Ranabhan Ranabhan ( रनभन रनभन ) | Dilip Shadangi | Chhattisgarh जस लिरिक्स
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गीत - रनभन रनभन वो
गायक-दिलीप सड़ंगी
गीतकार-डूलामनी देवांगन
संगीत-दिलीप सड़ंगी
वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे
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मुखड़ा
रनभन रनभन वो... तोर खेले दुलरवा रनभन रनभन वो
तोर खेले दुलरवा रनभन रनभन वो
अंतरा -1
खेलत खेलत गये दुलरवा, गये मालिन के पारा...2
गये मालिन के पारा भवानी गये मालिन के पारा
कौरी भरके फुलवा मांगे-----2
देवो दुलरवा वो... तोर खेले दुलरवा रनभन रनभन वो...2
अंतरा -2
मालिन पारा नाहक के दुलरु, गये ब्राम्हण के पारा... 2
गये ब्राम्हण के पारा भवानी गये ब्राम्हण के पारा
मटकी भर के चंदन मांगे-----2
देवो दुलरवा वो... तोर खेले दुलरवा रनभन रनभन वो...2
अंतरा -3
खेलत खेलत गये दुलरवा, गये कोष्टा के पारा... 2
गये कोष्टा के पारा भवानी गये कोष्टा के पारा
दस हाथ के पोतिया मांगे----2
देवो दुलरवा वो... तोर खेले दुलरवा रनभन रनभन वो...2
अंतरा -4
कोष्टा पारा नाहक के दुलरु, गये सोनार के पारा... 2
गये सोनार के पारा भवानी गये सोनार के पारा
एक ड़ी जुड़ा मांगे----2
देवो दुलरवा वो... तोर खेले दुलरवा रनभन रनभन वो...।2
अंतरा -5
खेलत खेलत गये दुलरवा, गये अहिरा के पारा...2
गये अहिरा के पारा भवानी गये अहिरा के पारा
एक लोटा गोरस मांगे----2
देवो दुलरवा वो... तोर खेले दुलरवा रनभन रनभन वो...2
अंतरा -6
पारा नाहक के दुलरु, गये छिपीया के पारा... 2
गये छिपीया के पारा भवानी गये छिपीया के पारा
एक जोड़ी फुंदरा मांगे----2
देवो दुलरवा वो... तोर खेले दुलरवा रनभन रनभन वो...2
अंतरा -7
खेलत खेलत गये दुलरवा, गये केंवटा के पारा...2
गये केंवटा के पारा भवानी गये केंवटा के पारा
तामी भरके लाई मांगे----2
देवो दुलरवा वो... तोर खेले दुलरवा रनभन रनभन वो..2
अंतरा -8
सुमर सुमर के तोर जस गायेव, जय जय होय तुम्हारे...2
जय जय होय तुम्हारे भवानी जय जय होय तुम्हारे
दास कछु नई जानें-----2
देवो दुलरवा वो... तोर खेले दुलरवा रनभन रनभन वो
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गीत के अर्थ
ये जस गीत म माता भवानी के “दुलरवा” यानी लाड़ला भक्त या बाल रूप के वर्णन करे गे हे। गीत म दुलरवा गाँव के अलग-अलग पारा (मोहल्ला) म जावत हे अउ हर समाज ले कुछ मांगत हे। ये मांगना केवल वस्तु मांगना नइये, बल्कि हर समाज के प्रेम, सेवा अउ भक्ति के प्रतीक आय।
गीत म मालिन फूल देथे, ब्राम्हण चंदन देथे, कोष्टा पोतिया देथे, सोनार गहना देथे, अहिरा गोरस देथे अउ केंवटा लाई देथे। एखर मतलब ये आय कि माता भवानी के दुलरवा बर हर समाज अपन श्रद्धा अउ सेवा अर्पित करथे।
“रनभन रनभन” शब्द ले खुशहाली, चंचलता अउ देवी भक्ति के मधुर वातावरण झलकथे। गीत सुनके अइसन लागथे जइसे माता के दुलरवा गाँव म आनंद बगरावत घूमत होही।
गीत के आध्यात्मिक महत्व
1. सब समाज ला एक माला म पिरोथे
ये गीत छत्तीसगढ़ के सामाजिक एकता के सुंदर उदाहरण आय। हर जाति, हर समाज माता के सेवा म समान रूप ले जुड़थे।
2. भक्ति म भेदभाव नइये
मालिन ले लेकर सोनार अउ अहिरा तक, सब्बो झिन अपन श्रद्धा अनुसार भेंट देथे। माता भवानी बर सब्बो समान हवंय।
3. सेवा अउ समर्पण के संदेश
गीत बताथे कि भगवान ला धन-दौलत नइ, सच्चा प्रेम अउ श्रद्धा चाही।
4. गाँव के संस्कृति के झलक
“पारा” शब्द छत्तीसगढ़ी गाँव के पहचान आय। ये गीत पुरखा संस्कृति अउ लोकजीवन ला जीवित रखथे।
कथा
बहुत पुराना बात आय। एक गाँव म माता भवानी के भव्य जस-जागरन होवत रहिस। गाँव भर के मनखे माता के सेवा म जुटे रहिन। उही बखत एक नानकुन दुलरवा गाँव म खेलत-खेलत घूमत रहिस। ओकर चेहरा म अइसन तेज रहिस कि लोगन मन ओला साधारण बालक नइ समझत रहिन।
सबसे पहिली वो मालिन पारा पहुंचिस। उहां के मालिन मन ओला फूल देके स्वागत करिन। दुलरवा ह मुस्कुराके फूल ले लिस अउ आगे बढ़ गीस।
फेर वो ब्राम्हण पारा पहुंचिस। ब्राम्हण मन चंदन घिसके ओकर माथा म लगाइन। पूरा पारा म भक्ति के सुगंध फइल गीस।
कोष्टा पारा म ओला सुंदर पोतिया मिलिस। सोनार पारा म सोना के जुड़ा। अहिरा पारा म ताजा गोरस अउ केंवटा पारा म मीठा लाई।
गाँव के मनखे समझ गइन कि ये कोई साधारण बालक नइये। ये माता भवानी के दुलरवा आय, जऊन हर घर ले प्रेम अउ श्रद्धा बटोरत हे।
रात म जस गावत समय गाँव के एक बुजुर्ग ला सपना आइस। माता भवानी कहिन –
“जिहां प्रेम अउ भक्ति रहिथे, उहां मैं अपन दुलरवा ला भेजथों।”
ओ दिन ले गाँव म ये जस गीत गाये जाए लगिस अउ मान्यता बन गीस कि जिहां ये गीत गूंजथे, उहां माता भवानी के कृपा बने रहिथे।
“हर गीत म भक्ति के एहसास अउ हर शब्द म अपनापन—एही सफर म हमर संग बने रहू Cgjaslyrics.com म।”



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