इतना के बेरिया /रामनारायण ध्रुव/ chhattisgadhi jas lyrics
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गीत -इतना के बेरिया
गायक -रामनारायण ध्रुव
गीतकार -रामनारायण ध्रुव
म्यूजिक कंपनी - सुंदरानी
वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
इतना के बेरिया कउन देव ल सुमिरव वो
लेहा वो भवानी तोरे नाम हो माँ
लेहा वो भवानी तोरे नाम हो माँ
//1 //
काकर घर के दिया हो माता काकर घर के बाती वो
काकर घर के तेल ल जलाव हो माँ
काकर घर के तेल ल जलाव हो माँ
कुम्हरा घर के दिया हो माता छिपिया घर के बाती वो
तेली घर के तेल ल जलाव हो माँ
तेली घर के तेल ल जलाव हो माँ भवानी
तेली घर के तेल ल जलाव हो माँ
लेहा वो भवानी तोरे नाम हो माँ
//2 //
काकर घर के चंदन माता काकर घर के काजर वो
काकर घर के फूल ल चढ़ाव हो माँ
काकर घर के फूल ल चढ़ाव हो माँ
ब्राम्हण घर के चन्दन माता घसनीन घर के काजर वो
माली घर के फूल ल चढ़ाव हो माँ भवानी
माली घर के फूल ल चढ़ाव हो माँ भवानी
माली घर के फूल ल चढ़ाव हो माँ
लेहा वो भवानी तोरे नाम हो माँ
//3 //
काकर घर के पोतिया माता काकर घर के चूड़ी वो
काकर घर के गहना पहिराव हो माँ
काकर घर के गहना पहिराव हो माँ
कोस्टा घर के पोतिया माता तुर्की घर के चूड़ी वो
सोनरा घर के गहना पहिराव हो माँ
सोनरा घर के गहना पहिराव हो माँ भवानी
सोनरा घर के गहना पहिराव हो माँ
लेहा वो भवानी तोरे नाम हो माँ
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ये जस गीत मा गायक माता भवानी ला सुमिरत हावे अउ पूछत हावे कि “ए बेरा कऊन देवता ला याद करौं?”
तभे वो खुदे कहिथे – “भवानी के नाम लेवव”
गीत मा बहुत सुंदर संदेश हे –
हर समाज, हर जाति के लोगन के योगदान ले माता के पूजा पूरा होथे।
जइसे –
- कुम्हार (कुम्हरा) दिया बनाथे
- तेली तेल देथे
- ब्राह्मण चंदन देथे
- माली फूल चढ़ाथे
- सोनार गहना बनाथे
मतलब – माता के सेवा मा सब्बो बराबर हें, कोनो छोट-बड़ नई।
🔷 विशेषताएं (Visheshatayen)
✔️ समाज के एकता के सुंदर संदेश
✔️ हर वर्ग के योगदान ला सम्मान
✔️ पारंपरिक छत्तीसगढ़ी संस्कृति के झलक
✔️ माता भवानी के प्रति गहरा भक्ति भाव
✔️ जसगीत गावे के समय भक्ति अउ उत्साह ला बढ़ाथे
कहानी (छत्तीसगढ़ी मा)
गांव के नाव रहिस – मुसरा । ओ गांव मा हर साल नवरात्रि के समय बहुत धूमधाम ले माता भवानी के जस गीत गाये जाथे। गांव के हर घर मा खुशहाली अउ भक्ति के माहौल बन जाथे।
एक साल गांव के कुछ जवान मन सोचिन – “ए साल हमन कुछ अलग करबो, माता के सेवा अउ भक्ति ला अउ बढ़िया बनाबो।”
तभो गांव के बुजुर्ग बुधारू दादा कहिन –
“बेटा, माता के सेवा मा सब्बो के भागीदारी जरूरी हे। जब तक सब मिलके नई करहू, पूजा अधूरा रह जाही।”
ये बात सुनके सब जवान मन गांव भर मा घूम-घूम के सबके मदद मांगे लगिन।
सबसे पहले वो मन कुम्हार (कुम्हरा) के घर गइन।
कुम्हार खुशी-खुशी कहिस –
“मोर हाथ ले बनाय दिया माता के सेवा मा लगही, ये मोर सौभाग्य हे।”
फेर वो मन तेली के घर गइन।
तेली कहिस –
“मोर तेल ले दीया जलही, माता के जोत चमकही।”
फेर ब्राह्मण जी चंदन देइन, माली फूल लेके आइस, अउ सोनार गहना बनाके देइस।
धीरे-धीरे पूरा गांव एकजुट होगे। हर कोई अपन-अपन योगदान देत रहिस।
कोई छोट नई, कोई बड़ा नई – सब एक समान।
नवरात्रि के पहिली रात, जब माता के दरबार सजिस –
दिया जलिस, फूल महकिस, चंदन के खुशबू फैलिस।
गांव के सब लोगन एक साथ खड़े होके गाइन –
“इतना के बेरिया कउन देव ल सुमिरव वो, लेहा वो भवानी तोरे नाम हो माँ…”
ओ बेरा ऐसा लगत रहिस जैसे खुद माता भवानी ओ दरबार मा विराजमान हें।
गांव के एक छोट लइका पूछिस –
“ददा, ये सब अलग-अलग लोगन के चीज काबर चढ़ाथन?”
बुधारू दादा मुस्कुराके कहिन –
“बेटा, ये दुनिया मा सब्बो जरूरी हें। कुम्हार बिना दिया नई, तेली बिना तेल नई, माली बिना फूल नई।
जइसे माता के पूजा मा सबके जरूरत हे, वइसने समाज मा घलो सबके बराबर महत्व हे।”
ओ दिन ले गांव के हर मनखे समझ गीस –
एकता मा ही शक्ति हे, अउ माता के सच्चा भक्ति सबके साथ ले होथे।
नवरात्रि खतम होगे, फेर ओ गीत अउ ओ सीख सबके मन मा बस गे।
हर साल जब घलो ये जस गीत गाये जाथे, लोगन ला ओ एकता अउ प्रेम के याद आ जाथे।



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