक्षण।

  8. भक्त अउ माता के बीच श्रद्धा के संबंध।

ए गीत छत्तीसगढ़ी जस गायन के माध्यम ले हमर लोकसंस्कृति अउ माता भक्ति के भाव ला प्रस्तुत करथे।

 गायक के परिचय

राज मानिकपुरी – छत्तीसगढ़ी जस गीत गायक

राज मानिकपुरी छत्तीसगढ़ी जस गायन के माध्यम ले माता रानी के भक्ति भाव ला प्रस्तुत करे हवंय। “तोला गुड़ गुड़ के” गीत म उनके आवाज के माध्यम ले माटी ले माता के स्वरूप बनाय के कल्पना अउ माता के श्रृंगार के सुंदर वर्णन सुनइया मन तक पहुंचथे।

ए गीत जय माँ महामाया महिमा अपार जस झांकी परिवार बेन्द्रिकाला के भक्ति परंपरा ले जुड़े हे।

 गीत  कथा

माटी म बसे माता रानी के महिमा – एक भक्त के अनोखा भाव

छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव बेन्द्रिकाला म माता रानी के भक्ति के सुंदर परंपरा रहिस। गांव के लोगन मन माता महामाया ला अपन गांव के रक्षक अउ परिवार के सुख-शांति के आधार मानत रहिन। गांव म जब नवरात्रि के समय आवय, त चारों मुड़ा भक्ति के माहौल बन जाय। घर-घर म जोत जलय, मंदिर म घंटी बाजय अउ जस मंडली मन माता के महिमा गावत रहिन।

एक दिन गांव के कुछ भक्त मन माता रानी के प्रतिमा बनाय के विचार करिन। सबो झन मिलके सोचिन कि ए बछर माता के स्वरूप अपन गांव के माटी ले बनाय जाही। गांव के एक भक्त नदिया तीर गिस। ओहा नदिया के किनारे पिवरा माटी देखिस। माटी ला अपन हाथ म धरके ओहा सोचे लगिस कि ए माटी हमर जीवन के आधार आय। एही माटी म हमर खेती होथे, एही माटी हमर घर बनाथे अउ एही माटी म हमर जिनगी के हर खुशी जुड़े हे।

भक्त मन मिलके नदिया तीर ले माटी लानिन। फेर सबो झन मिलके माटी ला गूंदे लगिन। कोनो पानी लावत रहिस, कोनो माटी तैयार करत रहिस, त कोनो माता के स्वरूप बनाय म सहायता करत रहिस। सबके मन म एके भाव रहिस कि माता रानी के सुंदर प्रतिमा बने।

जइसे-जइसे माटी के स्वरूप आकार लेवत गिस, भक्त मन के उत्साह बढ़त गिस। ओमन माता के चेहरा बनाइन, आंखी बनाइन अउ सुंदर श्रृंगार के तैयारी करिन।

एक भक्तिन कहिस कि माता ला लाली लुगरा पहिनाबो, हरियर पोलखा सजाबो अउ माथा म माटी के बिंदी लगाबो। दूसर भक्तिन कहिस कि माता के आंखी म कजरा अउ खोपा म गजरा सजही, त माता के रूप अउ सुंदर दिखही।

धीरे-धीरे माता के प्रतिमा तैयार होगे। पूरा गांव के लोगन मन माता के दर्शन करे बर पहुंचिन। जस मंडली के सदस्य मन ढोलक अउ झांझ के संग माता के जस गाना शुरू करिन।

गायक राज मानिकपुरी के आवाज म जब “तोला गुड़ गुड़ के तोला जुड़ जुड़ के माटी के बेटी बनाव वो” के भाव गूंजिस, त भक्त मन के मन म भक्ति के भावना अउ गहरा होगे।

सबो झन समझिन कि माता रानी के महिमा केवल सोना-चांदी के श्रृंगार म नइ, बल्कि सच्चा श्रद्धा अउ निर्मल मन म बसे रहिथे।

गांव के छोटे-छोटे लइका मन घलो माता के प्रतिमा देखके खुश होवत रहिन। बुजुर्ग मन कहिन कि हमर परंपरा अउ संस्कृति ला अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हमर जिम्मेदारी आय।

ओ दिन बेन्द्रिकाला गांव म माता रानी के जस चारों मुड़ा गूंजत रहिस। सबो भक्त मन एक साथ माता के जयकारा लगाइन।

ए कथा के सीख ए आय कि भक्ति म दिखावा ले जादा महत्व सच्चा मन, सेवा अउ श्रद्धा के होथे। हमर गांव के माटी, हमर बोली अउ हमर लोकगीत हमर संस्कृति के असली पहचान आय।

अक्सर पूछे जाथे (FAQ)

Q1. तोला गुड़ गुड़ के जस गीत के गायक कोन हे?

ए गीत के गायक राज मानिकपुरी हवंय।

Q2. तोला गुड़ गुड़ के गीत कऊन शैली के आय?

ए एक छत्तीसगढ़ी जस गीत आय।

Q3. ए गीत म कऊन देवी के महिमा गाये गे हे?

ए गीत म जगजननी माता जगदम्बा के महिमा गाये गे हे।

Q4. तोला गुड़ गुड़ के गीत म कऊन माटी के वर्णन हे?

ए गीत म नदिया तीर के पिवरा माटी के वर्णन हे।

Q5. ए गीत म माता के कइसन श्रृंगार के वर्णन हे?

ए गीत म लाली लुगरा, हरियर पोलखा, माटी के बिंदी, कजरा, गजरा अउ बाली के वर्णन हे।

Q6. ए गीत कऊन यूट्यूब चैनल ले जुड़े हे?

ए गीत के यूट्यूब जानकारी एनटीआर साहू के नाम ले प्राप्त हे।

Q7. तोला गुड़ गुड़ के गीत के वेबसाइट कोन हे?

ए गीत के लिरिक्स CGJasLyrics वेबसाइट म पढ़े जा सकथे।

Q8. ए गीत कऊन गांव के जस झांकी परिवार ले जुड़े हे?

जय माँ महामाया महिमा अपार जस झांकी परिवार बेन्द्रिकाला ले जुड़े हे।

माता रानी के भक्तिमय जस गीत 

१.डोंगरी पहाड़ 

२.देवी के सिंगारे बर 

३.काली चरण जुग हां 

४. चले चले माँ दुर्गा 

५.देवी के भुवन माँ 

CGJasLyrics के बारे म

CGJasLyrics – छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स के अपन मंच

CGJasLyrics एक अइसन वेबसाइट आय, जिहां आप मन ला छत्तीसगढ़ी जस गीत, पचरा जस, आरती जस गीत, विसर्जन जस गीत अउ पारंपरिक भक्ति गीत के लिरिक्स पढ़े बर मिलथे।

हमर प्रयास हे कि छत्तीसगढ़ी लोकगीत, माता रानी के जस अउ हमर लोकसंस्कृति के अनमोल धरोहर ला डिजिटल माध्यम ले सबो मनखे तक पहुंचाय जा सके।

वेबसाइट: www.cgjaslyrics.com

वेबसाइट ऑनर: के के पंचारे

 YouTube चैनल के बारे म

ए गीत के यूट्यूब जानकारी एनटीआर साहू के नाम ले प्राप्त हे। माता रानी के जस, छत्तीसगढ़ी भक्ति गीत अउ पारंपरिक गायन सुने बर संबंधित यूट्यूब चैनल ला जरूर देखव।

कॉपीराइट अउ स्रोत जानकारी

गीत के नाम: तोला गुड़ गुड़ के
गायक: राज मानिकपुरी
जस झांकी परिवार: जय माँ महामाया महिमा अपार जस झांकी परिवार बेन्द्रिकाला
यूट्यूब स्रोत: एनटीआर साहू
लिरिक्स वेबसाइट: CGJasLyrics
वेबसाइट ऑनर: के के पंचारे


आगे परब नवरात के दाई – भूषण यादव के छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स | CG Jas Lyrics

आगे परब नवरात के दाई – छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स 

आगे परब नवरात के दाई छत्तीसगढ़ी जस गीत, गायक भूषण यादव, माता दुर्गा नवरात्रि भक्ति गीत पोस्टर।

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गीत -आगे परब नवरात के दाई

गायक -भूषण यादव 

यूट्यूब -keshav video world

वेबसाइट -cgjaslyrics 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे  

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मया म भरे माता रानी के नवरात्रि जस गीत

छत्तीसगढ़ के माटी म माता रानी के भक्ति के अलग पहिचान हे। नवरात्रि के पावन परब आवत ही गांव-गांव म धरम ध्वजा लहराथे, मंदिर म जोत जलथे अउ माता सेवा के गीत गूंजे लगथे। येही भक्ति अउ श्रद्धा के भाव ला अपन सुरीला आवाज म सजाय हे गायक भूषण यादव ह।

आगे परब नवरात के दाई गीत म नवरात्रि के तैयारी, माता के मूर्ति निर्माण, विधि-विधान ले पूजा-पाठ अउ भक्त मन के श्रद्धा के सुंदर वर्णन करे गे हे।

अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी/गायक: जीतू साहू /जस मंडली -श्री दाई के दुलरवा नवरत्न जस जस झांकी मंडली


अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी – पूरा छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स

अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स

छोटा  परिचय

“अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी” एक भावपूर्ण छत्तीसगढ़ी जस गीत आय, जेमां महाभारत के द्रौपदी चीरहरण के प्रसंग ला बहुत मार्मिक ढंग ले गाये गे हवय। गीत म द्रौपदी अपन मान-सम्मान बचाय बर भगवान श्रीकृष्ण ला गोहार लगाथे। भगवान कृष्ण अपन भक्त के पुकार सुनके ओकर लाज बचाथें। ये गीत भक्ति, विश्वास अउ भगवान के शरण म जाए के संदेश देथे।

गीत की जानकारी

गीत के नाम: अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी
गीत के प्रकार: छत्तीसगढ़ी जस गीत
प्रसंग: द्रौपदी चीरहरण
गायक: जीतू साहू 
गीतकार: भुनेश्वर प्रसाद साहू
जस मंडली -श्री दाई के दुलरवा नवरत्न जस जस झांकी मंडली  
YouTube चैनल: cglyrics collection 
वेबसाइट ऑनर: के के पंचारे
वेबसाइट: CGJASLYRICS

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मुखड़ा 

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

उड़ान - बैरी खीचत तन के लुगरा ,होवत हावे तन भर उघरा -2 

दुहासासन दुराचारी --

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

//1//

महाभारत के किस्सा हरे ,सुनहु चेत लगाये  गा !

माया पति हे ,माया करे, मोहनी महल बनाये गा !!

पंडवा मन के बाटा मा परे ,सुघ्घर यज्ञ रचाये गा !

आये दुर्योधन यज्ञ के झरे ,देखे बर हे सधाये गा !!

उड़ान -महल देखे गा दुर्योधन ,महल हावे सुघ्घर अकन -2 

देख मोहाये भारी 

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

//2//

दुर्योधन आये महल भीतर ,माया ला नई जाने गा  !

पानी जनाये भुईया बरोबर ,रेगे सीना ताने गा  !!

भोरहा होंगे गिरगे जहुअर ,दुर्योधन बुध माने गा  !

लकर लउहा उठे उहि कर ,झपागे अलहन आने गा !!

उड़ान -देख परिस हे दुरपति महरानी ,ठठा करे हासे उहि खानी -2 

दुरपति उहि पारी --

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

//3//

भीम दुरपति उहि बेरा ,हासी उड़ाये भारी गा !

अंधरा के बेटा हावस अंधरा ,कहे दुरपति नारी गा  !!

हिरदे होंगे कतरा कतरा ,सहे अपमाने सारी गा  !

दुर्योधन आगी कस अंगरा  ,ललियाये अये दुवारी गा  !!

उड़ान -दुर्योधन बदला बर ठाने ,हासे हावे मोला मनमाने  -2 

पांच पति के नारी  --

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

//4//

पासा खेले बर जोखा जमाथे ,सकुनी ममा हर भारी गा !

पांडवमन बर न्योता पाठाथे  ,आये पांडव उहि पारी गा  !!

धर्मराज बइठे अगुवाथे ,पासा खेले उहि दारी गा !

पासा कपट के सकुनी ढुलाते  ,जाहुअर करे होशियारी गा  !!

उड़ान -दाव लगाए धर्मराजे  ,फसगे जाल म  पांडव आजे -2 

होंगे करम कारी   --

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी

//5//

दुरपति ला घिरलाये ,सभा बीच दुशासन गा !

भारी हसी मोर उड़त हे ,बदला लेबो गनगन गा  !!

दुशासन लाये चूंदियाए  हासे बैरी दुर्योधन गा  !

भारी दुरपति रोये गाये ,चीख चीख कल्पन गा  !!

उड़ान -दास बनगे पांडव हमर ,अब का करहि पांडव हर   -2 

गरजे अहंकारी   --

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

करनी मा हावे लजाके दपके वीर के पासा गा 

 //6//

पांडव मन मुड़ी गाड़ियाके ,बइठे देख तमासा गा  !

करनी मा हावे लजाके दपके वीर के पासा गा !!

दुरपति रोये गोहराके ,टूटे ओकर आशा गा 

रूठे हावे किरिया खाके ,धरती का आकाशा गा 

उड़ान -दुर्योधन कहे खींचो लुगरा  ,करो निवस्तर निच्चट उघरा -2 

हासे हावे भारी  --

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी  

//7//

दुसासन अचरा धर झपते  ,खींचे लुगरा सरसर  गा  !

दुरपति रोये कहा सपटे ,बैरी हासे सभा भर गा !!

लाज बचा अब लुगरा लपटे ,मुरलीधर मनोहर गा !

सभा भीतर सब हावे कपटे  ,हितवा नई हे मोर बर गा !!

उड़ान -सुने गोहार तुरते आये  ,छुपके हावे लुगरा हावे पुराये  -2 

गोवर्धन गिरधारी   --

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

//8//

 दुसासन गिरे थर खाथे ,बांचे दुरपति लाजे गा !

वस्तारा अवतार मा आये ,साजे भगत के काजे गा !!

दुराचार ला बंद कराये ,धृतराज हरआजे  गा !

हरे राज ला पांडव पाये ,सतके झंडा साजे गा !!

उड़ान -नवरत्न मंडली जस गाये ,भुनेश्वर घलो माथ नवाये -2 

शरणन हावे तुम्हारी   --

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

अब लाज रखो अब लाज रखो ,गोवर्धन गिरधारी 

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गीत के अर्थ

ये गीत के मूल भाव भगवान श्रीकृष्ण ऊपर पूरा भरोसा रखे के हवय। द्रौपदी जब अपन जीवन के सबसे कठिन घड़ी म पहुंचथे, तब सभा म ओकर मदद करे वाला कोनो नई रहिथे। पांडव मन घलो जुआ के बंधन म बंधाय रहिथें। तब द्रौपदी भगवान कृष्ण ला गोहार लगाथे।

“अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी” के मतलब आय कि हे भगवान कृष्ण, अब मोर मान-सम्मान के रक्षा करव। भक्त के विश्वास ये रहिथे कि भगवान अपन सच्चा भक्त के पुकार ला जरूर सुनथें।

गीत म अहंकार, कपट, अन्याय अउ अधर्म के परिणाम घलो देखाय गे हवय। अंत म सत्य अउ धर्म के विजय होथे।

छत्तीसगढ़ी परंपरा

छत्तीसगढ़ म जस गीत मन भक्ति अउ लोक संस्कृति के महत्वपूर्ण हिस्सा आय। गांव-गांव म जस मंडली मन देवी-देवता, रामायण, महाभारत अउ धार्मिक प्रसंग ऊपर आधारित गीत गाथें।

जस गीत के खास बात ये आय कि कठिन धार्मिक कथा ला सरल छत्तीसगढ़ी बोली म गाके आम मनखे तक पहुंचाय जाथे। रात के जस, नवरात्रि, धार्मिक आयोजन, मंडली कार्यक्रम अउ गांव के भक्ति माहौल म अइसने गीत मन सुनाय बर मिलथे।

“अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी” घलो महाभारत के कथा ला छत्तीसगढ़ी लोकभाषा के भाव म प्रस्तुत करे वाला भक्ति गीत आय।

गीत की विशेषता और महत्व

  1. गीत महाभारत के प्रसिद्ध प्रसंग ऊपर आधारित हवय।
  2. छत्तीसगढ़ी लोकभाषा म धार्मिक कथा ला सरल ढंग ले बताथे।
  3. भगवान कृष्ण के प्रति भक्त के विश्वास दिखाथे।
  4. गीत म अधर्म अउ अहंकार के विरोध के संदेश मिलथे।
  5. द्रौपदी के पीड़ा ला भावपूर्ण ढंग ले प्रस्तुत करे गे हवय।
  6. जस मंडली म सामूहिक रूप ले गाये बर उपयुक्त हवय।
  7. गीत छत्तीसगढ़ी जस परंपरा ला मजबूत बनाय म मददगार हवय।
  8. गीत के मुखड़ा जल्दी याद हो जाथे।
  9. महाभारत के कथा ला लोकगीत के माध्यम ले नई पीढ़ी तक पहुंचाय म मदद करथे।
  10. गीत के मूल संदेश सत्य, धर्म अउ भगवान के शरण ऊपर आधारित हवय।

कथा – द्रौपदी के लाज अउ भगवान कृष्ण

महाभारत के कथा म पांडव मन इंद्रप्रस्थ म अपन भव्य महल बनवाथें। माया के अद्भुत कला ले बने ये महल ला देखके बहुत झन अचंभित हो जाथें। एक बेरा दुर्योधन घलो इंद्रप्रस्थ पहुंचथे। महल के बनावट अइसन रहिथे कि जिहां पानी दिखथे उहाँ जमीन रहिथे अउ जिहां जमीन दिखथे उहाँ पानी रहिथे। माया के खेल ला नई समझ पाय के दुर्योधन कई बेर भ्रमित हो जाथे।दुर्योधन के मन म पांडव मन बर पहिली ले ईर्ष्या रहिथे। महल के घटना ओकर मन के जलन ला अउ बढ़ा देथे। द्रौपदी के हंसी के प्रसंग घलो ओकर मन म बदला के भावना पैदा करथे। बाद म दुर्योधन अपन मामा शकुनि के मदद ले पांडव मन ला जुआ खेले बर बुलवाथे।शकुनि पासा खेले म माहिर रहिथे अउ कपट के सहारा ले पासा खेलथे। धर्मराज युधिष्ठिर एक-एक करके अपन धन-दौलत, राज्य अउ आखिर म अपन भाई मन तक ला हार जाथे। स्थिति अइसन बनथे कि द्रौपदी ला घलो दांव म लगाय देथे।दुर्योधन के आदेश म दुशासन द्रौपदी ला सभा म घसीट के लाथे। सभा म द्रौपदी अपन मान-सम्मान के रक्षा बर बड़े-बड़े वीर मन ला सवाल करथे, फेर कोनो ओकर सहायता बर आगे नई आथे।जब दुशासन द्रौपदी के वस्त्र खींचे लगथे, तब द्रौपदी अपन सब सहारा छोड़के भगवान श्रीकृष्ण ला पुकारथे। ओकर मन म पूरा विश्वास रहिथे कि भगवान अपन भक्त के लाज जरूर रखहीं।द्रौपदी के पुकार सुनके भगवान श्रीकृष्ण ओकर लाज बचाथें। दुशासन वस्त्र खींचत रहिथे, फेर वस्त्र खत्म नई होय। अंत म दुशासन थक जाथे। द्रौपदी के मान-सम्मान बच जाथे।

ये कथा हमन ला सिखाथे कि अहंकार, अन्याय अउ अधर्म चाहे कुछ समय बर शक्तिशाली दिखय, फेर आखिर म सत्य अउ धर्म के विजय होथे। भगवान ऊपर सच्चा भरोसा रखे वाला भक्त कठिन समय म घलो अकेला नइ होय।

इही भाव ला छत्तीसगढ़ी जस गीत “अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी” म बहुत मार्मिक ढंग ले प्रस्तुत करे गे हवय।

अक्सर पूछे जाथे

1. “अब लाज रखो गोवर्धन गिरधारी” गीत के मुख्य विषय का आय?
ये गीत के मुख्य विषय द्रौपदी के लाज बचाना अउ भगवान श्रीकृष्ण ऊपर भक्त के अटूट भरोसा आय।
2. ये गीत कोन किसम के गीत आय?
ये एक छत्तीसगढ़ी जस गीत अउ भक्ति गीत आय।
3. गीत म कोन से महाभारत के प्रसंग ला बताय गे हवय?
गीत म दुर्योधन के ईर्ष्या, शकुनि के कपट वाला पासा, पांडव मन के हार अउ द्रौपदी के चीरहरण के प्रसंग ला बताय गे हवय।
4. द्रौपदी भगवान कृष्ण ला काबर पुकारिस?
सभा म अपन मान-सम्मान के रक्षा बर जब ओकर कोनो सहारा नई रहिस, तब द्रौपदी भगवान कृष्ण ला पूरा विश्वास के साथ गोहार लगाइस।
5. “गोवर्धन गिरधारी” कहिके भगवान कृष्ण ला काबर पुकारे गे हवय?
गोवर्धन गिरधारी भगवान श्रीकृष्ण के एक प्रसिद्ध नाम आय। श्रीकृष्ण गोवर्धन पर्वत ला धारण करे रहिन,

तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी | हरीश साहू /शीतला माता के छत्तीसगढ़ी जस गीत

तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी – छत्तीसगढ़ी जस

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गीत -तरिया पार के नीम छाव मा

गायक -हरीश साहू

जस मंडली-जय अम्बिका मानस एवं जस जगराता परिवार कारा (उरला) 

गीतकार -धनराज निर्मलकर 

गीत लेबल -शीतला जुड़वास 

यूट्यूब - सुमित फोटो स्टूडियो 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

वेबसाइट -cgjaslyrics 

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मुखड़ा 

तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी -2 

उड़ान - डीहिडोंगर के देवी कहाये -हो वो हो 

डीहिडोंगर के देवी कहाये

गांव देवी महरानी 

तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी

अंतरा -1 

हो जगजननी जगतरण के ,महिमा हावे नियारी गा  

दाई दयाली जगहितकारी ,शक्ति के अवतारी गा 

चण्डमुण्ड ला मारके देवी,चामुंडा नाव धारी गा 

दुर्गम मारे दुर्गा कहाये ,हे भगवती महतारी गा 

उड़ान - ये जग ला शीतला करईया हो वो हो

ये जग ला शीतला करईया

शीतला माता रानी 

रिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी

अंतरा -2 

शीतल शीतला मोर दाई ,ग्राम देवी कहाये गा 

गांव के डीहीवारिन देवी ,गांव गांव पुजाये गा 

शीतला दाई के मंदिर हां ,माता देवाला कहाये गा 

शीतला के इक्कीस रूप ,इक्कीस रूप धराये गा 

उड़ान - हावे इक्कीस बहिनी के हो वो हो 

हावे इक्कीस बहिनी 

अइसे नाव निसानी 

तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी

अंतरा -3 

बड़े दाई बूढ़ी माता  ,बाटय दाना चिहारी गा 

झलझला अगिया अउ ,मोती अंगार धारी गा  

बेमची लाइयाँ खुरा चपका ,उपके  अपारी गा 

जुड़ीताप सेंदरी माता ,काल स्वरूप धारी गा 

उड़ान - गला मा होथे गलवा माता हो--वो --हो  

गला मा होथे गलवा माता

शीतला के परमाने 

तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी

अंतरा -4 

इक्कीस बहिनी मान पावे ,शीतला के रूप कहाये गा  

सादा पीताम्बरी हां ,ये जग ला बचाये गा  

नाव अनेक शीतला के ,आषाढ़ मा परब आये गा  

माता पहुचनी जुड़वास मा ,गांव बस्ती सकलाये गा 

उड़ान - माता देवाला मेला भराये  हो--वो --हो  -2

माता देवाला मेला भराये

लागे दिन सुहानी 

तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी

अंतरा -5 

जेकर जइसे पूर्ति हे ,वइसे वोहा मनाथे गा  

कांचा पक्का जेवन अउ ,मेवा मिठाई चघाये गा  

अपन भगत के सेवा मा, शीतला दाई ज़ुराथे गा 

शीतल होंगे शीतला दाई ,मया दया बरसाथे गा 

उड़ान - धनराज लिखे जुडवासा हो--वो --हो  

धनराज लिखे जुडवासा

गुना गुण के कहानी 

तरिया पार के नीम छाव मा बइठे शीतला भवानी

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गीत के अर्थ

ये गीत के मूल भाव शीतला माता के भक्ति अउ गांव के लोक आस्था ऊपर आधारित हे। गीत मं माता ला जगजननी, जगत के पालनहारिन, शक्ति के अवतार अउ गांव के रखवारिन कहे गे हे।

“तरिया पार के नीम छांव” माता के शांत अउ शीतल रूप के प्रतीक आय। नीम ला गांव-गंवई मं पवित्र अउ उपयोगी पेड़ माने जाथे, एखर से शीतला माता के शीतलता अउ लोकविश्वास के संबंध अउ गहिरा हो जाथे।

गीत मं माता के अलग-अलग रूप जइसे शीतला, चामुंडा, दुर्गा, बूढ़ी माता, गलवा माता अउ इक्कीस बहिनी के उल्लेख मिलथे। ये सब रूप माता के अलग-अलग शक्ति अउ लोकपरंपरा के प्रतीक मानें जाथें।

गीत के आखिरी हिस्सा मं भक्त मन के श्रद्धा के वर्णन हे। मनखे अपन सामर्थ्य अउ मनोकामना के अनुसार माता ला भोजन, मेवा-मिठाई अउ प्रसाद चढ़ाथे। बदला मं माता अपन भक्त ऊपर मया, दया अउ आशीर्वाद बरसाथें—यही ये गीत के मुख्य संदेश आय।

गीत के विशेषता अउ महत्व

  1. ये गीत मं शीतला माता के लोक रूप के सुंदर वर्णन मिलथे।
  2. गीत मं डीही-डोंगर, गांव देवी अउ ग्राम-देवाला के लोकविश्वास झलकथे।
  3. इक्कीस बहिनी के मान्यता ला गीत के माध्यम ले सामने लाय गे हे।
  4. नीम के छांव अउ शीतलता के माध्यम ले माता के शांत स्वरूप ला बताय गे हे।
  5. गीत मं छत्तीसगढ़ के गांव-गंवई के धार्मिक परंपरा के झलक मिलथे।
  6. जुड़वासा अउ माता देवाला के मेला जइसन लोक आयोजन के उल्लेख हे।
  7. सरल छत्तीसगढ़ी बोली के कारण गीत ला गांव के आम मनखे आसानी ले समझ सकथे।
  8. ये गीत मं भक्ति के संग लोकसंस्कृति अउ परंपरा दुनों के समावेश हे।
  9. माता के अनेक रूप के वर्णन गीत ला धार्मिक रूप ले महत्वपूर्ण बनाथे।
  10. जस गीत के माध्यम ले आने वाली पीढ़ी तक लोक आस्था अउ परंपरा पहुंचाय जा सकथे।

गीतकार धनराज के जानकारी

“तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी” के गीतकार के रूप मं गीत के अंतिम उड़ान मं धनराज के नाम उल्लेखित हे। धनराज के रचना मं गांव-गंवई के बोली, देवी-देवता के लोकमान्यता अउ छत्तीसगढ़ी धार्मिक परंपरा के प्रभाव देखे बर मिलथे। ये गीत मं शीतला माता के अलग-अलग रूप अउ इक्कीस बहिनी के उल्लेख करके स्थानीय धार्मिक विश्वास ला जस गीत के रूप मं प्रस्तुत करे गे हे।

गायक हरीश साहू के बारे मं

हरीश साहू छत्तीसगढ़ी भक्ति गीत अउ जस गीत के गायकी ले जुड़े कलाकार आय। “तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी” जस गीत मं उनके आवाज के माध्यम ले शीतला भवानी के महिमा अउ भक्ति के भाव ला प्रस्तुत करे गे हे।

उनके गायकी मं छत्तीसगढ़ी बोली के मिठास, देवी भक्ति अउ लोकपरंपरा के भाव ला महत्व मिले हे। शीतला माता के महिमा गावत ये गीत गांव-गंवई के धार्मिक आस्था अउ लोकसंस्कृति संग जुड़त दिखाई देथे।

शीतला भवानी अउ जुड़वासा के कथा

छत्तीसगढ़ के गांव-गंवई मं शीतला दाई ला बहुत मान-सम्मान के साथ पूजा जाथे। लोकमान्यता मं शीतला माता ला गांव के रखवारिन देवी के रूप मं देखे जाथे। गांव के सुख-शांति, परिवार के मंगल अउ संकट ले बचाव बर मनखे माता के पूजा-पाठ करथें। एखर से शीतला दाई के पूजा केवल मंदिर तक सीमित नइ रहिस, बल्कि गांव के लोकजीवन अउ परंपरा के एक हिस्सा बन गे हे।

पुराना समय मं गांव के आसपास नीम के पेड़ के विशेष महत्व रहिस। नीम के छांव, ओकर पवित्रता अउ शीतलता ला माता के स्वरूप संग जोड़े गे। एही लोकभावना ले गीत मं “तरिया पार के नीम छांव मा बइठे शीतला भवानी” जइसन सुंदर पंक्ति बने हे। इहां तरिया गांव के प्राकृतिक जीवन के प्रतीक आय अउ नीम के छांव माता के शीतल मया के प्रतीक बन जाथे।

शीतला माता के लोकपरंपरा मं गांव के अलग-अलग देवी रूप के मान्यता घलो मिलथे। कोनो गांव मं दाई ला डीहीवारिन कहे जाथे, कोनो जगह बूढ़ी माता के रूप मं पूजा जाथे, त कोनो जगह शीतला दाई के संग अलग-अलग बहिनी देवी मन के मान्यता रहिथे। ये गीत मं इक्कीस बहिनी के उल्लेख एही लोकपरंपरा ला दर्शाथे।

जुड़वासा के समय गांव-गांव मं माता के पूजा, प्रसाद अउ सामूहिक आयोजन के माहौल बनथे। भक्त मन अपन श्रद्धा के अनुसार कांचा-पक्का भोजन, मेवा-मिठाई अउ प्रसाद चढ़ाथें। माता देवाला मं मेला भरथे, दूर-दूर ले मनखे पहुंचथें अउ दाई के दरबार मं अपन मनोकामना रखथें।

गीत के भाव ये बताथे कि भक्ति मं दिखावा जरूरी नइ हे। जेकर जइसन सामर्थ्य हे, वो अपन श्रद्धा के अनुसार माता ला मनाथे। माता अपन भक्त मन ऊपर मया अउ दया बरसाथें—यही लोकविश्वास शीतला जस गीत के केंद्र मं हे।

ए गीत मं देवी के शक्ति के संग छत्तीसगढ़ के मिट्टी, गांव, तरिया, नीम, मेला अउ लोकपरंपरा के सुंदर चित्र दिखाई देथे। एखर से ये केवल एक जस गीत नइ, बल्कि छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति अउ शीतला माता के प्रति जनआस्था के भावपूर्ण अभिव्यक्ति घलो आय।

माता भवानी के अउ जस गीत लिंक 

  1. ये पिंजरा के पोश सुवना – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  2. तरी हरी ना मोर नाना भवानी – पचरा जस
  3. जनम देवईया – जस गीत
  4. तोर रूप बिकट बिकराला वो – मरघट के काली जस
  5. बम्लाई ला सुमिरव  – देवी जस गीत
  6. मोर चले माँ दुर्गा – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  7. तोर दया ले माँ अम्बे – माता जस गीत
  8. तोर भुवन माँ – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  9. जुड़वास मनाये – देवी जस गीत
  10. हो मईया चंडिका  – काली जस गीत

हे मईया दुर्गा महरानी /लोकेश्वरी सेन /cgjaslyrics

हे मईया दुर्गा महरानी – पूरा छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स

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गीत -हे मईया दुर्गा महरानी 

गायिका - लोकेश्वरी सेन 

गीतकार - धनराज निर्मलकर 

यूट्यूब -dks studio video 

वेबसाइट- www.cgjaslyrics .com 

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मुखड़ा 

हे मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ -2 

उड़ान - तोर नाव ला सुमर सुमर के -2 

चरण ला पखारव हो मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ

 हे मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ 

अंतरा -1 

सुरहिन गईया के गोबर मा सुघ्घर अंगना लीपावन माँ 

चोवा चाउर पिसान म मईया अंगना चौक पुरावन माँ 

उड़ान - फूल काश के लोटा मा दाई -2 

निर्मल जल लावव हो मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ

 हे मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ

अंतरा -2 

अंग फूल चघाके हो मईया हुम् धुप जलायेंन माँ 

कुमकुम बंदन लगाके दाई अगर बत्ती जलायेन माँ 

उड़ान - धरम के दियना धरम के बाती  -2 

सत के दियना हो मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ

 हे मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ

अंतरा -3 

सुमर सुमर के झूमर झूमर के आरती उतारन माँ 

भूलचूक ला माफी करबे नेमधेम नई जानन माँ 

उड़ान - धनराज संग तोर वो दाई  -2 

जस महिमा ला गावव हो मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ

 हे मईया दुर्गा महरानी आरती तोर उतारन हो माँ

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गीत के भावार्थ

ए गीत मं भक्त माता दुर्गा ले अपन भक्ति स्वीकार करे के अरज करत हे। भक्त माता के नाव ला सुमरत-सुमरत वोकर चरण ला पखारथे अउ बड़े श्रद्धा ले आरती उतारथे।

गीत मं छत्तीसगढ़ी घर-आंगन के पूजा परंपरा के सुंदर वर्णन करे गे हे। गोबर ले अंगना लीपना, चोवा-चाउर ले चौक पुरना, फूल चढ़ाना, धूप-अगरबत्ती जलाना, कुमकुम-बंदन लगाना अउ दिया बारना जइसन परंपरा मन ए गीत मं दिखाई देथे।

अंत मं भक्त माता ले अपन भूल-चूक बर माफी मांगथे अउ धरम अउ सत के राह मं चले के भाव रखथे। माता के जस-महिमा गाके वो अपन भक्ति ला माता के चरण मं समर्पित करथे।

गीत के खासियत

(1)ए गीत के भाषा सरल अउ मिठास भरे छत्तीसगढ़ी आय।

(2)गीत मं माता दुर्गा के प्रति गहिर भक्ति के भाव हे।

(3)छत्तीसगढ़ के गांव-गंवई के पूजा परंपरा के झलक मिलथे।

(4)गोबर ले अंगना लीपना अउ चौक पुरना जइसन लोक परंपरा के उल्लेख हे।

(5)फूल, धूप, अगरबत्ती, कुमकुम अउ दिया के माध्यम ले माता के पूजा करे के भाव हे।

(6)धरम अउ सत के राह मं चले के संदेश मिलथे।

(7)माता के जस-महिमा गाए के परंपरा ले जुड़े होय के सेती एला जस गीत के रूप मं देखे जा सकथे।

छत्तीसगढ़ी संस्कृति संग गीत के नाता

ए गीत के खास बात ये आय के एमा माता दुर्गा के भक्ति के संग-संग छत्तीसगढ़ के माटी अउ लोक परंपरा के झलक घलो मिलथे।

“गोबर मा अंगना लीपावन”, “चोवा चाउर ले चौक पुरावन”, “फूल चढ़ाना”, “धूप जलाना”, “कुमकुम-बंदन लगाना” अउ “धरम के दियना” जइसन पंक्ति मन गांव के पारंपरिक पूजा-पाठ के याद दिलाथे।

छत्तीसगढ़ मं माता के जस गाए के अपन अलग परंपरा हे। गांव के जस मंडली मन माता के महिमा गावत हें अउ भक्ति के माहौल बनाथें। ए गीत घलो ओही भक्ति अउ लोक परंपरा के भाव ला अपन मं समेटे हुए हे।

गायिका के जानकारी

ए गीत के गायिका लोकेश्वरी सेन हें। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, “हे मईया दुर्गा महरानी” गीत ला वोमन अपन आवाज मं प्रस्तुत करे हें।

गीतकार के जानकारी

ए गीत के गीतकार धनराज निर्मलकर हें। गीत के आखिरी अंतरा मं “धनराज संग तोर वो दाई” के उल्लेख घलो मिलथे।

मातारानी के सूंदर जस गीत 

  1. तोर रूप बिकट विकराला 
  2. तोर दया ले माँ अम्बे
  3. मोर चले माँ दुर्गा
  4. जब काली चरणजुग हां 
  5. माता सती भवानी ओ
  6. भगवती भवानी हां 
  7. तोर डंडा शरण पखारव 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. “हे मईया दुर्गा महरानी” कइसन गीत आय?

2. ए गीत के गायिका कोन आय?

3. ए गीत के गीतकार कोन आय?

4. ए गीत मं काकर भक्ति करे गे हे?

5. ए गीत मं छत्तीसगढ़ी संस्कृति के झलक कइसे मिलथे?

CG Jas Lyrics – के. के. पंचारे

CG Jas Lyrics मं छत्तीसगढ़ी जस गीत, माता के भक्ति गीत, आरती, पचरा अउ छत्तीसगढ़ के लोक परंपरा ले जुड़े गीत के बोल अउ जानकारी प्रस्तुत करे जाथे।

ये पिंजरा के पोश सुवना/शत्रुहन पटेल / नवजागृति जस परिवार देवसरा/ जस झांकी प्रतियोगिता

ये पिंजरा के पोश सुवना – पूरा छत्तीसगढ़ी जस गीत

ये पिंजरा के पोश सुवना छत्तीसगढ़ी जस गीत – शत्रुहन पटेल

गीत के बारे म

“ये पिंजरा के पोश सुवना” एक भावपूर्ण छत्तीसगढ़ी जस गीत आय, जेमां मानव जीवन के नश्वरता, माता के भक्ति, धर्म-कर्म अउ सत के राह मं चले के संदेश मिलथे। गीत मं मनखे के देह ला पिंजरा अउ जीव ला सुवना के रूप मं समझाय गे हे।

गीत के मुखड़ा “जा रे जा अपन भुवना” मनखे ला अपन असली ठिकाना, अर्थात आध्यात्मिक चेतना अउ भगवान के चरण मं लौटे के संकेत देथे। अलग-अलग अंतरा मं माता के दरबार, नवदुर्गा, नवशक्ति, भक्ति, सेवा, सत अउ करम के महत्व ला सुंदर ढंग ले प्रस्तुत करे गे हे।

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गीत -ये पिंजरा के पोश सुवना 

गायक -शत्रुहन पटेल 

जस मंडली -नव जागृति जस परिवार देवसरा 

यूट्यूब -मोर गॉव के संस्कृति 

वेबसाइट ऑनर -के के  पंचारे 

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मुखड़ा 

जा रे जा अपन भुवना आ आ  -- -ये पिंजरा के पोश सुवना -2

अंतरा -1 

यहो ये पिंजरा के पोश मैना ,धर्मी चोला जनाये 

यहो चार पहर के ये दिन रैना, माता चरण मा पहाये

जोत जलाये मईया के भुवना,देवता नेवता भेजाये 

यहो सुमर सुमर माता के सुवना ,देवी मनला बलाये 

ताल - हो--हो , आये गा अंजनी ललना --आ --आ--आ-2  

भक्ति भजन के बांधे बंधना --आ आ---2

जा रे जा अपन भुवना आ,आ ,आ ,आ ,आ  -2 

ये पिंजरा के पोश सुवना -2

अंतरा -2 

यहो सब देवता तोर नेवता पाके ,आये हावे सुघ्घर 

नवदुर्गा नवशक्ति बनके ,बइठे अंतस भीतर 

आदि अम्बा विनती सुनके ,मया करे हे जहुअर

यहो पीड़ा हरे हे हर भगतन के ,माता सबके बरोबर 

ताल -फुले फुलवारी अंगना आ ---आ -2 

खनखन खनके मया कंगना -2 

जा रे जा अपन भुवना आ,आ ,आ ,आ ,आ  -2 

ये पिंजरा के पोश सुवना -2

अंतरा -3 

यहो रगरग म तोर शक्ति हावे ,शक्ति ला कहा पठाबे 

यहो तिहि बता अउ कब आबे ,कोन डहर तै जाबे 

यहो कोन जनि तै कब उड़जाबे ,कोन बन जाके थिराबे 

यहो माता चरण मा धियान लगाबे ,गीता के दरसन पाबे 

हो यहो पीड़ा हरे हे हर भगतन के ,माता सबके बरोबर 

हो --हो----सबला एक दिन हे मरना ---आ --आ -2 

फिर अर्जुन ला किसना आ --आ ----2

जा रे जा अपन भुवना आ,आ ,आ ,आ ,आ  -2 

ये पिंजरा के पोश सुवना -2

अंतरा -4 

माता मयारू के दरसन पाये ,भाग अपन सहूराये 

अमृत कस ममता बरसाये ,सुवना डुबकी लगाये 

यहो कुंवार के महीना सुहाये ,माता जस गाए 

यहो जगमग जोत जलाये ,मन मंदिर में जलाये

हो ---हो----भक्ति के बारे दीयना  ---आ --आ -2 

जगमग चमके घर अंगना आ --आ ----2 

जा रे जा अपन भुवना आ,आ ,आ ,आ ,आ  -2 

ये पिंजरा के पोश सुवना -2 

अंतरा -5  

सत के दियना धरम के बाती ,भक्ति के जोत जलाये  

सेवा करे नवदिन राति ,माता के आशिस पाये  

यहो पवरी परले जाती बेराती ,झन आबे बिसराये  

यहो दाई दयालु पड़पड़ पाती ,हिरदे राम समाये 

हो ---हो----वो करम के लिखाये गढ़ना ---आ --आ -2 

जइसे करना अउ वइसे भरना आ --आ ----2

जा रे जा अपन भुवना आ,आ ,आ ,आ ,आ  -2 

ये पिंजरा के पोश सुवना -2

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🎧 ये पिंजरा के पोश सुवना – गीत सुनव

ये सुंदर छत्तीसगढ़ी जस गीत ला मोर गाँव के संस्कृति यूट्यूब चैनल मं सुन सकथव। माता भक्ति, सत अउ करम के संदेश से भरपूर ये गीत जरूर सुनव।

गीत के अर्थ

ये गीत मनखे के जीवन ला एक पिंजरा अउ जीव ला सुवना के रूपक मं समझाथे। जइसने सुवना एक पिंजरा मं रहिथे, ओइसने जीवात्मा घलो देह रूपी पिंजरा मं कुछ समय बर रहिथे। ये देह हमेशा नइ रहय, एक दिन सबला अपन संसार छोड़के जाना परथे।

गीत मं माता के चरण मं ध्यान लगाय, भक्ति करे, सेवा करे अउ सत के राह मं चले के संदेश दे गे हे। माता के भक्ति मनखे के दुख-दर्द ला दूर करे वाली शक्ति के रूप मं देखाय गे हे।

गीत के अंतिम संदेश करम ऊपर आधारित हे—मनखे जइसने करम करही, वइसने ओकर फल मिलही। एही से जीवन मं धरम, सत, सेवा अउ भक्ति ला अपनाय के सीख गीत देथे।

गीत के मुख्य संदेश

“जइसे करना अउ वइसे भरना”

ये पंक्ति गीत के बहुत गहिर संदेश ला बताथे। मनखे जइसने करम करही, वइसने ओकर फल पाही।

गीत के मुख्य सीख:

(1) माता के भक्ति करव।

(2) सत अउ धरम के राह मं चलव।

(3) जरूरतमंद के सेवा करव।

(4) अपन करम ला अच्छा रखव।

(5) माता के चरण मं ध्यान लगावव।

(6) मन मं दया अउ मया रखव।

गीत  के विशेषता अउ महत्व

(1 ) ये गीत मं छत्तीसगढ़ी लोकभाषा के मिठास देखे बर मिलथे।

(2 ) मानव जीवन के नश्वरता ला “पिंजरा के पोश सुवना” के सुंदर रूपक ले समझाय गे हे।

(4) माता भक्ति के संग-संग सत अउ धरम के संदेश घलो मिलथे।

(3 ) नवदुर्गा अउ नवशक्ति के महिमा के उल्लेख गीत ला अउ भक्तिमय बनाथे।

(4 ) गीत मं करम के महत्व ला सरल ढंग ले बताय गे हे।

(5 ) माता के चरण मं ध्यान अउ भक्ति करे के प्रेरणा मिलथे।

(6 ) जस गायन के पारंपरिक भाव अउ लोकबोली के सुंदर मेल देखे बर मिलथे।

गायक शत्रुहन पटेल के बारे में 

शत्रुहन पटेल ये गीत के गायक हवंय। “ये पिंजरा के पोश सुवना” मं उनके आवाज के माध्यम ले माता भक्ति अउ जीवन दर्शन के भाव ला प्रस्तुत करे गे हे।

गायक के जन्मस्थान, शिक्षा, जन्मतिथि अउ व्यक्तिगत जीवन संबंधी प्रमाणित जानकारी उपलब्ध नइ होय, ए से गलत जानकारी जोड़े के बजाय गीत मं उनके योगदान ला प्रमुखता देना उचित हे।

गीत के कथा 

“ये पिंजरा के पोश सुवना” गीत के कथा मनखे के जीवन ला एक पिंजरा मं बंद सुवना के रूपक ले समझाथे। एक सुवना जब पिंजरा मं रहिथे, त वो पिंजरा ला अपन दुनिया समझ लेथे। फेर ओकर असली उड़ान पिंजरा के बाहिर हे। एही किसिम ले मनखे घलो अपन देह, धन-दौलत, घर-परिवार अउ संसारिक मोह मं बंधाय रहिथे, फेर आत्मा के यात्रा ए सब ले अलग होथे।

गीत के शुरुआत मं सुवना ला अपन भुवना जाय बर कहे गे हे। इहाँ “भुवना” ला अपन असली ठिकाना या आध्यात्मिक संसार के प्रतीक के रूप मं समझे जा सकथे। मनखे ला याद रखे ला चाही कि संसार मं ओकर रहई हमेशा बर नइ हे।

पहिली अंतरा मं धर्मी चोला, दिन-रात अउ माता के चरण के बात आवथे। ये मनखे ला अपन जीवन के समय ला भक्ति अउ सत्कर्म मं लगाय के सीख देथे। माता के भुवन मं जोत जलाना अउ देवी-देवता ला नेवता देना भक्ति के पवित्र भाव ला दिखाथे।

दूसर अंतरा मं नवदुर्गा अउ नवशक्ति के महिमा गाये गे हे। भक्त मन माता के दरबार मं पहुंचथें अउ माता सबके पीड़ा हरथें। इहाँ माता ला दया, मया अउ सहारा देय वाली शक्ति के रूप मं देखाय गे हे।

तीसर अंतरा गीत के सबसे गहिर संदेश ला सामने लाथे। मनखे के भीतर शक्ति तो हावय, फेर ओकर जीवन कब तक हे अउ वो कब संसार छोड़के जाही, ये कोनो नइ जानय। ए से माता के चरण मं ध्यान लगाय अउ आध्यात्मिक ज्ञान के राह मं चले के संदेश मिलथे। अर्जुन अउ किसना के संदर्भ गीता के ज्ञान के ओर संकेत करथे।

चउथा अंतरा मं माता के दर्शन, ममता अउ भक्ति के आनंद ला बताय गे हे। माता के दरबार मं जगमग जोत अउ भक्तिमय वातावरण मन के अंधियार ला दूर करे के प्रतीक बनथे।

पांचवां अंतरा मं सत, धरम, सेवा अउ करम के बात आवथे। गीत आखिर मं बहुत सरल लेकिन गहिर संदेश देथे—मनखे जइसने करम करही, ओइसने ओकर फल मिलही।

ए तरह ये जस गीत केवल माता के भक्ति तक सीमित नइ रहय, बल्कि मनखे ला अपन जीवन के सच्चाई समझाय, सत्कर्म करे अउ भगवान के चरण मं मन लगाय के प्रेरणा घलो देथे।

CG Jas Lyrics के बारे में 

CG Jas Lyrics छत्तीसगढ़ी जस गीत, भजन, आरती अउ लोकभक्ति गीत के बोल ला पाठक मन तक पहुंचाय के एक प्रयास आय। इहाँ छत्तीसगढ़ी भाषा अउ लोकसंस्कृति ले जुड़े गीत मन के जानकारी, गीत के बोल, अर्थ अउ गीत संबंधी जानकारी ला सरल भाषा मं प्रस्तुत करे जाथे।

वेबसाइट के उद्देश्य छत्तीसगढ़ी लोकभक्ति गीत अउ सांस्कृतिक धरोहर ला डिजिटल रूप मं सुरक्षित रखे अउ नवा पीढ़ी तक पहुंचाय के हे।

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यूट्यूब चैनल के बारे में 

मोर गाँव के संस्कृति के यूट्यूब चैनल ले उपलब्ध जानकारी के आधार मं ये गीत के बोल प्रस्तुत करे गे हें। चैनल के नाम ले ही गाँव, लोकसंस्कृति अउ छत्तीसगढ़ी परंपरा के संरक्षण के भाव झलकथे।

गीत के मूल वीडियो, गायन अउ प्रस्तुति देखे बर संबंधित यूट्यूब चैनल ला जरूर देखव।

ये सवाल के जवाब कमेंट बॉक्स में दो 

ये पिंजरा के पोश सुवना गीत के गायक कोन हे?

ये गीत कोन जस मंडली से जुड़े हे?

ये गीत के यूट्यूब चैनल कोन हे?

ये गीत मं का संदेश दे गे हे?

करुणामई माता के जस लिरिक्स पड़व 

  • तोर रूप बिकट बिकराला वो
  • मेघवा भईया
  • बेटी घर आये हावे 
  • गुरु बिना जग विरथा 
  • तरी हरी ना मोर
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