सागर के पार जुरे हन जहुरिया || जस गीत || छत्तीसगढ़ी गीत || गौतम केंवट

── ⋆⋅𖤓⋅⋆ ──

गीत- सागर के पार 

गायिका - राजमती केवट

म्यूजिक कंपनी-गौतम केवट
 
वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 
── ⋆⋅𖤓⋅⋆ ──

मुखड़ा 

सागर के ओपार जूरे हन जहूरिया हो

सागर के ओपार जूरे हन जहूरिया हो

उड़ान - जूरे हन जहूरिया हो

CGJASLYRICS

अंतरा-1

काहेन के तोर दंड कमंडल काहेन के  मृग छाला 

काहेन के तोर दंड कमंडल काहेन के  मृग छाला 

उड़ान - काहेन के तोर बेंन बसूरिया

काहेन के ज्यमाला 

सागर के ओपार जूरे हन जहूरिया हो

सागर के ओपार जूरे हन जहूरिया हो

CGJASLYRICS

अंतरा-2

कास पीतल के तोर दंड कमंडल मृगन के  मृग छाला हो मां

कास पीतल के तोर दंड कमंडल मृगन के  मृग छाला  हो मां

उड़ान - हरे बास के तोर बेंन बसूरिया

तुलसी के ज्यमाला 

सागर के ओपार जूरे हन जहूरिया हो

सागर के ओपार जूरे हन जहूरिया हो

CGJASLYRICS

अंतरा-3

कौन धरे तोर दंड कमंडल कौन धरे मृग छाला हो मां

कास पीतल के तोर दंड कमंडल मृगन के  मृग छाला  हो मां

उड़ान - कौन धरे तोर बेंन बसूरिया

कौन धरे ज्यमाला 

सागर के ओपार जूरे हन जहूरिया हो

सागर के ओपार जूरे हन जहूरिया हो

CGJASLYRICS

अंतरा-4

ब्रम्हा धरे तोर दंड कमंडल शिव जी  धरे मृग छाला हो मां

कास पीतल के तोर दंड कमंडल मृगन के  मृग छाला  हो मां

उड़ान - कान्हा धरे तोर बेंन बसूरिया

राधा धरे ज्यमाला 

सागर के ओपार जूरे हन जहूरिया हो

सागर के ओपार जूरे हन जहूरिया हो

── ⋆⋅𖤓⋅⋆ ──


नवरात्रि के गीत संग्रह नीचे दे हावे

👉 बघवा दिलाए- पूरन साहू

👉का तोला मानव दाई- दुकालू यादव

👉तै आशु बोहाये - ममता देशमुख  

👉हरियर मड़वा उजारे - kantikartik

👉कहा तो माता - सुखऊ राम केवट 

👉हो रंग लाल -kantikartik


गीत के अर्थ (Meaning in Chhattisgarhi)

ये जसगीत म भक्त मन माता रानी के महिमा गावत हें अउ ओकर दिव्य रूप के वर्णन करत हें।

“सागर के ओपार जूरे हन जहूरिया” के मतलब ये होथे के माता रानी के दरबार अइसन पवित्र अउ दिव्य हे जिहां दूर-दूर ले, सागर के ओपार ले घलो भक्त मन जुड़ जाथें।

गीत के अंतरा म जऊन सवाल-जवाब के रूप दिखत हे, वो बहुत गहरे अर्थ देथे।

जइसे पूछे जाथे –

👉 तोर दंड कमंडल काकर बने हे?

👉 मृगछाला काकर हे?

👉 बांसुरी अउ ज्यमाला काकर हे?

फेर जवाब म बताय जाथे –

👉 दंड कमंडल पीतल के बने हे

👉 मृगछाला हिरन के हे

👉 बांसुरी हरे बांस के हे

👉 ज्यमाला तुलसी के बने हे

अंत म ये घलो बताय जाथे के –

👉 ब्रह्मा जी दंड कमंडल धरे हें

👉 शिव जी मृगछाला पहिरे हें

👉 कान्हा (कृष्ण) बांसुरी बजावत हें

👉 राधा ज्यमाला धरे हें

इहां ये बताय जावत हे के माता रानी के महिमा एती महान हे के ब्रह्मा, शिव अउ कृष्ण जइसन देवता घलो ओखर सेवा म लगे हें।

🔵 गीत के विशेषता (Importance / Visheshata)

ये जसगीत के खासियत ये हे के ये सिरिफ एक भजन नई, बल्कि भक्ति, ज्ञान अउ एकता के संदेश देथे।

✨ 1. भक्ति के गहराई

गीत म माता रानी के प्रति सच्चा प्रेम अउ श्रद्धा झलकथे। हर लाइन म भक्त के मन के भाव साफ दिखथे।

✨ 2. देवता मन के एकता

इहां ब्रह्मा, शिव अउ कृष्ण – तीनों देवता के उल्लेख होथे।

ये बताथे के सब देवता एक ही शक्ति (माता) के रूप हें।

✨ 3. प्रश्न-उत्तर शैली

गीत के अंदर सवाल-जवाब के तरीका अपनाय गे हे, जेन ले ये और भी रोचक बन जाथे अउ सुनईया के मन म जिज्ञासा जगाथे।

✨ 4. लोक संस्कृति के झलक

छत्तीसगढ़ के पारंपरिक भाषा अउ शैली म ये गीत बने हे, जेन ले हमर संस्कृति अउ परंपरा जिंदा रहिथे।

✨ 5. आध्यात्मिक संदेश

गीत हमन ला ये सिखाथे के चाहे हमन कतको दूर काबर नई होन, अगर मन म सच्चा भक्ति हे त हम माता रानी ले जुड़ सकथन।

🟣 कथा ( भक्ति कहानी)

बहुत पुराना समय के बात आय। एक छोटे से गांव म एक गरीब किसान रहत रहिस – ओकर नाव रहिस मोहन।  बहुत सीधा-सादा अउ मेहनती मनखे रहिस। ओकर पास धन-दौलत नई रहिस, फेर ओकर मन म माता रानी के प्रति अगाध श्रद्धा रहिस।

हर साल नवरात्रि म वो पूरे गांव के साथ मिलके माता के जसगीत गावत रहिस। फेर एक साल अइसन आय जब गांव म बहुत बड़ा संकट आ गे। बरसात नई होइस, खेत सूख गेन, अउ लोगन भूख ले तड़पना सुरु कर दीन।

मोहन के घर म घलो अन्न के कमी होगे। फेर वो हिम्मत नई हारिस। वो रोज माता रानी के पूजा करत रहिस अउ गावत रहिस –

“सागर के ओपार जूरे हन जहूरिया हो…”

गांव के लोगन ओकर ऊपर हंसत रहिन –

“का फायदा ये सब गाना गाके? जब पेट म अनाज नई हे!”

फेर हरिहर के भरोसा अडिग रहिस। एक दिन वो ठान लिस के वो माता रानी के दरबार जाही, चाहे वो कतको दूर काबर नई होवय।

कहिथें के माता के दरबार “सागर के ओपार” रहिथे – ये एक प्रतीक रहिस, असल म ये बहुत कठिन यात्रा के संकेत रहिस।

मोहन बिना कुछ सोचे-समझे यात्रा सुरु कर दिस। रद्दा म ओकर सामना कई कठिनाई ले होइस –

👉 घना जंगल

👉 तेज नदी

👉 भूख-प्यास

फेर वो हर हाल म माता के नाम जपत रहिस।

एक दिन जब वो बहुत थक गे रहिस, तब ओकर सामने एक बूढ़ा साधु आइस। साधु पूछिस –

“कहां जात हस बेटा?”

हरिहर कहिस –

“माता रानी के दरबार जाथंव, मदद मांगना हे।”

साधु मुस्कुराइस अउ कहिस –

“का तंय जानथस माता कइसे मिलही?”

मोहन सिर झुका के कहिस –

“नई जानंव, फेर भरोसा हे।”

साधु कहिस –

“तोर भरोसा ही तोर सबसे बड़े ताकत हे।”

इतना कहिके साधु गायब होगे। मोहन समझ गे के ये कोई साधारण मनखे नई रहिस।

आगे बढ़त-बढ़त वो एक नदी के किनारे पहुंचिस। पानी बहुत तेज रहिस, पार करना असंभव लगत रहिस। फेर वो माता के नाम लेके नदी म कूद परिस।

अचरज के बात ये होइस के नदी के बीच म पानी शांत होगे अउ वो आसानी से पार होगे।

आखिरकार वो एक पहाड़ी के ऊपर पहुंचिस, जिहां एक दिव्य प्रकाश दिखत रहिस। वो समझ गे – यही माता रानी के दरबार हे।

जइसे ही वो दरबार म पहुंचिस, वो देखिस के ब्रह्मा, शिव अउ कृष्ण खुद माता के सेवा करत हें।

👉 ब्रह्मा जी दंड कमंडल धरे हें

👉 शिव जी मृगछाला पहिरे हें

👉 कृष्ण जी बांसुरी बजावत हें

मोहन ये देख के भावुक होगे अउ जमीन म गिर के रोने लगिस।

माता रानी प्रकट होइस अउ कहिस –

“बेटा, तंय का चाहथस?”

हरिहर हाथ जोड़ के कहिस –

“मोर गांव म सुख-शांति दे देवा, अन्न दे देवा।”

माता मुस्कुराइस अउ कहिस –

“तोर भक्ति ले मैं प्रसन्न हवंव। तंय खाली हाथ नई जाही।”

जइसे ही मोहन गांव वापस आइस, अचानक मौसम बदल गे। जोरदार बारिश होइस, खेत लहलहा उठिन, अउ गांव म खुशहाली आ गे।

गांव के लोगन मोहन ले माफी मांगिन अउ सब मिलके माता रानी के जसगीत गाए लगिन।

🔴 निष्कर्ष (Conclusion)

“सागर के ओपार जूरे हन जहूरिया” सिरिफ एक जसगीत नई, बल्कि ये भक्ति, विश्वास अउ समर्पण के कहानी आय।

ये हमन ला सिखाथे –

👉 सच्चा मन ले भक्ति करबो, त माता जरूर सुनही

👉 कठिनाई चाहे कतको बड़े काबर नई होवय, भरोसा नई टूटना चाहिए

👉 भगवान तक पहुंचना दूरी म नई, मन के श्रद्धा म होथे

टिप्पणियाँ