ए गीत म कहे जावत हे कि जब धरती म भक्ति के फुल खिले लागथे, तब सब देवता मन खुद-ब-खुद खिंच के आ जाथें। चाहे वो गणपति राजा हो, हनुमान जी हो या पांचों पांडव – सब कोई अलग-अलग दिशा ले आके भगवान के दरबार म पहुंचथें।
येकर मतलब ये हवय कि जिहां सच्चा मन ले पूजा होथे, ओतका जगह म सब देवी-देवता के वास हो जाथे।
🌼 महत्व
ए जस गीत हमन ला सिखाथे कि भक्ति म बहुत ताकत होथे। जब हमन सच्चा मन ले भगवान ला याद करथन, त भगवान खुद हमर लगे आथें।
ये गीत नवरात्रि, जस गीत अउ पूजा-पाठ के समय गाये जाथे, जिहां भक्त मन खुशी अउ श्रद्धा ले देवी-देवता के स्वागत करथें।
📖 कहानी
एक गाँव म बहुत सुन्दर मइया के मंदिर रहिस। हर साल नवरात्रि म ओ गाँव के मनखे मन बड़े धूमधाम ले पूजा करंय। एक बछर, गाँव के एक बूढ़ी दाई रहिस, जेन अपन मन ले बहुत सच्चा भक्ति करत रहिस। ओहर हर दिन फूल तोड़के मइया ला चढ़ावत रहिस।
एक दिन दाई सोचिस – “आज मैं अपन मइया बर सबसे सुग्घर फुलवा सजाहूं।”
ओहर जंगल ले रंग-बिरंगा फूल लाके मंदिर ला सजा दिस। मंदिर इतना सुंदर दिखे लागिस कि लगे जइसे स्वर्ग उतर आय होवय।
ओ रात जब पूजा चालू होइस, त अचरज होगे।
सबसे पहिली गणपति राजा अपन मुसवा म बइठ के आइन। फेर हनुमान जी उड़त-उड़त आइन।
ओकर बाद पांचों पांडव रथ म बइठ के आइन।
गाँव के मनखे मन ये देख के दंग रहिगे। कोनो ला भरोसा नई होवत रहिस कि सच म देवता मन आ गे हवंय।
बूढ़ी दाई अपन आंखी ले आंसू बहावत कहिस – “मइया, मोर भक्ति ला स्वीकार कर लेहू।”
मइया मुस्कुरा के कहिन – “जहां सच्चा मन ले भक्ति होथे, उहां हमन जरूर आथन।”
ओ दिन ले गाँव के मनखे मन समझ गइन कि भगवान ला खुश करे बर बड़े-बड़े चीज के जरूरत नई होवय, बस सच्चा मन अउ श्रद्धा चाही।
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