तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ – नोहर वर्मा | नवरात्रि देवी जस गीत अर्थ (Chhattisgarhi Jas Geet Lyrics)

तर जाही ओ चोला हा । नोहर वर्मा l जस लिरिक्स छत्तीसगढ़ी
Tar Jahi o Chola Ha Tore Darash Le Ha | CG...

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गीत-तारजाही हो चोला हा

गायक -नोहर वर्मा 

गीतकार -

म्यूज़िक लेबल-पचरा जस गीत

म्यूज़िक कंपनी -sks studio cg 

वेबसाईट ऑनर - कैलाश पंचारे

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मुखड़ा 

        तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ,

        तर जाही वो चोला हा तोरे दया ले हाँ।

     येहो तोरे दरस ले हाँ...

अंतरा -1 

जब पहली रूप तोर दर्शन पायेव, शैलपुत्री वो भवानी

जब दूसर रूप ब्रह्मचारिणी वो माता

तोरे दरस ले हाँ----

  तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ

अंतरा -2 

जब तीसर रूप तोर दर्शन पायेव, चंद्रघंटा जगरानी

   चौथे रूप कुष्मांडा वो माता

तोरे दरस ले हाँ---- 

  तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ

अंतरा -3 

जब पाँचवा रूप तोर दर्शन पायेव, स्कंदमाता भवानी 

जब छटवाँ रूप कात्यायनी वो माता

तोरे दरस ले हाँ----

  तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ

अंतरा -4

जब सांतवा रूप तोर दर्शन पायेव, कालरात्रि कल्याणी 

जब आठवाँ रूप महागौरी वो माता

तोरे दरस ले हाँ----

  तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ

अंतरा -5

जब नोवों रूप तार दर्शन पायेव, सिद्धिदात्री महामाई

जब नव दिन नवरात में माता

तोरे दरस ले हाँ----

  तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ

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गीत का अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)

“तर जाही ओ चोला हा तोरे दरस ले हाँ” एक भक्ति से भरपूर छत्तीसगढ़ी देवी जस गीत हे। ए गीत म भक्त माता दुर्गा के चरण म अपन श्रद्धा अऊ विश्वास ला व्यक्त करत हे।

गीत म गायक कहिथे कि मोर ये मनखे के चोला (जीवन) माता के दर्शन अऊ दया ले पवित्र हो जाही। माता के कृपा मिलते ही जीवन के दुख-तकलीफ दूर हो जाथे।

ए गीत के हर अंतरा म माता दुर्गा के नौ रूप के महिमा बताय गे हे, जेन ला नवरात्रि म पूजा जाथे।

1️⃣ पहला रूप – शैलपुत्री

जब भक्त माता शैलपुत्री के दर्शन पाथे, तब ओकर जीवन म नई शक्ति अऊ भक्ति के शुरुआत होथे।

2️⃣ दूसर रूप – ब्रह्मचारिणी

ब्रह्मचारिणी माता तपस्या अऊ संयम के प्रतीक हें। ओखर दर्शन ले मन म धीरज अऊ भक्ति बढ़थे।

3️⃣ तीसरा रूप – चंद्रघंटा

चंद्रघंटा माता संकट दूर करे वाली देवी हें। ओखर कृपा ले डर अऊ बिपत्ति दूर हो जाथे।

4️⃣ चौथा रूप – कुष्मांडा

कुष्मांडा माता सृष्टि के रचना करे वाली देवी माने जाथे। ओखर दर्शन ले जीवन म सुख-समृद्धि आथे।

5️⃣ पाँचवाँ रूप – स्कंदमाता

स्कंदमाता ममता अऊ करुणा के रूप हें। ओ भक्त मन ला संतान सुख अऊ खुशहाली देथें।

6️⃣ छठवाँ रूप – कात्यायनी

कात्यायनी माता शक्ति अऊ साहस के प्रतीक हें। ओ दुष्ट शक्तियों के नाश करथें।

7️⃣ सातवाँ रूप – कालरात्रि

कालरात्रि माता अंधकार अऊ भय के नाश करे वाली हें। ओ भक्त मन के रक्षा करथें।

8️⃣ आठवाँ रूप – महागौरी

महागौरी माता शांति, पवित्रता अऊ कृपा के रूप हें। ओ जीवन म सुख अऊ उजाला भर देथें।

9️⃣ नौवाँ रूप – सिद्धिदात्री

सिद्धिदात्री माता भक्त मन ला सिद्धि अऊ वरदान देथें। नवरात्रि के आखरी दिन ओखर पूजा करे जाथे।

👉 ए गीत के संदेश ये हे कि जेन भक्त सच्चे मन ले माता के पूजा करथे, ओकर जीवन माता के दर्शन अऊ दया ले सफल हो जाथे।और पचरा जस गीत पढ़ें :

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डोंगरी पहाड़ म हा

देवी के सिंगारे बर

मोर दुर्गा मईया

ये हो माई के दरश बर हां

जगमग जोत जले दाई

दाई तोर अचरा मा फुले फुले गजरा

दाई दयाली वो




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