Devi Ke Bhuvan ma // देवी के भुवन मा // Motilal Jaltare & Gunja Manikpuri //pachra jas lyrics

🌼 देवी के भुवन मा बरत हे जोत 

Devi Ke Bhuvan Ma // देवी के भुवन मा // Singer - Motilal Jaltare & Gunja Manikpuri // Aaradna Studio.jpg

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गीत - देवी  भुवन माँ 

गीत लेबल -पचरा जस

गायिका -गूंजा मानिकपुरी  

गीतकार - डी-आर -निषाद ,मोतीलाल जलतारे

यूटुब -आराधना स्टूडियो 

वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

 देवी के भुवन मा बरत हे जोत माया के भुवन मा बरत हे जोत -2 

लहर लहर लहरावे वो   

देवी के भुवन मा बरत हे जोत माया के भुवन मा बरत हे जोत -2 

अंतरा -1 

स्वेत स्वेत तोर ककनी बनूरिया स्वेत पटा तुम्हारे हो मा स्वेत स्वेत तोर ककनी बनूरिया-2

स्वेत हावय तोर गल के रूपया बरय सुरुज कस जोत वो

 देवी के भुवन मा बरत हे जोत माया के भुवन मा बरत हे जोत -2 

अंतरा -2 

हरा हरा तोर हाथ के चूड़ी हरा कान के धारे हो मा -2 

हरा हावय तोर माथ के टिकली बरय  सुरुज कस जोत वो

 देवी के भुवन मा बरत हे जोत माया के भुवन मा बरत हे जोत -2

अंतरा -3 

लाल लाल तोर आँखि दिखत हे लाली गोड़ के महूर हो मा -2 

पान खात मुख लाल दिखत हे बरय सुरूज कस जोत वो  

 देवी के भुवन मा बरत हे जोत माया के भुवन मा बरत हे जोत -2

अंतरा -4 

नीला नीला तोर उड़न खटोला नीला रूप तुम्हारे हो मा -2 

श्याम कलर के घोड़ा फदे हे रेशम लागे डोर वो 

 देवी के भुवन मा बरत हे जोत माया के भुवन मा बरत हे जोत -2

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गीत का अर्थ

इस जस गीत में माता रानी के दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है। गीत के प्रत्येक अंतरे में अलग-अलग रंगों के माध्यम से माता के श्रृंगार और तेज का वर्णन है। सफेद रंग पवित्रता का प्रतीक है, हरा रंग सुख-समृद्धि का, लाल रंग शक्ति और विजय का तथा नीला रंग अनंत शक्ति और दिव्यता का प्रतीक माना गया है। गीत यह संदेश देता है कि माता के दरबार में सदैव दिव्य ज्योति प्रज्वलित रहती है और उनकी कृपा से भक्तों का जीवन प्रकाशमय हो जाता है।

गीत की विशेषताएँ

1)      पारंपरिक छत्तीसगढ़ी जस गीत।

2)      नवरात्रि एवं जवारा सेवा में गाया जाने वाला लोकप्रिय भक्ति गीत।

3)      माता के श्रृंगार और दिव्य स्वरूप का सुंदर वर्णन।

4)      सरल एवं मधुर छत्तीसगढ़ी भाषा।

5)      समूह गायन के लिए उपयुक्त।

6)      देवी भक्ति और लोक संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण।

कथा

छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा में जस गीत केवल गीत नहीं बल्कि देवी आराधना का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। नवरात्रि के दौरान गांव-गांव में ज्योति कलश स्थापित किए जाते हैं, जवारा बोए जाते हैं और माता की सेवा में जस गीत गाए जाते हैं। "देवी के भुवन मा बरत हे जोत" भी उसी परंपरा का गीत है। इसमें माता के भुवन में जलती हुई दिव्य ज्योति का वर्णन किया गया है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का प्रकाश फैलाती है। माता के विभिन्न रंगों के श्रृंगार का वर्णन उनके अनेक स्वरूपों और शक्तियों का प्रतीक माना जाता है। इस प्रकार यह गीत भक्तों को माता की भक्ति, श्रद्धा और सेवा के लिए प्रेरित करता है।

मातारानी के मनमोहक जस गीत पढ़े 

Ø  जगमग जगमग दीया बरत हे

Ø  चंदन झूलना मां झूलना झूले मोर मईया

Ø  पानी रे पानी रे पानी बरसे पानी

Ø  तुम झुलव महामाई (पचरा जस गीत)

Ø  कंकालिन मोरे मया हो चंडालिन मोरे माया

Ø  तोर आरती उतारन मोर दुर्गा मईया

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