जब काली चरण जुग हां | काली माता जस गीत लिरिक्स | छत्तीसगढ़ी जस गीत
जब काली चरण जुग हां – काली माता जस गीत
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गीत -काली चरण जुग हां
गायिका -अनुसुईया साहू
गीत लेबल -पचरा जस गीत
यूट्यूब -अमरैया स्टूडियो
वेबसाइट -cgjaslyrics
वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे
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मुखड़ा
जब काली चरण जुग हां मै बन्दव माता काली चरण जुग हां
तोला बन्दव माता काली चरण जुग हां
येहो मै बन्दव माता काली चरण जुग हां
अंतरा -1
जब काली चरण जुग बन्दव माता गिरजा सूत के पावे -2
सोन रूप दन्देश्वरी बन्दव ,हनुमत चरण मनावव ,
शम्भु भवानी ला बन्दव माता ,भैरव के पग जोरी
शारदा माई दुलरू ला बन्दव करो सहायक मोरी
उड़ान - जब कर जोरि सरसती ला बन्दव काली चरण जुग हां
मै बन्दव माता काली चरण जुग हां
तोला बन्दव माता काली चरण जुग हां
अंतरा -2
जब फोड़ पाताल ले निकले भवानी रक्तमांस लपटाये -2
जा भीतर सिकंदर गये है कई एक मुनि ला मारे
तिरिया होके लड़े बर आये मर्दो ला कहा छिपाये
तुम तो हो मोर आदि भवानी फेर भगतन ला खाये
उड़ान - जब देख रूप सब देव घबराये काली चरण जुग हां
मै बन्दव माता काली चरण जुग हां
तोला बन्दव माता काली चरण जुग हां
अंतरा -3
जब अपन मीढुल ले चले भवानी हाथ खपर तिरसुले -2
गल मुंडन के माल पहिनके कई एक असुर संहारे
पहली बाण लंकासुर मारे काली खड़ग लहराये
कटकट सलगाये हो माता महिककासुर भर पाये
उड़ान - जब मारमार सब धरे चघुरिया काली चरण जुग हां
मै बन्दव माता काली चरण जुग हां
तोला बन्दव माता काली चरण जुग हां
अंतरा -4
जब बईठ पाताल ले चले भुईया ले भुई डंडी -2
निकले अल्हण निकले दलहन महिककासुर भर पाये
भइसा सुर के माते अखाड़ा हन मारे तिरसुले
उड़ान - जब रक्त रोहनी तोर मंडल में काली चरण जुग हां
मै बन्दव माता काली चरण जुग हां
तोला बन्दव माता काली चरण जुग हां
अंतरा -5
जब जब अपन भुवन चले भवानी सिंग्लॉज बर जाये -2
हिंगलाज में जाके हो माता आते जाते चंडी जगाये
ठाकुर देव तै जाने महामाया दो गोप होई आवे
माता काल भय अगुवानी बाजत हे दुम दुर्गा हो माता
गावत मंगल चारो कोत
उड़ान - जब सिंगार सिंहासन बइठे हो माता काली चरण जुग हां
मै बन्दव माता काली चरण जुग हां
तोला बन्दव माता काली चरण जुग हां
गीत के अर्थ
ए जसगीत के मूल भाव माता काली के चरण मं अपन सिर नवाय के, ओखर शक्ति ला सुमिरन करे के आय। गायक माता काली ला आदि शक्ति, भवानी अउ जगत के रक्षा करे वाली महामाया के रूप मं पुकारथे।
गीत मं माता के अलग-अलग रूप के वर्णन मिलथे। माता कभू भवानी के रूप मं, कभू काली के रूप मं अउ कभू असुरन के संहार करे वाली रणचंडी के रूप मं दिखाई देथें।
“काली चरण जुग” के भाव ये आय के भक्त अपन अहंकार छोड़के माता के चरण मं समर्पित होवत हे। माता के चरण ला भक्ति, भरोसा अउ शरण के प्रतीक माने गे हे।
गीत मं तिरसूल, खड़ग, मुंड माला जइसन शक्ति के प्रतीक मन के माध्यम ले माता के उग्र रूप के वर्णन करे गे हे। ए उग्र रूप के उद्देश्य अन्याय, अधर्म अउ दुष्ट शक्ति के नाश करना बताय गे हे।
अंतरा मन मं असुर संहार के प्रसंग आवथे, जेन माता के वीर अउ रक्षक रूप ला उजागर करथे। भक्त मन के नजर मं माता काली सिरिफ उग्र रूप वाली देवी नइ, बल्कि अपन भगतन के रक्षा करे वाली दयामयी महतारी घलो हवंय।
ए गीत के अंत मं माता के सिंहासन मं विराजमान होय के भाव आथे। ये दृश्य भक्त मन के मन मं माता के दिव्य दरबार के कल्पना जगाथे अउ श्रद्धा ला अउ मजबूत करथे।
गीत के विशेषता
गीत के कथा
“जब काली चरण जुग हां” के कथा के केंद्र मं माता काली के शक्ति अउ भक्त के समर्पण के भाव बसे हे। गीत के सुरुआत मं भक्त माता काली के चरण मं अपन माथा नवाथे। ओ कहिथे के माता के चरण मन पवित्र हवंय अउ ओखर शरण मं जाके मनखे अपन मन के डर, दुख अउ चिंता ला दूर करे के भरोसा रखथे
गीत के पहिली कड़ी मं माता के संग अलग-अलग देवी-देवता मन के स्मरण करे गे हे। गिरजा के सुत, शम्भु भवानी, भैरव, सरस्वती अउ हनुमान जइसन दिव्य नाम मन के स्मरण ले गीत के भक्ति भाव अउ गहिरा हो जाथे। भक्त अपन मन के बात माता के आगू रखके सहारा मांगे हे।
दूसर कड़ी मं माता के उग्र रूप के चित्रण मिलथे। माता जब पाताल ले प्रकट होथें त ओखर रूप देखके देवता मन घलो अचंभित हो जाथें। गीत के भाव मं माता के ये रूप अधर्म अउ अत्याचार के खिलाफ खड़े होय वाली शक्ति के प्रतीक आय। माता के उग्रता दुष्ट शक्ति बर भय के कारण बनथे, फेर अपन भगतन बर ओही शक्ति सुरक्षा के भरोसा बन जाथे।
तीसर कड़ी मं माता हाथ मं तिरसूल अउ खड़ग धरे रणभूमि मं उतरथें। गला मं मुंड के माला अउ हाथ मं अस्त्र-शस्त्र धरे माता असुरन के मुकाबला करथें। लंकासुर अउ महिषासुर जइसन दानवी शक्ति के संहार के भाव गीत ला वीर रस ले भर देथे।
चउथा कड़ी मं माता के पाताल ले धरती तक के शक्ति स्वरूप के वर्णन आथे। असुरन के बढ़त अत्याचार के बीच माता अपन अस्त्र ले अधर्म के नाश करथें। भैंसा सुर जइसन दानवी शक्ति के ऊपर माता के विजय के भाव इहाँ दिखाई देथे।
पांचवां कड़ी मं माता के अलग-अलग पवित्र रूप अउ स्थान के स्मरण करे गे हे। हिंगलाज जइसन शक्ति स्थान के उल्लेख ले माता के व्यापक शक्ति के भावना प्रकट होथे। माता के आगमन के संग भक्त मन मंगल गीत गावथें, सेवा करथें अउ चारो मुड़ा भक्ति के वातावरण बन जाथे।
अंत मं माता काली सिंहासन मं विराजमान होथें। भक्त मन माता के चरण मं अपन श्रद्धा अर्पित करके कहिथें के महतारी के शरण ही ओकर भरोसा आय। ए तरह पूरा जसगीत शक्ति, भक्ति, साहस अउ समर्पण के संदेश देथे।
ए गीत के मुख्य संदेश
ए गीत हमन ला सिखाथे के कठिन समय मं डर के बजाय हिम्मत रखना चाही। माता काली के उग्र रूप अधर्म के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक आय, जबकि माता के चरण भक्त बर मया, भरोसा अउ सुरक्षा के प्रतीक हवंय।
गीत के संदेश ये आय के मनखे अपन मन मं सच्ची श्रद्धा, सेवा अउ विश्वास रखे। माता के महिमा के गायन केवल पूजा-पाठ नइ, बल्कि अपन संस्कृति, लोकपरंपरा अउ भक्ति भावना ला जिंदा रखे के माध्यम घलो आय।
CG Jas Lyrics के बारे मं
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लेखक – कैलाश पंचारे
वेबसाइट – CG Jas Lyrics
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