सेवा में आये हो – ब्रम्हा सेवा मा आये हो | सूरज सुनील पचरा जस गीत

सेवा में आये हो ब्रम्हा सेवा मा आये हो छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत

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गीत -सेवा में आये हो 

गायक -सूरज सुनील 

शैली -पचरा जस 

यूट्यूब -vijaykumarjasgeet 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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गीत के बारे में

“सेवा में आये हो” एक सुंदर छत्तीसगढ़ी पचरा जस गीत आय। ये गीत म ब्रम्हा जी के सेवा भाव, कमंडल, झांझ-मजीरा, करताले, बांसुरी अउ जयमाला के माध्यम ले भक्ति के सुंदर चित्रण करे गे हवय।

गीत के मुखड़ा म “ब्रम्हा सेवा मा आये हो” के भाव बार-बार आवत हवय, जेन ले भक्ति अउ सेवा के भावना अउ गहिरा हो जाथे। अलग-अलग अंतरा म झांझ-मजीरा, करताले, बांसुरी अउ जयमाला के बारे म सवाल-जवाब के रूप म गीत आगे बढ़थे।

राम-लखन, कृष्ण-राधा जइसन धार्मिक पात्र मन के उल्लेख ले गीत के भक्ति भाव अउ सुंदर बन जाथे। पचरा जस के पारंपरिक गायकी म ये गीत भक्ति कार्यक्रम, जस मंडली अउ धार्मिक आयोजन म गाये बर उपयुक्त हवय।

मुखड़ा 

ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

अंतरा -1 

काहेन के तोर झांझ मजीरा ,काहेन के करताले 

काहेन के तोर झांझ मजीरा ,काहेन के करताले 

काहेन के करताले हो माता काहेन के करताले

काहेन के करताले हो माता काहेन के करताले

उड़ान - काहेन के तोर बेन बांसुरी काहेन के जयमाला

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो  

अंतरा -2  

कांच पीतल के तोर झांझ मजीरा ,कठवा के करताले 

कांच पीतल के तोर झांझ मजीरा ,कठवा के करताले 

कठवा के करताले हो माता कठवा के करताले 

कठवा के करताले हो माता कठवा के करताले 

उड़ान - हरा बांस के बेन बांसुरी तुलसी  के जयमाला

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो  

अंतरा -3   

कौन बजावे तोर झांझ मजीरा ,कौन बजावे करताले 

कौन बजावे तोर झांझ मजीरा ,कौन बजावे करताले 

कौन बजावे करताले हो माता कौन बजावे करताले 

कौन बजावे करताले हो माता कौन बजावे करताले 

उड़ान - कौन बजावे बेन बांसुरी कौन धरे यमाला

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

अंतरा -4   

राम  बजावे तोर झांझ मजीरा ,लखन बजावे करताले 

राम  बजावे तोर झांझ मजीरा ,लखन बजावे करताले 

लखन बजावे करताले  हो माता लखन बजावे करताले 

लखन बजावे करताले  हो माता लखन बजावे करताले 

उड़ान - कृष्ण बजावे तोर बेन बांसुरी राधा धरे जयमाला

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

 ब्रम्हा सेवा मा आये हो, ब्रम्हा सेवा मा आये हो 

धर के कमंडल ब्रम्हा सेवा मा आये हो

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गीत के अर्थ

ये गीत के मुख्य भाव सेवा, भक्ति अउ धार्मिक समर्पण आय। “ब्रम्हा सेवा मा आये हो” के माध्यम ले भगवान के सेवा म पहुंचना अउ पूजा-अर्चना के भाव ला प्रकट करे गे हवय।

गीत म झांझ-मजीरा, करताले, बांसुरी अउ जयमाला जइसन धार्मिक साधन अउ पूजा के सामग्री के उल्लेख मिलथे। ये मन भक्ति के वातावरण ला दर्शाथें।

दूसर अंतरा म कांच, पीतल, कठवा अउ हरा बांस के उल्लेख करके पारंपरिक पूजा अउ लोक संस्कृति के झलक दिखाय गे हवय।

अंतिम अंतरा म राम-लखन अउ कृष्ण-राधा के उल्लेख करके गीत म रामायण अउ कृष्ण भक्ति के भाव ला जोड़े गे हवय।

छत्तीसगढ़ी परंपरा

छत्तीसगढ़ के गांव-गंवई म जस गीत अउ पचरा के अपन अलग महत्त्व हवय। गांव के धार्मिक आयोजन, नवरात्रि, माता सेवा, जस मंडली अउ देवी-देवता के पूजा के बेरा म ये किसिम के गीत गाये जाथे।

पचरा जस म सवाल-जवाब, दोहराव, झांझ-मजीरा, करताले अउ सामूहिक गायन के परंपरा देखे बर मिलथे। ये गीत घलो ओही लोक परंपरा के सुंदर उदाहरण आय।

गीत के विशेषता अउ महत्त्व

  1. गीत म भक्ति अउ सेवा के भाव प्रमुख हवय।
  2. पचरा जस के पारंपरिक अंदाज देखे बर मिलथे।
  3. झांझ-मजीरा अउ करताले जइसन लोक वाद्य के उल्लेख हवय।
  4. बांसुरी अउ जयमाला के माध्यम ले भक्ति के चित्रण करे गे हवय।
  5. राम-लखन अउ कृष्ण-राधा के धार्मिक संदर्भ गीत ला अउ सुंदर बनाथे।
  6. गीत के दोहराव वाला मुखड़ा आसानी ले याद रहिथे।
  7. जस मंडली के सामूहिक गायन बर गीत उपयोगी हो सकथे।

गीतकार के जानकारी

ये गीत के गीतकार के नाम के पक्का जानकारी उपलब्ध नइ हे। एहू से गीतकार के नाम के जगह गलत जानकारी जोड़े के बजाय जानकारी उपलब्ध नइ हे लिखे गे हवय। अगर मूल गीत के गीतकार के सही जानकारी मिलथे, त इहाँ बाद म जोड़े जा सकथे।

गायक के जीवनी – सूरज सुनील

सूरज सुनील के स्वर म प्रस्तुत ये गीत छत्तीसगढ़ी पचरा जस के भक्ति भाव ला सामने लाथे। गीत म गायक के आवाज के माध्यम ले सेवा, भक्ति अउ धार्मिक भावना ला लोक गायकी के अंदाज म प्रस्तुत करे गे हवय।

सूरज सुनील के ये प्रस्तुति म छत्तीसगढ़ी जस गीत के पारंपरिक रंग देखे बर मिलथे। “सेवा में आये हो” जइसन गीत छत्तीसगढ़ के धार्मिक अउ सांस्कृतिक माहौल म भक्ति संगीत के महत्त्व ला दर्शाथे।

गीत के कथा

“सेवा में आये हो” गीत के कथा के केंद्र म भगवान के सेवा अउ भक्ति के भाव हवय। गीत के शुरुआत एक भक्तिमय दृश्य ले होथे, जिहां ब्रम्हा जी कमंडल धरके सेवा म आये हवय। ये दृश्य ला लोकभक्ति के सरल भाषा म प्रस्तुत करे गे हवय।

गीत म भक्त के मन म एक सवाल उठथे कि भगवान के सेवा म कऊन-कऊन चीज के उपयोग होथे। झांझ-मजीरा कऊन बजाही, करताले कऊन बजाही, बांसुरी कऊन बजाही अउ जयमाला कऊन धरी—ये सवाल गीत ला संवाद जइसन रूप देथे।

पहिली कड़ी म झांझ-मजीरा अउ करताले के बात आथे। ओकर बाद गीत के भाव अउ गहिरा होथे अउ अलग-अलग सामग्री के उल्लेख करे जाथे। कांच अउ पीतल के झांझ-मजीरा, कठवा के करताले, हरा बांस के बांसुरी अउ तुलसी के जयमाला जइसन चीज मन के माध्यम ले गांव के पारंपरिक पूजा-पाठ के चित्र उभरथे।

गीत के अगला हिस्सा म सवाल के जवाब खोजे के कोशिश करे गे हवय। कऊन वाद्य बजाही अउ कऊन जयमाला धरी—ये बात ला धार्मिक पात्र मन के संग जोड़े गे हवय। ये ढंग ले गीत म राम-लखन अउ कृष्ण-राधा के संदर्भ आथे।

राम झांझ-मजीरा बजाथें अउ लखन करताले बजाथें, अइसनेच कृष्ण बांसुरी बजाथें अउ राधा जयमाला धरथें। ये धार्मिक कल्पना गीत ला भावपूर्ण बनाथे।

पूरा गीत म “ब्रम्हा सेवा मा आये हो” के मुखड़ा बार-बार दोहराय गे हवय। ये दोहराव जस गायकी के खास अंदाज आय, जेन ले मंडली म गावत बेरा संगवारी मन घलो आसानी ले साथ दे सकथें।

ए गीत के मूल संदेश सेवा, भक्ति, समर्पण अउ धार्मिक एकता के भाव ले जुड़थे। गीत म बड़े-बड़े शब्द के बजाय गांव-गंवई के सहज बोली के उपयोग करे गे हवय। एही से ये गीत आम श्रोता मन बर आसानी ले समझ म आ जाथे।

छत्तीसगढ़ी लोक परंपरा म अइसने गीत सिरिफ मनोरंजन बर नइ, बल्कि धार्मिक भावना अउ सांस्कृतिक पहचान ला जिंदा रखे म घलो योगदान देथें। “सेवा में आये हो” गीत म पचरा जस के गायकी, धार्मिक पात्र, लोक वाद्य अउ भक्ति भाव के सुंदर मेल देखे बर मिलथे।

अक्सर पूछे जाथे – FAQ

1. “सेवा में आये हो” गीत के गायक कोन हवय?

“सेवा में आये हो” गीत ला सूरज सुनील ह गाये हवय।

2. ये गीत के शैली का हवय?

ये गीत छत्तीसगढ़ी पचरा जस शैली के हवय।

3. “सेवा में आये हो” गीत के यूट्यूब चैनल कोन हवय?

ये गीत vijaykumarjasgeet यूट्यूब चैनल म उपलब्ध हवय।

4. गीत म कऊन धार्मिक पात्र मन के नाम आथे?

गीत म ब्रम्हा, राम, लखन, कृष्ण अउ राधा के धार्मिक संदर्भ आथे।

5. गीत म कऊन-कऊन वाद्य के उल्लेख हवय?

गीत म झांझ-मजीरा, करताले अउ बेन बांसुरी के उल्लेख हवय।

6. गीत म जयमाला किसके संग जोड़े गे हवय?

गीत के अलग-अलग भाव म तुलसी के जयमाला अउ राधा के जयमाला के उल्लेख मिलथे।

7. ये गीत के गीतकार कोन हवय?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार गीतकार के नाम नइ मिल पाय हवय।

8. ये गीत कऊन कार्यक्रम म गाये जा सकथे?

ये गीत जस मंडली, धार्मिक आयोजन, माता सेवा अउ भक्ति कार्यक्रम म गाये जा सकथे।

9. “सेवा में आये हो” गीत कहां पढ़े जा सकथे?

ये गीत के बोल CG Jas Lyrics म पढ़े जा सकथे।

10. ये गीत के मुख्य भाव का आय?

गीत के मुख्य भाव सेवा, भक्ति, समर्पण अउ धार्मिक भावना आय।

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CG Jas Lyrics के बारे म

CG Jas Lyrics छत्तीसगढ़ी जस गीत, पचरा जस, माता सेवा गीत अउ पारंपरिक भक्ति गीत के बोल ला एके जगह म पहुंचाय के कोसिस करे वाला वेबसाइट आय। इहाँ छत्तीसगढ़ी लोकभाषा अउ धार्मिक गीत-संगीत से जुड़े जानकारी ला सरल ढंग ले पढ़े बर मिलथे।

हमर कोसिस रहिथे कि छत्तीसगढ़ी जस गीत के बोल के संग गीत के जानकारी, अर्थ, परंपरा अउ सांस्कृतिक महत्त्व घलो पाठक मन तक पहुंचय।

YouTube चैनल के बारे म

ये गीत के जानकारी vijaykumarjasgeet यूट्यूब चैनल ले संबंधित हवय। ये चैनल म छत्तीसगढ़ी जस गीत अउ भक्ति संगीत से जुड़े वीडियो देखे बर मिल सकथे। गीत के मूल वीडियो अउ प्रस्तुति बर संबंधित यूट्यूब चैनल ला श्रेय देय जाथे।

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