जुड़वास मनाबो आषाढ़ महीना में | शीतला माता जस गीत Lyrics | छत्तीसगढ़ी जस गीत
════════👣════════
गीत -जुड़वास मनाबो ना
गायक -युकेश देवांगन
गीत लेबल -पारंपरिक जस
जस मंडली -माँ हिंगलाज जस सेवा भजन मंडली पवनतरा (जालबंधा)
यूट्यूब -cg dog eshwar sahu
वेबसाइट ऑनर -कैलाश पंचारे
════════👣════════
गीत के बारे में
"जुड़वास मनाबो आषाढ़ महीना में" शीतला माता के महिमा ला बखान करे वाला एक सुंदर छत्तीसगढ़ी जस गीत आय। ए गीत मं आषाढ़ महीना के रिमझिम बरसात, धरती के तृप्ति, नीम के छांव मं विराजे शीतला माता अऊ जुड़वास पर्व के महत्व के सुंदर वर्णन करे गे हे। गीत मं दूध-भात, दही, फूल अर्पित करके माता ले सुख, शांति अऊ रोगमुक्त जीवन के कामना करे जाथे। ए जस गीत भक्ति, लोकसंस्कृति अऊ छत्तीसगढ़ के पारंपरिक आस्था के जीवंत उदाहरण आय।
मुखड़ा
जुड़वास मनाबो आषाढ़ महीना में हां -2
आषाढ़ महीना में हां -2
जुड़वास मनाबो आषाढ़ महीना में हां -2
अंतरा -1
आषाढ़ महीना रिमझिम वर्षा भुईया के तिस्ना मिटाये -2
जब भुईया के तिस्ना मिटाये हो मईया भुईया के तिस्ना मिटाये
आषाढ़ महीना रिमझिम वर्षा भुईया के तिस्ना मिटाये
जब नीम के छईया म बईठे मईया शीतला माता कहाये -2
जब शीतला माता कहाये मईया शीतला माता कहाये
नीम के छईया म बईठे मईया शीतला माता कहाये
जब रोग प्रपस ल दूर भगाये
आषाढ़ महीना में हां -2
जुड़वास मनाबो आषाढ़ महीना में हां -2
अंतरा -2
दूध भात अउ दही चढ़ाये फूल के माला चढ़ाये -2
जब फूल के माला चढ़ाये हो मईया फूल के माला चढ़ाये
दूध भात अउ दही चढ़ाये फूल के माला चढ़ाये
जब नरनारी सब आशीष पाये जयजय कार बुलाये
जब जयजय कार बुलाये हो मईया जयजय कार बुलाये
नरनारी सब आशीष पाये जयजय कार बुलाये
जब सरग सब देव फूल बरसाये आषाढ़ महीना में हां
जुड़वास मनाबो आषाढ़ महीना में हां -2
════════👣════════
गीत के अर्थ
ए जस गीत मं शीतला माता के पूजा के महत्व ला बताय गे हे। आषाढ़ महीना मं जुड़वास पर्व मनाके माता ला दूध-भात, दही अऊ फूल चढ़ाय जाथे। मान्यता हे कि शीतला माता अपन भक्त मन ला रोग-व्याधि ले बचाथे अऊ परिवार मं सुख-समृद्धि प्रदान करथे। गीत मं बरसात के आगमन, धरती के हरियाली अऊ माता के कृपा के सुंदर चित्रण मिलथे।
गीत के विशेषता
- शीतला माता के महिमा के सुंदर वर्णन।
- जुड़वास पर्व के धार्मिक महत्व।
- छत्तीसगढ़ी लोकभाषा मं सरल अऊ मधुर शब्द।
- बरसात अऊ प्रकृति के सुंदर चित्रण।
- भक्ति रस ले भरपूर पारंपरिक जस गीत।
- धार्मिक कार्यक्रम अऊ माता सेवा मं गाये जाथे।
जुड़वास पर्व के कथा
जुड़वास छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख लोकपर्व आय, जेनला आषाढ़ महीना मं बड़े श्रद्धा अऊ भक्ति भाव ले मनाय जाथे। ए पर्व के संबंध शीतला माता ले माने जाथे। गांव-गांव मं ए दिन माता के पूजा-अर्चना करे जाथे अऊ परिवार के सुख, शांति, निरोग जीवन अऊ खुशहाली बर आशीर्वाद मांगे जाथे। जुड़वास के दिन घर-आंगन के साफ-सफाई करके पूजा के तैयारी करे जाथे। लोगन मन बिहान ले नहाधो के नीम के डारा, फूल, दूध, दही, भात अऊ दूसर पूजा सामग्री के व्यवस्था करथें।
पुरखा मन के मान्यता हवय कि जब धरती मं भीषण गर्मी परथे अऊ चारों कोती सूखा के हालत बन जाथे, तब जीव-जंतु, पेड़-पौधा अऊ मनखे सब झिन गर्मी ले परेशान हो जाथें। अइसने समय मं आषाढ़ महीना के रिमझिम बरसात धरती ला ठंडक देथे। एही समय शीतला माता के पूजा करके प्रकृति अऊ माता के प्रति आभार व्यक्त करे जाथे। "जुड़वास" शब्द के अर्थ घलो ठंडक, शांति अऊ राहत ले जोड़के देखे जाथे। ए पर्व मनखे के मन, तन अऊ प्रकृति तीनों ला जुड़ाव अऊ शीतलता देय के संदेश देथे।
शीतला माता ला रोगन के नाश करे वाली देवी माने जाथे। गांव के बुजुर्ग मन कहिथें कि माता के कृपा ले चेचक, बुखार, महामारी अऊ अनेक प्रकार के रोग ले रक्षा मिलथे। एखर सेती माता के पूजा मं विशेष रूप ले ठंडा भोग चढ़ाय जाथे। दूध-भात, दही, चना, गुड़, नारियल अऊ फूल माता ला अर्पित करे जाथे। कई जगह मं एक दिन पहिली बने भात ला दूसरे दिन ठंडा करके माता ला भोग लगाय जाथे। ए परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चलत आवत हे।
जुड़वास के दिन गांव के महिला, पुरुष, बुजुर्ग अऊ छोटे-छोटे लइका मन साफ कपड़ा पहनके माता के मंदिर या नीम के पेड़ के नीचे एकत्र होथें। माता के जयकारा लगाय जाथे, जस गीत गाये जाथें अऊ पूजा-पाठ करे जाथे। ढोलक, मंजीरा अऊ झांझ के संग भक्ति गीत गूंजथे, जेन ले पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाथे। गांव के लोग एक-दूसर ला जुड़वास के बधाई देवतें अऊ सुख-समृद्धि के कामना करथें।
नीम के पेड़ के जुड़वास मं बहुत विशेष महत्व माने जाथे। लोकमान्यता अनुसार शीतला माता नीम के छांव मं विराजमान रहिथें। नीम मं प्राकृतिक औषधीय गुण होथे, एखर पाना अऊ डारा वातावरण ला शुद्ध रखे मं मदद करथे। एही कारण ले माता के पूजा अधिकतर नीम के नीचे करे जाथे। पूजा के बाद नीम के पाना घर ले जाके सुरक्षित रखे जाथे, जेनला शुभ अऊ मंगलकारी माने जाथे।
जुड़वास खाली एक धार्मिक पर्व नइये, बल्कि ए प्रकृति संरक्षण अऊ सामाजिक एकता के संदेश घलो देथे। ए दिन गांव के लोग मिलजुल के पूजा करथें, एक-दूसर के घर जाथें, प्रसाद बांटथें अऊ भाईचारा बढ़ाथें। ए परंपरा समाज मं प्रेम, सहयोग अऊ अपनापन ला मजबूत करथे। लइका मन घलो अपन ददा-दाई अऊ ददा-दाई (बुजुर्ग) ले ए पर्व के महत्व सीखथें, जेन ले संस्कृति अगली पीढ़ी तक पहुंचथे।
छत्तीसगढ़ मं आज घलो अनेक गांव मं जुड़वास बड़े धूमधाम ले मनाय जाथे। कई जगह माता के झांकी निकाले जाथे, भजन-कीर्तन होथे अऊ जस गायन के आयोजन घलो रखे जाथे। श्रद्धालु मन माता ले परिवार के सुख, खेती-किसानी के उन्नति, अच्छा बरसात अऊ निरोग जीवन के वरदान मांगथें। किसान मन विश्वास करथें कि माता के कृपा ले खेत मं हरियाली आही अऊ फसल बढ़िया होही।
जुड़वास हमन ला ए सीख देथे कि प्रकृति, पानी, पेड़-पौधा अऊ स्वास्थ्य के सम्मान करना बहुत जरूरी हवय। धरती ला ठंडक देय वाला पानी अऊ जीवन बचाय वाला प्रकृति के संरक्षण करना हर मनखे के जिम्मेदारी आय। माता शीतला के पूजा के माध्यम ले हमन अपन संस्कृति, परंपरा अऊ लोकआस्था ला जीवित रखथन।
आज के आधुनिक समय मं घलो जुड़वास पर्व के महत्व कम नई होय हवय। गांव होवय या शहर, श्रद्धालु मन पूरे विश्वास अऊ भक्ति ले माता के पूजा करथें। ए पर्व छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक पहचान के एक अमूल्य हिस्सा आय। जुड़वास मनाके हमन अपन पुरखा मन के परंपरा, प्रकृति के सम्मान अऊ माता शीतला के असीम कृपा के प्रति अपन श्रद्धा व्यक्त करथन।
छत्तीसगढ़ी नवरात्री जस गीत
© CG Jas Lyrics.
ए वेबसाइट मं प्रकाशित लिरिक्स केवल शैक्षणिक, सांस्कृतिक अऊ जानकारी देय के उद्देश्य ले साझा करे जाथे। गीत के मूल अधिकार संबंधित गायक, गीतकार, संगीतकार अऊ म्यूजिक लेबल के पास सुरक्षित हे। अगर कोनो कॉपीराइट संबंधी समस्या होय, त कृपया संपर्क करव।
.jpg)


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें