आवो देवी दुर्गा ,देवेंद्र साहू,लेखराम साहू , छत्तीसगढ़ी जस गीत

आवो देवी दुर्गा || aawo devi durga || cg jasgeet सरगम जस सेवा मण्डली कोसमी (बालोद)

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गीत -आवो देवी दुर्गा 

गायक -देवेंद्र साहू ,लेखराम साहू 

जस मंडली -सरगम जस सेवा मंडली कोसमी (बालोद)

यूट्यूब -n studio cg 

वेबसाइट- www.cgjaslyrics.com 

वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे 

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मुखड़ा 

आओ देवी दुर्गा हमरो दुवरिया हो ----

सेऊक मन हा पारत हन गोहारे हो माया मोर 

सेऊक मन हा पारत हन गोहारे हो माँ 

अंतरा -1 

सुरहिन गईया के मईया गोबर मगायेव हो -----

कुटधर अंगना लिपाये हो माया मोर 

कुटधर अंगना लिपाये हो माँ

 आओ देवी दुर्गा हमरो दुवरिया हो ----

सेऊक मन हा पारत हन गोहारे हो माया मोर 

सेऊक मन हा पारत हन गोहारे हो माँ  

अंतरा -2  

नीक नीक रखवा के मईया मड़वा छवायेव हो -----

तोरण खोचेव आमा डारे हो माया मोर

तोरण खोचेव आमा डारे हो माँ 

 आओ देवी दुर्गा हमरो दुवरिया हो ----

सेऊक मन हा पारत हन गोहारे हो माया मोर 

सेऊक मन हा पारत हन गोहारे हो माँ  

अंतरा -3   

चन्दन पिडुली के मईया आसन लगायेव हो ----

कलश भराये गंगा धारे हो माया मोर 

कलश भराये गंगा धारे हो माँ 

 आओ देवी दुर्गा हमरो दुवरिया हो ----

सेऊक मन हा पारत हन गोहारे हो माया मोर 

सेऊक मन हा पारत हन गोहारे हो माँ  

अंतरा -4    

बर बर बाती घीव के दियना जलायेव हो ----

आरती सजायेव सोना थारी हो माया मोर 

आरती सजायेव सोना थारी हो माँ 

 आओ देवी दुर्गा हमरो दुवरिया हो ----

सेऊक मन हा पारत हन गोहारे हो माया मोर 

सेऊक मन हा पारत हन गोहारे हो माँ  

अंतरा -5  

परब नवराति मईया नेवता भेजायेव हो ----

पइया लागथव हाथ जोड़े हो माया मोर 

पइया लागथव हाथ जोड़े हो माँ 

 आओ देवी दुर्गा हमरो दुवरिया हो ----

सेऊक मन हा पारत हन गोहारे हो माया मोर 

सेऊक मन हा पारत हन गोहारे हो माँ 

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अर्थ (छत्तीसगढ़ी में)

ये गीत माँ दुर्गा ला बुलावत हे — "आवो माँ, हमर दुवारी में पधारव" — गांव के सेवा करने वाले (सेऊक) जन मन, हाथ जोड़े, मन भर गोहरावत हे। गीत में घर, आँगन, मड़वा, तोरण, आसन, कलश, आरती-सजावट, घी के दीप, चन्दन और नेवता जैसी पूजा की तैयारियों के दृश्य बखान करे गे हावय


महत्व

1.      नवरात्रि में देवी दुर्गा के आगमन और पूजा के पारंपरिक विधानों का वर्णन करता है।

2.      ग्राम्य जीवन में सामूहिक भक्ति, सहयोग और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करता है।

3.      जसगीत गाने के माध्यम से श्रद्धालु एक साथ जुटकर सेवा और भक्ति का माहौल बनाते हैं।

उद्देश्य

1.      धार्मिक आस्था को प्रकट करना।

2.      नवरात्रि के उत्सव में सामूहिक भागीदारी को बढ़ावा देना।

3.      लोकगीत परंपरा का संरक्षण प्रसार।




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