मोर दुर्गा मईया/avm gana/सुरेश नायक, प्रीतम भूवार्य
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गीत - मोर दुर्गा मईया
गायक- सुरेश नायक,प्रीतम भूवार्य
म्यूजिक कंपनी - Avm Gana
वेबसाईट ऑनर - कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
आवत हावव तोर दुवारी मोर दुर्गा मईया अचरा लमाके झोंकी लेवें हो मां
// 1 //
चारों कोती जय जय कारा काटा के झूलना म झूले -2
उड़ान-परब जवारा तोर झूले ए---मोर दुर्गा मईया
अचरा लमाके झोंकी लेबे हो मां
आवत हावव तोर दुवारी मोर दुर्गा मईया अचरा लमाके झोंकी लेबे हो मां
// 2 //
रहीथस तैहा गांव खमरिया दुरुग तोर जिला-2
उड़ान-घरम माटी रिसाग़े---मोर दुर्गा मईया
अचरा लमाके झोंकी लेबे हो मां
आवत हावव तोर दुवारी मोर दुर्गा मईया अचरा लमाके झोंकी लेबे हो मां
// 3 //
तोरसहाराजीयत रहीहु करहूंमोर सहाई-2
उड़ान-भूले बिसरे ला माफी देहु---मोर दुर्गा मईया
अचरा लमाके झोंकी लेवें हो मां
आवत हावव तोर दुवारी मोर दुर्गा मईया अचरा लमाके झोंकी लेबे हो मां
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गीत के अर्थ (सरल छत्तीसगढ़ी में)
ये जसगीत म भक्त अपन मया अउ भक्ति के भाव ले माता दुर्गा के दुवारी म पहुंचत हे। वो कहिथे के — “हे मईया, मैं तोर द्वार म आथों, मोला अपन अंचरा (आंचल) ले आशीर्वाद दे, मोर ऊपर कृपा कर।”
गीत म आगे बताय गे हे के चारों दिशा म माता के जय-जयकार होवत हे, जवारा झूलत हे, अउ पूरा वातावरण भक्ति म डूबे हे।
दूसर अंतरा म गांव-खमरिया (दुर्ग जिला) के उल्लेख हे, जेन बताथे के माता हर हर जगह म विराजमान हे, अउ माटी तक पवित्र हो जाथे।
तीसर अंतरा म भक्त अपन गलती बर माफी मांगथे अउ कहिथे — “मईया, मोला सहारा दे, मैं भूल-चूक कर देथों, मोला माफ कर।”
👉 कुल मिलाके, ये गीत भक्ति, समर्पण अउ माफी के भाव ला दर्शाथे।
🔷 विशेषता (Features)
✅ ये जसगीत म सच्चा भक्ति भाव झलकथे
✅ नवरात्रि म गाये जाने वाला लोकप्रिय जसगीत
✅ सरल अउ बोलचाल के छत्तीसगढ़ी भाषा
✅ माता दुर्गा के प्रति समर्पण अउ माफी के भाव
✅ गांव-देहात के संस्कृति अउ आस्था के सुंदर चित्रण
🔷 (छत्तीसगढ़ी बोली में कहानी)
गांव खोभा के बात हवय। नवरात्रि के समय आइस रहिस। चारों कती भक्ति के माहौल बन गे रहिस। गली-गली म माई के जस गीत गूंजत रहिस। हर घर म दिया जलत रहिस, अउ मंदिर म भीड़ लगत रहिस।
एही गांव म एक गरीब किसान रहिस — नाम रहिस दुकालू। दुकालू बहुत सीधा अउ मेहनती मनखे रहिस, फेर ओकर जिनगी म बहुत दुख तकलीफ रहिस। खेती ठीक से नइ होवय, घर म पैसा के कमी, अउ ऊपर ले परिवार के चिंता।
एक दिन दुकालू के मन म विचार आइस — “अब मोर सहारा सिरिफ दुर्गा मईया हवय।” वो नवरात्रि के पहिली दिन बिहान उठिस, नहा-धो के साफ कपड़ा पहिरिस अउ माता के मंदिर जाय के तय करिस।
जब वो मंदिर पहुंचिस, त देखिस — चारों कती “जय माता दी” के आवाज गूंजत हवय। जवारा झूलत हवय, अउ माता के मूर्ति बहुत सुंदर सजाय गे हवय।
दुकालू के आंखी भर आइस। वो धीरे-धीरे गावत कहिस — “आवत हावव तोर दुवारी मोर दुर्गा मईया…”
वो माता के चरण म सिर झुकाइस अउ कहिस — “हे मईया, मोर जिनगी म बहुत दुख हवय, फेर मोर भरोसा तोर ऊपर हवय। मोला अपन अचरा म ले लेव।”
उसी समय मंदिर के पंडित जी कहिन — “बेटा, सच्चा मन ले मांगे हवस, त मईया जरूर सुनही।”
दुकालू हर रोज मंदिर जाय लगिस। जसगीत गावय, सेवा करय, अउ सच्चे मन ले प्रार्थना करय।
धीरे-धीरे गांव वाले मन घलो ओकर भक्ति देखके प्रभावित हो गइन। सब कहिन — “देखव, दुकालू के भक्ति सच्चा हवय।”
नवरात्रि के पांचवे दिन एक चमत्कार होइस।
दुकालू के सूखा खेत म अचानक पानी गिरिस (बारिश होइस), अउ फसल लहराय लगिस। जेन खेत म कुछु नइ उगय, उहां अब हरियर फसल दिखे लगिस।
दुकालू समझ गीस — “ये सब मईया के कृपा हवय।”
वो खुशी ले रो परीस अउ मंदिर जाके कहिस — “मईया, मोर गलती ला माफ कर, मैं तोला कभू भूल गे रहेंव।”
फेर वो गावत कहिस — “भूले बिसरे ला माफी देहु मोर दुर्गा मईया…”
गांव वाले मन घलो ये देख के माता के महिमा गावे लगिन।
नवरात्रि के आखिरी दिन, पूरा गांव म भव्य जगराता होइस। दुकालू हर सबसे आगे रहिस, जसगीत गावत, ढोलक बजावत।
अब ओकर जिनगी बदल गे रहिस। गरीबी धीरे-धीरे दूर होवत रहिस, घर म खुशहाली आइस, अउ मन म शांति मिलिस।
दुकालू हर सबला कहिस — “सच्चा मन ले मईया के भक्ति करव, वो जरूर सुनथे।”
एही कहानी हमन ला सिखाथे — 👉 भगवान ले सच्चा मन ले प्रार्थना करबो, त वो जरूर सुनही
👉 दुख के समय हिम्मत नइ हारना चाहिए
👉 भक्ति म बहुत ताकत होथे



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