माटी के पुतरी अम्बा | छत्तीसगढ़ी जस गीत लिरिक्स, अर्थ अउ कहानी | Navdurga CG Jas Geet
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गीत-माटी के पुतरी अम्बा
गीत लेबल - छत्तीसगढ़ी जस गीत
गायक - विनोद देवांगन
गीतकार - विनोद देवांगन
म्यूज़िक कंपनी - विनोद देवांगन ऑफिशियल
वेबसाईट ऑनर - कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
माटी के पुतरी अम्बा नव दिन बर आये हो -ओ हो -ओ
माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर माटी के दुर्गा कहाये हो माँ
अंतरा -1
नवदुर्गा नवरूप नरैनी आये जग म दाई वो
धन हे कुमरा भाग ले भाई माटी ल लाए वो
यूही माटी ल माताके कुमरा दुर्गा तन सीर जाए ओ
उड़ान - धन धन तोर भाग रे भाई दाई ल गढ़ डारे हो
माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर---- 2
माटी के पुतरी अम्बा नव दिन बर आये हो -ओ हो -ओ
माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर माटी के दुर्गा कहाये हो माँ
अंतरा -2
दुर्गा तन ल सिरजन करके सिंगारी सजाए हो
लाली लुगरा लाली पोलखा लाली बिंदियां लगाएं हो
मोहिनी मूर्तियां पुत्री बरोबर दाई हा झलकत हे हो
उड़ान - श्री दुर्गा के सीरजन हावे दाई जग म आए हो
माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर---- 2
माटी के पुतरी अम्बा नव दिन बर आये हो -ओ हो -ओ
माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर माटी के दुर्गा कहाये हो माँ
अंतरा -3
कुमरा घर ले जम्मों सेऊक दाई ल हे लाए हो
पान फूल आऊ भोग लगाके दाई ल बईथारे हो
अगर कपूर कंचन के थारी आरती तोर सजाए हो
उड़ान - सुमर सुमर के झूमर झूमर आरती तोर गाए हो ---
माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर---- 2
माटी के पुतरी अम्बा नव दिन बर आये हो -ओ हो -ओ
माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर माटी के दुर्गा कहाये हो
अंतरा -4
चैत कुंवार तोर महामाई सरग कस हे लागे हो
पंचमी के काली माई साहुए दरश दिखाए हो
आठे तोर हुमन कराके गुण गुण सेवा गाए हो
उड़ान - रोई रोई सुरता तोर सताही बिदा के बेरा आए हो ---
माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर---- 2
माटी के पुतरी अम्बा नव दिन बर आये हो -ओ हो -ओ
माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर माटी के दुर्गा कहाये हो माँ
अंतरा -5
बेटी बरोबर दाई के बिदा आंखी ले आंसू बिहाये हो
सगरी नहाए चले महामाई सगुरी म समाए हो
होंगे विसर्जन तोर ओ दाई गुमसुम जग हर लागे हो
उड़ान - गुनत गुनत कर डारे बिदा अमर विनोद गाए आए हो ---
माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर---- 2
माटी के पुतरी अम्बा नव दिन बर आये हो -ओ हो -ओ
माटी के दुर्गा कहाये हो माया मोर माटी के दुर्गा कहाये
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माता शेरा वाली के आऊ जस गीत के नीचे दे हावे क्लिक करव और पढ़व
मोर दुर्गा दुलावरीन दाई तोला सुमर सुमर के मनाव
नीम डारा तोला भाए हो शीतला भवानी
दाई तोर अचरा मा फुले फुले गजरा मा
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गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)
“माटी के पुतरी अम्बा” गीत म ये बताय गे हे कि दुर्गा मइया माटी ले बनथे, फेर ओ माटी म देवत्व समाय रहिथे। कुम्हार (कुमरा) अपन भाग्य ले माटी ल लाथे अउ ओला गढ़ के माता के रूप देथे।
ये गीत म माता के नव रूप (नवदुर्गा) के वर्णन हवय। मइया के सिंगार, पूजा, आरती अउ अंत म विसर्जन तक के पूरा दृश्य ला बड़े सुंदर तरीका ले दिखाय गे हे।
🌼 गीत के महत्व
ये गीत खास करके नवरात्रि म गाये जाथे। ये हमन ला सिखाथे कि माटी जइसन साधारण चीज घलो जब श्रद्धा ले बनथे, त ओ म भगवान बन जाथे।
👉 ये बताथे:
कुम्हार के मेहनत के महत्व
माटी के पवित्रता
नवरात्रि के भक्ति भावना
विसर्जन के भावुक पल
📖 छत्तीसगढ़ी कहानी
एक छोटे से गांव म एक कुम्हार रहय – ओकर नाव रहय रामसाय। रामसाय बहुत गरीब रहय, फेर ओकर मन म माता दुर्गा के प्रति बहुत श्रद्धा रहय। हर साल नवरात्रि आवत रहय, त वो अपन हाथ ले माटी के सुंदर दुर्गा मइया के मूर्ति बनावत रहय।
एक दिन गांव के लोगन कहिन – “रामसाय, तें हर साल मूर्ति बनाथस, फेर तोर घर म गरीबी काबर नई हटय?”
रामसाय मुस्कुराके कहिस – “मोर भाग्य म जऊन हे, वो मिलही, फेर मइया के सेवा म मोला सबसे जियादा सुख मिलथे।”
नवरात्रि के समय आइस। रामसाय नदी किनारे ले साफ माटी लाय, ओला बड़े प्रेम ले गूंथिस अउ धीरे-धीरे दुर्गा मइया के मूर्ति बनाय लागिस। जब मूर्ति बनके तैयार होइस, त लगत रहय जइसे सच म मइया खुद आके बइठ गे हों।
गांव के लोगन आके देखिन अउ कहिन – “वाह! ये त जिंदा मइया जइसन दिखत हे।”
नवरात्रि के पहिली दिन, सब गांव वाले मिलके मूर्ति के स्थापना करिन। रोज पूजा, भजन, आरती होय लागिस। रामसाय हर दिन माता के सेवा म लगे रहय।
नव दिन तक पूरा गांव भक्ति म डूब गे रहय। आठवें दिन (अष्टमी) म हवन होइस, अउ सब झन माता के चरण म माथा टेकिस।
नवमी के दिन रामसाय के आंखी म आंसू आ गे। वो कहिस – “मइया, अब तोर बिदाई के बेरा आ गे, मोला छोड़ के मत जा।”
दसमी (विजयादशमी) के दिन, विसर्जन के समय सबके आंखी म आंसू रहय। रामसाय मूर्ति ल गोद म उठाके नदी तक ले गीस।
वो धीरे-धीरे कहत रहय –
“मइया, अगले साल फेर आहू, मोर घर अउ गांव ल खुश रखिहू।”
जइसे ही मूर्ति पानी म विसर्जित होइस, रामसाय के मन म अजीब शांति आइस।
ओही रात रामसाय सपना देखिस – मइया खुद आके कहत हवंय –
“रामसाय, तें मोर सच्चा भक्त हवस, तोर मेहनत अउ भक्ति देख के मंय खुश हंव।”
अगले दिन ले रामसाय के किस्मत बदलना शुरू होगे। ओकर बनाय मूर्ति दूर-दूर तक प्रसिद्ध होगे। लोगन अब ओकर पास मूर्ति बनवाय बर आवय लागिन।
धीरे-धीरे रामसाय के गरीबी दूर होगे, फेर वो अपन भक्ति कभू नई छोड़िस।
हर साल वो कहत रहय –
“माटी के दुर्गा नई, ये त साक्षात मइया आय।”



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