MALNIYA GUTH DENA JAS GEET /MASTER SUNIL SIHORE मलनियां गूंथ देना जस गीत
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गीत- मलनिया गूथ देना वो
गायक-सुनील सिहोरे
गीतकार-सुनील सिहोरे
संगीत- वासु साहू
म्यूज़िक कंपनी - मास्टर सुनील सिहोरे
वेबसाइट ऑनर - कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
मलनिया गूथ देना वो मोर दुर्गा दाई बर फुलवा के हार -2
उड़ान-,मोर दुर्गा दाई बर,मोर शीतला माई बर
मोर महमाई बर फुलवा के हार --------------------
मलनिया, ये मलनिया , मलनिया गूथ देना वो मोर दुर्गा दाई बर फुलवा के हार -2
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काहेन फूल के अजरा गजरा काहेन फूल हार वो-2
काहेन फूल के माथ मुकुटिया, सोलह वो सिंगार वो
मलनिया, ये मलनिया , मलनिया गूथ देना वो मोर दुर्गा दाई बर फुलवा के हार -2
उड़ान-,मोर दुर्गा दाई बर,मोर शीतला माई बर
मोर महमाई बर फुलवा के हार --------------------
मलनिया, ये मलनिया , मलनिया गूथ देना वो मोर दुर्गा दाई बर फुलवा के हार -2
//2//
मोगरा फूल के अजरा गजरा चमेली फूल हार वो-2
सेवती फूल के माथ मुकुटिया, सोलह वो सिंगार वो
उड़ान-,मोर दुर्गा दाई बर,मोर शीतला माई बर
मोर महमाई बर फुलवा के हार --------------------
मलनिया, ये मलनिया , मलनिया गूथ देना वो मोर दुर्गा दाई बर फुलवा के हार -2
//3//
कौने माई बर अजरा गजरा कौने माई बर हार वो-2
कौने माई बर माथ मुकुटिया, सोलह वो सिंगार वो
उड़ान-,मोर दुर्गा दाई बर,मोर शीतला माई बर
मोर महमाई बर फुलवा के हार --------------------
मलनिया, ये मलनिया , मलनिया गूथ देना वो मोर दुर्गा दाई बर फुलवा के हार -2
//4//
दुर्गा माई बर अजरा गजरा कौने शीतला बर हार वो-2
महामाई बर माथ मुकुटिया, सोलह वो सिंगार वो
उड़ान-,मोर दुर्गा दाई बर,मोर शीतला माई बर
मोर महमाई बर फुलवा के हार --------------------
मलनिया, ये मलनिया , मलनिया गूथ देना वो मोर दुर्गा दाई बर फुलवा के हार -2
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माया के दरबार सेउक सेवा मा आये
इतना के बेरिया कउन देव ल सुमिरव
माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला बनाव
कंकालिन मोरे माया वो चण्डालिन मोरे माया
गीत के अर्थ (Arth)
ए जसगीत म भक्तिन मलनिया (फूल गूंथई वाली) ल कहिथे के मोर दुर्गा दाई, शीतला माई अउ महामाई बर सुंदर-सुंदर फुलवा के हार बना दे। गीत म मोगरा, चमेली, सेवती जइसने फूल के नाम लेके माता के सिंगार के बात करे गे हे।
भक्त मन चाहत हें के माता के माथे मुकुट, गजरा अउ सोलह श्रृंगार होवय। ये गीत म माता के प्रति सच्चा भक्ति भाव, सेवा अउ सजावट के महत्व बताय गे हे।
इहां भक्त अपन श्रद्धा ले कहिथे –
माता के पूजा सिरिफ आरती ले नई, बल्कि फूल के हार, गजरा अउ सिंगार ले माता ल प्रसन्न करे जाथे।
🌼 गीत के विशेषता (Visheshta)
ये एक पारंपरिक छत्तीसगढ़ी जसगीत हवय
गीत म दुर्गा दाई, शीतला माई अउ महामाई तीनों के महिमा
फूल के सिंगार के सुंदर वर्णन
नवरात्रि, जंवारा अउ जसगायन म गाये जाथे
सरल अउ भक्ति से भरपूर बोल
महिला मंडली म जादा गाये जाथे
माता सेवा अउ सजावट के महत्व बताथे
मोगरा, चमेली, सेवती फूल के उल्लेख
सोलह श्रृंगार के परंपरा
भक्त अउ माता के प्रेम दर्शाथे
📖 कथा
एक गांव म नवरात्रि के समय बहुत धूम रहिस। गांव के बीच म दुर्गा दाई के छोटकुन मंदिर रहिस। हर साल गांव के महिलामन जंवारा बोके माता के सेवा करथें।
ए साल गांव के एक बुजुर्ग दाई कहिस –
"ए बार माता के विशेष सिंगार करना हे"
तब गांव के महिलामन सोचिन के माता ल फुलवा के हार चढ़ाय जाही। गांव म एक मलनिया रहिस जऊन बहुत सुंदर फूल के गजरा बनाथे। सबो महिलामन ओकर घर गिन।
तब सबो मिलके गाइन –
"मलनिया गूथ देना वो मोर दुर्गा दाई बर फुलवा के हार"
मलनिया ह मुस्कुराइस अउ कहिस –
"कऊन कऊन माई बर हार बनाना हे?"
तब महिलामन कहिन –
दुर्गा माई बर
शीतला माई बर
महामाई बर
मलनिया ह बगिया ले मोगरा फूल लाय
चमेली फूल तोरिस
सेवती फूल जमा करिस
फेर वो गजरा बनाय लागिस।
माथ मुकुटिया बनाय गिस
गले के हार बनाय गिस
हाथ के फूल बनाय गिस
नवरात्रि के पहला दिन मंदिर सजाय गिस।
माता के मूर्ति ल फूल के हार पहिराय गिस।
पूरा गांव महक उठिस।
जंवारा निकले के समय महिलामन फेर गाइन –
मोर दुर्गा दाई बर
मोर शीतला माई बर
मोर महामाई बर फुलवा के हार
गांव के लोगन मन कहिन –
ए साल माता बहुत प्रसन्न दिखत हे
कहिनी हवय के ओ साल गांव म बरसात बढ़िया होइस
फसल लह लहाय गिस
कोनो बीमारी नई आइस
सबो मन कहिन –
माता के सिंगार अउ भक्ति के फल मिलिस
तब ले हर साल गांव म ये जसगीत गाये जाथे
अउ मलनिया के याद करे जाथे
ये गीत बताथे के माता के सेवा मन ले करे जाथे
फूल के हार सिरिफ सजावट नई
भक्ति के प्रतीक हवय



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