शीतला भवानी मईया मोर- गोविंद साह/cgjaslyrics

✦✦ शीतला भवानी मईया मोर-गोविंद साहू/छत्तीसगढ़ी जस लिरिक्स✦✦

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गीत - शीतला भवानी मईया मोर 

गायक - गोविंद साहू 

गीतकार - दास मनोहर घृतलहरे 

म्यूज़िक कंपनी - T C Music 

वेबसाईट ऑनर-कैलाश पंचारे 

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मुखड़ा 

 शीतला भवानी मईया मोर-2

 जिनगी सुग्घर लागे कोरा मा तोर -2

उड़ान - पलपल हावे तोर सहारा -------2

बांधे मया के हावे डोर के----

जिनगी सुग्घर लागे कोरा मा तोर -2

अंतरा -1

आठों पहर समाए दाई, तै तो मोर मन मा 

दुःख पीड़ा विश्रायेव मईया आके तोर शरण मा 

उड़ान-अगर धूप नारियर फूल माला-2

चढ़ाए हाथ करे जोड़...

जिनगी सुग्घर लागे कोरा मा तोर -2

अंतरा -2

छत्तीसगढ़ के गांव गांव मां बैठें तरियां पारे 

आरंग तीर के भोथली गांव म बीच बस्ती म डारे 

उड़ान-रोज आथन मां तोर देवाला -2

उवत सुरुज भोर.....

जिनगी सुग्घर लागे कोरा मा तोर -2

अंतरा -3

आदि शक्ति माता मोर शीतला,शीतल हे तोर रूप ओ 

दास मनोहर गोविंदा ला, देथे भारी सुख ओ 

उड़ान-महिमा हावय तोर नियारा-2

शीतल करे अंजोर...

जिनगी सुग्घर लागे कोरा मा तोर -2

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माता रानी के अऊ जस गीत के लिंक

हे मैया माता सेवा मा चले आबे – दुकालू यादव जसगीत

शीतल शीतला शीतल शीतला हो – अमन बघेल शीतला भक्ति गीत

झुमरी तलइया के पारे – पंचराम मिर्झा जसगीत लिरिक्स

तोर आरती उतारन मोर दुर्गा मईया – पूरन साहू जस

मरघहीन काली ओ – तांत्रिक काली माता जसगीत

लहराये जंवारा – पंचू यादव देवी जसगीत

पैजनिया बाजे मईया के – सुखऊ राम केंवट जसगीत

गीत का अर्थ (भावार्थ)

यह जसगीत माता शीतला की महिमा का वर्णन करता है। भक्त कहता है कि माता के आंचल में जीवन बहुत सुंदर लगता है। हर पल माता का सहारा मिलता है और उनकी ममता की डोर से भक्त बंधा रहता है।

गीत में बताया गया है कि भक्त दिन-रात माता को अपने मन में बसाए रहता है और दुख-पीड़ा से छुटकारा पाने के लिए उनकी शरण में जाता है। नारियल, फूल और माला चढ़ाकर भक्त माता की पूजा करता है।

दूसरे अंतरे में छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में माता शीतला के मंदिर होने का वर्णन है। लोग सुबह-सुबह माता के देवालय में जाकर पूजा करते हैं और उनके आशीर्वाद से दिन की शुरुआत करते हैं।

तीसरे अंतरे में माता को आदि शक्ति बताया गया है। उनकी महिमा निराली है और वे संसार को शीतलता प्रदान करती हैं। भक्त दास मनोहर कहता है कि माता शीतला की कृपा से जीवन सुखमय हो जाता है।

🔷 गीत की विशेषता

• शीतला माता की ममता का सुंदर वर्णन

• छत्तीसगढ़ के गांवों की भक्ति परंपरा दिखाई गई

• सरल और भावुक शब्दों में लिखा गया जसगीत

• भक्त और माता के रिश्ते को दर्शाता गीत

• सुबह की पूजा और शरणागति का वर्णन

• आदि शक्ति माता की महिमा का गान

🔷 कहानी ,Chhattisgarhi Story)

छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव में दास मनोहर नाम के एक गरीब किसान रहत रहिस। ओकर जिनगी मा बहुत दुख तकलीफ रहिस। खेत मा फसल ठीक नई होवय, घर मा बीमारी रहय, मन हमेशा परेशान रहय।

गांव के बुजुर्ग मन कहिन — "शीतला भवानी मईया के शरण मा जा, सब दुख दूर हो जाही।"

दूसर दिन भोर मा दास मनोहर नारियल, फूल आऊ माला लेके गांव के तरिया पारे बने छोटे मंदिर मा पहुंचिस। उहां शीतला मईया के मूर्ति रहिस। ओ हाथ जोड़ के कहिस —

"मोर मईया, अब तोर शरण मा आएंव, मोर जिनगी ला सुधर दे।"

धीरे-धीरे ओकर मन शांत होगे। ओ रोज सुबह मंदिर जाय लगिस। पूजा करे लगिस। कुछ दिन बाद ओकर खेत मा हरियाली आ गे। घर मा सुख आ गे। बीमारी दूर होगे।

दास मनोहर समझ गे — ये सब मईया के कृपा हवय।

अब ओ हर दिन गावत रहिस —

"शीतला भवानी मईया मोर

जिनगी सुग्घर लागे कोरा मा तोर"

गांव के दूसर लोग मन घलो ओला देखके माता के पूजा करे लगिन। धीरे-धीरे पूरा गांव मा भक्ति के माहौल बन गे।

माता शीतला के मंदिर मा रोज दिया जलय, भजन गूंजय, आऊ सबके जीवन मा सुख शांति आ गे।

तब ले आज तक गांव के लोग मन कहिथें —

माता शीतला के कोरा मा जाके जिनगी सचमुच सुग्घर हो जाथे।

✦✦  शीतला भवानी आप सब की मनोकामना पूर्ण करे ✦✦

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