मोर दुर्गा मईया/avm gana/सुरेश नायक, प्रीतम भूवार्य

✦✦मोर दुर्गा मईया/avm gana/सुरेश नायक, प्रीतम भूवार्य  ✦✦

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गीत - मोर दुर्गा मईया

गायक- सुरेश नायक,प्रीतम भूवार्य 

म्यूजिक कंपनी - Avm Gana 

वेबसाईट ऑनर - कैलाश पंचारे

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मुखड़ा 

आवत हावव तोर दुवारी मोर दुर्गा मईया अचरा लमाके झोंकी लेवें हो मां 

// 1 //

चारों कोती जय जय कारा काटा के झूलना म झूले -2

उड़ान-परब जवारा तोर झूले ए---मोर दुर्गा मईया 

अचरा लमाके झोंकी लेबे हो मां

 आवत हावव तोर दुवारी मोर दुर्गा मईया अचरा लमाके झोंकी लेबे हो मां 

// 2 //

रहीथस तैहा गांव खमरिया दुरुग तोर जिला-2

उड़ान-घरम माटी रिसाग़े---मोर दुर्गा मईया 

अचरा लमाके झोंकी लेबे हो मां 

आवत हावव तोर दुवारी मोर दुर्गा मईया अचरा लमाके झोंकी लेबे हो मां 

// 3 //

तोरसहाराजीयत रहीहु करहूंमोर सहाई-2

उड़ान-भूले बिसरे ला माफी देहु---मोर दुर्गा मईया 

अचरा लमाके झोंकी लेवें हो मां

 आवत हावव तोर दुवारी मोर दुर्गा मईया अचरा लमाके झोंकी लेबे हो मां 

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सागर के पार

जब दौड़े कालिका

मोर दुर्गा मईया

लहराए जवारा

इतना के बेरिया

माया के दरबार 

दुर्गा दाई के भुवन

गीत के अर्थ (सरल छत्तीसगढ़ी में)

ये जसगीत म भक्त अपन मया अउ भक्ति के भाव ले माता दुर्गा के दुवारी म पहुंचत हे। वो कहिथे के — “हे मईया, मैं तोर द्वार म आथों, मोला अपन अंचरा (आंचल) ले आशीर्वाद दे, मोर ऊपर कृपा कर।”

गीत म आगे बताय गे हे के चारों दिशा म माता के जय-जयकार होवत हे, जवारा झूलत हे, अउ पूरा वातावरण भक्ति म डूबे हे।

दूसर अंतरा म गांव-खमरिया (दुर्ग जिला) के उल्लेख हे, जेन बताथे के माता हर हर जगह म विराजमान हे, अउ माटी तक पवित्र हो जाथे।

तीसर अंतरा म भक्त अपन गलती बर माफी मांगथे अउ कहिथे — “मईया, मोला सहारा दे, मैं भूल-चूक कर देथों, मोला माफ कर।”

👉 कुल मिलाके, ये गीत भक्ति, समर्पण अउ माफी के भाव ला दर्शाथे।

🔷 विशेषता (Features)

✅ ये जसगीत म सच्चा भक्ति भाव झलकथे

✅ नवरात्रि म गाये जाने वाला लोकप्रिय जसगीत

✅ सरल अउ बोलचाल के छत्तीसगढ़ी भाषा

✅ माता दुर्गा के प्रति समर्पण अउ माफी के भाव

✅ गांव-देहात के संस्कृति अउ आस्था के सुंदर चित्रण

🔷  (छत्तीसगढ़ी बोली में कहानी)

गांव खोभा के बात हवय। नवरात्रि के समय आइस रहिस। चारों कती भक्ति के माहौल बन गे रहिस। गली-गली म माई के जस गीत गूंजत रहिस। हर घर म दिया जलत रहिस, अउ मंदिर म भीड़ लगत रहिस।

एही गांव म एक गरीब किसान रहिस — नाम रहिस दुकालू। दुकालू बहुत सीधा अउ मेहनती मनखे रहिस, फेर ओकर जिनगी म बहुत दुख तकलीफ रहिस। खेती ठीक से नइ होवय, घर म पैसा के कमी, अउ ऊपर ले परिवार के चिंता।

एक दिन दुकालू के मन म विचार आइस — “अब मोर सहारा सिरिफ दुर्गा मईया हवय।” वो नवरात्रि के पहिली दिन बिहान उठिस, नहा-धो के साफ कपड़ा पहिरिस अउ माता के मंदिर जाय के तय करिस।

जब वो मंदिर पहुंचिस, त देखिस — चारों कती “जय माता दी” के आवाज गूंजत हवय। जवारा झूलत हवय, अउ माता के मूर्ति बहुत सुंदर सजाय गे हवय।

दुकालू के आंखी भर आइस। वो धीरे-धीरे गावत कहिस — “आवत हावव तोर दुवारी मोर दुर्गा मईया…”

वो माता के चरण म सिर झुकाइस अउ कहिस — “हे मईया, मोर जिनगी म बहुत दुख हवय, फेर मोर भरोसा तोर ऊपर हवय। मोला अपन अचरा म ले लेव।”

उसी समय मंदिर के पंडित जी कहिन — “बेटा, सच्चा मन ले मांगे हवस, त मईया जरूर सुनही।”

दुकालू हर रोज मंदिर जाय लगिस। जसगीत गावय, सेवा करय, अउ सच्चे मन ले प्रार्थना करय।

धीरे-धीरे गांव वाले मन घलो ओकर भक्ति देखके प्रभावित हो गइन। सब कहिन — “देखव, दुकालू के भक्ति सच्चा हवय।”

नवरात्रि के पांचवे दिन एक चमत्कार होइस।

दुकालू के सूखा खेत म अचानक पानी गिरिस (बारिश होइस), अउ फसल लहराय लगिस। जेन खेत म कुछु नइ उगय, उहां अब हरियर फसल दिखे लगिस।

दुकालू समझ गीस — “ये सब मईया के कृपा हवय।”

वो खुशी ले रो परीस अउ मंदिर जाके कहिस — “मईया, मोर गलती ला माफ कर, मैं तोला कभू भूल गे रहेंव।”

फेर वो गावत कहिस — “भूले बिसरे ला माफी देहु मोर दुर्गा मईया…”

गांव वाले मन घलो ये देख के माता के महिमा गावे लगिन।

नवरात्रि के आखिरी दिन, पूरा गांव म भव्य जगराता होइस। दुकालू हर सबसे आगे रहिस, जसगीत गावत, ढोलक बजावत।

अब ओकर जिनगी बदल गे रहिस। गरीबी धीरे-धीरे दूर होवत रहिस, घर म खुशहाली आइस, अउ मन म शांति मिलिस।

दुकालू हर सबला कहिस — “सच्चा मन ले मईया के भक्ति करव, वो जरूर सुनथे।”

एही कहानी हमन ला सिखाथे — 👉 भगवान ले सच्चा मन ले प्रार्थना करबो, त वो जरूर सुनही

👉 दुख के समय हिम्मत नइ हारना चाहिए

👉 भक्ति म बहुत ताकत होथे



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