देवी पार्वती हा /गुड्डा साहू /cgjaslyrics 

देवी पारवती हाँ cgjaslyrics

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गीत -देवी पारवती हाँ

गायक - गुड्डा साहू

गीतकार - गुड्डा साहू 

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वेबसाईट ऑनर - के के पंचारे 

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मुखड़ा 

देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ  

देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ  

उड़ान -बनगे जोगनिया हो माँ -2 

देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ  

अंतरा -1 

जब बनके दूल्हा बनके भोले नाथ हा बइला म चढ़के आये

 भूतवा परेतवा कइसे बराती अपन संग म लाये

उड़ान - राजा हिमांचल सुघ्घर दाई 

करथे बरात परघनिया

देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ

अंतरा -2 

जब बनके जोगनिया पारवती हां जोगी संग म जाये 

 बइठे हवय सुघ्घर डोली म मंदमंद मुस्काये 

उड़ान - पारवती हां चलय वो दाई 

बनके भोला के दुल्हनिया 

देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ 

अंतरा -3 

शीतला मंडल ताल मिलाके आनंद मंगल गाये 

लशमन झंगु अउ गिरधारी शहनाई ल बजाये 

उड़ान - मम अपराध शमा कर दाई 

सेऊक बने हे बजनिया 

        देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ           

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गीत के अर्थ (Chhattisgarhi Arth)

“देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया” एक पवित्र छत्तीसगढ़ी जसगीत आय जेन म माता पारवती के त्याग, भक्ति अउ भगवान भोलेनाथ संग विवाह के कथा ल सुंदर तरीका ले गाया गे हे।

ए गीत म बताय गे हे कि जब भगवान शिव दूल्हा बनके बैल (नंदी) म चढ़के आथें, त ओमन संग भूत-परेत घलो बराती बनके आथें। ए दृश्य ल देखके राजा हिमांचल अउ माता मैना घबराथें फेर आखिरकार पारवती जी अपन सच्चा प्रेम अउ भक्ति ले शिव जी के संग विवाह करथें।

पारवती जी जोगनिया रूप धारण करके अपन तपस्या अउ समर्पण के प्रतीक बन जाथें। ए गीत म शीतला मंडल, शहनाई अउ आनंद मंगल के गूंज ले विवाह के माहौल ल घलो सुंदर ढंग ले दिखाय गे हे।

🔷 गीत के धार्मिक महत्त्व (महत्व)

भक्ति अउ तपस्या के प्रतीक – माता पारवती के जोगनिया रूप त्याग अउ समर्पण के चिन्ह आय।

शिव-शक्ति मिलन – ए गीत शिव अउ शक्ति के पवित्र संगम ल दर्शाथे।

विवाह संस्कार के झलक – छत्तीसगढ़ी परंपरा अनुसार बरात, शहनाई अउ मंगल गीत के वर्णन मिलथे।

आध्यात्मिक संदेश – सच्चा प्रेम, विश्वास अउ श्रद्धा ले भगवान के प्राप्ति हो सकथे।

 छत्तीसगढ़ी भक्तिमय कहानी 🌺

छत्तीसगढ़ के धरती म जसगीत के परंपरा बहुते पवित्र माने जाथे। एही पवित्र जसगीत म एक प्रसिद्ध गीत आय – “देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ”। ए गीत ल गायक अउ गीतकार गुड्डा साहू जी गाए हें, जेन म माता पारवती अउ भगवान शिव के पवित्र विवाह के कथा ल बहुत सुंदर ढंग ले प्रस्तुत करे गे हे।

🔶 हिमांचल के महल म जन्मे पारवती

बहुत बछर पहिली, हिमालय पर्वत के राजा हिमांचल अउ माता मैना के घर एक सुंदर कन्या के जनम होइस – माता पारवती। बचपन लेच पारवती जी के मन भगवान शिव म लगे रहिस। ओमन जानत रहिन कि ओमन के जीवन के लक्ष्य शिव जी के प्राप्ति आय।

🔶 तपस्या अउ जोगनिया रूप

जब पारवती जी बड़ी होइस, त ओमन कठोर तपस्या करे लगिन। जंगल म रहिके, भूखे-पियासे रहिके, भगवान शिव के ध्यान लगाइन। ए तपस्या देखके देवता घलो चकित हो गइन।

आखिरकार, पारवती जी अपन राजसी रूप त्याग के “जोगनिया” रूप धारण करिन। ए जोगनिया रूप त्याग, समर्पण अउ सच्चा प्रेम के प्रतीक आय। एही बात ल गीत म गाया गे हे –

“देवी पारवती हाँ बनगे जोगनिया हो माँ…”

🔶 भोलेनाथ के अनोखा बरात

जब भगवान शिव दूल्हा बनके निकरिन, त ओमन नंदी बैल म सवार रहिन। बराती मन म भूत, प्रेत, गण अउ योगी रहिन। ए बरात ल देखके राजा हिमांचल घबरा गइन, फेर पारवती जी के अटूट विश्वास सबके शंका दूर कर दिस।

गीत के पंक्ति म सुंदर वर्णन आय –

“भूतवा परेतवा कइसे बराती अपन संग म लाये…”

ए दृश्य बताथे कि भगवान शिव साधारण दूल्हा नई, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के स्वामी हें।

🔶 विवाह के मंगल ध्वनि

जब पारवती जी डोली म बइठिन, त ओमन मंद-मंद मुस्काइन। चारों ओर शहनाई बजे लगिस। शीतला मंडल ताल मिलाके आनंद मंगल गावत रहिन। पूरा वातावरण भक्तिमय होगे।

ए विवाह सिरिफ दू आत्मा के मिलन नई रहिस, बल्कि शिव अउ शक्ति के संगम रहिस। ए संगम ले सृष्टि के संतुलन बनिस।

🔶 गीत के आध्यात्मिक संदेश

ए कहानी हमन ला सिखाथे कि –

सच्चा प्रेम म त्याग जरूरी हे

भगवान के प्राप्ति खातिर धैर्य अउ तपस्या चाही

बाहरी रूप नई, भीतर के भक्ति महत्वपूर्ण हे

माता पारवती के जोगनिया रूप हमन ला सिखाथे कि अगर मन सच्चा होही, त भगवान जरूर मिलहीं।

🔶 छत्तीसगढ़ी संस्कृति म महत्व

छत्तीसगढ़ म नवरात्रि, जसगीत, जंवारा अउ देवी भजन के समय ए गीत गाए जाथे। गांव-गांव म माता पारवती के विवाह कथा गूंजत रहिथे। ए गीत भक्ति, संस्कृति अउ परंपरा के प्रतीक आय।



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