दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो | छत्तीसगढ़ी जस गीत अर्थ, महत्व अउ कहानी

दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो

दुर्गा दाई के मंदिर   गायक -गुड्डा साहू

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गीत -दुर्गा दाई के मंदिर 

गायक -गुड्डा साहू 

गीतकार -गुड्डा साहू 

म्यूजिक कंपनी - sg  music

वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे  

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मुखड़ा 

दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो 

उड़ान -झूमे गाये नर अउ नारी झूमे गाये वो -2 

दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो 

//1 //

चैत के महीना दाई बोये हव जंवारा वो 

ढोल नगाड़ा अउ तबला बाजे बाजत हे नगाड़ा वो 

कोनो बजावे तासा मांदर कोनो हा खधेरी वो

उड़ान -मन के मनौती सबझन पाये मन झूमे गाये वो-2

दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो

//2  //

कोनो चघाये हीरा मोती कोनो चघाये नरियर वो

ढोल नगाड़ा अउ तबला बाजे बाजत हे नगाड़ा वो 

तोर दरश बर ब्रम्हा विष्णु आये हे सरग ले वो 

उड़ान -भोले बाबा डमरू हे बजाये मन झूमे गाये वो-2

दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो

//3 //

रुचमुच ले मोर माता रानी करे हे सिंगारी वो 

नवराति के पावन बेला मेला भरे हे भारी वो 

दाई के दुवारी झंगु माथ ल नवाये वो

उड़ान -भोले बाबा डमरू हे बजाये मन झूमे गाये वो-2

दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो

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गीत के अर्थ (Meaning in Chhattisgarhi)

ये जस गीत म दुर्गा दाई के महिमा गाये गे हे। जब नवरात्रि के पावन समय आथे, तब गांव-गांव अउ मंदिर म भक्ति के माहौल बन जाथे। नर अउ नारी सब मिलके दाई के मंदिर म झूम-झूम के भजन गाथें।

चैत महीना म जंवारा बोये जाथे, जऊन माता के शक्ति के प्रतीक होथे। ढोल, नगाड़ा, तबला अउ मांदर के आवाज ले पूरा वातावरण गूंज उठथे। हर कोनो अपन-अपन मनौती लेके दाई के चरण म आथे अउ दाई सबके इच्छा पूरा करथें।

गीत म ये घलो बताय गे हे कि ब्रह्मा, विष्णु अउ भोले बाबा घलो दाई के दरबार म आथें, जऊन दाई के महानता ला दर्शाथे।


🟣 गीत के महत्व (Importance)

👉 ये जस गीत नवरात्रि म गाये जाथे
👉 दाई के भक्ति अउ श्रद्धा ला बढ़ाथे
👉 समाज म एकता अउ खुशी के माहौल बनाथे
👉 जंवारा, मेला अउ पूजा के परंपरा ला जिंदा रखथे
👉 मनोकामना पूरा करे के विश्वास ला मजबूत करथे

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🟠  छत्तीसगढ़ी कहानी

शीर्षक: दाई के मंदिर म जागे भक्ति के ज्योत

चैत के महीना सुरु होत ही गांव म अलगच रौनक दिखे लगिस। चारो ओर भक्ति के माहौल बन गे रहिस। गांव के बीचों-बीच स्थित दुर्गा दाई के मंदिर म रोज भीड़ बढ़त जावत रहिस।

गांव के रामू, जऊन एक गरीब किसान रहिस, वो हर साल नवरात्रि म जंवारा बोवत रहिस। ओकर मन म अटूट विश्वास रहिस कि दाई जरूर ओकर दुख दूर करही।

एक दिन रामू अपन घरवाली सीता ले कहिस –
"ए सीता, ये साल दाई के दरबार म जाके मनौती मांगहूं, मोर फसल हर साल खराब हो जाथे, दाई जरूर कुछ करही।"

सीता मुस्कुराके कहिस –
"दाई म सबके दुख हर लेथें, तोर घलो जरूर सुनही।"

नवरात्रि सुरु होइस। गांव म ढोल, नगाड़ा, तबला अउ मांदर के आवाज गूंज उठिस। हर कोई रंग-बिरंगा कपड़ा पहिन के मंदिर जावत रहिस। रामू घलो अपन जंवारा बोके दाई के मंदिर पहुंचिस।

मंदिर म भारी भीड़ रहिस। नर अउ नारी सब झूम-झूम के जस गीत गावत रहिन –
"दुर्गा दाई के मंदिर में नर अउ नारी मन झूमे गाये वो…"

रामू के आंखी म आंसू आ गे। वो हाथ जोड़ के कहिस –
"हे दाई, मोर दुख ला दूर कर दे, मोर घर म खुशहाली ले आ।"

दिन बीतत गिस। नवरात्रि के आखरी दिन मेला लगिस। दूर-दूर ले लोगन आइन। दुकान, झूला अउ भक्ति गीत ले पूरा वातावरण गूंजत रहिस।

उही रात रामू ला सपना आइस। सपना म दाई प्रकट होइस अउ कहिस –
"बेटा, चिंता झन कर, तोर मेहनत अब रंग लाही।"

सपना ले जाग के रामू बहुत खुश होइस।

कुछ दिन बाद, रामू के खेत म फसल लहलहा उठिस। ए साल ओकर जीवन बदल गे। वो खुशी-खुशी मंदिर जाके दाई के धन्यवाद करिस।

गांव वाले सब कहिन –
"देखव, दाई के महिमा अपार हे, जऊन सच्चा मन ले मांगथे, ओकर जरूर पूरा होथे।"

तब ले हर साल रामू अउ पूरा गांव दाई के मंदिर म झूम-झूम के जस गीत गाथें।

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