पलना गड़े मजेदार/pachra jas geet/cgjaslyrics

पलना गड़े मजेदार,

गीत -पलना गड़े मजेदार

गायक -

म्यूज़िक लेबल -पचरा जस 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

────୨ৎ────

मुखड़ा 

पलना गड़े मजेदार,झूलो ला मईया पलना-2 

उड़ान - झूलो ला मईया पलना हो ,झूलो ला मईया पलना

पलना गड़े मजेदार,झूलो ला मईया पलना-2 

(1)

काहेन के हो मईया पलना बने हे -2 

पलना बने हो दाई ,पलना बने हे 

उड़ान - काहेन के लगे हावय डोर---झूलो ला मईया पलना

पलना गड़े मजेदार,झूलो ला मईया पलना-2 

(2)

चंदन काठ के तोरे पलना बने हे -2 

पलना बने हो दाई ,पलना बने हे 

उड़ान - रेशम के लगे हावय डोर---झूलो ला मईया पलना

पलना गड़े मजेदार,झूलो ला मईया पलना-2 

(3)

कोने हा झुलय मईया कोने झुलावय  -2 

कोने झुलावय हो मईया ,कोने झुलावय

उड़ान - कोने हां खींचत हावय डोर---झूलो ला मईया पलना

पलना गड़े मजेदार,झूलो ला मईया पलना-2 

(4 )

दुर्गा माई  झुलय मईया, लँगूरे  झुलावय  -2 

लँगूरे  झुलावय ,लँगूरे  झुलावय

उड़ान - शखियन खींचत हावय डोर---झूलो ला मईया पलना

पलना गड़े मजेदार,झूलो ला मईया पलना-2 

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गीत के अर्थ (विस्तार से)

ए जसगीत म भक्त मन माता ला स्नेह अउ भक्ति ले झूला झुलावत हें। “पलना गड़े मजेदार” के मतलब हे – सुंदर अउ सुगंधित पलना बनाय गे हवय, जिहां मईया झूलत हें।

1️⃣ काहेन के हो मईया पलना बने हे?”

ए पंक्ति म भक्त पूछत हवय – मईया के पलना कऊन चीज ले बनाय गे हवय?
जवाब म आवत हे – चंदन काठ के पलना
चंदन पवित्रता अउ सुगंध के प्रतीक आय।

2️⃣ “रेशम के लगे हावय डोर”

रेशम के डोर कोमलता अउ प्रेम के प्रतीक आय।
मतलब – मईया संग जुड़ाय डोर प्रेम अउ श्रद्धा के हवय।

3️⃣ “कोने हा झुलय मईया, कोने झुलावय?”

भक्त मन जिज्ञासा करथें – मईया ला कऊन झुलावत हवय?

4️⃣ “दुर्गा माई झुलय मईया, लँगूरे झुलावय”

इहाँ “लँगूरे” के अर्थ – हनुमान जी के सेवक रूप म भक्त।
शखियन (सखियाँ) डोर खींचत हें – अर्थात संग-संग भक्ति के आनंद मनावत हें।

ए गीत म माता के झूला झुलाय के माध्यम ले भक्ति, सेवा अउ प्रेम के भाव व्यक्त करे गे हवय।


🌸 धार्मिक महत्व

  1. झूला परंपरा – सावन अउ नवरात्रि म देवी ला झूला झुलाय के परंपरा हवय।

  2. चंदन काठ के महत्व – पवित्रता अउ शांति के प्रतीक।

  3. रेशम डोर – भक्त अउ भगवान के मधुर संबंध।

  4. दुर्गा माई के स्वरूप – ए गीत म माता के कोमल रूप दिखथे।

छत्तीसगढ़ म दंतेश्वरी मंदिर दंतेवाड़ा अउ महामाया मंदिर रतनपुर जइसन मंदिर म नवरात्रि के समय झूला सजाय जाथे अउ जसगीत गाए जाथे।


🌺  कहानी

छत्तीसगढ़ के एक गांव – सोनबरसा। सावन के महीना चालू रहिस। हरियर खेत, ठंडी हवा अउ मंदिर म घनघोर तैयारी चलत रहिस। गांव के दाई-बहिनी मन मिलके मईया बर पलना बनावत रहिन।

गांव के बूढ़ी दाई – कौशल्या बाई कहिस –
“ए साल पलना चंदन काठ के बनही। मईया झूलही त गांव म सुख-शांति आही।”

गांव के बढ़ई रामलाल जंगल ले चंदन लकड़ी लानिस। सुगंध चारों ओर फैल गे। पलना बनिस – सुंदर नक्काशी वाला। ऊपर रंग-बिरंगा कपड़ा सजाइस। रेशम के मजबूत डोर लगाइस।

सावन के दूज के दिन मंदिर सज गे। फूल माला, दीपक अउ धूप ले पूरा माहौल सुगंधित होगे। गांव के लइका मन गावत रहिन –
“पलना गड़े मजेदार, झूलो ला मईया पलना…”

एक गरीब परिवार रहिस – हीरालाल अउ ओकर मया भरी घरवाली सरिता। ओमन के एक नानकन बेटी रहिस – गौरी। गौरी बहुत बीमार रहत रहिस। डॉक्टर दिखाइस, दवा करवाइस, फेर हालत नई सुधरिस।

सरिता रोवत मंदिर आइस। पलना देखके ओकर आंख भर आइस। वो मईया ले कहिस –
“हे दुर्गा माई, मोर लइका ला झूला जइसन झुला के अपन आंचल म राख लेव।”

ओ रात मंदिर म भजन-कीर्तन होइस। सब झन गावत रहिन –
“रेशम के लगे हावय डोर…”

रात के आधा पहर म सरिता ला सपना दिस। सपना म वो देखिस – पलना झूलत हवय। पलना म उज्ज्वल रूप म माता विराजमान हें। सखियन डोर खींचत हें। एक लँगूरा सेवा करत खड़ा हवय।

माता मुस्कुराके कहिथे –
“डर मत बेटी, तोर डोर मंय पकड़ के हंव।”

बिहान जब सरिता घर लोटिस त देखिस – गौरी के बुखार उतर गे हवय। वो हंसत खेलत उठ गे। हीरालाल के आंख ले आंसू बह निकरिस – खुशी के आंसू।

पूरा गांव म चर्चा फैल गे – “मईया पलना झूल के आशीर्वाद दे दीस।”

अगला दिन विशेष झूला उत्सव रखे गीस। मंदिर म भीड़ लग गे। दाई-बहिनी मन फूल बरसावत रहिन। पंडित जी कहिन –
“चंदन के पलना म मईया के झुलाय के मतलब हे – मन के शुद्धि। रेशम के डोर मतलब – प्रेम के संबंध।”

गांव के लइका मन बारी-बारी डोर खींचिन। हर कोई अपन मनोकामना मांगिन।

सोनबरसा गांव म तब ले ए परंपरा बन गे। हर सावन अउ नवरात्रि म पलना गड़े जाथे। जसगीत गूंजथे।

गौरी बड़ी होके भक्ति म रच बस गे। वो हर साल पहिली डोर खींचथे। वो कहिथे –
“जेन दिन मोर जिनगी के डोर टूटत रहिस, मईया रेशम जइसन मजबूत बना दीस।”

समय बदलिस, गांव म सड़क बन गे, बिजली आ गे, फेर परंपरा आज घलो जिंदा हवय। जब मंदिर म जसगीत गूंजथे –
“दुर्गा माई झुलय मईया, लँगूरे झुलावय…”
त हर मन म विश्वास जाग जाथे।

ए गीत सिरिफ झूला झुलाय के नई, ए तो जीवन के प्रतीक आय।
जइसे पलना ऊपर-नीचे झूलथे, ओइसने जिनगी म सुख-दुख आथे-जाथे।
फेर जेन डोर रेशम के – अर्थात प्रेम अउ विश्वास – मजबूत रहिथे, ओ जिनगी कभी टूटे नई।

सोनबरसा गांव आज घलो पहिचान जाथे अपन झूला उत्सव बर। दूर-दूर ले लोगन आवत हें, दर्शन करत हें, अउ जसगीत गावत हें।


🔔 निष्कर्ष

“पलना गड़े मजेदार, झूलो ला मईया पलना” छत्तीसगढ़ी संस्कृति अउ भक्ति के सुंदर उदाहरण आय। ए गीत म चंदन के पलना, रेशम के डोर अउ दुर्गा माई के ममता के भाव प्रकट होथे।

ए सिरिफ गीत नई, ये विश्वास, सेवा अउ प्रेम के संदेश आय।

🌺 जय दुर्गा माई 🌺



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