थईया नाचे हनुमान / दीपक वर्मा / पचरा जस लिरिक्स छत्तीसगढ़ी

── ⋆⋅𖤓⋅⋆ ──  थईया  नाचे हनुमान / दीपक वर्मा  / पचरा छत्तीसगढ़ी गीत  ── ⋆⋅𖤓⋅⋆ ──


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गीत-थईया थईया नाचे हनुमान 
गायक-दीपक वर्मा
संकलन - अजय 
म्यूजिक कंपनी-sks studio cg 
वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 
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 थईया थईया नाचे हनुमान 

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

थईया थईया नाचे हनुमान 

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

अंतरा-1

राम जनम सुने देवता सब आए

कीसम किसाम के हे भेस बनाए

राम जनम सुने देवता सब आए

किसम किसम के हे भेस बनाए

उड़ान  -जुरे हावय लइका अऊ सियान 

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

थईया थईया नाचे हनुमान 

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

अंतरा -2

अंजनी दुलरवा हे बदले हे चोला

संग में मदारी बनके चले बंभोला

अंजनी दुलरवा हे बदले हे चोला

संग में मदारी बनके चले बंभोला

उड़ान - करा थे तमासा दिनमान

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

थईया थईया नाचे हनुमान 

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

अंतरा-3

ऐती ओती भागे कभु रुख चढ़ जाथे

मारथे उलानबाटी चोन्हा देवावे 

ऐती ओती भागे कभु रुख चढ़ जाथे

मारथे उलानबाटी चोन्हा देवावे 

उड़ान - कभू परे भुईयां में उठान

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

थईया थईया नाचे हनुमान 

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

अंतरा -4

राम दरस करके गदगद हे

सात परिक्रमा करके खुशी होगे मन में

राम दरस करके गदगद हे

सात परिक्रमा करके खुशी होगे मन में

उड़ान- करत हे अजय गुणगान

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

थईया थईया नाचे हनुमान 

बजावत हावय डमरू शंकर भगवान

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जन्मों प्रकार के पचरा जस गीत के लिंक नीचे दे हावे 

मोर दुर्गा मईया,

सागर के पार 

इतना के बेरिया 

लहराए जवारा 

गंगा अस्नान्दे 

देवी के सिंगारे 

तर जाहि चोला

डोंगरी पहाड़ मा 

पलना गड़े मजेदार 

गीत का अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)

ये जसगीत म हनुमान जी के आनंद अउ भक्ति के वर्णन करे गे हवय। जब भगवान राम के जनम होइस, त सब देवता खुश होगे। हनुमान जी अपन खुशी ला नाचा के जाहिर करत हवंय, अउ शंकर भगवान डमरू बजावत हवंय।

पहिली अंतरा म बताय गे हवय कि राम जन्म के खबर सुनके देवता मन अलग-अलग भेस बना के आइन। लइका ले लेके सियान तक सब झूम उठिन।

दूसर अंतरा म हनुमान जी के बाल रूप के वर्णन हवय, जिहां वो अपन रूप बदल के मस्ती करत हवंय अउ भगवान शिव मदारी बनके संग म चलत हवंय।

तीसर अंतरा म हनुमान जी के चंचलता दिखाय गे हवय — कभू इहाँ दौड़त, कभू रूख म चढ़त, कभू कूदत-फांदत। ये सब उनकर बाल लीला के चिन्ह हवय।

चौथा अंतरा म जब हनुमान जी राम जी के दरस करथें, त वो गदगद हो जाथें अउ सात परिक्रमा करके खुशी म डूब जाथें। आखिर म वो भगवान के गुणगान करथें।

👉 कुल मिलाके, ये गीत भक्ति, खुशी अउ उत्सव के प्रतीक आय।

🔷 विशेषताएं (Features / Importance)

🌼 भक्ति से भरपूर – हनुमान जी के राम प्रति प्रेम के सुंदर चित्रण

🌼 उत्सव का माहौल – राम जन्म के खुशी म देवता मन के आगमन

🌼 बाल लीला वर्णन – हनुमान जी के चंचल रूप के सुंदर झलक

🌼 शिव-हनुमान संबंध – शंकर भगवान के डमरू बजाना एक विशेष आकर्षण

🌼 लोक संस्कृति से जुड़ा – छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुसार गाया जाने वाला जसगीत

🔷 कथा (छत्तीसगढ़ी में)

बहुत दिन पहिली के बात आय। अयोध्या नगरी म जब भगवान राम के जनम होइस, त पूरा धरती म खुशी के लहर दौड़ गे। हर कोती बधाई के आवाज गूंजे लागिस। देवता मन घलो ये पवित्र घड़ी के इंतजार करत रहिन, त सबो देवता अपन-अपन रूप बदल के अयोध्या पहुंच गइन।

कोई साधु के भेस म आय, कोई गवइया बनके, त कोई नट-नटनी बनके। सबके मन म एकेच बात रहिस – राम जी के दरस पाना।

एही बखत, एक नन्हा बालक घलो हावय, जऊन दिखत साधारण रहिस, फेर ओकर आंखी म अलग चमक रहिस। ये बालक अउ कोनो नई, खुद हनुमान जी रहिन, जऊन अपन बाल रूप म आय रहिन।

हनुमान जी राम जनम के खबर सुनके इतका खुश होगे रहिन कि वो खुद ला रोक नई पाइन। वो थईया-थईया करके नाचना सुरू कर दिन। ओखर हर कदम म भक्ति झलकत रहिस।

उधर भगवान शिव घलो ये आनंद के घड़ी म चुप कइसे रहितें? वो घलो अयोध्या पहुंच गइन। फेर वो अपन असली रूप म नई, बल्की एक मदारी के रूप धारण करिन। हाथ म डमरू धरके वो बजाना सुरू कर दिन।

डमरू के धुन अउ हनुमान जी के नाच – ये दृश्य इतका अद्भुत रहिस कि जऊन देखत रहिस, वो मंत्रमुग्ध हो जाथे।

हनुमान जी कभू इहाँ दौड़त, कभू उहां कूदत, कभू रूख म चढ़ जाथें। छोटे-छोटे करतब दिखाके सबके मन ला खुश कर देथें। लइका मन त ताली बजा-बजा के हंसे लगिन, अउ सियान मन घलो मुस्कान रोक नई पाइन।

एक बखत हनुमान जी इतका उछलिन कि सीधे जमीन म गिर गइन, फेर तुरंत उठके फेर नाचना सुरू कर दिन। ये सब देखके देवता मन घलो हंस पड़िन।

जब राम जी के दरबार म पहुंचिन, त हनुमान जी के आंखी म आंसू आ गइन। वो अपन प्रभु के दरस करके भावुक हो गइन। तुरंत वो सात परिक्रमा करिन अउ हाथ जोड़के प्रणाम करिन।

ओकर मन म एकेच भावना रहिस – सेवा अउ भक्ति।

भगवान शिव घलो डमरू बजावत-बजावत मुस्कुरा रहिन। वो जानत रहिन कि ये बालक कोई साधारण नई, बल्कि खुद भक्ति के सागर हनुमान आय।

पूरा अयोध्या म वो दिन खुशी, भक्ति अउ प्रेम के संगम बन गे। हर कोती “जय श्री राम” के जयकारा गूंजत रहिस।

हनुमान जी अपन नाच अउ भक्ति ले सबके मन जीत लिन। वो दिखा दिन कि सच्चा भक्त कइसन होथे – जऊन अपन प्रभु के खुशी म खुद ला भुला देथे।

आज घलो जब ये जसगीत गाए जाथे, त मन म वही खुशी अउ भक्ति जाग उठथे। ये गीत हमन ला सिखाथे कि भगवान के प्रति सच्चा प्रेम अउ समर्पण कइसन होना चाही।

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