डग डमरू बाजे । यूकेश देवांगन l जस लिरिक्स
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गीत-डग डमरू बाजे,
गायक - यूकेश देवांगन
म्यूज़िक कंपनी - यूकेश देवांगन
वेबसाईट ऑनर- कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
डग डमरू बाजे, डगरे-डगरे डग हा
डगरे-डगरे डग हा -----
डग डमरू बाजे, डगरे-डगरे डग हा
//1//
जब काहीन के तोर डग-डग डमरू काहीन के करताले
काहीन के तोर डग-डग डमरू काहीन के करताले
जब काहीन के करताले हो माता काहीन के करताले
काहीन के तोर डग-डग डमरू काहीन के करताले
उड़ान - जब काहीन के तोर झांझ मंजीरा
डगरे डगरे डग हा येहो............
डग डमरू बाजे डगरे-डगरे डग हा
//2//
जब निमुआ काठ के डग-डग डमरू चन्दन के करताले
निमुआ काठ के डग-डग डमरू चन्दन के करताले
जब चंदन के करताले हो माता चन्दन के करताले
निमुआ काठ के डग-डग डमरू चन्दन के करताले
उड़ान - जब पितल कांस के झांझ मंजीरा
डगरे डगरे डग ये हो --------------
डग डमरू बाजे डगरे-डगरे डग हा
//3//
जब कौन बजावय डग-डग डमरू कौन बजावय करताले
जब कौन बजावय डग-डग डमरू कौन बजावय करताले
कौन बजावय करताले हो माता कौन बजावय करताले
कौन बजावय डग-डग डमरू कौन बजावय करताले
उड़ान - जब कौन बजावय, झांझ मंजीरा
डगरे डगरे डग ये हो------
डग डमरू बाजे डगरे-डगरे डग हा
//4//
जब ब्रम्हा बजावय, झांझ मंजोरा नारद बजाए करताले
ब्रम्हा बजावय, झांझ मंजोरा नारद बजाए करताले
नारद बजाए करताले हो माता नारद बजाए करताले
नारद बजाए करताले हो माता नारद बजाए करताले
ब्रम्हा बजावय, झांझ मंजोरा नारद बजाए करताले
उड़ान - जब संभु बजावय डग-डग डमरू
डगरे डगरे डग ये हो --------------
डग डमरू बाजे डगरे-डगरे डग हा
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कंकालिन मोरे माया चण्डालिन मोरे माया
कारी मा बीरबिट काली माता कलकत्ता वाली
माटी के दाई दुर्गा गढ़ गढ़ तोला बनाव
आवत हावव तोर दुवारी मोर दुर्गा मईया
“डग डमरू बाजे डगरे-डगरे डग हा” जसगीत म माता के दरबार के भव्य माहौल के वर्णन करे गे हवय। गीत म बताय गे हवय कि जब माता के दरबार सजथे तब चारों कोती बाजा-गाजा गूंज उठथे। कहीं डमरू बजथे, कहीं करताल, त कहीं झांझ-मंजीरा के आवाज सुनाई देथे।
गीत के अगला पंक्ति म डमरू के बनावट के बारे म बताय गे हवय – निम्मूआ काठ के डमरू अउ चंदन के करताल। ए बताथे कि माता के पूजा म पवित्र चीज के उपयोग करे जाथे।
अंत म गीत म देवता मन के आगमन के वर्णन हवय। ब्रह्मा जी झांझ बजाथें, नारद मुनि करताल बजाथें अउ शंभु भगवान अपन डमरू बजाके माता के जस गाथें। ए दृश्य माता के दरबार के दिव्यता अउ भक्ति के माहौल ला दर्शाथे।
ये जसगीत म पारंपरिक बाजा के सुंदर वर्णन हवय
डमरू, करताल अउ झांझ मंजीरा के मेल दिखाय गे हवय
देवता मन के माता के दरबार म आगमन के चित्रण हवय
गीत म भक्ति अउ उत्सव के माहौल बनथे
नवरात्रि अउ जंवारा म गाये बर बहुत लोकप्रिय शैली हवय
एक समय के बात हवय। नवरात्रि के दिन रहिस। गांव म माता के जंवारा बोये गे रहिस अउ नौ दिन तक भजन-कीर्तन चलत रहिस। आखरी रात गांव के लोगन मन माता के दरबार सजाइन। फूल, नारियल अउ जोत के उजाला ले पूरा मंडप जगमगावत रहिस।
जइसे ही भजन शुरू होइस, अचानक डमरू के आवाज गूंज उठिस — डग डमरू बाजे, डगरे-डगरे डग हा…। लोगन मन देखिन कि चारों कोती बाजा बजत हवय। कऊनो करताल बजावत रहिस, कऊनो झांझ मंजीरा। माहौल धीरे-धीरे भक्तिमय होगे।
कहिनी म बताय जाथे कि जब सच्चा मन ले माता के जस गाथे जाथे, तब देवता मन खुद दरबार म आथें। एही रात म ब्रह्मा जी झांझ बजाइन, नारद मुनि करताल बजाइन अउ शंभु भगवान अपन डमरू बजाके माता के महिमा गाइन।
डमरू के आवाज ले पूरा गांव गूंज उठिस। भक्त मन झूम झूम के नाचत रहिन। माता के जयकारा लगत रहिस — जय माता दी।
कहिनी के अंत म बताय जाथे कि जहां भक्ति, श्रद्धा अउ एकता रहिथे, उहां माता जरूर अपन कृपा बरसाथें। “डग डमरू बाजे” गीत एही संदेश देथे कि माता के दरबार म बजत हर बाजा भक्त मन के प्रेम अउ विश्वास के प्रतीक आय।



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