कोन विधि सुमिरव हां | छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत लिरिक्स | CGJasLyrics

कोन विधि सुमिरव हां मोर आदि भवानी – छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत

कोन विधि सुमिरव हां मोर आदि भवानी छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत गायक मोतीलाल जलतारे

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गीत -कोन विधि सुमिरव हां

गायक -मोतीलाल जलतारे 

शैली -पचरा जस 

यूट्यूब -आराधना स्टूडियो दामाखेड़ा 

वेबसाइट -cgjaslyrics 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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गीत के परिचय

छत्तीसगढ़ के पारंपरिक जस गायन म माता आदि भवानी के महिमा के वर्णन अलग-अलग अंदाज म करे जाथे। कोन विधि सुमिरव हां मोर आदि भवानी एक भक्तिमय पचरा जस गीत आय, जेमे भक्त माता भवानी के सुमिरन करे के विधि पूछत हे।

ए गीत म धरती, आकाश, ब्रह्मा, विष्णु अउ पांडव राजा के प्रसंग के माध्यम ले माता रानी के महिमा ला प्रस्तुत करे गे हे। गायक मोतीलाल जलतारे के स्वर म प्रस्तुत ए जस गीत भक्ति अउ आध्यात्मिक भावना ले जुड़े हे।

 मुखड़ा 

कोन विधि सुमिरव हां मोर आदि भवानी कोन विधि सुमिरव हां -२

अंतरा -1  

कौने सिरजे धरती अउ पृथ्वी कौने सिरजे आकाशे -2 

ब्रम्हा सिरजे धरती अउ पृथ्वी विष्णु सिरजे आकाशे

उड़ान -कुंती सिरजे पांडव राजा ,पूरन होवय काजे

 मोर आदि भवानी  कोन विधि सुमिरव हां -२ 

 कोन विधि सुमिरव हां मोर आदि भवानी  कोन विधि सुमिरव हां -२

अंतरा -2 

के खंड सिरजे धरती अउ पृथ्वी केखंड सिरजे आकाशे -2

नव खंड सिरजे धरती अउ पृथ्वी 16 खंड आकाशे -2 

उड़ान - पांच पूत सिरजे पांडव राजा पूरन होये काजे 

मोर आदि भवानी  कोन विधि सुमिरव हां -२ 

 कोन विधि सुमिरव हां मोर आदि भवानी  कोन विधि सुमिरव हां -२

अन्तर -3   

कोन बरन हे धरती अउ पृथ्वी कोन बरन हे आकाशे -2

हरा बरन हे धरती अउ पृथ्वी नीला बरन हे आकाशे -2

उड़ान -स्वेत बरन हे पांडव राजा पूरन होये काजे 

मोर आदि भवानी  कोन विधि सुमिरव हां -२ 

 कोन विधि सुमिरव हां मोर आदि भवानी  कोन विधि सुमिरव हां -२  

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गीत के भावार्थ

ए गीत के भावार्थ माता आदि भवानी के भक्ति अउ सुमिरन के महत्व ले जुड़े हे।

गीत के मुखड़ा म भक्त माता रानी ले पूछथे कि हे आदि भवानी! मैं तोर सुमिरन कोन विधि ले करव? ए सवाल के भीतर भक्त के श्रद्धा, प्रेम अउ माता के प्रति समर्पण के भावना छुपे हे।

पहिली अंतरा म धरती अउ आकाश के रचना के प्रसंग आवत हे। ब्रह्मा अउ विष्णु के माध्यम ले सृष्टि के विस्तार के बात कहे गे हे। संग म कुंती अउ पांडव राजा के प्रसंग घलो जोड़े गे हे।

दूसर अंतरा म धरती अउ आकाश के अलग-अलग खंड के वर्णन हे। पांच पांडव पुत्र के प्रसंग गीत ला धार्मिक कथा ले जोड़थे।

तीसरा अंतरा म धरती के हरियर रंग, आकाश के नीला रंग अउ पांडव मन के स्वेत बरन के वर्णन करे गे हे।

पूरा गीत के भाव ए आय कि माता भवानी के महिमा अपरंपार हे। भक्त अपन श्रद्धा अउ प्रेम ले माता के सुमिरन करथे।

 छत्तीसगढ़ी परंपरा अउ जस गायन

छत्तीसगढ़ म जस गीत माता रानी के आराधना के महत्वपूर्ण लोक परंपरा आय। गांव-गांव म जस मंडली मन माता के सेवा म जस गायन करथें। नवरात्रि, धार्मिक आयोजन अउ देवी पूजा के अवसर म जस गीत गाये जाथे।

पचरा जस म माता के महिमा, भक्ति, धार्मिक प्रसंग अउ लोककथा मन के सुंदर समावेश रहिथे। गायक अपन स्वर अउ मंडली के संगत ले भक्ति के वातावरण बनाथे।

कोन विधि सुमिरव हां गीत घलो एही पारंपरिक भक्ति धारा ले जुड़े हे। एमा सवाल-जवाब के शैली म माता के महिमा के वर्णन करे गे हे।

गीत के विशेषता अउ महत्व

ए छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत के कुछ खास विशेषता ये प्रकार हे:

  1. माता के सुमिरन: पूरा गीत आदि भवानी के भक्ति भावना ऊपर आधारित हे।

  2. पारंपरिक शैली: गीत म छत्तीसगढ़ी पचरा जस के लोक रंग झलकथे।

  3. धार्मिक प्रसंग: ब्रह्मा, विष्णु, कुंती अउ पांडव मन के उल्लेख मिलथे।

  4. प्रश्नात्मक मुखड़ा: कोन विधि सुमिरव हां के सवाल गीत ला अलग पहचान देथे।

  5. सरल भाषा: छत्तीसगढ़ी बोली म रचे गीत ला समझना सहज हे।

  6. सामूहिक गायन: जस मंडली मन ए प्रकार के गीत ला भक्ति आयोजन म प्रस्तुत कर सकथें।

ए गीत छत्तीसगढ़ी लोकभक्ति संगीत अउ पारंपरिक जस गायन के महत्व ला दर्शाथे।


अक्सर पूछे जाथे (FAQ)

प्रश्न 1. कोन विधि सुमिरव हां गीत के गायक कोन हे?

उत्तर: ए गीत के गायक मोतीलाल जलतारे हें।

प्रश्न 2. कोन विधि सुमिरव हां गीत कोन शैली के आय?

उत्तर: ए गीत छत्तीसगढ़ी पचरा जस शैली के आय।

प्रश्न 3. ए गीत म कोन देवी के महिमा गाये गे हे?

उत्तर: ए गीत म माता आदि भवानी के महिमा अउ सुमिरन के वर्णन हे।

प्रश्न 4. ए गीत के YouTube चैनल के नांव का हे?

उत्तर: आराधना स्टूडियो दामाखेड़ा।

प्रश्न 5. कोन विधि सुमिरव हां गीत के मुखड़ा का हे?

प्रश्न 6. ए गीत म कोन-कोन धार्मिक पात्र के उल्लेख हे?

उत्तर: ए गीत म ब्रह्मा, विष्णु, कुंती अउ पांडव राजा के उल्लेख हे।

प्रश्न 7. ए गीत के भावार्थ का हे?

उत्तर: ए गीत के मुख्य भाव माता भवानी के सुमिरन, श्रद्धा अउ भक्ति ले जुड़े हे।

प्रश्न 8. कोन विधि सुमिरव हां के पूरा लिरिक्स कहां पढ़े जा सकथे?

उत्तर: ए गीत के पूरा छत्तीसगढ़ी लिरिक्स CGJasLyrics वेबसाइट म पढ़े जा सकथे।

प्रश्न 9. ए गीत के गीतकार कोन हे?

उत्तर: गीतकार के नाम के पुष्टि उपलब्ध नइ हे।

प्रश्न 10. ए गीत कोन अवसर म गाये जा सकथे?

उत्तर: ए प्रकार के जस गीत माता रानी के पूजा, नवरात्रि अउ धार्मिक भक्ति आयोजन म गाये जा सकथे। 

 CGJasLyrics के बारे म

આવતીકાલથી શરૂ થશે ચૈત્ર નવરાત્રી; કળશ સ્થાપના માટે આ છે સૌથી સચોટ શુભ મુહૂર્ત

CGJasLyrics छत्तीसगढ़ी जस गीत अउ भक्ति संगीत प्रेमी मन बर बनाये गे एक वेबसाइट आय। इहां आप मन ला छत्तीसगढ़ी जस गीत के पूरा लिरिक्स, पचरा जस, नवा जस गीत, पारंपरिक जस गीत, माता रानी के आरती अउ धार्मिक गीत पढ़े बर मिलही।

हमर प्रयास हे कि छत्तीसगढ़ के लोकभाषा, भक्ति अउ सांस्कृतिक परंपरा ला डिजिटल माध्यम ले जियावत रखे जावय।

वेबसाइट: www.cgjaslyrics.com

वेबसाइट ऑनर: के के पंचारे

 YouTube चैनल के बारे म

आराधना स्टूडियो दामाखेड़ा YouTube चैनल म प्रस्तुत छत्तीसगढ़ी जस गीत अउ माता रानी के भक्ति संगीत ला सुने बर नीचे अपन चैनल के वीडियो देख सकथव।

आराधना स्टूडियो दामाखेड़ा

कोन विधि सुमिरव हां – मोतीलाल जलतारे

 कॉपीराइट अउ स्रोत जानकारी

गीत के नांव: कोन विधि सुमिरव हां मोर आदि भवानी

गायक: मोतीलाल जलतारे

YouTube चैनल: आराधना स्टूडियो दामाखेड़ा

वेबसाइट: CGJasLyrics

वेबसाइट ऑनर: के के पंचारे

ए पोस्ट के उद्देश्य छत्तीसगढ़ी जस गीत अउ लोकभक्ति संगीत के जानकारी पाठक मन तक पहुंचाना आय। गीत के मूल स्वर, संगीत अउ गायन के अधिकार संबंधित मूल कलाकार अउ अधिकारधारी मन के पास सुरक्षित रहिथे।

गीत के बोल अउ जानकारी के स्रोत उपलब्ध कराये गे गीत विवरण आय। यदि कोनो अधिकारधारी ला ए पोस्ट म सुधार, श्रेय या हटाये के अनुरोध करना हे, त वेबसाइट संचालक ले संपर्क कर सकथें।

जय माता दी 🙏 जय आदि भवानी 🪔

CGJasLyrics – छत्तीसगढ़ी जस गीत के अपन डिजिटल संग्र

उत्तर: कोन विधि सुमिरव हां मोर आदि भवानी, कोन विधि सुमिरव हां।


मोला संग देबे माता | Mithleshwar Sen | छत्तीसगढ़ी जस गीत

मोला संग देबे माता – छत्तीसगढ़ी जस गीत | मिथलेश्वरी सेन

मोला संग देबे माता छत्तीसगढ़ी जस गीत – गायिका मिथलेश्वरी सेन

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गीत -मोला संग देबे माता 

स्वर -मिथलेश्वरी सेन 

संगीत -पंडित विवेक शर्मा 

यूट्यूब - मिथलेश्वरी सेन 

वेबसाइट -cgjaslyrics 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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गीत के बारे म कुछ बात

छत्तीसगढ़ महतारी के पावन माटी म माता रानी के भक्ति के अलग-अलग रूप देखे बर मिलथे। इही भक्ति अउ श्रद्धा ले भरे एक सुंदर जस गीत आय – मोला संग देबे माता।

ये गीत म भक्त अपन मन के बात माता ले कहत हे कि हे माता, जब मंय तोर दरबार अउ अलग-अलग देवी-देवता के धाम जाये बर निकलथंव, त मोला अपन संग देबे। छत्तीसगढ़ के पाटनपुर, संबलपुर, धमतरी, डोंगरगढ़, रतनपुर, राजिम, भोरमदेव, चम्पारण, रायपुर, कोरबा, राजनांदगांव अउ अउ दूसर धार्मिक जगह मन के महिमा ला गीत म गाये गे हे।

गीत म माता के अनेक रूप, देवी धाम, बैगा परंपरा अउ शक्ति उपासना के सुंदर झलक मिलथे। ये गीत सुनके भक्त के मन म माता के प्रति श्रद्धा अउ अपन छत्तीसगढ़ के धार्मिक संस्कृति ऊपर गरब जागथे।

सेवा में आये हो – ब्रम्हा सेवा मा आये हो | सूरज सुनील पचरा जस गीत

सेवा में आये हो ब्रम्हा सेवा मा आये हो छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत

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गीत -सेवा में आये हो 

गायक -सूरज सुनील 

शैली -पचरा जस 

यूट्यूब -vijaykumarjasgeet 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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गीत के बारे में

“सेवा में आये हो” एक सुंदर छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत आय। ये गीत म ब्रम्हा जी के सेवा भाव, कमंडल, झांझ-मजीरा, करताले, बांसुरी अउ जयमाला के माध्यम ले भक्ति के सुंदर चित्रण करे गे हवय।

गीत के मुखड़ा म “ब्रम्हा सेवा मा आये हो” के भाव बार-बार आवत हवय, जेन ले भक्ति अउ सेवा के भावना अउ गहिरा हो जाथे। अलग-अलग अंतरा म झांझ-मजीरा, करताले, बांसुरी अउ जयमाला के बारे म सवाल-जवाब के रूप म गीत आगे बढ़थे।

राम-लखन, कृष्ण-राधा जइसन धार्मिक पात्र मन के उल्लेख ले गीत के भक्ति भाव अउ सुंदर बन जाथे। पचरा जस के पारंपरिक गायकी म ये गीत भक्ति कार्यक्रम, जस मंडली अउ धार्मिक आयोजन म गाये बर उपयुक्त हवय।

मुखड़ा 

ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

अंतरा -1 

काहेन के तोर झांझ मजीरा ,काहेन के करताले 

काहेन के तोर झांझ मजीरा ,काहेन के करताले 

काहेन के करताले हो माता काहेन के करताले

काहेन के करताले हो माता काहेन के करताले

उड़ान - काहेन के तोर बेन बांसुरी काहेन के जयमाला

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो  

अंतरा -2  

कांच पीतल के तोर झांझ मजीरा ,कठवा के करताले 

कांच पीतल के तोर झांझ मजीरा ,कठवा के करताले 

कठवा के करताले हो माता कठवा के करताले 

कठवा के करताले हो माता कठवा के करताले 

उड़ान - हरा बांस के बेन बांसुरी तुलसी  के जयमाला

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो  

अंतरा -3   

कौन बजावे तोर झांझ मजीरा ,कौन बजावे करताले 

कौन बजावे तोर झांझ मजीरा ,कौन बजावे करताले 

कौन बजावे करताले हो माता कौन बजावे करताले 

कौन बजावे करताले हो माता कौन बजावे करताले 

उड़ान - कौन बजावे बेन बांसुरी कौन धरे यमाला

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

अंतरा -4   

राम  बजावे तोर झांझ मजीरा ,लखन बजावे करताले 

राम  बजावे तोर झांझ मजीरा ,लखन बजावे करताले 

लखन बजावे करताले  हो माता लखन बजावे करताले 

लखन बजावे करताले  हो माता लखन बजावे करताले 

उड़ान - कृष्ण बजावे तोर बेन बांसुरी राधा धरे जयमाला

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो

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गीत के अर्थ

ये गीत के मुख्य भाव सेवा, भक्ति अउ धार्मिक समर्पण आय। “ब्रम्हा सेवा मा आये हो” के माध्यम ले भगवान के सेवा म पहुंचना अउ पूजा-अर्चना के भाव ला प्रकट करे गे हवय।

गीत म झांझ-मजीरा, करताले, बांसुरी अउ जयमाला जइसन धार्मिक साधन अउ पूजा के सामग्री के उल्लेख मिलथे। ये मन भक्ति के वातावरण ला दर्शाथें।

दूसर अंतरा म कांच, पीतल, कठवा अउ हरा बांस के उल्लेख करके पारंपरिक पूजा अउ लोक संस्कृति के झलक दिखाय गे हवय।

अंतिम अंतरा म राम-लखन अउ कृष्ण-राधा के उल्लेख करके गीत म रामायण अउ कृष्ण भक्ति के भाव ला जोड़े गे हवय।

छत्तीसगढ़ी परंपरा

छत्तीसगढ़ के गांव-गंवई म जस गीत अउ पचरा के अपन अलग महत्त्व हवय। गांव के धार्मिक आयोजन, नवरात्रि, माता सेवा, जस मंडली अउ देवी-देवता के पूजा के बेरा म ये किसिम के गीत गाये जाथे।

पचरा जस म सवाल-जवाब, दोहराव, झांझ-मजीरा, करताले अउ सामूहिक गायन के परंपरा देखे बर मिलथे। ये गीत घलो ओही लोक परंपरा के सुंदर उदाहरण आय।

गीत के विशेषता अउ महत्त्व

  1. गीत म भक्ति अउ सेवा के भाव प्रमुख हवय।
  2. पचरा जस के पारंपरिक अंदाज देखे बर मिलथे।
  3. झांझ-मजीरा अउ करताले जइसन लोक वाद्य के उल्लेख हवय।
  4. बांसुरी अउ जयमाला के माध्यम ले भक्ति के चित्रण करे गे हवय।
  5. राम-लखन अउ कृष्ण-राधा के धार्मिक संदर्भ गीत ला अउ सुंदर बनाथे।
  6. गीत के दोहराव वाला मुखड़ा आसानी ले याद रहिथे।
  7. जस मंडली के सामूहिक गायन बर गीत उपयोगी हो सकथे।

गीतकार के जानकारी

ये गीत के गीतकार के नाम के पक्का जानकारी उपलब्ध नइ हे। एहू से गीतकार के नाम के जगह गलत जानकारी जोड़े के बजाय जानकारी उपलब्ध नइ हे लिखे गे हवय। अगर मूल गीत के गीतकार के सही जानकारी मिलथे, त इहाँ बाद म जोड़े जा सकथे।

गायक के जीवनी – सूरज सुनील

सूरज सुनील के स्वर म प्रस्तुत ये गीत छत्तीसगढ़ी पचरा जस के भक्ति भाव ला सामने लाथे। गीत म गायक के आवाज के माध्यम ले सेवा, भक्ति अउ धार्मिक भावना ला लोक गायकी के अंदाज म प्रस्तुत करे गे हवय।

सूरज सुनील के ये प्रस्तुति म छत्तीसगढ़ी जस गीत के पारंपरिक रंग देखे बर मिलथे। “सेवा में आये हो” जइसन गीत छत्तीसगढ़ के धार्मिक अउ सांस्कृतिक माहौल म भक्ति संगीत के महत्त्व ला दर्शाथे।

गीत के कथा

“सेवा में आये हो” गीत के कथा के केंद्र म भगवान के सेवा अउ भक्ति के भाव हवय। गीत के शुरुआत एक भक्तिमय दृश्य ले होथे, जिहां ब्रम्हा जी कमंडल धरके सेवा म आये हवय। ये दृश्य ला लोकभक्ति के सरल भाषा म प्रस्तुत करे गे हवय।

गीत म भक्त के मन म एक सवाल उठथे कि भगवान के सेवा म कऊन-कऊन चीज के उपयोग होथे। झांझ-मजीरा कऊन बजाही, करताले कऊन बजाही, बांसुरी कऊन बजाही अउ जयमाला कऊन धरी—ये सवाल गीत ला संवाद जइसन रूप देथे।

पहिली कड़ी म झांझ-मजीरा अउ करताले के बात आथे। ओकर बाद गीत के भाव अउ गहिरा होथे अउ अलग-अलग सामग्री के उल्लेख करे जाथे। कांच अउ पीतल के झांझ-मजीरा, कठवा के करताले, हरा बांस के बांसुरी अउ तुलसी के जयमाला जइसन चीज मन के माध्यम ले गांव के पारंपरिक पूजा-पाठ के चित्र उभरथे।

गीत के अगला हिस्सा म सवाल के जवाब खोजे के कोशिश करे गे हवय। कऊन वाद्य बजाही अउ कऊन जयमाला धरी—ये बात ला धार्मिक पात्र मन के संग जोड़े गे हवय। ये ढंग ले गीत म राम-लखन अउ कृष्ण-राधा के संदर्भ आथे।

राम झांझ-मजीरा बजाथें अउ लखन करताले बजाथें, अइसनेच कृष्ण बांसुरी बजाथें अउ राधा जयमाला धरथें। ये धार्मिक कल्पना गीत ला भावपूर्ण बनाथे।

पूरा गीत म “ब्रम्हा सेवा मा आये हो” के मुखड़ा बार-बार दोहराय गे हवय। ये दोहराव जस गायकी के खास अंदाज आय, जेन ले मंडली म गावत बेरा संगवारी मन घलो आसानी ले साथ दे सकथें।

ए गीत के मूल संदेश सेवा, भक्ति, समर्पण अउ धार्मिक एकता के भाव ले जुड़थे। गीत म बड़े-बड़े शब्द के बजाय गांव-गंवई के सहज बोली के उपयोग करे गे हवय। एही से ये गीत आम श्रोता मन बर आसानी ले समझ म आ जाथे।

छत्तीसगढ़ी लोक परंपरा म अइसने गीत सिरिफ मनोरंजन बर नइ, बल्कि धार्मिक भावना अउ सांस्कृतिक पहचान ला जिंदा रखे म घलो योगदान देथें। “सेवा में आये हो” गीत म पचरा जस के गायकी, धार्मिक पात्र, लोक वाद्य अउ भक्ति भाव के सुंदर मेल देखे बर मिलथे।

अक्सर पूछे जाथे – FAQ

1. “सेवा में आये हो” गीत के गायक कोन हवय?

“सेवा में आये हो” गीत ला सूरज सुनील ह गाये हवय।

2. ये गीत के शैली का हवय?

ये गीत छत्तीसगढ़ी पचरा जस शैली के हवय।

3. “सेवा में आये हो” गीत के यूट्यूब चैनल कोन हवय?

ये गीत vijaykumarjasgeet यूट्यूब चैनल म उपलब्ध हवय।

4. गीत म कऊन धार्मिक पात्र मन के नाम आथे?

गीत म ब्रम्हा, राम, लखन, कृष्ण अउ राधा के धार्मिक संदर्भ आथे।

5. गीत म कऊन-कऊन वाद्य के उल्लेख हवय?

गीत म झांझ-मजीरा, करताले अउ बेन बांसुरी के उल्लेख हवय।

6. गीत म जयमाला किसके संग जोड़े गे हवय?

गीत के अलग-अलग भाव म तुलसी के जयमाला अउ राधा के जयमाला के उल्लेख मिलथे।

7. ये गीत के गीतकार कोन हवय?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार गीतकार के नाम नइ मिल पाय हवय।

8. ये गीत कऊन कार्यक्रम म गाये जा सकथे?

ये गीत जस मंडली, धार्मिक आयोजन, माता सेवा अउ भक्ति कार्यक्रम म गाये जा सकथे।

9. “सेवा में आये हो” गीत कहां पढ़े जा सकथे?

ये गीत के बोल CG Jas Lyrics म पढ़े जा सकथे।

10. ये गीत के मुख्य भाव का आय?

गीत के मुख्य भाव सेवा, भक्ति, समर्पण अउ धार्मिक भावना आय।

अउ छत्तीसगढ़ी जस गीत पढ़व

  1. बम्लाई ला सुमिरव 
  2. डोंगरी पहाड़ म हा – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  3. देवी के सिंगारे बर – जस गीत
  4. मोर दुर्गा मईया – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  5. माई के दरस बर हां  – जस गीत
  6. मोरो मन हुलसे – छत्तीसगढ़ी जस गीत
  7. झूलना मा झूला लेना -जस पचरा गीत 
  8. अब लाज रखो  – छत्तीसगढ़ी भक्ति गीत
  9. बेटी घर आये हावे  – छत्तीसगढ़ी बेटी जस गीत
  10. जगजोत जलत हे – छत्तीसगढ़ी जस गीत

CG Jas Lyrics के बारे म

CG Jas Lyrics छत्तीसगढ़ी जस गीत, पचरा जस, माता सेवा गीत अउ पारंपरिक भक्ति गीत के बोल ला एके जगह म पहुंचाय के कोसिस करे वाला वेबसाइट आय। इहाँ छत्तीसगढ़ी लोकभाषा अउ धार्मिक गीत-संगीत से जुड़े जानकारी ला सरल ढंग ले पढ़े बर मिलथे।

हमर कोसिस रहिथे कि छत्तीसगढ़ी जस गीत के बोल के संग गीत के जानकारी, अर्थ, परंपरा अउ सांस्कृतिक महत्त्व घलो पाठक मन तक पहुंचय।

YouTube चैनल के बारे म

ये गीत के जानकारी vijaykumarjasgeet यूट्यूब चैनल ले संबंधित हवय। ये चैनल म छत्तीसगढ़ी जस गीत अउ भक्ति संगीत से जुड़े वीडियो देखे बर मिल सकथे। गीत के मूल वीडियो अउ प्रस्तुति बर संबंधित यूट्यूब चैनल ला श्रेय देय जाथे।

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ये पोस्ट म देय गीत के बोल मूल रचनाकार, गायक, संगीतकार, यूट्यूब चैनल अउ संबंधित अधिकारधारी मन के सम्मान बर प्रस्तुत करे गे हवय। अगर कोनो सामग्री ऊपर अधिकार संबंधी आपत्ति या सुधार के जरूरत होही, त संबंधित अधिकारधारी हमन ले संपर्क कर सकथें। CG Jas Lyrics के उद्देश्य छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत, लोकभाषा अउ सांस्कृतिक सामग्री ला जानकारी के रूप म प्रस्तुत करना आय।

वेबसाइट ऑनर – के के पंचारे
CG Jas Lyrics

आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो | विजय कुमार सिंगरौल | छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत


आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत विजय कुमार सिंगरौल

आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो

गीत परिचय

“आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” एक भक्ति भाव ले भरपूर छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत आय। ए गीत म नवदुर्गा दाई के आगमन, भुवना म जोत जलाय के भक्ति, अंगना लिपाय के चौक पुराय के परंपरा अउ कलश, धान, आम के पाना ले पूजा-सजावट के सुंदर चित्रण करे गे हवय।

ए गीत ला विजय कुमार सिंगरौल गाये हवंय अउ गीत के रचना घलो विजय कुमार सिंगरौल के हवय।

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गीत -आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो 

गायक -विजय कुमार सिंगरौल 

गीतकार -विजय कुमार सिंगरौल

शैली -छत्तीसगढ़ी पचरा जस  

यूट्यूब -vijay gana channel 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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मुखड़ा 

आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो ,भुवना मा जोत जलाये हो माँ

मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

 आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो ,भुवना मा जोत जलाये हो माँ

मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

ये मोर मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

ये मोर मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

मईया भुवना मा जोत जलायेव हो माँ

अंतरा -1 

कुटधर अंगना लिपायेव मोर माता वो ,मोतियन चौक पुराये हो माँ

मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

कुटधर अंगना लिपायेव मोर माता वो ,मोतियन चौक पुराये हो माँ 

मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

 ये मोर मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

 ये मोर मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

मईया मोतियन चौक पुराये हो माँ

अंतरा -2 

सोन के कलशा अउ सूपा भर धान वो आमा के पतरी सजाये हो माँ 

मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

सोन के कलशा अउ सूपा भर धान वो आमा के पतरी सजाये हो माँ 

मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ

 ये मोर मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

 ये मोर मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

मईया आमा के पतरी सजाये हो माँ 

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गीत के अरथ

ए गीत के मूल भाव नवदुर्गा दाई के स्वागत अउ भक्ति ऊपर आधारित हवय।

“आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” के भाव ये आय कि नवरात्रि के पावन बेरा आ गे हवय अउ भक्त अपन घर-आंगन म दाई के पूजा बर तैयारी करत हें।

“भुवना मा जोत जलाये हो माँ” म दाई के भक्ति म पवित्र जोत जलाय के भाव हवय। जोत ला श्रद्धा, आस्था अउ उजियारा के प्रतीक मान के पूजा करे जाथे।

“कुटधर अंगना लिपायेव” म घर-आंगन ला साफ-सुथरा करके पूजा बर तैयार करे के परंपरा देखे बर मिलथे।

“मोतियन चौक पुराये” म चौक बनाय के लोक परंपरा के उल्लेख हवय।

“सोन के कलशा अउ सूपा भर धान” म छत्तीसगढ़ के खेती-किसानी अउ अन्न के महत्व झलकथे।

“आमा के पतरी सजाये” म आम के पाना ले पूजा के जगह सजाय के पारंपरिक भाव दिखाई देथे।


🌾 छत्तीसगढ़ी परंपरा

छत्तीसगढ़ के गांव-गांव म नवरात्रि के बेरा देवी-देवता के पूजा के संग घर-आंगन के साफ-सफाई, चौक सजाय, कलश स्थापना अउ जोत जलाय के परंपरा देखे बर मिलथे।

धान छत्तीसगढ़ के प्रमुख अन्न आय, एखर से पूजा के तैयारी म धान के उपयोग के अपन अलग महत्व रहिथे। सूपा, कलश, आम के पाना, जोत अउ चौक जइसन चीज मन छत्तीसगढ़ी लोकजीवन अउ धार्मिक परंपरा के हिस्सा हवंय।

ए पचरा जस गीत एही लोकभावना ला सरल छत्तीसगढ़ी बोली म गीत के रूप देथे।

गीत के विशेषता अउ महत्व

  • गीत म नवदुर्गा दाई के भक्ति के भाव हवय।
  • छत्तीसगढ़ी लोकबोली के सहज उपयोग करे गे हवय।
  • पचरा जस गायन के पारंपरिक भाव दिखाई देथे।
  • जोत जलाय अउ देवी के स्वागत के सुंदर चित्रण हवय।
  • धान, सूपा, कलश अउ आम के पाना जइसन लोक वस्तु के उल्लेख हवय।
  • नवरात्रि के पूजा माहौल बर गीत उपयुक्त हवय।
  • गीत म घर-आंगन अउ देवी पूजा के छत्तीसगढ़ी संस्कृति झलकथे।

✍️ गीतकार के जानकारी — विजय कुमार सिंगरौल

विजय कुमार सिंगरौल ए गीत के गीतकार अउ गायक हवंय। “आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” म उन्हीं के रचनात्मक भाव अउ गायकी के माध्यम ले नवदुर्गा दाई के भक्ति ला छत्तीसगढ़ी पचरा जस के रूप म प्रस्तुत करे गे हवय।

ए गीत म सरल लोकभाषा, देवी भक्ति अउ छत्तीसगढ़ी पूजा परंपरा के मेल देखे बर मिलथे।


🎤 गायक के जानकारी — विजय कुमार सिंगरौल

विजय कुमार सिंगरौल ए गीत के गायक हवंय। ए गीत म छत्तीसगढ़ी पचरा जस के भक्ति भाव ला अपन आवाज के माध्यम ले प्रस्तुत करे गे हवंय। गीत के बोल म मौजूद पूजा, जोत अउ नवदुर्गा के भाव ला गायकी के माध्यम ले श्रोता मन तक पहुंचाय के प्रयास करे गे हवय।


📖 गीत के कथा 

नवरात्रि के पावन बेरा म गांव के माहौल एकदम भक्तिमय हो जाथे। घर-घर म दाई के पूजा बर तैयारी शुरू हो जाथे। बिहान ले घर के अंगना साफ करे जाथे, आंगन ला लिप-पोत के सजाय जाथे अउ पूजा के जगह ला पवित्र बनाय जाथे। एही भक्ति के माहौल ला “आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” गीत म सुंदर ढंग ले प्रस्तुत करे गे हवय।

गीत के शुरुआत म भक्त अपन मन के भाव ले नवदुर्गा दाई ला अपन घर-भुवना म विराजे के निवता देथे। दाई के स्वागत बर भुवना म जोत जलाय जाथे। जोत के उजियारा म भक्त के मन म आस्था अउ भरोसा के भाव जागथे। दाई के पूजा म जलत जोत ला पवित्रता अउ भक्ति के चिन्ह के रूप म देखे जाथे।

दाई के आगमन बर घर के अंगना ला लिपाय-पोताय जाथे। छत्तीसगढ़ी गांव के पुरानी परंपरा म तिहार अउ पूजा के बेरा घर-दुवार के सफाई के विशेष महत्व रहिथे। साफ अंगना म चौक पुराय जाथे। चौक म रंग-बिरंगा आकृति बनाके दाई के स्वागत करे जाथे। गीत म मोतियन चौक के उल्लेख एही सुंदर परंपरा ला सामने लाथे।

आगे गीत म सोन के कलशा अउ सूपा भर धान के बात आथे। धान छत्तीसगढ़ के जीवन अउ किसानी संस्कृति ले गहराई ले जुड़ाय हवय। किसान बर धान खाली अन्न नइ, बल्कि परिवार के जीवन के आधार घलो आय। ए कारण पूजा के तैयारी म धान के उपयोग के अपन धार्मिक अउ सांस्कृतिक महत्व रहिथे।

आम के पाना ले पूजा के जगह सजाय के उल्लेख घलो गीत म मिलथे। आम के पाना, कलश अउ जोत जइसन चीज मन मिलके पूजा के पूरा वातावरण ला मंगलमय बनाथें।

ए गीत म भक्त के मन के एकेच भावना बार-बार उभर के आथे—मईया के स्वागत, पूजा अउ भक्ति। गीत के दोहरावदार पंक्ति जस गायन के विशेषता ला मजबूत करथे अउ सामूहिक रूप ले गावत बेरा श्रोता मन ला संग जोड़थे।

ए पचरा जस के माध्यम ले छत्तीसगढ़ी लोकभाषा, देवी भक्ति अउ गांव के पारंपरिक पूजा-विधि के सुंदर संगम देखे बर मिलथे। गीत सुनत बेरा श्रोता मन ला नवरात्रि के वही भक्तिमय माहौल के अनुभव होथे, जिहां घर-आंगन म जोत जलथे, चौक सजथे अउ दाई के जयकारा गूंजथे।


❓ अक्सर पूछे जाथे

1. “आगे कुंवार बईठारेव नवदुर्गा वो” गीत के गायक कोन हें?

ए गीत के गायक विजय कुमार सिंगरौल हवंय।

2. ए गीत के गीतकार कोन हें?

ए गीत के गीतकार घलो विजय कुमार सिंगरौल हवंय।

3. ए गीत कोन शैली के आय?

ए गीत छत्तीसगढ़ी पचरा जस शैली के आय।

4. ए गीत म काकर भक्ति करे गे हवय?

ए गीत म नवदुर्गा दाई के भक्ति अउ स्वागत के भाव हवय।

5. गीत म जोत जलाय के का भाव हवय?

जोत जलाय के भाव दाई के प्रति श्रद्धा, आस्था अउ भक्ति ले जुड़ाय हवय।

6. गीत म कऊन-कऊन पूजा सामग्री के उल्लेख हवय?

गीत म कलशा, धान, सूपा अउ आम के पतरी के उल्लेख हवय।

7. ए गीत ला कहां सुन सकथन?

ए गीत के यूट्यूब चैनल vijay gana channel म उपलब्ध हवय।

8. ए गीत म छत्तीसगढ़ी संस्कृति कइसे दिखथे?

अंगना लिपाय, चौक पुराय, धान, सूपा, कलश अउ आम के पाना जइसन परंपरागत चीज के उल्लेख ले छत्तीसगढ़ी संस्कृति झलकथे।


🔗 जस गीत 

  1. जगमग जगमग दीया बरत हे
  2. हे मैया माता सेवा मा चले आबे
  3. चंदन झूलना मां झूलना झूले मोर मईया
  4. पानी रे पानी रे पानी बरसे पानी
  5. तुम झुलव महामाई — पचरा जस गीत
  6. कंकालिन मोरे मया हो चंडालिन मोरे माया
  7. तोर आरती उतारन मोर दुर्गा मईया

बर के डारा लहसगे | पचरा जस गीत/नारी शक्ति सेवा मंडली

बर के डारा लहसगे / पचरा जस गीत / नारी शक्ति सेवा मंडली मोहड़

बर के डारा लहसगे छत्तीसगढ़ी जस गीत नारी शक्ति सेवा मंडली मोहड़

गीत परिचय

बर के डारा लहसगे पीपर के डारा लहसगे एक सुंदर छत्तीसगढ़ी जस गीत आय, जेमां बर, पीपर अउ लिमुआ के डारा के माध्यम ले मया, भक्ति अउ माता के महिमा के बखान करे गे हवय। ये जस गीत नारी शक्ति सेवा मंडली मोहड़ के जस गायन परंपरा ले जुड़ाय हवय।

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गीत - बर के डारा लहसगे 

गायिका -

गीतकार -

यूट्यूब -नारी शक्ति सेवा मंडली 

जस मण्डली -नारी शक्ति सेवा मंडली मोहड़ 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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बर के डारा लहसगे पीपर के डारा लहसगे  

बर के डारा लहसगे पीपर के डारा लहसगे  

उड़ान - लिमुआ के डारा घनघोर मोरे माया 

बर के डारा लहसगे पीपर के डारा लहसगे  

बर के डारा लहसगे पीपर के डारा लहसगे  

अंतरा -1 

बर मा बिराजे ब्रम्हा ,पीपर मा परबतिया -2

पीपर मा परबतिया हो मईया पीपर मा परबतिया 

पीपर मा परबतिया हो मईया पीपर मा परबतिया

उड़ान - लिमुआ के डारा घनघोर मोरे माया 

बर के डारा लहसगे पीपर के डारा लहसगे  

बर के डारा लहसगे पीपर के डारा लहसगे

अंतरा -2 

बर पीपर लिमुआ के तैहा सुख दाई  -2

तैहा सुख दाई  हो मईया तैहा सुख दाई 

तैहा सुख दाई  हो मईया तैहा सुख दाई 

उड़ान - लिमुआ के रस घोर पिये मोरे माया 

बर के डारा लहसगे पीपर के डारा लहसगे  

    बर के डारा लहसगे पीपर के डारा लहसगे      

अंतरा -3 

बर के पूजा करबो पीपर के पूजा करबो  -2

पीपर के पूजा करबो हो मईया पीपर के पूजा करबो

पीपर के पूजा करबो हो मईया पीपर के पूजा करबो

उड़ान - लिमुआ चघाये बईगा तोर बर माया 

बर के डारा लहसगे पीपर के डारा लहसगे  

बर के डारा लहसगे पीपर के डारा लहसगे  

बर के डारा लहसगे पीपर के डारा लहसगे  

      बर के डारा लहसगे पीपर के डारा लहसगे

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गीत के अर्थ

ये गीत मं बर, पीपर अउ लिमुआ के डारा के संग माता के भक्ति के भाव ला जोड़े गे हवय। गीतकार कहिथे कि बर के डारा लहकथे, पीपर के डारा लहकथे अउ चारों डहर भक्ति के माहौल बने रहिथे।

बर मं ब्रम्हा अउ पीपर मं परबतिया के उल्लेख करके पवित्रता अउ देवी-देवता के प्रति आस्था ला बताय गे हवय। गीत मं माता ला सुख देय्या माने गे हवय। भक्त अपन श्रद्धा ले बर अउ पीपर के पूजा करे के बात कहिथे।

ये गीत के मूल भाव माता के भक्ति, प्रकृति के सम्मान, गांव के लोकविश्वास अउ मया आय।

छत्तीसगढ़ी परंपरा

छत्तीसगढ़ मं बर अउ पीपर के पेड़ ला सिरिफ पेड़ नइ, बल्कि लोकआस्था अउ परंपरा के हिस्सा माने जाथे। गांव के पुराना बर-पीपर के छांव मं मनखे मन बइठके बातचीत करथें, पूजा-पाठ करथें अउ कई जगह देवस्थान घलो बने रहिथे।

जस गीत मन एही लोकजीवन ले जनम लेथें। गायक मंडली मन गांव के बोली-बानी, लोकविश्वास अउ देवी-देवता के महिमा ला अपन सुर मं रखके अगली पीढ़ी तक पहुंचाथें। बर के डारा लहसगे घलो एही छत्तीसगढ़ी लोकभक्ति के सुंदर झलक दिखाथे।

गीत के विशेषता अउ महत्तम

  1. गीत मं छत्तीसगढ़ी लोकभाषा के सहज उपयोग होय हवय।
  2. बर अउ पीपर के पवित्रता ला गीत के केंद्र मं रखे गे हवय।
  3. माता के भक्ति अउ श्रद्धा के भाव साफ दिखाई देथे।
  4. गीत के बोल गांव-गंवई के लोकजीवन ले जुड़े हवय।
  5. जस मंडली के सामूहिक गायन बर ये गीत उपयुक्त भाव रखथे।
  6. गीत मं प्रकृति अउ भक्ति के सुंदर मेल देखे बर मिलथे।
  7. सरल शब्द होय के सेती आम श्रोता मन आसानी ले समझ सकथें।
  8. छत्तीसगढ़ी जस परंपरा ला जिंदा रखे मं अइसन गीत मन के अपन महत्तम हे।

अक्सर पूछे जाथे

1. बर के डारा लहसगे गीत के नाम का आय?

ये जस गीत के नाम बर के डारा लहसगे आय।

2. बर के डारा लहसगे गीत कोन गाये हवय?

उपलब्ध जानकारी मं गायक/गायिका के नाम नइ मिलय। गीत नारी शक्ति सेवा मंडली के यूट्यूब चैनल ले जुड़ाय हवय।

3. ये गीत कोन जस मंडली के आय?

ये गीत नारी शक्ति सेवा मंडली मोहड़ के जस मंडली ले जुड़ाय हवय।

4. बर के डारा लहसगे गीत मं काकर महिमा करे गे हवय?

गीत मं माता के भक्ति संग बर, पीपर अउ लिमुआ के पवित्रता अउ लोकविश्वास के भाव देखे बर मिलथे।

5. ये गीत मं बर अउ पीपर के का महत्तम हे?

छत्तीसगढ़ी लोकपरंपरा मं बर अउ पीपर ला पवित्र पेड़ मानके पूजा अउ सम्मान करे जाथे।

6. बर के डारा लहसगे के लिरिक्स कहां पढ़े जा सकथे?

ये गीत के पूरा बोल CG Jas Lyrics मं पढ़े जा सकथे।

7. गीत के गीतकार कोन आय?

उपलब्ध जानकारी मं गीतकार के नाम नइ देय गे हवय।

8. ये गीत के यूट्यूब चैनल कोन आय?

ये गीत नारी शक्ति सेवा मंडली यूट्यूब चैनल ले जुड़ाय हवय

अउ जस गीत घलो पढ़व

  1. डोंगरी पहाड़ म हा
  2. देवी के सिंगारे बर
  3. मोर दुर्गा मईया
  4. माई के दरस बर हां 
  5. मोरो मन हुलसे
  6. माटी के पुतरी अम्बा 
  7. देवी पार्वती हा
  8. बम्लाई ला सुमिरव 
  9. हनुमान जनम ले
  10. जगजोत जलत हे

..यूट्यूब चैनल के बारे मं

नारी शक्ति सेवा मंडली के यूट्यूब चैनल ले जुड़े ये जस गीत मं छत्तीसगढ़ी भक्ति, जस गायन अउ मंडली परंपरा के झलक देखे बर मिलथे। गीत के वीडियो अउ मूल प्रस्तुति देखे बर दर्शक संबंधित यूट्यूब चैनल ला जरूर देख सकथें।

CG Jas Lyrics के बारे मं

CG Jas Lyrics छत्तीसगढ़ी जस गीत, देवी-देवता के भक्ति गीत अउ छत्तीसगढ़ी लोकभक्ति के गीत के बोल ला एके जगह मं पढ़े के सुविधा देय के प्रयास करथे। हमर कोसिस रहिथे कि छत्तीसगढ़ी बोली, लोकगीत अउ जस गायन के परंपरा इंटरनेट मं घलो सुरक्षित रहय अउ नवा पीढ़ी तक पहुंचय।

वेबसाइट ऑनर – के के पंचारे


तरी हरी ना मोर नाना भवानी मोर – पचरा जस गीत लिरिक्स/comedy dost

तरी हरी ना मोर नाना भवानी मोर – पूरा पचरा जस गीत लिरिक्स

री हरी ना मोर नाना भवानी मोर पचरा जस गीत

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गीत - तरी हरी ना मोर 

गीत लेबल -पचरा जस 

यूट्यूब - comedy dost

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे

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गीत के बारे में 

“तरी हरी ना मोर नाना भवानी मोर” छत्तीसगढ़ी लोकभक्ति परंपरा के रंग में गाया जाने वाला पचरा जस गीत है। इसमें माता भवानी की भक्ति के साथ भगवान गणेश और हनुमान जी का स्मरण किया गया है।

गीत में प्रश्न और उत्तर की लोकशैली दिखाई देती है। जैसे गणेश देवता किसके बेटा हैं और हनुमान जी किसके बेटा हैं, वे कहाँ से आते हैं और किस प्रकार आते हैं—इन बातों को गीत के माध्यम से भक्तिमय ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

आगे गीत में पांडवों और श्रीकृष्ण भगवान का भी स्मरण किया गया है। इसी कारण यह गीत केवल देवी स्तुति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हिंदू धार्मिक परंपरा के अनेक पूजनीय पात्रों को एक साथ स्मरण करता है।

ये भंग भंग भंग हां मोर बाहरा खार मा | राकेश तिवारी /छत्तीसगढ़ी जस गीत | CG Jas Lyrics

ये भंग भंग भंग मोर बाहरा खार मा 

ये भंग भंग भंग हां मोर बाहरा खार मा छत्तीसगढ़ी जस गीत

गीत के बोल

"ये भंग भंग भंग मोर बाहरा खार मा” एक रहस्यमय अउ पारंपरिक रंग वाले छत्तीसगढ़ी जस गीत के रूप म प्रस्तुत करे गे हे। गीत म गांव-गंवई के लोकविश्वास, बाहरा-खार, भंग के प्रतीक, डरावना वातावरण अउ लोकभाषा के सुंदर मेल दिखाई देथे।

गीत के बोल म रात के सुनसान माहौल, भटकटिया, परेतिन, मशान अउ रहस्यमय लोक-कल्पना के चित्रण करे गे हे। ए गीत के भाषा सरल, ग्रामीण अउ लोकगीत के भाव ले जुड़ाय रखे गे हे।

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गीत -भंग भंग भंग हां 

गायक -राकेश तिवारी 

गीतकार -राकेश तिवारी 

यूट्यूब -राकेश तिवारी jeora 

वेबसाइट ऑनर - के के पंचारे 

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मुखड़ा 

 ये भंग भंग भंग हां मोर बाहरा खार मा 

बरय टोनही भंग भंग भंग हां 

मोर बाहरा खार मा 

बरय टोनही भंग भंग भंग हां 

अंतरा -1 

भटकटिया के जरी ला चाटय लाल भंगा भंग बरय 

मुँह तोरे विकराल दिखय देखत जियरा डरय -2

उड़ान -बिन मुड़ी के तै संग में चढ़े भंग भंग भंग हां 

मोर बाहरा खार मा बरय टोनही भंग भंग भंग हां  

अंतरा -2  

घुघवा बनके बइठे परेतिन सुते मनखे ल ताकत 

मनखे के मुँह म सुध ओरमाके सपसप लहू ला चुहकत 

उड़ान -अढाहिया खड़ी तोर मंतर हावय भंग भंग भंग हां

मोर बाहरा खार मा बरय टोनही भंग भंग भंग हां  

अंतरा -3 

चटिया मटिया मरी मशान आये तोर संगवारी 

लुगरा हेरके चुंदी छरियाके निकलत भूख पियारी 

उड़ान - अरे ये टोनही ले मोला बचाले भंग भंग भंग हां

मोर बाहरा खार मा बरय टोनही भंग भंग भंग हां

गीत के अर्थ

ए गीत म एक डरावना अउ रहस्यमय लोक-दृश्य के वर्णन करे गे हे। गीत के गायक अपन आसपास के बाहरा-खार के वातावरण म दिखाई देय रहस्यमय चीज मन के कल्पनात्मक वर्णन करथे।

“भंग भंग” के दोहराव गीत म रहस्य अउ डर के भाव ला अउ गहरा करथे। भटकटिया, परेतिन, मशान अउ सुनसान जगह के उल्लेख ले एक लोक-कथा जइसन वातावरण बनथे।

गीत के अंतिम हिस्सा म गायक डर के भाव ले “ये टोनही ले मोला बचाले” कहिथे। ए भाव गीत ला लोकविश्वास अउ ग्रामीण जीवन के कल्पनाशील पक्ष ले जोड़थे।  

गीत के विशेषता

1.गीत के भाषा म ठेठ छत्तीसगढ़ी लोकबोली के स्वाद मिलथे।
2.गीत म रहस्य अउ रोमांच के भाव मजबूत हे।
3.“भंग भंग भंग हां” के दोहराव गीत के मुख्य पहचान बनथे।
4.बाहरा-खार अउ गांव के लोक वातावरण के चित्रण करे गे हे।
5.गीत के अंतरा म अलग-अलग रहस्यमय दृश्य के कल्पना करे गे हे।
6.गीत म लोकविश्वास अउ पारंपरिक कल्पना के प्रभाव दिखाई देथे।
7.छत्तीसगढ़ी लोक-संस्कृति के ग्रामीण शब्दावली के उपयोग करे गे हे।

गायक के जीवनी – राकेश तिवारी

राकेश तिवारी छत्तीसगढ़ी संगीत के क्षेत्र म अपन आवाज अउ गीत रचना के माध्यम ले योगदान देथें। उनकर प्रस्तुति म छत्तीसगढ़ी बोली के सहजपन अउ लोकगीत के भाव ला महत्व मिले हे।

उनकर यूट्यूब चैनल “राकेश तिवारी जेओरा” के माध्यम ले छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत के सामग्री श्रोता मन तक पहुंचत हे।

“ये भंग भंग भंग हां मोर बाहरा खार मा” गीत म रहस्य अउ लोकभावना ला आवाज के माध्यम ले प्रस्तुत करे गे हे।

गीतकार के जीवनी – राकेश तिवारी

राकेश तिवारी छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत के क्षेत्र ले जुड़े गीतकार अउ गायक के रूप म अपन रचना प्रस्तुत करथें। उनकर गीत म छत्तीसगढ़ी बोली, गांव के वातावरण, लोकजीवन अउ पारंपरिक भाव के झलक दिखाई देथे।

उनकर रचनात्मक शैली म सरल छत्तीसगढ़ी शब्द के उपयोग देखे बर मिलथे, जेन ह गांव-गंवई के श्रोता मन ला आसानी ले समझ म आथे। “ये भंग भंग भंग हां मोर बाहरा खार मा” जइसन गीत म लोककल्पना, रहस्य अउ ग्रामीण परिवेश के मेल दिखाई देथे।

राकेश तिवारी के गीत मन म छत्तीसगढ़ी लोकभाषा के संरक्षण अउ लोकसंगीत के भाव ला आगे बढ़ाय के प्रयास दिखाई देथे।