लगुरवा भईया सुन्दर आरती सजाये हो माँ, vijay kumar singroul, तुलसी के चौरा जस मण्डली गिरधौना
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गीत - लंगुरुवा भईया
गीत लेबल - पारंपरिक जस
गायक - विजय कुमार
म्यूज़िक कंपनी - विजयकुमार जस गीत
वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
लंगुरुवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2
//1//
पहली आरती सजे माता जी के ब्रह्मा जी चले आए -2
उड़ान- ब्रह्मा जी चले आए भुवन मा पड़ पड़ वेद सुनाए हो
लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2
पहली आरती सजे माता जी के ब्रह्मा जी चले आए -2
उड़ान- ब्रह्मा जी चले आए भुवन मा पड़ पड़ वेद सुनाए हो
लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2
//2//
दुसर आरती सजे माता जी के विष्णु जी चले आए -2
उड़ान -विष्णु जी चले आए भुवन मा सुंदर शंख बजाए हो
लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2
दुसर आरती सजे माता जी के विष्णु जी चले आए -2
उड़ान -विष्णु जी चले आए भुवन मा सुंदर शंख बजाए हो
लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2
//3//
तीसर आरती सजे माता जी के शंकर जी चले आए -2
उड़ान - शंकर जी चले आए भुवन मा डम डम बजाए हो
लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2
तीसर आरती सजे माता जी के शंकर जी चले आए -2
उड़ान - शंकर जी चले आए भुवन मा डम डम बजाए हो
लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2
//4//
चौथे आरती सजे माता जी के नारद जी चले आए -2
उड़ान - नारद जी चले आए भुवन मा सुंदर वीणा बजाए हो
लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2
चौथे आरती सजे माता जी के नारद जी चले आए -2
उड़ान - नारद जी चले आए भुवन मा सुंदर वीणा बजाए हो
लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2
//5//
पांचवे आरती सजे माता जी के देवता मन चले आए -2
उड़ान - देवता मन चले आए भुवन मा सुंदर जस ला गाए हो
लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2
पांचवे आरती सजे माता जी के देवता मन चले आए -2
उड़ान - देवता मन चले आए भुवन मा सुंदर जस ला गाए हो
लंगूरवा भईया सुंदर आरती सजाए हो मां -2
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1. माता के भक्ति रस ले भरे गीत पढ़े बर
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8. दुर्गा माता के शक्ति स्वरूप गीत
9. माता के दरबार के भावपूर्ण जसगीत
10. गांव-गांव गूंजत माता भक्ति गीत
➡ सुमरी सुमर के हां मैं तोर जस गांवव
गीत के अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)
ये जसगीत म माता के आरती के दिव्य स्वरूप ला गाये गे हवय। गीत म बताय गे हे कि माता के दरबार म एक-एक करके देवता मन पहुंचत हें अउ अपन-अपन भक्ति अउ सेवा अर्पित करत हें।
पहिली आरती म Brahma जी आथें अउ वेद के ज्ञान सुनाथें। ये ज्ञान अउ सृष्टि के प्रतीक आय।
दूसर आरती म Vishnu जी आथें अउ शंख बजाके संसार म मंगल संदेश देथें। ये पालन अउ रक्षा के प्रतीक आय।
तीसर आरती म Shiva जी आथें अउ डमरू बजाथें। ये शक्ति, तपस्या अउ परिवर्तन के संकेत देथे।
चौथी आरती म Narada जी वीणा बजाके माता के महिमा गाथें।
पांचवीं आरती म सब देवता मन मिलके माता के जस गाथें। ये बताथे कि माता के शक्ति सबसे महान हवय।
गीत के विशेषता
1. भक्ति अउ श्रद्धा ले भरपूर
ये गीत सुनते ही मन म माता के प्रति भक्ति जाग जाथे।
2. देवी दरबार के सुंदर चित्रण
गीत म देवता मन के आगमन के सुंदर वर्णन मिलथे।
3. मंच कार्यक्रम बर उपयुक्त
जगराता, जसगीत कार्यक्रम, माता सेवा अउ नवरात्रि म ये गीत बहुते लोकप्रिय हो सकथे।
4. आध्यात्मिक संदेश
गीत बताथे कि ज्ञान, शक्ति, रक्षा अउ संगीत—सब माता के चरण म समर्पित हे।
कहानी (छत्तीसगढ़ी)
बहुत साल पहिली एक छोटे गांव म नवरात्रि के समय माता सेवा के भव्य आयोजन होवत रहिस। गांव के सब लोग माता के मंदिर म जुटे रहिन। दीपक जलत रहिस, घंटी बजत रहिस अउ पूरा वातावरण भक्तिमय होगे रहिस।
गांव के एक सेवक लंगुरुवा अपन मन ले माता के आरती सजा रहिस। ओकर भक्ति देखके सब लोग भावुक होगे। जैसे-जैसे आरती सुरू होइस, लगिस जैसे देव लोक धरती म उतर आए होय।
पहिली आरती म ज्ञान के प्रकाश फैलिस। दूसर आरती म शंख के ध्वनि ले पूरा गांव गूंज उठिस। तीसर आरती म डमरू के आवाज ले नकारात्मक ऊर्जा दूर होगे। चौथी आरती म वीणा के मधुर स्वर ले सबके मन शांत होगे। आखिरी आरती म सब देवता मन माता के जयकारा लगाइन।
ओ दिन गांव के लोगन मन अनुभव करिन कि जहां सच्ची भक्ति होथे, ओतके माता अपन कृपा जरूर बरसाथे।
"छत्तीसगढ़ी माता जस गीत के अइसनेच सुंदर लिरिक्स पढ़े बर CG Jas Lyrics संग जुड़े रहव, अउ अपन भक्ति के सफर ला आगे बढ़ावव।"



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