माया के दरबार / कांतिकार्तिक यादव /दुर्गा जस गीत | छत्तीसगढ़ी भक्तिगीत

✦✦ माया के दरबार - कांतिकार्तिक यादव जस गीत ✦✦

माया के दरबार (पारम्परिक जस गीत मांदर धुन मे)🙏 | Kantikartik Yadav New Jas Geet 2026 | 360INDIA

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गीत -माया के दरबार 

गायक -कांतिकार्तिक यादव 

गीत लेबल -पारंपरिक जस 

म्यूजिक कंपनी -360india 

वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना 

दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना 

जब सेउक सेवा में आये हां  --

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना 

//1 //

ये काहेन के मृदंगे,मृदंगे,काहेन करताल ,काहेन बने डमरुवा

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

जब सेउक सेवा में आये हां  --

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना

//2 //

ये माटी के मृदंगे,मृदंगे ,लोहा करताल ,काठ के बने डमरुवा

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

जब सेउक सेवा में आये हां --

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना

//3 //

ये कौन बनाये मृदंगे,मृदंगे,कौने बनाये करताल ,कौन बनाये डमरुवा

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

जब सेउक सेवा में आये हां  --

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना

//4 // 

ये कुम्हार बनाये मृदंगे,मृदंगे,लोहरा करताल ,बढ़ई बनाये डमरुवा

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

जब सेउक सेवा में आये हां --

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना        

//5 //   

ये कोन बजाये मृदंगे,मृदंगे,कोन बजाये करताल ,कोन बजाये डमरुवा

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

जब सेउक सेवा में आये हां --

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

  दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना 

//6 //

ये कोन बजाये मृदंगे,मृदंगे,कोन बजाये करताल ,कोन बजाये डमरुवा

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

जब सेउक सेवा में आये हां --

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना

//7 //

ये ब्रम्हा बजाये मृदंगे,मृदंगे,नारद बजाये करताल ,भोला बजाये डमरुवा

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

जब सेउक सेवा में आये हां --

माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना

दुर्गा दरबार सेउक सेवा मा आये ना

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गीत का अर्थ (Meaning Chhattisgarhi)

ये जस गीत म भक्त मन माता माया (दुर्गा) के दरबार म सेवा करे बर आथें।
गीत म ये बताय गे हे कि जब भक्त सेवा म आथें, त मृदंग, करताल अउ डमरू जइसने वाद्य बजथे।

एमा ये घलो बताय गे हे कि ये सब वाद्य अलग-अलग कारीगर बनाथें—जइसे कुम्हार, लोहरा अउ बढ़ई।
फेर अंत म देवता मन (ब्रम्हा, नारद अउ भोलेनाथ) खुदे ए वाद्य बजाके माता के सेवा करथें।

👉 मतलब साफ हे—माता के भक्ति म इंसान लेके देवता तक सब झुक जाथें।


🔷 गीत की विशेषता ( Importance)

  • ये गीत छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के सुगंध ले भरपूर हे 🌿
  • एमा पारंपरिक वाद्य यंत्र (मृदंग, करताल, डमरू) के वर्णन हे
  • अलग-अलग समाज (कुम्हार, लोहरा, बढ़ई) के योगदान दिखाय गे हे
  • भक्ति अउ एकता के संदेश देथे
  • देवी सेवा म सब बराबर हवंय—ये बात ला मजबूत बनाथे

🔷 गीत के ऊपर कहानी 

छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव म नवरात्रि के समय भारी उत्साह रहिस। गांव के हर कोना म माता माया के भक्ति के रंग छा गे रहिस। मंदिर ला फूल, दीया अउ रंगोली ले सजाय गे रहिस। सबो गांव वाले मन एकजुट होके माता के सेवा करे बर तैयारी करत रहिन।

ए गांव म सुकालू नाव के एक गरीब किसान रहिस। ओकर मन म माता दुर्गा बर अगाध श्रद्धा रहिस। वो हर साल नवरात्रि म बिना नागा माता के दरबार म सेवा करे जाथे। इस साल घलो वो सोचिस—"मोर पास धन दौलत नई हे, फेर मंय अपन सेवा जरूर देहूं।"

नवरात्रि के पहिली रात, मंदिर म जस गीत शुरू होइस—
"माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना..."
गीत के सुर सुनके सुकालू के मन भाव-विभोर होगे।

गांव के लोगन म अलग-अलग जिम्मेदारी बंट गे रहिस।
कुम्हार माटी ले मृदंग बनाइस, लोहरा करताल गढ़िस अउ बढ़ई सुंदर डमरू बनाइस।
सबो अपन-अपन काम ला माता के सेवा समझ के करत रहिन।

जइसे-जइसे रात गहरात गीस, जस गीत के धुन तेज होवत गीस।
मृदंग के थाप, करताल के झंकार अउ डमरू के आवाज ले पूरा वातावरण भक्तिमय होगे।

रामसाय चुपचाप कोना म बैठ के ये सब देखत रहिस। ओकर मन म एक ही बात घूमत रहिस—
"का मंय घलो माता के सेवा म कुछ कर सकत हंव?"

तभी मंदिर के पुजारी ओकर पास आइन अउ कहिन—
सुकालू सेवा करे बर धन नई, मन चाही। तैं आके जस गीत म संग दे।"

सुकालू हिम्मत करके गीत गाना शुरू करिस—
"माया के दरबार सेउक सेवा मा आये ना..."

जइसे ही वो गाइस, सबो लोग ओकर सुर म सुर मिलाइन।
धीरे-धीरे पूरा मंदिर भक्ति के सागर म डूब गे।

उसी समय एक अद्भुत घटना होइस।
ऐसा लगिस जइसे खुद ब्रम्हा, नारद अउ भोलेनाथ आके मृदंग, करताल अउ डमरू बजावत हवंय।

लोगन के आंख म आंसू आ गे—ये माता के कृपा रहिस।

सुकालू ला महसूस होइस कि माता हर ओकर सच्ची भक्ति ला स्वीकार कर लीस।
ओकर मन म अब कोई कमी के अहसास नई रहिस।

नवरात्रि के आखिरी दिन, गांव वाले मन सुकालू के बहुत सम्मान करिन।
सबो कहिन—"सच्ची सेवा धन ले नई, दिल ले होथे।"

रामसाय मुस्कुराइस अउ माता के चरण म सिर झुकाइस।

👉 ये कहानी ले हमन ला ये सीख मिलथे:

  • सच्ची भक्ति दिल ले होथे ❤️
  • हर इंसान माता के सेवा कर सकथे
  • समाज के हर वर्ग के योगदान जरूरी हे
  • माता के दरबार म सब बराबर हवंय 

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