दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो | छत्तीसगढ़ी जस गीत अर्थ, महत्व अउ कहानी
════════✿════════
गीत -दुर्गा दाई के मंदिर
गायक -गुड्डा साहू
गीतकार -गुड्डा साहू
म्यूजिक कंपनी - sg music
वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे
════════✿════════
मुखड़ा
दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो
उड़ान -झूमे गाये नर अउ नारी झूमे गाये वो -2
दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो
//1 //
चैत के महीना दाई बोये हव जंवारा वो
ढोल नगाड़ा अउ तबला बाजे बाजत हे नगाड़ा वो
कोनो बजावे तासा मांदर कोनो हा खधेरी वो
उड़ान -मन के मनौती सबझन पाये मन झूमे गाये वो-2
दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो
//2 //
कोनो चघाये हीरा मोती कोनो चघाये नरियर वो
ढोल नगाड़ा अउ तबला बाजे बाजत हे नगाड़ा वो
तोर दरश बर ब्रम्हा विष्णु आये हे सरग ले वो
उड़ान -भोले बाबा डमरू हे बजाये मन झूमे गाये वो-2
दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो
//3 //
रुचमुच ले मोर माता रानी करे हे सिंगारी वो
नवराति के पावन बेला मेला भरे हे भारी वो
दाई के दुवारी झंगु माथ ल नवाये वो
उड़ान -भोले बाबा डमरू हे बजाये मन झूमे गाये वो-2
दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो
════════✿═══════
गीत के अर्थ (Meaning in Chhattisgarhi)
ये जस गीत म दुर्गा दाई के महिमा गाये गे हे। जब नवरात्रि के पावन समय आथे, तब गांव-गांव अउ मंदिर म भक्ति के माहौल बन जाथे। नर अउ नारी सब मिलके दाई के मंदिर म झूम-झूम के भजन गाथें।
चैत महीना म जंवारा बोये जाथे, जऊन माता के शक्ति के प्रतीक होथे। ढोल, नगाड़ा, तबला अउ मांदर के आवाज ले पूरा वातावरण गूंज उठथे। हर कोनो अपन-अपन मनौती लेके दाई के चरण म आथे अउ दाई सबके इच्छा पूरा करथें।
गीत म ये घलो बताय गे हे कि ब्रह्मा, विष्णु अउ भोले बाबा घलो दाई के दरबार म आथें, जऊन दाई के महानता ला दर्शाथे।
🟣 गीत के महत्व (Importance)
🟠 छत्तीसगढ़ी कहानी
शीर्षक: दाई के मंदिर म जागे भक्ति के ज्योत
चैत के महीना सुरु होत ही गांव म अलगच रौनक दिखे लगिस। चारो ओर भक्ति के माहौल बन गे रहिस। गांव के बीचों-बीच स्थित दुर्गा दाई के मंदिर म रोज भीड़ बढ़त जावत रहिस।
गांव के रामू, जऊन एक गरीब किसान रहिस, वो हर साल नवरात्रि म जंवारा बोवत रहिस। ओकर मन म अटूट विश्वास रहिस कि दाई जरूर ओकर दुख दूर करही।
नवरात्रि सुरु होइस। गांव म ढोल, नगाड़ा, तबला अउ मांदर के आवाज गूंज उठिस। हर कोई रंग-बिरंगा कपड़ा पहिन के मंदिर जावत रहिस। रामू घलो अपन जंवारा बोके दाई के मंदिर पहुंचिस।
दिन बीतत गिस। नवरात्रि के आखरी दिन मेला लगिस। दूर-दूर ले लोगन आइन। दुकान, झूला अउ भक्ति गीत ले पूरा वातावरण गूंजत रहिस।
सपना ले जाग के रामू बहुत खुश होइस।
कुछ दिन बाद, रामू के खेत म फसल लहलहा उठिस। ए साल ओकर जीवन बदल गे। वो खुशी-खुशी मंदिर जाके दाई के धन्यवाद करिस।
तब ले हर साल रामू अउ पूरा गांव दाई के मंदिर म झूम-झूम के जस गीत गाथें।


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें