बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां | कांतिकार्तिक यादव/छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स
गीत - बम्लाई ला सुमिरव
गीतकार -राजा कमल नारायण सिंह
म्यूजिक कंपनी - ओ पी देवांगन
वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
डोंगरगढ़ के हो बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां -2
बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां -2
अंतरा -1
जब केसव रहे तोर ईढ़ही अउ सीढ़ही ,केसव रहे पुजारी -2
केसव रहे तोर जोत जलत हे जगमग जगमग हां-
जगमग जगमग हां -2
बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां -2
अंतरा -2
जब 9 सौ 1 तोर ईढ़ही अउ सीढ़ही ,लाखो रहे पुजारी -2
8 सौ 60 तोर जोत जलत हे, जगमग जगमग हां
जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां -2
बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां -2
अंतरा -3
जब ऋषि मुनी मन ध्यान लगाये तोर चरण में आके -2
लाल लागुरवा जोत जलाये जगमग जगमग हां
जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां -2
बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां -2
अंतरा -4
जब ब्रम्हा वेद धरे तोर द्वारे शंकर ध्यान लगावे -2
कमल पति तोर आरती उतारे , जगमग जगमग हां
जगजोत जलत हे जगमग जगमग हां -2
बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां -2
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बम्लाई ला सुमिरव – गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)
"बम्लाई ला सुमिरव डोंगरगढ़ के हां" एक सुंदर भक्ति जस गीत आय, जेमां डोंगरगढ़ वाली बम्लाई दाई के महिमा गाये गे हे। गीत म बताय गे हे कि माता के दरबार म हजारों-लाखों भक्त मन दर्शन बर आवत हें अउ माता के जोत हमेशा जगमगावत रहिथे।
पहिली अंतरा म माता के पुराना समय के सेवा अउ पुजारी के बात कहे गे हे। दूसर अंतरा म माता के मंदिर म लगातार जलत पवित्र जोत अउ बढ़त भक्त मन के संख्या के वर्णन हे। तिसर अंतरा म ऋषि-मुनि मन घलो माता के चरण म ध्यान लगाथें, जेन ले माता के आध्यात्मिक शक्ति के महिमा पता चलथे। आखरी अंतरा म ब्रह्मा, शंकर अउ विष्णु जइसने देवता घलो माता के आरती उतारथें, जेन ले बम्लाई दाई के सर्वोच्च शक्ति के सम्मान झलकथे।
गीत के महत्व
डोंगरगढ़ वाली बम्लाई दाई के महिमा ला जन-जन तक पहुंचाथे।
माता के जोत, भक्ति अउ श्रद्धा के महत्व बताथे।
भक्त मन ला माता के सुमिरन करे बर प्रेरित करथे।
नवरात्रि, जस गीत, माता सेवा अउ धार्मिक कार्यक्रम म गाये जाथे।
छत्तीसगढ़ के लोकसंस्कृति अउ देवी भक्ति के सुंदर उदाहरण आय।
बम्लाई दाई के कथा (छत्तीसगढ़ी में)
डोंगरगढ़ के पवित्र धरती म बम्लाई दाई के असीम कृपा माने जाथे। मान्यता हे कि जऊन भक्त सच्चा मन ले माता के नाम जपथे, ओकर दुख-दरद धीरे-धीरे दूर हो जाथे। माता अपन भक्त मन ऊपर मया बरसाथे अउ संकट के बेरा रच्छा करथे।
कहिथें कि पहिली माता के मंदिर म गिने-चुने सेवक रहिन, फेर समय के संग माता के चमत्कार दूर-दूर तक फैलिस। आज हजारों-लाखों श्रद्धालु डोंगरगढ़ पहुंचके माता के दर्शन करथें। मंदिर म जलत अखंड जोत भक्त मन बर आशा, विश्वास अउ उजाला के प्रतीक माने जाथे।
गीत म ऋषि-मुनि, ब्रह्मा, विष्णु अउ महादेव के माता के चरण म नमन करे के वर्णन ये बात ला बताथे कि माता के शक्ति सबले महान मानी जाथे। जऊन मन श्रद्धा ले माता के आराधना करथें, ओमन ला साहस, सुख, शांति अउ नई ऊर्जा मिलथे।
ए गीत हमन ला सिखाथे कि संकट के बेरा घबराय के बजाय माता बम्लाई के सुमिरन करना चाही। सच्ची भक्ति, सेवा अउ विश्वास ले जीवन म उजाला आथे, ठीक ओइसने जइसने माता के मंदिर के अखंड जोत हमेशा जगमगावत रहिथ
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